कच्चे मकान  

कच्चे मकान प्राय: मिट्टी के बने होते हैं। संभवत: मिट्टी ही सबसे पुरानी वस्तु है, जिसका उपयोग मनुष्य घर बनाने के लिए करता है। अनंत काल से मिट्टी से दीवारें बनाई जाती रही हैं, जो टेढ़ी-मेढ़ी होती थीं और धूप में भली प्रकार से सुखाई हुई ईटों की बनी व सीधी होती थीं। ऐसे मकान दक्षिण और मध्य अमरीका, दक्षिण यूरोप, अफ़्रीका, फ़ारस तथा निकटवर्ती देश मिस्र और भारत, अर्थात्‌ संसार के प्राय: सभी भागों में मिलते हैं।

कच्चा माल

मकानों आदि की रचना में प्राय: चिकनी मिट्टी का ही प्रयोग होता है, किंतु कई स्थानों में मिट्टी में दृढ़ता एवं सुघट्यता लाने के लिए रेत भी मिला दी जाती है। यद्यपि सूखने पर मिट्टी सिकुड़ती है, तथापि सिकुड़न के कारण ईटों के छोटी पड़ने के अतिरिक्त अन्य कोई हानि नहीं होती। ऐसा भी विश्वास है कि सूखने पर ईटों के सिकुड़ जाने से उनकी दाब के प्रति सहनशीलता में वृद्धि हो जाती है। फलत: इन ईटों से बनी दीवारें अधिक बोझ सँभाल सकती हैं। विश्व के कतिपय ऐसे भागों में जहाँ मिट्टी में रेत मिलाने की परंपरा नहीं है, थोड़ा-सा भूसा या सूखी घास मिला दी जाती है, जिससे मिट्टी की पुष्टता में वृद्धि हो जाए और सूखने पर चटखे नहीं।[1]

भौगोलिक तथ्य

अल्प वर्षा वाले स्थानों में ही कच्चे मकान अधिक बनाए जाते हैं। कारण यह है कि वहाँ की मिट्टी की बनी हुई ईटों में 0.2 से लेकर 1 टन प्रतिवर्ग फुट तक की दाब की सहनशीलता होती है, जो शुष्कावस्था के एक मंजिले मकानों के लिए पर्याप्त होती है। अधिक वर्षा वाले स्थानों में उचित प्रकार की छतों वाले मकान बनाए जा सकते हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 कच्चे मकान (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 06 जून, 2014।
  2. कंपैक्शन
  3. इमल्शन
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