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'''वातापी''' [[बीजापुर ज़िला|ज़िला बीजापुर]], [[कर्नाटक]] राज्य [[भारत]] में स्थित है। [[शोलापुर ज़िला|शोलापुर]] से 141 मील दूर स्थित वर्तमान [[बादामी]] ही प्राचीन 'वातापी' है। यह शोलापुर-गदग रेल मार्ग पर स्थित है। बादामी की बस्ती दो पहाड़ियों के बीच में है। वातापी का नाम [[पुराण|पुराणों]] में उल्लिखित है, जहाँ इसका सम्बन्ध [[वातापि]] नामक दैत्य से बताया जाता है, जिसे [[अगस्त्य]] ऋषि ने मारा था।<ref>[[अगस्त्य#इल्वल और वातापि|इल्वल और वातापि]]</ref>  
 
'''वातापी''' [[बीजापुर ज़िला|ज़िला बीजापुर]], [[कर्नाटक]] राज्य [[भारत]] में स्थित है। [[शोलापुर ज़िला|शोलापुर]] से 141 मील दूर स्थित वर्तमान [[बादामी]] ही प्राचीन 'वातापी' है। यह शोलापुर-गदग रेल मार्ग पर स्थित है। बादामी की बस्ती दो पहाड़ियों के बीच में है। वातापी का नाम [[पुराण|पुराणों]] में उल्लिखित है, जहाँ इसका सम्बन्ध [[वातापि]] नामक दैत्य से बताया जाता है, जिसे [[अगस्त्य]] ऋषि ने मारा था।<ref>[[अगस्त्य#इल्वल और वातापि|इल्वल और वातापि]]</ref>  
 
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==पौराणिक कथा==
*पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में यह नगर वातापि नामक असुर के अधीन था, जो ब्राह्मणों का परम शत्रु था।
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पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में यह नगर वातापि नामक असुर के अधीन था, जो ब्राह्मणों का परम शत्रु था। बाद के दिनों में अगत्स्य ऋषि ने इसका वध किया था।
*बाद के दिनों में अगत्स्य ऋषि ने इसका वध किया था।
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==दर्शनीय स्थल==
*वातापी [[महाराष्ट्र]] राज्य के [[बीजापुर]] ज़िले में स्थित है।
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*यहा एक दुर्ग है, उसमें बायीं ओर [[हनुमान]] जी का मन्दिर, ऊपर जाने पर [[शिव]] का मन्दिर, उससे आगे दो तीन और मन्दिर मिलते हैं।
*इसके पूर्वोत्तर में एक दुर्ग है, उसमें बायीं ओर [[हनुमान]] जी का मन्दिर, ऊपर जाने पर [[शिव]] का मन्दिर, उससे आगे दो तीन और मन्दिर मिलते हैं।
 
 
*दक्षिण की पहाड़ी पर पश्चिम की ओर 'गुहामन्दिर' हैं, तीन गुहाएँ स्मार्त धर्म की और एक [[जैन धर्म]] की है।
 
*दक्षिण की पहाड़ी पर पश्चिम की ओर 'गुहामन्दिर' हैं, तीन गुहाएँ स्मार्त धर्म की और एक [[जैन धर्म]] की है।
 
*पहली गुहा में 18 भुजाओं वाली शिवमूर्ति, गणेशमूर्ति तथ गणों की मूर्तियाँ हैं।
 
*पहली गुहा में 18 भुजाओं वाली शिवमूर्ति, गणेशमूर्ति तथ गणों की मूर्तियाँ हैं।
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*पिछली दीवार में महिषासुरमर्दिनी, [[गणेश]] तथा [[स्कन्द]] की मूर्तियाँ हैं।
 
*पिछली दीवार में महिषासुरमर्दिनी, [[गणेश]] तथा [[स्कन्द]] की मूर्तियाँ हैं।
 
*दूसरी गुहा में [[वामन अवतार]], [[वराह अवतार]], गरुड़ारूढ़ [[नारायण]], शेषशायी नारायण की मूर्तियाँ तथा कुछ अन्य मूर्तियाँ भी हैं।  
 
*दूसरी गुहा में [[वामन अवतार]], [[वराह अवतार]], गरुड़ारूढ़ [[नारायण]], शेषशायी नारायण की मूर्तियाँ तथा कुछ अन्य मूर्तियाँ भी हैं।  
*तीसरी गुहा में अर्द्धनारीश्वर शिव, पार्वती, [[नृसिंह अवतार]], नारायण, वराह आदि की मूर्तियाँ हैं।  
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*तीसरी गुहा में [[अर्द्धनारीश्वर]] [[शिव]], [[पार्वती]], [[नृसिंह अवतार]], [[नारायण]], वराह आदि की मूर्तियाँ हैं।  
 
*जैन गुहा में जैन [[तीर्थंकर|तीर्थंकरों]] की मूर्तियाँ हैं।  
 
*जैन गुहा में जैन [[तीर्थंकर|तीर्थंकरों]] की मूर्तियाँ हैं।  
  
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==संबंधित लेख==
 
==संबंधित लेख==
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10:36, 5 जुलाई 2012 के समय का अवतरण

भूतनाथ शिव मंदिर, बादामी
शिव के मंदिर पर नक़्क़ाशी
Disamb2.jpg वातापि एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- वातापि बहुविकल्पी

वातापी ज़िला बीजापुर, कर्नाटक राज्य भारत में स्थित है। शोलापुर से 141 मील दूर स्थित वर्तमान बादामी ही प्राचीन 'वातापी' है। यह शोलापुर-गदग रेल मार्ग पर स्थित है। बादामी की बस्ती दो पहाड़ियों के बीच में है। वातापी का नाम पुराणों में उल्लिखित है, जहाँ इसका सम्बन्ध वातापि नामक दैत्य से बताया जाता है, जिसे अगस्त्य ऋषि ने मारा था।[1]

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में यह नगर वातापि नामक असुर के अधीन था, जो ब्राह्मणों का परम शत्रु था। बाद के दिनों में अगत्स्य ऋषि ने इसका वध किया था।

दर्शनीय स्थल

इन्हें भी देखें: बादामी


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख