"प्रयोग:दीपिका3": अवतरणों में अंतर
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||[[दबाव समूह|दबाव समूहों]] को इनकी कार्यशैली के कारण 'अदृश्य सरकार' कहा जाता है। एस. इ. फाइनर ने इन्हें 'अज्ञात साम्राज्य' की संज्ञा दी है। शुम्पीटर ने इन्हें वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में 'गुमनाम साम्राज्य के शासक' कहा है। | ||[[दबाव समूह|दबाव समूहों]] को इनकी कार्यशैली के कारण 'अदृश्य सरकार' कहा जाता है। एस. इ. फाइनर ने इन्हें 'अज्ञात साम्राज्य' की संज्ञा दी है। शुम्पीटर ने इन्हें वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में 'गुमनाम साम्राज्य के शासक' कहा है। | ||
{[[भारत]] में 'एपलबी समिति' की स्थापना हुई थी, निम्नलिखित में सुधार करने के लिए- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-131,प्रश्न-17 | {[[भारत]] में 'एपलबी समिति' की स्थापना किस में सुधार करने के लिये हुई थी, निम्नलिखित में सुधार करने के लिए- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-131,प्रश्न-17 | ||
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-कैबिनेट प्रणाली | -कैबिनेट प्रणाली | ||
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||जॉर्ज एच. सेबाइस ने अपनी पुस्तक "द हिस्ट्री ऑफ़ पॉलिटिकल थियरी" (1973) में लिखा है कि "लेनिन का मार्क्सवाद मार्क्स के सिद्धांतों की दृढ़तम एवं कट्टरतम स्वीकृत होने के साथ परिस्थितियों के अनुसार इन सिद्धांतों की स्वतंत्रतम बदलती हुई व्यवस्था है।" | ||जॉर्ज एच. सेबाइस ने अपनी पुस्तक "द हिस्ट्री ऑफ़ पॉलिटिकल थियरी" (1973) में लिखा है कि "लेनिन का मार्क्सवाद मार्क्स के सिद्धांतों की दृढ़तम एवं कट्टरतम स्वीकृत होने के साथ परिस्थितियों के अनुसार इन सिद्धांतों की स्वतंत्रतम बदलती हुई व्यवस्था है।" | ||
{के.सी. व्हीयर द्वारा प्रतिपादित 'व्यवस्थापिकाओं के | {के.सी. व्हीयर द्वारा प्रतिपादित 'व्यवस्थापिकाओं के ह्रास' का अर्थ है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-73,प्रश्न-52 | ||
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-उनकी कानूनी शक्तियों में कमी | -उनकी कानूनी शक्तियों में कमी | ||
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-ग्रीक भाषा से | -ग्रीक भाषा से | ||
-जर्मन भाषा से | -जर्मन भाषा से | ||
||' | ||'लिबर्टी' शब्द लैटिन भाषा के 'लाइबर' शब्द से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है 'बंधनों का अभाव'। किंतु स्वतंत्रता शब्द की व्युत्पत्ति के आधार पर प्रचलित इस अर्थ को स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ नहीं माना जा सकता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहते हुए मनुष्य असीमित स्वतंत्रता का उपभोग नहीं कर सकता। उसे सामाजिक नियमों की मर्यादा के अंतर्गत रहना होता है। अत: स्वतंत्रता मानवीय प्रकृति और सामाजिक जीवन के इन दो विरोधी तत्वों (बंधनों का अभाव और नियमों का पालन) में सामंजस्य का नाम है। | ||
{किसकी देख-रेख में | {किसकी देख-रेख में ज़िले की पुलिस बल शांति और व्यवस्था कायम करता है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-131,प्रश्न-18 | ||
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+ | +ज़िलाधीश | ||
-पुलिस कप्तान | -पुलिस कप्तान | ||
-राज्य के गृह मंत्री | -राज्य के गृह मंत्री | ||
-[[मुख्यमंत्री]] | -[[मुख्यमंत्री]] | ||
|| | ||ज़िले में कानून व्यवस्था बनाए रखना जिलाधीश का कर्तव्य होता है। ज़िलाधीश के अन्य संबंधित कर्त्तव्य हैं- पुलिस और जेलों का पर्यवेक्षण, अधीनस्थ कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पद का पर्यवेक्षण, दंड प्रक्रिया संहिता की निवारक खंड के अंतर्गत मामलों की सुनवाई आदि। | ||
{"प्रशासन कार्यों के प्रबंध अथवा उनको पूर्ण करने की एक क्रिया है।" यह व्याख्या किसकी है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-136,प्रश्न-49 | {"प्रशासन कार्यों के प्रबंध अथवा उनको पूर्ण करने की एक क्रिया है।" यह व्याख्या किसकी है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-136,प्रश्न-49 | ||
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-एपिलबी | -एपिलबी | ||
-इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका | -इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका | ||
||लूथर गुलिक के अनुसार, "प्रशासन कार्यों के प्रबंध अथवा उनका पूर्ण करने की एक क्रिया है"। अर्थात प्रशासन की चार विशेषताएं हैं- कार्य विभाजन, पदसोपान, निर्वैव्यक्तिता तथा कार्यकुशलता गुलिक ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में | ||लूथर गुलिक के अनुसार, "प्रशासन कार्यों के प्रबंध अथवा उनका पूर्ण करने की एक क्रिया है"। अर्थात प्रशासन की चार विशेषताएं हैं- कार्य विभाजन, पदसोपान, निर्वैव्यक्तिता तथा कार्यकुशलता गुलिक ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पोस्डकोर्ब शब्द का विशेष रूप से प्रयोग किया है। | ||
{नेतृत्व के सिद्धांत के रूप में ' | {नेतृत्व के सिद्धांत के रूप में 'पारिस्थिति की दृष्टिकोण' प्रतिपादित किया गया था- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-73,प्रश्न-53 | ||
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+मिलेट द्वारा | +मिलेट द्वारा | ||
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-बर्नार्ड द्वारा | -बर्नार्ड द्वारा | ||
-लिविंग्सन द्वारा | -लिविंग्सन द्वारा | ||
||नेतृत्व के सिद्धांत के रूप में ' | ||नेतृत्व के सिद्धांत के रूप में 'पारिस्थिति की दृष्टिकोण' का प्रतिपादन मिलेट द्वारा किया गया था। मिलेट के अनुसार, "नेतृत्व प्राय: परिस्थितियों के अनुसार बनता या बिगड़ता है। मिलेट ने नेतृत्व की दो आवश्यक परिस्थितियां बतायी हैं- 1.राजनीतिक, 2.संस्थागता। | ||
{शीत युद्ध का अर्थ है: (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-115,प्रश्न-30 | {शीत युद्ध का अर्थ है: (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-115,प्रश्न-30 |
13:07, 7 मार्च 2018 का अवतरण
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