सूती वस्त्र उद्योग  

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सूती वस्त्र मिल में कार्यरत व्यक्ति

सूती वस्त्र उद्योग भारत का सबसे प्राचीन एवं बड़ा उद्योग है। इसमें भारत की सर्वाधिक जनसंख्या 5 करोड़ को रोज़गार भी प्राप्त हुआ है। प्रायः भारत के सभी राज्यों में सूती वस्त्र उद्योग से सम्बन्धित मिलें स्थापित हैं, किन्तु महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल आदि राज्यों में इनकी प्रमुखता है। सूती वस्त्र उद्योग का सर्वाधिक केन्द्रीकरण महाराष्ट्र तथा गुजरात राज्यों में हुआ है, जो भारत की सर्वाधिक कपास का भी उत्पादन करते हैं।

भारत में मिलों की स्थापना

आधुनिक ढंग की सूती वस्त्र की पहली मिल की स्थापना 1818 में कोलकता के समीप फोर्ट ग्लास्टर में की गयी थी, किन्तु यह असफल रही। पुनः 1851 में मुम्बई में एक मिल स्थापित की गयी, जो असफल रही। सबसे पहला सफल आधुनिक कारख़ाना 1854 में मुम्बई में ही कावसजी डाबर द्वारा खोला गया जिसमें 1856 में उत्पादन प्रारम्भ हुआ। इसके बाद तो भारत में सूती वस्त्र उद्योग के विकास मार्ग प्रशस्त हो गया एवं वर्ष 1988 तक भारत में इस उद्योग से सम्बन्धित 1227 (1995 में) मिलों की स्थापना की जा चुकी थी, जिसमें 771 मिलों मे केवल सूत की कताई होती थी, जबकि 283 मिलें कताई के साथ ही वस्त्र निर्माण करने का भी काम करती थी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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