ऑपरेशन मेघदूत  

ऑपरेशन मेघदूत (अंग्रेज़ी: Operation Meghdoot) भारतीय सेना द्वारा 13 अप्रैल, 1984 को शुरू किया गया सैन्य अभियान था। साल 1984 में भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ को यह जानकारी हासिल हुई कि पाकिस्तान अपने अभियान ऑपरेशन अबाबील के तहत सियाचीन के सल्तोरो रिज को हथियाने की योजना बना रहा है। यह खबर मिलते ही भारतीय सेना ने इस दुर्गम इलाके में तुरंत ऑपरेशन मेघदूत की योजना बना डाली। इस सामरिक चोटी पर क़ब्ज़ा जमाने के लिए पाकिस्तानी सेना के जवान पहुंचें, उसके पहले ही इस क्षेत्र में करीब 300 भारतीय जवानों की टुकड़ी को तैनात कर दिया गया।

इतिहास

सियाचिन में भारतीय फौजों की किलेबंदी इतनी मजबूत है कि पाकिस्तान चाह कर भी इसमें सेंध नहीं लगा सकता। दरअसल, ये सफलता है 1984 के उस मिशन मेघदूत की, जिसे भारतीय सेना ने सियाचिन पर कब्जे के लिए शुरू किया था। शह और मात के इस खेल में भारत ने पाकिस्तान को जबरदस्त शिकस्त दी थी। दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र सियाचिन में भारत और पाकिस्तान की फौज पिछले 30 साल से आमने-सामने डटी हुई हैं। 1984 से पहले सियाचिन में ये स्थिति नहीं थी, वहां किसी भी देश की फौज नहीं थी। 1949 के कराची समझौते और 1972 के शिमला समझौते में दोनों देशों के बीच ये समझदारी बनी हुई थी कि प्वाइंट NJ 9842 के आगे के दुर्गम इलाके में कोई भी देश नियंत्रण की कोशिश नहीं करेगा। तब तक उत्तर में चीन की सीमा की तरफ प्वाइंट NJ 9842 तक ही भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा चिन्हित थी, लेकिन पाकिस्तान की नीयत खराब होते देर नहीं लगी। उसने इस इलाके में पर्वतारोही दलों को जाने की इजाजत देनी शुरू कर दी, जिसने भारतीय सेना को चौकन्ना कर दिया।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 13 अप्रैल 1984: ऑपरेशन मेघदूत (हिंदी) tejasraval.wordpress.com। अभिगमन तिथि: 15 जनवरी, 2017।

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