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{"दुनिया में प्रत्येक मनुष्य की आवश्यकता की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधन है, न कि उसके लालच के लिए।" उपर्युक्त कथन किसके नाम से जाना जाता है?(नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-39, प्रश्न-2
{परमाणु अप्रसार संधि अस्तित्व में कब आई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-26
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+1968 में
-1970 में
-1962 में
-1972 में
||1 जुलाई, 1968 को [[अमेरिका]] एवं अन्य 61 देशों ने परमाणु अप्रसार संधि (Non-Proliferation Treaty)  पर हस्ताक्षर किए परंतु यह संधि वास्तव में 5 मार्च, 1970 को प्रभावी हुई।
 
{"प्रबंधक जो कुछ भी करता है, निर्णयों के द्वारा ही करता है।" यह कथन किसका है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-136,प्रश्न-47
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-[[कार्ल मार्क्स]]
+पीटर ड्रकर
-माओत्से तुंग
-जे.सी. ग्लोवर
+[[महात्मा गांधी]]
-जॉर्ज टेरी
-हो ची मिन्ह
-अर्नेस्ट डेल
||[[महात्मा गांधी |महात्मा गांधी जी]] का मानना था कि मनुष्य को भौतिक वस्तुओं का उतना ही उपभोग करना चाहिए जितना की उसके शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अनिवार्य हो इससे सभी की भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकेगी। इसी संदर्भ में इनका कथन है कि "इस धरती पर इतने संसाधन तो है जिनसे सबकी अनिवार्य आवश्यकताएं पूरी हो सकें, परंतु इतने संसाधन नहीं हैं जिनसे किसी की लालसा की शांति की जा सके।"
||पीटर ड्रकर निर्णयन सिद्धांत के समर्थक हैं। निर्णय के महत्त्व को परिभाषित करते हुए पीटर ड्रकर ने कहा था कि "प्रबंधक जो कुछ भी करता है, निर्णयों के द्वारा ही करता है"


{'समाजवाद' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम निम्नलिखित में से किसके द्वारा किया गया? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-55,प्रश्न-28
{निम्नलिखित में से किसने 'फॉसीवाद के सिद्धांत' का वर्णन, इस रूप में किया है कि वह समाजवाद का राष्ट्रवादी रूप है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-42, प्रश्न-16
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-लेनिन
-मार्टिन हैडेगर
+रॉबर्ट ओवेन
-जॉर्जेज सोरेल
-[[कार्ल मार्क्स]]
+एल्फ्रेडो रोक्को
-हीगल
-रूडोल्फ जेलेन
||'समाजवाद' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग रॉबर्ट ओवेन (1771-1858) ने किया था, जो एक ब्रिटिश उद्योगपति, मानव प्रेमी एवं सहकारिता आंदोलन का अग्रदूत था। राबर्ट ओवेन द्वारा लिखित पुस्तकें क्रमश; 'ए न्यू व्यू ऑफ़ सोसाइटी', 'एसेज ऑन फॉर्मेशन ऑफ़ कैरेक्टर', 'सोशल सिस्टम', 'द बुक ऑफ़ द न्यू मोरल वर्ल्ड एवं द फ्यूचर ऑफ़ द ह्यूमन रेस' है।
||एल्फ्रेडो रोक्को ने फासीवाद के सिद्धांत का वर्णन इस रूप में किया है कि वह "समाजवाद का राष्ट्रवादी रूप है।" रोक्को इटली में लंबे समय तक राष्ट्रवादियों का नेता था। वह [[इटली]] में नए गठबंधन सरकार में न्यायमंत्री (Minister of Justic) था। उपरोक्त परिभाषा को उसने 1925 में चैम्बर ऑफ़ डिपुटीज के समक्ष भाषण देते हुए कहा था कि समाजवाद का राष्ट्रीय वर्जन प्रत्येक लोगों में खुशी लायेगा।


