कामाख्या शक्तिपीठ  

कामाख्या शक्तिपीठ
कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी
वर्णन कामाख्या पीठ भारत का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। कामाख्या देवी का मन्दिर पहाड़ी पर है, अनुमानत: एक मील ऊँची इस पहाड़ी को नील पर्वत भी कहते हैं।
स्थान गुवाहाटी, असम
देवी-देवता यहाँ माता सती को 'कामाख्या' और भगवान शिव को 'उमानंद' कहते है।
धार्मिक मान्यता कामाख्या मंदिर के समीप ही उत्तर की ओर देवी की क्रीड़ा पुष्करिणी (तालाब) है, जिसे सौभाग्य कुण्ड कहते हैं। मान्यता है कि इसकी परिक्रमा से पुण्य मिलता है।
अन्य जानकारी इस मन्दिर में शक्ति की पूजा योनिरूप में होती है। यहाँ कोई देवीमूर्ति नहीं है। योनि के आकार का शिलाखण्ड है, जिसके ऊपर लाल रंग की गेरू के घोल की धारा गिराई जाती है और वह रक्तवर्ण के वस्त्र से ढका रहता है। इस पीठ के सम्मुख पशुबलि भी होती है।

कामाख्या शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाये। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं। देवीपुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है।

स्थिति

कामाख्या पीठ भारत का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जो असम प्रदेश में है। कामाख्या देवी का मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर दूर नीलाचल पर्वत पर स्थित है।[1] कामाख्या देवी का मन्दिर पहाड़ी पर है, अनुमानत: एक मील ऊँची इस पहाड़ी को नील पर्वत भी कहते हैं। कामरूप का प्राचीन नाम धर्मराज्य था। वैसे कामरूप भी पुरातन नाम ही है। प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र-सिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। पूर्वोत्तर के मुख्य द्वार कहे जाने वाले असम की नयी राजधानी दिसपुर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नीलाचल पर्वतमालाओं पर स्थित माँ भगवती कामाख्या का सिद्ध शक्तिपीठ सती के इक्यावन शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान रखता है।

यह भारत के ईशान कोण[2] तथा योगिनी तंत्र[3] में इसकी सीमा है- पश्चिम में करतोया से दिक्करवासिनी तक, उत्तर में कंजगिरि, पूर्व में तीर्थश्रेष्ठ दिक्षु नदी, दक्षिण में ब्रह्मपुत्र और लाक्षानदी के संगम स्थल तक, त्रिकोणाकार कामरूप की सीमा-लंबाई 100 योजना, विस्तार 30 योजन है। नीलाचल पर्वत के दक्षिण में वर्तमान पाण्डु गौहाटी मार्ग पर जो पहाड़ियाँ हैं, उन्हें नरकासुर पर्वत कहते है। नरकासुर कामरूप के प्राग्जोतिषपुर का राजा था, जिसने त्रेता से द्वापर तक राज्य किया तथा वह कामाख्या का प्रमुख भक्त था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

हिन्दू धर्मकोश |लेखक: डॉ. राजबली पाण्डेय |प्रकाशक: उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान |पृष्ठ संख्या: 176 |

  1. अनुमानत यह 2000 मीटर ऊँचा है
  2. 51/65-66
  3. पूर्व खण्ड-पटल 11/17-18,21
  4. ईसा की 7वीं से 12वीं शताब्दी पर्यंत कामरूप के राजाओं के ताम्र लेखों में कामाख्या का कोई उल्लेख नहीं है किंतु वरमाल और इंद्रपाल के शासन में कामेश्वर महागौरी का उल्लेख है। ये शायद उन राजाओं के इष्टदेव-शिव शाक्ति-थे। (कल्याणः शाक्तिअंक-पृष्ठ 657)
  5. देवी पुराण 2/9
  6. 7 स्कन्ध, अध्याय 38
  7. अध्याय 61
  8. कालिका पुराण
  9. Reserve Bank of India- Without Reserve- (2002/No.4) P.35.
  10. देवी पुराण- 12/30
  11. कालिका पुराण-51/67
  12. कुब्जिका तंत्र-पटल 7
  13. योगिनी तंत्र, उत्तरखण्ड-6/150
  14. कुब्जिका तंत्र, सप्तम पटल
  15. I bid, p.35 (उपर्युक्त पत्रिका- पृष्ठ 35)

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