अरब सागर  

अरब सागर
अरब सागर, केरल
विवरण अरब सागर हिन्द महासागर का पश्चिमोत्तर भाग है और यूरोप व भारत के बीच मुख्य समुद्री मार्ग के एक हिस्से को निर्मित करता है।
देश भारत, पाकिस्तान और ईरान
अधिकतम गहराई 4,652 मीटर
अधिकतम चौड़ाई 2,400 किलोमीटर
क्षेत्रफल लगभग 38,62,000 वर्ग किलोमीटर
गूगल मानचित्र गूगल मानचित्र
अन्य जानकारी मध्यकाल के अरबों के लिए अरब सागर भारत का सागर अथवा 'महान सागर' का एक भाग था, जिसमें से छोटी खाड़ियाँ, जैसे फ़रिस का समुद्र (फ़ारस की खाड़ी) या कोलज़म का समुद्र (लाल सागर), अलग पहचान रखती थीं।

अरब सागर (अंग्रेज़ी:Arabian Sea) हिन्द महासागर का पश्चिमोत्तर भाग, लगभग 38,62,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है और यूरोपभारत के बीच मुख्य समुद्री मार्ग के एक हिस्से को निर्मित करता है। यह पश्चिम में अफ़्रीका अन्तरीप और अरब प्रायद्वीप से, उत्तर में ईरान और पाकिस्तान, पूर्व में भारत और दक्षिण की ओर हिन्द महासागर के शेष भाग से घिरा हुआ है। ओमान की खाड़ी उत्तर में सागर को फ़ारस की खाड़ी से हॉरमुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से जोड़ती है। पश्चिम में अदन की खाड़ी उसे बाब एल–मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से लाल सागर से जोड़ती है। इसकी औसत गहराई 2,734 मीटर है। रोमन काल में इसका नाम मेर एरिथ्रेइयम (एरिथ्रेइयन सागर) था।

भारत, ईरान और पाकिस्तान के अलावा ओमान सल्तनत, यमन और सोमालिया सागर के आसपास स्थित राजनीतिक इकाइयाँ हैं। सागर के द्वीपों में सोकोत्रा (यमन का एक भाग) अफ़्रीकी हॉर्न के निकट, ओमान के तट के निकट कुरिया मुरिया द्वीप और लक्षद्वीप।[1] लक्षद्वीप भारत के दक्षिण–पश्चिम (मालाबार) तट से 160 और 400 किमी के बीच स्थित मूंगे के प्रवाल द्वीपों का समूह है। सिंधु नदी इस सागर में पड़ने वाली प्रमुख नदी है।

भौतिक लक्षण

अरब सागर के अधिकांश भाग की गहराई 2,987 मीटर से अधिक है और इसके मध्य में कोई द्वीप नहीं है। पाकिस्तान व भारत के तट के निकट को छोड़कर, गहरा पानी पूर्वोत्तर में किनारों की भूमि के पास तक है। दक्षिण–पूर्व में, जो हिन्द महासागर में दक्षिण की ओर बढ़ता है और जहाँ पर वह पानी की सतह से ऊपर उठकर मालदीव के प्रवालद्वीप को निर्मित करता है। सागर के पश्चिमी भाग की ओर लगभग 113 किमी लम्बा व लगभग 3,626 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाला सोकोत्रा का पठारी द्वीप अफ़्रीकी हॉर्न का एकद्वीपीय विस्तार है और ग्वार्डाफुई अन्तरीप से 257 किमी पूर्व में है।

अन्तःसागरीय आकृति एवं भू–विज्ञान

अरब सागर विगत 1,500 लाख वर्षों (मेसोज़ोइक और सिनोज़ोइक युगों) में ही निर्मित हुआ है। जब भारतीय उपमहाद्वीप उत्तर की ओर बढ़ा और एशिया से टकराया था। सोकोत्रा से दक्षिण की ओर जलमग्न कार्ल्सबर्ग कटक है, जो कि हिन्द महासागर में भूकम्पीय गतिविधि के क्षेत्र से मिलता है। जो अरब सागर को दो मुख्य बेसिनों, पूर्व की ओर अरब बेसिन और पश्चिम की ओर सोमाली बेसिन में बाँटता है। सागर की अधिकतम गहराई 5,803 मीटर व्हीटले गर्त में है। कार्ल्सबर्ग कटक एक मध्यवर्ती घाटी द्वारा लम्बाई में विभाजित है, जो समुद्र की सतह के नीचे 3,596 मीटर की गहराई तक पहुँचती है। अदन की खाड़ी के तटीय कगार रिफ़्ट भ्रंशों से बने हैं, जो कि दक्षिण–पश्चिम की ओर अभिसरित होकर पूर्वी अथवा ग्रेट रिफ़्ट वैली के सीमांत कगारों के रूप में अफ़्रीका तक जाते हैं और पूर्वी अफ़्रीकी रिफ़्ट प्रणाली का एक हिस्सा है, अरब बेसिन ओमान की खाड़ी के बेसिन से, एक संकरे, भूकम्प सक्रिय जलमग्न मर्रे कटक द्वारा विभाजित है, जो कि पूर्वोत्तर से दक्षिण–पश्चिम में विस्तृत होकर कार्ल्सबर्ग से मिलता है। मर्रे कटक के पश्चिम में मालियान का दाबित क्षेत्र है। जहाँ पर समुद्र तल निकटवर्ती महाद्वीपीय पटल के नीचे धंस जाता है।

