इसराज  

इसराज

इसराज (अंग्रेज़ी:Esraj) एक प्रकार से सितार और सारंगी का ही रूपांतर है। इसका ऊपरी भाग सितार से मिलता है और नीचे का भाग सारंगी के समान होता है। इसराज को दिलरुवा भी कहते हैं। यद्यपि इसकी शक्ल में थोड़ा अंतर होता है, किंतु बजाने का ढंग एक-सा होता है। इसीलिए इसरज और दिलरुवा पृथक् साज नहीं माने जाते।

मुख्य अंग

इसराज के मुख्य अंग
तूँबा यह खाल से मढ़ा हुआ होता है। इसके ऊपर घोड़ी या ब्रिज लगा रहता है।
लंगोट यह तार बाँधने की कील होती है।
डाँड इसमें परदे बँधे रहते हैं।
घुर्च यह खाल से मढ़ी हुई तबली के ऊपर का हड्डी का टुकड़ा होता है, जिसके ऊपर तार रहते हैं। इसे 'घोड़ी' या 'ब्रिज' भी कहते हैं।
अटी सिरे की पट्टी, जिस पर होकर तार तारगहन के भीतर होकर खूँटियों तक जाते हैं।
खूटियाँ ये तारों को बाँधने और कसने के लिए होती है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  • पुस्तक- संगीत विशारद, लेखक- वसंत, प्रकाशक- संगीत कार्यालय हाथरस, पृष्ठ संख्या- 377

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