सप्तिपारा  

सप्तिपारा मयूरभंज ज़िला, उड़ीसा में स्थित है। स्थानीय किंवदंती के अनुसार यह महाभारत काल का मत्स्य देश है; किंतु यह तथ्य सही नहीं जान पड़ता, क्योंकि मत्स्य देश का अभिज्ञान जयपुरअलवर (राजस्थान) के कुछ भागों के साथ निश्चित रूप से हो चुका है।

  • उपरोक्त किंवदंती का आधार निम्न विवेचन से स्पष्ट हो जाता है-

'दिब्बिड़ ताम्रपत्रों[1] से सूचित होता है कि मत्स्य निवासियों की एक शाखा मध्य काल में 'विजिगापटम्' प्रदेश (आंध्र) में जाकर बस गई थी। उत्कल नरेश जयत्सेन ने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह इसी परिवार के कुमार सत्यमार्तंड से किया और उसे 'ओड्डावाड़ी' (उड़ीसा का एक भाग) का शासक नियुक्त किया। 23 पीडि़यों के पश्चात् 1269 ई. में इसी के वंशज अर्जुन का यहां राज्य था। इससे अनुमान किया जाता है कि किस प्रकार मत्स्य देश की प्राचीन अनुश्रुतियाँ व परंपराएँ सैंकड़ों मील के व्यवधान को पार कर उड़ीसा जा पहुंचीं। इसीलिए पांडवों के अज्ञातवास से संबद्ध कथाएँ भी सप्तिपारा में आज तक परंपरा से प्रचलित चली आ रही हैं।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. एपिग्राफिका इंडिका 5, 108
  2. ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 934 |

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=सप्तिपारा&oldid=504382" से लिया गया