अरब सागर का मानचित्र

सिंधु नदी के द्वारा एक गहरी जलमग्न खाई काटी गई है, जिसने 861 किमी चौड़े व 1,496 किमी लम्बे गहरे सागर का सघन अपशिष्ट शंकु भी निक्षेपित किया है। यह शंकु और इसके पास ही अरब बेसिन में गहरे पानी का एक समतल मैदान अरब सागर के अधिकांश पूर्वोत्तर समतल पर फैले हैं। सोमाली तट के पूर्व में सोमाली बेसिन गहरे पानी का दूसरा समतल मैदान बनाता है।


महाद्वीपीय कगार अरब प्रायद्वीप तट पर संकरा है और सोमाली तट के किनारे और भी संकरा है। अरब तट के आसपास कोई वास्तविक प्रवाल–भित्तियाँ नहीं पाई जाती हैं। अल–हद (अरब प्रायद्वीप की पूर्वी अग्रभूमि) अन्तरीप के पास के निक्षेपों में, जहाँ गर्मियों में गहरा पानी ऊपर आ जात है, उच्च जैविक पदार्थ वाले हाइड्रोजन सल्फ़ाइड युक्त हरी मिट्टी है। यह क्षेत्र, जिसमें मछलियों के कई अवशेष हैं, मछलियों की क़ब्रगाह कहलाता है। महाद्वीपीय कगार के अधिकांश भाग पर 2,743 मीटर की गहराई तक भू–व्युत्पन्न निक्षेप फैले हैं। इसके नीचे, निक्षेप ग्लोबीजेराइना (फ़ोरामिनिफ़ेरिडा वर्ग के प्रोटोजोआ का एक वंश) के चूने से बने आवरणों से निर्मित हैं, जबकि 3,962 मीटर के नीचे के बेसिन लाल मिट्टी से ढंके हैं। स्व–स्थानक (उसी जगह पर निर्मित) फ़ैरोमैंगनीज़ पिण्ड सोमाली और अरब बेसिनों में पाए गए हैं तथा कार्ल्सबर्ग कटक के आसपास पॉलीमैटेलिक सल्फ़ाइड पाए गए हैं। निक्षेप की मोटाई उत्तर में 2,499 मीटर से अरब बेसिन के दक्षिण में लगभग 489 मीटर तक घटती है।

जलवायु एवं जल विज्ञान

अरब सागर का दृश्य

अरब सागर की जलवायु मॉनसूनी है। मध्य अरब सागर में जनवरीफ़रवरी में समुद्र की सतह के निकट हवा का न्यूनतम तापमान लगभग 24º से 25º से. रहता है, जबकि जून और नवम्बर में 28º से. से अधिक तापमान रहता है। दक्षिण–पश्चिम मॉनसूनी हवाएँ चलने के दौरान वर्षा ऋतु (अप्रैल से नवम्बर) में सागर से ऊपरी 46 मीटर में लवणता प्रति हज़ार 36 भाग से कम दर्ज की गई है। जबकि सूखे के मौसम के दौरान (नवम्बर से मार्च), जब पूर्वोत्तर मॉनसूनी हवाएँ चलती हैं, प्रति हज़ार 36 भाग से अधिक की लवणता सोमाली तट के अलावा 5º उत्तरी अक्षांश के समूचे अरब सागर की उत्तरी सतह पर दर्ज की गई है। चूंकि वाष्पन वर्षा व नदियों के निवेश के योग से अधिक होता है, सागर प्रतिवर्ष पानी की मात्रा में हानि दर्शाता है।

जटिल सोमाली धारा, जो सोकोत्रा के तट के निकट लगभग सात समुद्री मील की गति पकड़ लेती है और एक दक्षिणावर्त संचरण तंत्र का भाग बन जाती है, जो गर्मियों में पूर्वोत्तर में अरब तट के साथ और फिर दक्षिण की ओर भारत के तट के साथ 10º उत्तर तक निरन्तर बहती है। उस जगह पर दक्षिण–पश्चिमी मॉनसून धारा में विलयित हो जाती है, जो 5º और 10º उत्तर के बीच पूर्व की ओर बहती है। सोमाली और अरब तटों पर गर्मियों में गहरे पानी का ऊपर उठना साफ़–साफ़ दृष्टिगोचर होता है। सोमाली धारा धीमा पड़कर पूर्वोत्तर मॉनसून (सर्दियों के) के समय विपरीत दिशा में बहती है। उत्तरी हिन्द महासागर के ऊपरी 914 मीटर में पहचाने गए पाँच जल पिण्डों में से तीन का उदय क्रमशः लाल सागर, फ़ारस की खाड़ी और अरब सागर से पाया गया है। इन जल पिण्डों के प्रवाह के मार्ग दक्षिण व पूर्व की ओर हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारत का एक संघ शासित प्रदेश, जो लक्कादीव, मिनिकाय और अमीनदीवी द्वीपों से बना है।
  2. जो तट से दूर समुद्र में सतह के निकट रहती हैं।
  3. एक प्रजाति, जिसकी एक लम्बी, तीखी चोंच या थूथन होती है
  4. तेज़ी से तैरने वाली एक बड़ी शिकारी मछली
  5. एक बड़ी प्रजाति, जिसके आरी जैसे दाँत होते हैं
  6. धंसी छाती और पतले शरीर वाली एक रुपहली मछली

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