बेकल क़िला  

बेकल क़िला, कासरगोड ज़िला

बेकल क़िला कासरगोड ज़िला, केरल के पर्यटन स्थलों में से एक है। यह एक तटीय क़िला है, जो पल्‍लीक्‍करे गांव के अरब सागर त‍ट की पृष्टभूमि पर स्थित कासरगोड के दक्षिण-पूर्व में 16 कि.मी.की दूरी पर स्थित है। यह केरल के उत्‍तम संरक्षित क़िलों में से एक है। इस क़िले का निर्माण 'शिवप्पा' नाम के एक नायक ने करवाया था।

इतिहास

इस क़िले की स्थिति 120° 23' उत्‍तर और 750° 02' पूर्व है। कासरगोड का एक लंबा और सतत इतिहास रहा है। कर्नाटक क्षेत्र से इसकी निकटता होने और बेकल क्षेत्र के सामरिक महत्‍व के कारण विजयनगर शासन काल से ही इसे महत्‍व प्राप्‍त था। दक्षिणी केनारा मैनुअल और अन्‍य साहित्यिक कृतियों के अनुसार केलेडी नायकों (सन 1500-1763) जिनकी कर्नाटक के केलाड़ी, इक्‍केरी और बेडनोर में विभिन्‍न राजधानियाँ थीं, ने होसदुर्ग-कासरगोड क्षेत्र में कुछ किलों का निर्माण करवाया था। माना जाता है कि बेकल क़िले का निर्माण शिवप्‍पा नायक ने करवाया था। दूसरी मान्यता यह है कि यह क़िला कोलाथिरी राजाओं के काल में भी मौजूद था और कोलाथिरी राजाओं और विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद यह क्षेत्र इक्‍केरी नायकों के नियंत्रण में आ गया, जिन्‍होंने इस क़िले का पुन: निर्माण करवाया और उस क्षेत्र का उपयोग किया।

बेकल क़िला

अंग्रेज़ों का अधिकार

सन 1763 में यह क़िला हैदर अली के हाथों में आया था। बेकल क़िला टीपू सुल्तान के महत्‍वपूर्ण सेना पड़ाव के रूप में उस समय उपयोग में आया, जब उसने मालाबार पर अधिकार करने के लिए बड़ा सैन्‍य अभियान चलाया। सन 1799 में अंग्रेज़ों के विरुद्ध लड़ते समय टीपू सुल्‍तान की मृत्‍यु के साथ ही मैसूर राज्‍य का इस क़िले से नियंत्रण समाप्‍त हो गया और बाद में यह क़िला ईस्ट इंडिया कम्पनी के नियंत्रण में चला गया। धीरे-धीरे बेकल का राजनीतिक और आर्थिक महत्‍व समाप्‍त होता चला गया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हुजूर

बाहरी कड़ियाँ

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