गुरु हनुमान  

गुरु हनुमान
गुरु हनुमान
पूरा नाम गुरु हनुमान
अन्य नाम विजय पाल (वास्तविक नाम)
जन्म 15 मार्च 1901
जन्म भूमि चिड़ावा तहसील, राजस्थान
मृत्यु 24 मई, 1999
मृत्यु स्थान मेरठ, उत्तर प्रदेश
कर्म भूमि भारत
खेल-क्षेत्र कुश्ती
पुरस्कार-उपाधि द्रोणाचार्य पुरस्कार, पद्मश्री
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी गुरु हनुमान, महाबली सतपाल, करतार सिंह, 1972 के ओलम्पियन प्रेमनाथ, सैफ विजेता धीरज ठाकरान, सुभाष पहलवान, हंसराम पहलवान जैसे अनगिनत पहलवानों के कोच थे।
अद्यतन‎

गुरु हनुमान (अंग्रेज़ी: Guru Hanuman, जन्म: 15 मार्च, 1901; मृत्यु: 24 मई, 1999) भारत के महान् कुश्ती प्रशिक्षक (कोच) थे। वे स्वयं भी महान् पहलवान थे, उन्‍होंने सम्‍पूर्ण विश्‍व में भारतीय कुश्‍ती को महत्त्वपूर्ण स्‍थान दिलाया। उनकी कुश्‍ती के क्षेत्र विशेष में उपलब्धियों के कारण इन्हें सन 1988 में द्रोणाचार्य पुरस्कार और सन 1983 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

जीवन परिचय

गुरु हनुमान का जन्म राजस्थान के झुंझुनू ज़िला के चिड़ावा तहसील में 1901 में हुआ था। गुरु हनुमान का बचपन का नाम विजय पाल था। बचपन में कमज़ोर सेहत का होने के कारण अक्सर ताकतवर लड़के इन्हें तंग करते थे। इसलिए उन्होंने सेहत बनाने के लिए बचपन में ही पहलवानी को अपना लिया था। कुश्ती के प्रति अपने आगाध प्रेम के चलते इन्होंने 20 साल की उम्र में दिल्ली की और प्रस्थान किया। भारतीय मल्लयुद्ध के भगवान हनुमान से प्ररित होकर इन्होंने अपना नाम हनुमान रख लिया और ताउम्र ब्रह्मचारी रहने का प्रण कर लिया। उनके अनुसार उनकी शादी तो कुश्ती से ही हुई थी। ये बात कोई अतिश्योक्ति भी नहीं थी, क्योंकि जितने पहलवान उनके सान्निध्य में आगे निकले हैं, शायद किसी और गुरु को इतना सम्मान मिल पाया है। कुश्ती के प्रति उनके प्रेम के चलते मशहूर भारतीय उद्योगपति के.के बिरला ने उन्हें दिल्ली में अखाड़ा चलाने के लिए ज़मीन दान में दे दी थी। सन 1940 में वो आजादी की लड़ाई में शामिल हो गये। 1947 में भारत विभाजन के समय पाकिस्तान से शरणार्थियों की उन्होंने खूब सेवा की। 1947 के बाद हनुमान अखाड़ा दिल्ली पहलवानों का मंदिर हो गया। 1980 में इनको पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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