गौरीशंकर हीराचंद ओझा  

गौरीशंकर हीराचंद ओझा
गौरीशंकर हीराचंद ओझा
पूरा नाम गौरीशंकर हीराचंद ओझा
जन्म 15 सितम्बर, 1863
जन्म भूमि रोहिड़ा ग्राम, राजस्थान
मृत्यु 20 अप्रैल, 1947
अभिभावक पिता- हीराचन्द ओझा
कर्म भूमि भारत
मुख्य रचनाएँ 'भारतीय प्राचीन लिपि माला', 'मध्यकालीन भारतीय संस्कृति', 'सोलंकियों का इतिहास', 'पृथ्वीराज विजय', 'कर्मचंद वंश' तथा 'राजपूताना का इतिहास' आदि।
भाषा राजस्थानी, हिन्दी, संस्कृत
विद्यालय 'एलफिंस्टन हाईस्कूल', मुम्बई
प्रसिद्धि इतिहासकार
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख राजस्थान, राजस्थान का इतिहास, गोपीनाथ शर्मा, काशीप्रसाद जायसवाल
अन्य जानकारी सन 1894 ई. में 'भारतीय प्राचीन लिपि माला' नामक पुस्तक लिखकर गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने भाषा और लिपि के क्षेत्र में क्रान्ति ला दी। इस पुस्तक में भारतीय लिपियों के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी गई है।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

गौरीशंकर हीराचंद ओझा (अंग्रेज़ी: Gaurishankar Hirachand Ojha, जन्म- 15 सितम्बर, 1863, राजस्थान; मृत्यु- 20 अप्रैल, 1947) भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार थे। इन्हें इतिहास, पुरातत्त्व और प्राचीन लिपियों में विशेषज्ञता प्राप्त थी। वर्ष 1937 में 'काशी हिन्दू विश्वविद्यालय' ने उन्हें 'डी.लिट' की उपाधि से सम्मानित किया था।[1] ओझा जी आधी शताब्दी तक ज्ञान के प्रकाश स्तम्भ के रूप में खड़े थे। वे भारत के अतीत का मार्ग टटोलने में निरन्तर आलोक पाते रहे। सिरोही राज्य, सोलंकियों तथा राजपूताने के इतिहास के साथ-साथ आपने इतिहास तथा अन्य विषयक कई ग्रंथ लिखे।[2]

जन्म तथा शिक्षा

पण्डित गौरीशंकर हीराचंद ओझा का जन्म 15 सितम्बर, 1863 ई. को में हुआ था। मेवाड़ और सिरोही राज्य की सीमा पर एक गांव है- 'रोहिड़ा'। अरावली श्रृंखला के पश्चिम में तलहटी में बसा यह गांव उस दिन धन्य हो गया जिस दिन हीराचन्द ओझा के घर पुत्ररत्न ने पदार्पण किया। वह दिन था मंगलवार भाद्रपद सुदि पंचमी संवत 1920।[3] अति सामान्य ब्राह्मण परिवार में जन्म होने के कारण गौरीशंकर हीराचंद ओझा की प्रारम्भिक शिक्षा उस छोटे से गांव में ही हुई। संस्कृत का अध्ययन आपने अपने पिता के पास रहकर किया। बाद में 1877 में मात्र 14 वर्ष की आयु में उच्च शिक्षा के लिये वे मुम्बई गये, जहां 1885 में 'एलफिंस्टन हाईस्कूल' से मेट्रिक्यूलेशन की परीक्षा उत्तीर्ण की। रोगग्रस्त हो जाने के कारण वे इन्टरमीडियेट की परीक्षा न दे सके और गांव लौट आये।[4]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |पृष्ठ संख्या: 257 |
  2. 2.0 2.1 2.2 2.3 गोरीशंकर हीराचंद ओझा (हिन्दी) राजस्थान स्टडीज। अभिगमन तिथि: 16 अगस्त, 2015।
  3. तदनुसार 15 सितम्बर 1863 ई.
  4. राजस्थान के इतिहासकार – सं. 31. डा. हुकमसिंह भाटी पृ. 104
  5. हमारा राजस्थान-पृथ्वीसिंह मेहता पृ. 262
  6. हमारा राजस्थान-पृ. 262-63
  7. राजस्थान के इतिहासकार-पृ. 107

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