ऊष्मारसायन  

उष्मारसायन के अंतर्गत रासायनिक क्रियाओं में क्षेपित या शोषित ऊर्जा का अध्ययन किया जाता है। प्रत्येक में एक विशिष्ट अंतर्निहित (इंट्रिंज़िक) ऊर्जा होती है। उदाहरण के लिए यदि क्रिया

क + ख ® ग + घ

में भाग लेनेवाले पदार्थों क, ख, ग तथा घ को अंतर्निहित ऊर्जा क्रमानुसार का, खा, गा तथा घा द्वारा व्यक्त की जाए, तो इन ऊर्जाओं के निम्नलिखित संबंध संभव हैं :

(का + खा) = (गा + घा);

(का +खा) < (गा + घा);

(का + खा) > (गा + घा)।

प्रथम अवस्था में प्रतिकारकों की ऊर्जा का योगफल क्रियाफलों की ऊर्जा के योगफल के बराबर है, अतएव प्रतिक्रिया में न तो उष्मा का क्षेपण होगा, न शोषण। परंतु वस्तुत: बहुत कम क्रियाओं में ऐसा होता है। द्वितीय अवस्था में प्रतिकारकों की कुल ऊर्जा, (का +खा), क्रियाफलों की कुल ऊर्जा, (गा + घा), से अधिक है, अतएव ऊर्जानित्यत्व (कॉनज़र्वेशन ऑव एनर्जी) संबंधी नियम के अनुसार इस प्रतिक्रिया में (का + खा) - (गा + घा) के बराबर उष्मा क्षेपित होगी। इसी प्रकार तृतीय अवस्था में (का + खा) - (गा + घा) के बराबर ऊर्जा शोषित होगी। जिन क्रियाओं में उष्मा का क्षेपण होता है, वे उष्माक्षेपक (एक्सोथर्मिक) कहलाती हैं और जिनमें उष्मा का शोषण होता है, उन प्रतिक्रियाओं को उष्माशोषक (एंडोथर्मिक) कहते हैं।

उष्मारासायनिक समीकरण-साधारणतया किसी प्रतिक्रिया में क्षेपित या शोषित उष्मा को उसके समीकरण द्वारा व्यक्त कर देते हैं। उदाहरण के लिए :

H2 (गैस) + Cl2 = 2HCl (गैस) + 44,000 क0

द्वारा पकट होता है कि 1 ग्राम-अणु (2 ग्राम) हाइड्रोजन गैस तथा 1 ग्राम-अणु (71 ग्राम) क्लोरीन गैस से संयोजन से जब 2 ग्राम-अणु (73 ग्राम) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल गैस बनती है, तो 44, 000 कैलरी उष्मा क्षेपित होती है। इसी प्रकार निम्नांकित समीकरण देखिए :

H2 (गैस) + I2 = 2HCl (गैस) - 11,860 क0

द्वारा यह प्रकट होता है कि यदि 2 ग्राम हाइड्रोजन तथा 254 ग्राम आयोडीन गैस के संयोजन से 256 ग्राम हाइड्रोजन आयोडाइड गैस बनाई जाए तो इस प्रतिक्रिया में 11,860 कैलरी उष्मा शोषित होगी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 2 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 174 |

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