टेक्कलकोट  

टेक्कलकोट कर्नाटक के बेल्लारी ज़िले में स्थित है। इस स्थल से नव-प्रस्तर काल के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इस स्थल के उत्खनन से दो नव-प्रस्तरकालीन संस्कृतियों के जमाव अनावृत्त किए हैं। दोनों ही चरणों से ताम्र निर्मित वस्तुएँ प्राप्त की गई हैं।

इतिहास

प्रारम्भिक नव-प्रस्तर चरण में घर्षित पाषाण उपकरण, लघु-आश्मक अस्थि-उपरकण, मनके तथा स्वर्ण निर्मित वस्तुएँ प्राप्त हुई हैं। मनके पाषाण तथा घिया पत्थर से निर्मित हैं। इनके अतिरिक्त सीपी तथा सीसा के मनके भी प्राप्त हुए हैं। गर्त शवाधानों से खण्डित कंकाल मिले हैं, जिनके ऊपर ग्रेनाइट के पाषाण खण्ड स्थापित हैं। इस काल में क़ब्र में शवों के साथ सामग्री रखने की प्रथा प्रचलित नहीं थी। इस चरण के अधिकतर पात्र हस्तनिर्मित हैं। इनमें धूसर पात्रों की अधिकता है।

निवास स्थान

इस स्थल का परवर्ती चरण ताम्र-प्रस्तरकालीन माना गया है। इस चरण में कृष्ण-लोहित तथा फीके लाल पात्र विशेष रुप से उल्लेखनीय हैं। उत्खनन से प्राप्त झोंपड़ियों को लकड़ी की बल्लियों पर गाड़ कर टिकाया जाता था। इनके नीचे का भाग घास-फूस से घेरा गया था तथा इसी सामग्री से सम्भवतः तिकोने छप्पर का निर्माण भी किया जाता था। दूसरे प्रकार के वृत्ताकार झोंपड़ियों की दीवार पाषाण खण्डों के टुकड़ों द्वारा निर्मित वृत्त के सहारे टिकाई जाती थी। तीसरा प्रकार वर्गाकार तथा आयताकार झोंपड़ियों का है, जिनको बड़े पाषाण के खण्डों या चट्टानों के सहारे बनाया गया है। पाषाण खण्डों के सहारे टिकी वृत्ताकार झोंपड़ियाँ आज भी इस क्षेत्र की बोया जनजातियाँ बनाती हैं।

विभिन्न उपकरण

इस स्थल से प्राप्त उपकरण पाषाण व अस्थि निर्मित हैं। पाषाण उपकरणों में घर्षित कुल्हाड़ियों की अधिकता है। कुल्हाड़ियों के अतिरिक्त इनमें छेनी, छिद्रक तथा फनाकार अस्त्र तथा हथौड़े, लोढ़े, अहरन तथा तराशने के उपकरण प्राप्त हुए हैं। अस्थि उपकरण पशुओं के पैर की लम्बी हड्डियों तथा पिंजर से निर्मित हैं। इस वर्ग में छेनी, नोकदार अस्त्र आदि प्रमुख हैं। यहाँ से प्राप्त शवों को सीधा लिटाने की प्रथा अथवा दूसरी प्रथा के अंतर्गत अस्थियों को चुन कर दफ़नाया जाता था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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