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जीवन (अभिनेता) - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर

जीवन (अभिनेता)  

जीवन (अभिनेता)
जीवन
पूरा नाम ओंकार नाथ धर
प्रसिद्ध नाम जीवन
जन्म 24 अक्टूबर, 1915
जन्म भूमि श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर
मृत्यु 10 जून, 1987
पति/पत्नी किरण
संतान किरण कुमार, भूषण जीवन
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में ‘दिल ने फिर याद किया’, ‘हमराज़’, ‘बंधन’, ‘धरम वीर’, ‘चाचा भतीजा’, ‘सुहाग’, ‘नसीब’, ‘मेरे हमसफ़र’, ‘हीर रांझा’, ‘रोटी’, ‘गेम्बलर’, ‘याराना’, ‘सनम तेरी कसम’, ‘देशप्रेमी’ और ‘लावारिस’ इत्यादि।
प्रसिद्धि अभिनेता
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी अभिनेता जीवन को दर्शकों ने नारद मुनि की भूमिका में काफ़ी पसंद किया। "नारायण.... नारायण..." बोलते जीवन ने देवर्षि नारद के उस पौराणिक पात्र को 60 से अधिक फ़िल्मों में पर्दे पर जीवंत किया था, जो शायद अपने आप में एक विक्रम और एक कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि थी।
अद्यतन‎

जीवन (अंग्रेज़ी: Jeevan, जन्म- 24 अक्टूबर, 1915, श्रीनगर; मृत्यु- 10 जून, 1987) हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। उनका पूरा नाम 'ओंकार नाथ धर' था। उन्होंने फ़िल्मी पर्दे पर अपनी भूमिकाओं को बड़ी ही संजीदगी से निभाया। वैसे तो अभिनेता जीवन ने अधिकांश फ़िल्मों में खलनायक की भूमिका निभाई थी, लेकिन फिर भी एक भूमिका ऐसी थी जिसमें दर्शकों ने उन्हें देखना हमेशा पसंद किया। देवर्षि नारद के रूप में उनके द्वारा निभाई गई भूमिका को दर्शक कभी नहीं भूल पायेंगे। नारद मुनि के पौराणिक पात्र को अभिनेता जीवन ने 60 से भी अधिक फ़िल्मों में पर्दे पर जीवंत किया।

परिचय

अभिनेता जीवन का जन्म 24 अक्टूबर, 1915 को श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर में हुआ था। उनका वास्तविक नाम ओंकार नाथ धर था। जीवन को बचपन से ही अभिनेता बनने का मन था। उनके पुत्र और खुद भी एक जाने माने अभिनेता किरण कुमार ने एक पुराने साक्षात्कार में बताया था कि जीवन के पिता जी पाकिस्तान में स्थित गिलगिट के गवर्नर थे। जीवन की माताजी का देहांत सन 1915 में जीवन साहब के जन्म के समय ही हो गया था। उनकी उम्र तीन साल की होते-होते जीवन के पिताजी भी चल बसे थे। किन्तु गवर्नर साहब के खानदान के पुत्र को सिनेमा में अभिनय जैसे उस समय के निम्न व्यवसाय से नाता जोड़ने की इजाजत परिवार वाले कैसे देते? लिहाजा 18 साल की उम्र में जेब में मात्र 26 रुपये लेकर ओंकार नाथ धर बम्बई (वर्तमान मुम्बई) जाने के लिए घर से भाग गए।

जीवन का घर का नाम ‘जीवन किरण’ था और लोग समजते थे कि उन्होंने अपने साथ बेटे का भी नाम जोड़ा था, परंतु हकीकत ये थी कि उनकी पत्नी का नाम ‘किरण’ था। वे लाहौर की थीं। पर्दे पर अधिकतर खलनायक की भूमिका करने वाले जीवन साहब निजी ज़िन्दगी में इतने भले थे कि पैसों के मामले में कोई अगर उन्हें दगा दे जाये तो वे कहते थे- "उस व्यक्ति को ज्यादा जरुरत होगी"।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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