बाजरा  

बाजरा

बाजरा भारत की प्रमुख फ़सलों में से एक है, जिसका उपयोग भारतीय लोग बहुत लम्बे समय से करते आ रहे हैं। बाजरे की फ़सल मोटे अनाजों में सबसे अधिक उगायी जाती है। इसकी खेती अफ़्रीका और भारतीय महाद्वीप में प्रागेतिहासिक काल से ही की जाती रही है। बाजरे के सम्बन्ध में यह माना जाता है कि यह मूल रूप से अफ़्रीका की फ़सल है, जिसका बाद में भारतीय महाद्वीप में प्रवेश हुआ। भारत में बाजरा लगभग ईसा पूर्व दो हज़ार वर्ष से उगाया जाना निश्चित किया गया है। बाजरे का यह विशेष गुण है कि यह सूखा प्रभावित क्षेत्र में भी आसानी से उग जाता है और उच्च तापमान को भी सह लेता है। इसीलिए बाजरा उन क्षेत्रों में अधिक उगाया जाता है, जहाँ मक्का या गेंहूँ की फ़सल नहीं उगायी जा सकती या फिर ये फ़सलें वहाँ कम फल पाती हैं। वर्तमान समय में मोटे अन्न उत्पादन का लगभग आधा भाग बाजरा ही होता है। बाजरा ग्रामीण जनसंख्या का मुख्य खाद्यान्न है। इसकी अधिकांश मात्रा का उपयोग देश में किया जाता है। देश में 2006-07 के दौरान बाजरे का कुल उत्पादन 86 लाख टन हुआ।

भौगोलिक दशाएँ

बाजरा के लिए ज्वार से अधिक शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। यह 30 से 50 सेण्टीमीटर तक वर्षा वाली बलुई भूमि में अधिक उत्पन्न होता है। यह 50 से 70 सेण्टीमीटर वर्षा वाले भागो में भी बोया जाता है। अतः बिना सिंचाई व कम उपजाऊ भूमि में बिना खाद डाले ही बाजरा पैदा किया जाता है। यदि वर्षा वहाँ हल्की फुहार के रूप में होती रहे तो भी निकृष्ट भूमि में भी इसका उत्पादन हो सकता है। इसलिए बाजरा की कृषि भारत में 80° देशान्तर के पश्चिम में स्थित अनुपजाऊ भूमि में अधिक होती है। यह समान्यतः दलहनों के साथ मिलाकर बोया जाता है। यह मई से अगस्त तक बोया जाता है और सितम्बर से जनवरी तक काट लिया जाता है। इसके लिए औसत तापमान 15° से 32° सेंटीग्रेट तक उपयुक्त रहता है। बाजरा व ज्वार को हरी चरी व सूखी, किन्तु पौष्टिक घास के लिये भी पैदा पैदा किया जाता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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