मृत सागर  

मृत सागर

मृत सागर समुद्र के तल से 400 मीटर नीचे दुनिया का सबसे निचला बिंदु है। यह सागर अपने उच्च घनत्व के लिए जाना जाता है। इस सागर में तैराकों का डूबना लगभग असम्भव है। आम पानी की तुलना में मृत सागर के पानी में 20 गुना ज़्यादा ब्रोमिन, 50 गुना ज़्यादा मैग्नीशियम तथा 10 गुना ज़्यादा आयोडिन उपस्थित रहता है। इस सागर के भौतिक गुणों का वर्णन स्वयं अरस्तु ने भी किया है।

आकर्षण तथा जैव जगत

मृत सागर सदा से ही विदेशी सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र रहा है। 65 किलोमीटर लम्बा और 18 किलोमीटर चौड़ा यह सागर अपने उच्च घनत्व के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि इस सागर में किसी का भी डूबना असम्भव है। मृत सागर में मुख्यत: जॉर्डन नदी और अन्य छोटी नदियाँ आकर गिरती हैं। हालाँकि इसमें कोई मछली जिंदा नहीं रह सकती, लेकिन इसमें बैक्टीरिया की 11 जातियाँ पाई जाती हैं। इसके अलावा मृत सागर में प्रचुर मात्रा में खनिज पाए जाते हैं। ये खनिज पदार्थ वातावरण की मदद से कई स्वास्थ्यवर्धक चीज़ें मुहैया कराते हैं। मृत सागर अपनी विलक्षण ख़ासियतों के लिए कम से कम चौथी सदी से जाना जाता रहा है, जब विशेष नावों द्वारा इसकी सतह से शिलाजीत निकालकर मिस्र के लोगों को बेचा जाता था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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