{"नागरिकों और प्रजाजनों पर विधि से अमर्यादित सर्वोच्च शक्ति" संप्रभुता की यह परिभाषा किसने दी है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-27,प्रश्न-29
{"आंग्ला-भाषी जगल में राजनीतिक सिद्धांत मर चुका है, साम्यवादी देशों में वह बंदी हैं और अन्यत्र मर रहा है।" यह कथन किसका है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-55,प्रश्न-29
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+बोदां
-अल्फ्रेड कॉबेन
-ऑस्टिन
-डेविड ईस्टन
-मैकियावेली
-सी.एल. वेपर
-हॉब्स
+राबर्ट डहल
||बोदां ने संप्रभुता को परिभाषित करते हुए लिखा है कि "यह नागरिकों और प्रजाजनों पर विधि से अमर्यादित सर्वोच्च शक्ति है।" बोदां ने संप्रभुता पर कानूनी दृष्टिकोण से विचार किया है। ज्ञातव्य है कि प्रभुसत्ता का कानूनी दृष्टिकोण सबसे पहले बोदां और हॉब्स ने स्पष्ट किया और बाद में बेंथम और आस्टिन ने इसकी विस्तृत व्याख्या की।
||उपरोक्त कथन राबर्ट डहल का है। किसी भी विषय को समग्र रूप से समझने के लिए एक सामान्य सिद्धांत की आवश्यकता होती है। राजनीति विज्ञान को समग्र रूप में समझने तथा इसका भविष्य में विकास एक आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत के निर्माण पर निर्भर करता है। परंतु वर्तमान स्थिति में राजनीतिक सिद्धांत की स्थिति बड़ी सोचनीय है। इसी संदर्भ में डहल ने कहा है कि "आंग्ल-भाषी जगत में राजनीतिक सिद्धांत मर चुका है, साम्यवादी देशों में वह बंदी है और अन्यत्र मर रहा है।" ज्ञातव्य है कि डेविड ईस्टन तथा कॉबेन भी राजनीतिक सिद्धांत के पतन से दुखी हैं।


{हीगल ने नागरिक समाज को देखा- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-72,प्रश्न-50
{"मार्क्सवादी केवल वही है जो वर्ग संघर्ष की मान्यता को मजदूर वर्ग की तानाशाही की मान्यता तक ले जाती है।" यह किसने कहा था? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-55,प्रश्न-30
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-विशिष्टता के प्रभाव-क्षेत्र के रूप में
+लेनिन
-स्वतंत्रता के प्रभाव-क्षेत्र के रूप में
-स्टॉलिन
+सार्विकता के प्रभाव-क्षेत्र के रूप में
-काउत्सकी
-सामंजस्य के प्रभाव-क्षेत्र के रूप में
-बर्नेस्टीन
||हीगल ने नागरिक समाज को सार्विकता के प्रभाव-क्षेत्र के रूप में देखा है। हीगल के राजनीतिक दर्शन का आधार 'विश्वात्मा' का विचार है। विश्व में पायी जाने वाली समस्त जड़ और चेतन वस्तुएँ इसी विश्वात्मा से नि:सृत हुई हैं। विश्वात्मा का धीरे-धीरे विकास होता रहता है। सर्वप्रथम जड़ जगत में इतनी अभिव्यक्ति होती है फिर परिवार, समाज जैसी सामाजिक संस्थाओं में इसका प्रकटीकरण होता है। अन्त में विश्वात्मा 'राज्य' के रूप में प्रकट होती है।
||[[कार्ल मार्क्स|मार्क्स]] और एंगेल्स की मृत्यु के बाद, लेनिन ने मजदूर आंदोलन के भीतर सभी विजातीय विचारों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए सर्वहारा अधिनायकत्व की सर्वोच्चता पर लगातार बल दिया। इन्होंने अपनी पुस्तक 'राज्य और क्रांति' में लिखा है कि "केवल वही मार्क्सवादी कहला सकता है जो वर्ग संघर्ष की स्वीकृति को सर्वहारा के अधिनायकवाद की स्वीकृति तक ले जाता है।"


{यह कथन किसका है कि "स्वतंत्रता और समानता न तो एक-दूसरे के विरोधी हैं और न ही पृथक वे एक आदर्श के दो रूप हैं"? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-86,प्रश्न-17
{संप्रभुता में विधिवादी सिद्धांत का प्रमुख प्रवक्ता निम्नलिखित में से कौन था? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-27,प्रश्न-30
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-पैरटो
-लॉक
-मेंटरलैंड
-रूसो
+हर्बर्ट डीन
+ऑस्टिन
-डेविड ह्यूम
-बोदां
||वर्तमान कल्याणकारी राज्य में स्वतंत्रता एवं समानता को एक-दूसरे का विरोधी न मानकर पूरक माना जाता है। दोनों का उद्देश्य एक ही है वह है व्यक्ति के व्यक्तित्व का स्वाभाविक विकास जैसा कि हबर्ट डीन लिखते हैं, "स्वतंत्रता और समानता न तो विरोधी है और न ही पृथक परंतु एक ही आदर्श के दो पक्ष है।" गेन्स के अनुसार "स्वतंत्रता और समानता में कोई विरोध नहीं है। हमें इस तरह के समाज का निर्माण करना चाहिए जो इतनी समानता प्रदान करें कि प्रत्येक व्यक्ति दूसरों पर किसी भी प्रकार की असमानता थोपे बिना अपनी जीवन को नियंत्रित करने के लिए स्वतंत्र हो।"
||बोदां, ग्रोशियस, हॉब्स, रूसो और ऑस्टिन के अनुसार राज्य एकमात्र ऐसी संस्था है जो समाज के लिए कानून बनाती है। अत: कानून की दृष्टि से राज्य की सत्ता अनन्य, सर्वोच्च और असीम है। इस सिद्धांत को 'प्रभुसत्ता का एकलवादी सिद्धांत' कहते हैं और इसकी सर्वोत्तम अभिव्यक्ति ऑस्टिन के चिंतन में होती है।


