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पाषाणीय शिलालेख (लेखन सामग्री) - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर

पाषाणीय शिलालेख (लेखन सामग्री)  

लेखन सामग्री विषय सूची

प्राचीन भारत की लेखन सामग्री में पाषाणीय शिलालेख एक लेखन सामग्री है। प्रारम्भिक काल के भारतीय लेख उन्हें चिरस्थायी बनाने की दृष्टि से, पाषाणों पर उत्कीर्ण देखने को मिलते हैं। पाषाणीय लेख चट्टानों, शिलाओं, स्तम्भों, मूर्तियों तथा उनके आधार-पीठों और पत्थर के कलश या उनकी ढक्कन-जैसी वस्तुओं पर पाए जाते हैं।

पाषाण को तराशना

पाषाण को कभी-कभी चिकना किए बिना ही लेख खोद दिए जाते थे। परन्तु जब प्रशस्ति- जैसे लेख उत्कीर्ण करने होते तो, पत्थर को काट-छाँट और छीलकर चिकना किया जाता था। कभी-कभी चिकने पत्थर से रगड़कर उसे चमकीला भी बनाया जाता था।

अक्षरों का उत्कीर्णन

लेख की रचना कोई कवि, विद्वान् अथवा राज्य का उच्चाधिकारी करता था। लेखक उसे स्याही या खड़िया से पत्थर की सतह पर लिख देता था। पट्टी अथवा रंग में डुबोए गए धागे से पत्थर पर सीधी रेखाएँ खींची जाती थीं। अन्त में शिल्पी छेनी से अक्षरों को उत्कीर्ण कर देता था। कभी-कभी पुस्तकें भी, उन्हें चिरस्थायी रखने के प्रयोजन से, चट्टान या शिलाओं पर खोद दी जाती थीं। उदाहरणार्थ, धार, मालवा से राजा भोज का 'कूर्मशतक' नामक प्राकृत काव्य शिलाओं पर ख़ुदा हुआ मिला है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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