अण्णा हज़ारे  

अण्णा हज़ारे
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पूरा नाम किसन बापट बाबूराव हज़ारे
अन्य नाम अण्णा हज़ारे/अन्ना हज़ारे
जन्म 15 जून, 1937
जन्म भूमि अहमदनगर के भिंगर क़स्बे में, महाराष्ट्र
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि 1998 और 2005 में तत्कालीन सरकार के कुछ नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए आवाज़ उठाई थी।
पद गांधीवादी समाजसेवक
भाषा हिन्दी, अंग्रेज़ी
शिक्षा मुंबई में सातवीं तक पढ़ाई की।
पुरस्कार-उपाधि 1990 में पद्मश्री से और 1992 में पद्म भूषण से, 1986 में इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार, 1989 में महाराष्ट्र सरकार का कृषि भूषण पुरस्कार, 1986 में विश्व बैंक का 'जित गिल स्मारक पुरस्कार'
बाहरी कड़ियाँ आधिकारिक वेबसाइट
अद्यतन‎ 12:06, 9 अप्रॅल 2011 (IST)

अण्णा हज़ारे / अन्ना हज़ारे (अंग्रेज़ी: Anna Hazare, जन्म- 15 जून, 1938, अहमदनगर) गांधीवादी विचारधारा पर चलने वाले एक समाज सेवक हैं, जो किसी राजनीतिक पार्टी की जगह स्वतंत्र रुप से काम करते हैं। भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन में आम आदमी को जोड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्‍ना हज़ारे का वास्‍तविक नाम किसन बापट बाबूराव हज़ारे है तथा प्यार से लोग इन्हें अन्ना कहते हैं। अण्णा हजारे भारत के उन चंद नेताओं में से एक है जो हमेशा सफेद खादी के कपड़े पहनते हैं और सिर पर गाँधी टोपी पहनते हैं।

जीवन परिचय

15 जून, 1938 को महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के भिनगरी क़स्बे में जन्मे अन्ना हज़ारे का बचपन बहुत ग़रीबी और अभावों में गुज़रा। उनके पिता आयुर्वेद आश्रम में एक साधारण मज़दूर थे, दादा फ़ौज में थे। दादा की पोस्टिंग भिंगनगर में थी। पिता का नाम बाबूराव हजारे और माँ का नाम लक्ष्मीबाई हजारे है। अन्ना का पुश्‍तैनी गाँव अहमदनगर ज़िले में स्थित रालेगण सिद्धि में था। दादा की मौत के सात साल बाद अन्ना का परिवार रालेगण आ गया। उनके परिवार की ग़रीबी और तंगी देखकर अन्ना हज़ारे की बुआ उन्हें अपने साथ मुंबई ले गईं। कुछ समय बाद उनका परिवार भी भिंगर से उनके पुरखों के गाँव रालेगण सिद्धि चला आया था। उनके अलावा उनके परिवार में उनके छः और भाई थे। मुंबई में बुआ के साथ रहते हुए उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की। आर्थिक अभाव की वजह से वह आगे की पढ़ाई नहीं कर पाए पर देश की व्यवस्था में व्याप्त गंदगियों का अच्छा अध्ययन कर लिया। परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर वह दादर स्टेशन के बाहर एक फूल बेचनेवाले की दुकान में 40 रुपये की पगार पर काम करना प्रारम्भ किया। इसके बाद उन्होंने फूलों की अपनी दुकान खोल ली और अपने दो भाइयों को भी रालेगण से बुला लिया।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. किसन बाबूराव हज़ारे उर्फ़ अन्ना (अण्णा) हज़ारे ! (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) अंधड़ !। अभिगमन तिथि: 9 अप्रॅल, 2011
  2. Awards to Anna Hazare (अंग्रेज़ी) (एच.टी.एम.एल) annahazare.org। अभिगमन तिथि: 10 अप्रॅल, 2011

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