{किसने एकात्मक राज्य की परिभाषा "एक केंद्रीय सरकार के अंतर्गत संगठित" राज्य के रूप में दी? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-95,प्रश्न-10
{किसने इस नियम का प्रतिपादन किया है: "कर्मचारी एक-दूसरे के लिए कार्य उत्पन्न करते हैं"? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-72,प्रश्न-51
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+स्ट्रांग
-[[मैक्स वेबर]]
-गार्नर
+नॉरथियोट पार्किंसन
-विलोबी
-रैम्जे म्योर
-फाइनर
-पीटर ड्रकर
||बहुत से देशों (जैसे- [[ब्रिटेन]], [[फ्रांस]], [[चीन]]) में एकात्मक शासन विद्यमान है जिसकी मुख्य विशेषता एक केंद्रीय शासन के हाथों में सारी शक्तियों का केंद्रीकरण है। सी.एफ. स्ट्रांग के अनुसार "एकात्मक राज्य वह है जो एक केंद्रीय सरकार के अधीन संगठित होता है। तथा केंद्रीय सरकार अपने अंगों को विशेष शक्ति प्रदान करने वाले किसी भी कानून द्वारा आरोपित प्रतिबंधों से मुक्त होने के नाते समग्र राजनीतिक संगठन पर सर्वोच्च होती है।"
||नॉरथियोट पार्किंसन ने इस नियम का प्रतिपाद  किया है कि "कर्मचारी एक-दूसरे के लिए कार्य उत्पन्न करते हैं"


{निम्नलिखित में से कौन एक एकात्मक राज्य है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-96,प्रश्न-11
{निम्नलिखित में से किस विचार पद्धति में कानून को स्वतंत्रता का विरोधी समझा जाता है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-86,प्रश्न-18
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-यू.एस.ए.
-लोकतंत्रीय विचार पद्धति
-[[भारत]]
+शास्त्रीय उदारवादी विचार पद्धति
-[[ऑस्ट्रेलिया]]
-समाजवादी विचार पद्धति
+[[यू. के.|यू.के.]]
-समष्टिवादी विचार पद्धति
||एकात्मक राज्य में सरकार की एक ही इकाई होती है जिसका क्षेत्राधिकार पूरा प्रदेश होता है। [[प्रदेश]] को छोटी-छोटी सरकारी इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है, जिन्हें सीमित शक्तियां प्राप्त होती हैं। ये शक्तियां उन्हें [[केंद्र सरकार]] द्वारा प्रदान की जाती है। अत: सरकारी विभागों के अपने क्षेत्रीय कार्यालय होते हैं जिनका एकमात्र लक्ष्य प्रशासनिक सुविधा प्राप्त करना होता है। नगर के कार्यों के निष्पादन के लिए स्थानीय संस्थाएं होती हैं और सरकारी निर्णयों को लागू करने हेतु संबंधित विभागों के क्षेत्रीय अभिकरण होते हैं। यू.के. की काउंटीज तथा [[फ्रांस]] के विभाग इस प्रकार की स्थानीय सरकार की प्रशासनिक इकाइयों के उदाहरण हैं। अत: यू.के. एक एकात्मक राज्य है।
 
||कानून को स्वतंत्रता का विरोधी शास्त्रीय उदारवादी विचार पद्धति में माना जाता है। प्रारंभिक व्यक्तिवादी विचारक राज्य को एक आवश्यक बुराई मानते थे। उनका विचार है कि स्वतंत्रता और कानून परस्पर विरोधी हैं तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हित में राज्य जैसी कानून निर्मात्री संस्था का न्यूनीकरण हो जाना चाहिए।


