आतानक विश्लेषण  

आतानक विश्लेषण (टेंसर ऐनालिसिस) का मुख्य उद्देश्य ऐसे नियमों की रचना और अध्ययन है, जो साधारणतया सहचर (कोवैरिऐंट) रहते हैं, अर्थात्‌ यदि हम नियामकों की एक संहति से दूसरी में जाएं तो ए नियम ज्यों के त्यों बने रहते हैं। इसीलिए अवकल ज्यामिति के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है।

इस विषय के पुराने विचारकों में गाउस, रीमान और क्रिस्टॉफ़ेल के नाम उल्लेखनीय हैं। किंतु इस विषय को व्यवस्थित रूप रिची और लेवी चिविता ने दिया। इन्होंने इस विषय का नाम बदलकर निरपेक्ष चलन कलन (ऐब्सोल्यूट डिफ़रेशियल कैल्कुलस) कर दिया। इस विषय का प्रयोग अनुप्रयक्त गणित की बहुत सी शाखाओं में होता है।

मान लीजिए, एक त्रिविस्तारी अवकाश (स्पेस) अ३है जिसके प्रत्येक बिंदु पा के नियामक तीन वास्तविक राशियों य१य२ य३ पर आश्रित हैं। मान लीजिए, पा के निकट ही फा एक दूसरा बिंदु है जिसके नियामक (य1+ताय12+ताय23+ताय3) हैं, तो इस अवकल कुलक (सेट ऑव डिफ़रेंशियल्स)

ताय'1 ताय'2 ताय'3

को एक सदिश (वेक्टर) कहते हैं; या यों कहिए कि बिंदुयुग्म पा, फा को एक सदिश कहते हैं।

मान लीजिए, हम य'1, य2, य3,को एक दूसरी नियामक पद्धति य'1 य'2 य'3 में परिवर्तित करते हैं, जो ऐसी है कि पहले नियामक दूसरे नियामकों के सतत फलन हैं। इसके अतिरिक्त अवकल गुणक

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 1 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 362 |
  2. सं.ग्रं.-एल.पी.आइज़ेनहार्ट : कंटिन्युअस ग्रूप्स ऑव ट्रैंसफॉर्मेशंस (1933); ओ.वेब्लेन : इन्वैरिएँटस ऑव क्वाड्रैटिक डिफ़रेंशियल फ़ार्म्स (1927); ए.डी. माइकेल : मैट्रिक्स ऐंड टेंसर कैलक्युलस विद ऐप्लिकेशन्स टु मेकैनिक्स, इलैस्टिसिटी ऐंड एअरोनॉटिक्स (1946)।

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