सूर्य मंदिर कोणार्क  

Disamb2.jpg सूर्य मंदिर एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- सूर्य मंदिर (बहुविकल्पी)
सूर्य मंदिर कोणार्क
सूर्य मंदिर, कोणार्क
विवरण कोणार्क का सूर्य मन्दिर अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। सूर्य ग्रहण के समय विश्व स्तर के खगोल शास्त्री यहाँ एकत्रित होते हैं।
राज्य उड़ीसा
ज़िला पुरी
निर्माता नरसिम्हा देव प्रथम
निर्माण काल तेरहवीं शताब्दी
भौगोलिक स्थिति उत्तर- 19.887444°, पूर्व- 86.094596°
मार्ग स्थिति सूर्य मंदिर कोणार्क से 1.2 किमी की दूरी पर स्थित है।
प्रसिद्धि 'सूर्यमन्दिर' भारत का इकलौता सूर्य मन्दिर है जो पूरी दुनिया में अपनी भव्यता और बनावट के लिए जाना जाता है। यह विश्‍व विरासत स्‍थल सूची में भी शामिल है।
कब जाएँ नवम्बर से अप्रैल
कैसे पहुँचें बस, रेल, हवाई जहाज़ आदि से पहुँचा जा सकता है।
हवाई अड्डा भुवनेश्वर हवाई अड्डा
रेलवे स्टेशन पुरी रेलवे स्टेशन
बस अड्डा कोणार्क बस अड्डा
यातायात टैक्सी, जीप, ऑटो रिक्शा, रिक्शा
क्या देखें माया देवी मंदिर, वैष्णव मंदिर, रामचंडी मन्दिर आदि
कहाँ ठहरें होटल, अतिथि ग्रह, धर्मशाला
एस.टी.डी. कोड 06758
ए.टी.एम लगभग सभी
Map-icon.gif गूगल मानचित्र
अन्य जानकारी सूर्य मंदिर के निर्माण में 1200 कुशल शिल्पियों ने 12 साल तक लगातार काम किया।
बाहरी कड़ियाँ सूर्य मंदिर
अद्यतन‎

कोणार्क का सूर्य मंदिर भारत के उड़ीसा राज्य के पुरी ज़िले के कोणार्क नामक क़स्बे में स्थित है। सूर्य मंदिर अपने निर्माण के 750 साल बाद भी अपनी अद्वितीयता, विशालता व कलात्मक भव्यता से हर किसी को निरुत्तर कर देता है। वास्तव में जिसे हम कोणार्क के सूर्य मन्दिर के रूप में पहचानते हैं, वह पार्श्व में बने उस सूर्य मन्दिर का जगमोहन या महामण्डप है, जो कि बहुत पहले ध्वस्त हो चुका है। कोणार्क का सूर्य मंदिर को अंग्रेज़ी में ब्लैक पैगोडा भी कहा जाता है।

  • पुराविद व वास्तुकार मन्दिर की संरचना, मूर्तिशिल्प व पत्थरों पर उकेरी आकृतियों को वैज्ञानिक, तकनीकी व तार्किक कसौटी पर कसने के बाद तथ्यों को दुनिया के सामने रखते रहे हैं और यह क्रम लगातार जारी है। बहरहाल इस महामण्डप या जगमोहन की विराटता व भग्न हो चुके मुख्य मन्दिर के आधार पर उत्कीर्ण सज्जा से ही इसे यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल की पहचान मिली है।
  • भारत से ही नहीं बल्कि दुनिया भर से लाखों पर्यटक इसको देखने कोणार्क आते हैं। कोणार्क में बनी इस भव्य कृति को महज देखकर समझना कठिन है कि यह कैसे बनी होगी। इसे देखने का आनन्द तभी है जब इसके इतिहास की पृष्ठभूमि में जाकर इसे देखा जाए।

स्थापना

सूर्य मंदिर को गंग वंश के राजा नरसिम्हा देव प्रथम ने लगभग 1278 ई. में बनवाया था। कहा जाता है कि ये मंदिर अपनी पूर्व निर्धारित अभिकल्पना के आधार पर नहीं बनाया जा सका। मंदिर के भारी गुंबद के हिसाब से इसकी नींव नहीं बनी थी। यहाँ के स्थानीय लोगों की मानें तो ये गुम्बद मंदिर का हिस्सा था पर इसकी चुम्बकीय शक्ति की वजह से जब समुद्री पोत दुर्घटनाग्रस्त होने लगे, तब ये गुम्बद हटाया गया। शायद इसी वज़ह से इस मंदिर को ब्लैक पैगोडा भी कहा जाता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. सूर्य के दिव्य रथ का प्रतीक है कोर्णाक सूर्यमन्दिर (हिन्दी) आधी आबादी डॉट कॉम। अभिगमन तिथि: 15 सितंबर, 2010

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