{[[दबाव समूह]] के विषय में क्या सत्य नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-108,प्रश्न-26
{लिबर्टी शब्द लिया गया है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-86,प्रश्न-19
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|type="()"}
-वे संगठित होते हैं।
-लाइबेल से
-वे राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
-लिंगुआ से
-वे सरकार पर दबाव डालते हैं।
+लाइबर से
+वे चुनाव लड़ते हैं।
-लिब्रा से
||दबाव समूह अपने हितों की पूर्ति हेतु चुनाव नहीं लड़ते, बल्कि परोक्ष रूप से नीति-निर्माताओं को प्रभावित करते हैं।
||'कुबर्टी' शब्द लैटिन भाषा के 'लाइबर' शब्द से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है 'बंधनों का अभाव'। किंतु स्वतंत्रता शब्द की व्युत्पत्ति के आधार पर प्रचलित इस अर्थ को स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ नहीं माना जा सकता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहते हुए मनुष्य असीमित स्वतंत्रता का उपभोग नहीं कर सकता। उसे सामाजिक नियमों की मर्यादा के अंतर्गत रहना होता है। अत: स्वतंत्रता मानवीय प्रकृति और सामाजिक जीवन के इन दो विरोधी तत्वों (बंधनों का अभाव और नियमों का पालन) में सामंजस्य का नाम है।


{[[भारत]] में 'इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन' की स्थापना किस रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर हुई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-131,प्रश्न-16
{निम्न युग्मों में से कौन-सा युग्म गलत है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-96,प्रश्न-12
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-गोरेवाला रिपोर्ट
-संसदात्मक शासन व्यवस्था-ब्रिटेन,जर्मनी
-संथानम रिपोर्ट
-अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था-[[अमेरिका]], [[ब्राजील]], लैटिन अमेरिका के राज्य, [[दक्षिण अफ्रीका]]
+एपलबी रिपोर्ट
+संघात्मक शासन व्यवस्था- [[इंग्लैंड]], [[जापान]], [[चीन]], [[फ्रांस]]
-आयंगर रिपोर्ट
-एकात्मक शासन व्यवस्था- [[ब्रिटेन]], [[फ्रांस]], [[चीन]]
||वर्ष 1953 में लोक प्रशासन के प्रबुद्ध अमेरिकी विद्वान डीन पाल एपलबी ने भारतीय लोक सेवा के संदर्भ में अपनी अनुशंसाएं [[भारत सरकार]] को सौंपी। उनकी अनुशंसा के अनुसार 1954 में [[नई दिल्ली]] में भारतीय लोक 'इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन' की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य भारत में लोक प्रशासन के विधिवत अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करना तथा सरकारी कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान करना है।
||[[चीन]] तथा [[फ्रांस]] में एकात्मक व्यवस्था है। [[ब्रिटेन]] तथा [[जापान]] में संसदीय व्यवस्था है। इस प्रकार विकल्प (c) असत्य है जबकि अन्य विकल्प सत्य हैं।


{निम्नलिखित में से कौन तृतीय विश्व के सदस्य हैं? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-25
{दबाव समूहों का स्वभाव होता है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-108,प्रश्न-27
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|type="()"}
-[[जापान]], कनाडा, पूर्व सोवियत संघ
-राजनीतिक दल के रूप में
-[[अमेरिका]], [[जर्मनी]], नीदरलैंड
-न्यायपालिका के रूप में
+[[भारत]], नाइजीरिया, [[श्रीलंका]]
-समूह-अभिकरण के रूप में
-भारत, [[जापान]], कनाडा
+अदृश्य सरकार के रूप में
||'तीसरी दुनिया' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग फ्रांसीसी जनांकिकीयविद् मानवशास्त्री एवं इतिहासकार अल्फ्रेड सॉवी ने फ्रांसीसी पत्रिका फल 'आब्जर्वफीयूर' में अपने एक प्रकाशित लेख में 14 अगस्त, 1952 को किया। तीसरी दुनिया के देशों में [[अफ्रीका]], लैटिन [[अमेरिका]], ओशीनिया तथा एशिया क्षेत्र के देश आते हैं जो यूरोपीय देशों के उपनिवेश रह चुके हैं। इनमें तटस्थ तथा गुट निरपेक्षा देश शामिल हैं। पहली दुनिया के देशों में [[संयुक्त राज्य अमेरिका]], [[ब्रिटेन]] तथा उनके गठबंधन देश तथा दूसरी दुनिया में सोवियत संघ, [[चीन]] तथा उनके गठबंधन देश शामिल हैं। तीसरी दुनिया के देशों में [[भारत]], [[पाकिस्तान]], [[बांग्लादेश]], [[श्रीलंका]], नाइजीरिया इत्यादि शामिल हैं।
||दबाव समूहों को इनकी कार्यशैली के कारण 'अदृश्य सरकार' कहा जाता है। एस. इ. फाइवर ने इन्हें 'अज्ञात साम्राज्य' की संज्ञा दी है। शुम्पीटर ने इन्हें वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में 'गुमनाम साम्राज्य के शासक' कहा है।


{परमाणु अप्रसार संधि अस्तित्व में कब आई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-26
{[[भारत]] में 'एपलबी समिति' की स्थापना हुई थी, निम्नलिखित में सुधार करने के लिए- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-131,प्रश्न-17
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+1968 में
-कैबिनेट प्रणाली
-1970 में
-केंद्र-राज्य संबंध
-1962 में
-आंग्ल-भारतीय हेतु विशेष प्रावधान
-1972 में
+भारतीय प्रशासन
||1 जुलाई, 1968 को [[अमेरिका]] एवं अन्य 61 देशों ने परमाणु अप्रसार संधि (Non-Proliferation Treaty)  पर हस्ताक्षर किए परंतु यह संधि वास्तव में 5 मार्च, 1970 को प्रभावी हुई।
||||वर्ष 1953 में लोक प्रशासन के प्रबुद्ध अमेरिकी विद्वान डीन पाल एपलबी ने भारतीय लोक सेवा के संदर्भ में अपनी अनुशंसाएं [[भारत सरकार]] को सौंपी। उनकी अनुशंसा के अनुसार 1954 में [[नई दिल्ली]] में भारतीय लोक 'इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन' की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य [[भारत]] में लोक प्रशासन के विधिवत अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करना तथा सरकारी कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान करना है।


{परमाणु अप्रसार संधि पर [[अमेरिका]] और [[सोवियत संघ]] ने कब हस्ताक्षर किया था? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-115,प्रश्न-27
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+1971 के पूर्व
-1971 के पश्चात
-1975 के पश्चात
-उपर्युक्त सभी असत्य है
||परमाणु अप्रसार संधि पर अमेरिका और सोवियत संघ ने 1971 के पूर्व वर्ष 1968 में हस्ताक्षर किए थे।
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12:21, 18 फ़रवरी 2018 का अवतरण

1 परमाणु अप्रसार संधि अस्तित्व में कब आई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-26

1968 में
1970 में
1962 में
1972 में

2 "प्रबंधक जो कुछ भी करता है, निर्णयों के द्वारा ही करता है।" यह कथन किसका है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-136,प्रश्न-47

पीटर ड्रकर
जे.सी. ग्लोवर
जॉर्ज टेरी
अर्नेस्ट डेल

3 निम्नलिखित में से किसने 'फॉसीवाद के सिद्धांत' का वर्णन, इस रूप में किया है कि वह समाजवाद का राष्ट्रवादी रूप है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-42, प्रश्न-16

मार्टिन हैडेगर
जॉर्जेज सोरेल
एल्फ्रेडो रोक्को
रूडोल्फ जेलेन

4 "आंग्ला-भाषी जगल में राजनीतिक सिद्धांत मर चुका है, साम्यवादी देशों में वह बंदी हैं और अन्यत्र मर रहा है।" यह कथन किसका है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-55,प्रश्न-29

अल्फ्रेड कॉबेन
डेविड ईस्टन
सी.एल. वेपर
राबर्ट डहल

5 "मार्क्सवादी केवल वही है जो वर्ग संघर्ष की मान्यता को मजदूर वर्ग की तानाशाही की मान्यता तक ले जाती है।" यह किसने कहा था? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-55,प्रश्न-30

लेनिन
स्टॉलिन
काउत्सकी
बर्नेस्टीन

6 संप्रभुता में विधिवादी सिद्धांत का प्रमुख प्रवक्ता निम्नलिखित में से कौन था? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-27,प्रश्न-30

लॉक
रूसो
ऑस्टिन
बोदां

7 किसने इस नियम का प्रतिपादन किया है: "कर्मचारी एक-दूसरे के लिए कार्य उत्पन्न करते हैं"? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-72,प्रश्न-51

मैक्स वेबर
नॉरथियोट पार्किंसन
रैम्जे म्योर
पीटर ड्रकर

8 निम्नलिखित में से किस विचार पद्धति में कानून को स्वतंत्रता का विरोधी समझा जाता है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-86,प्रश्न-18

लोकतंत्रीय विचार पद्धति
शास्त्रीय उदारवादी विचार पद्धति
समाजवादी विचार पद्धति
समष्टिवादी विचार पद्धति

9 लिबर्टी शब्द लिया गया है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-86,प्रश्न-19

लाइबेल से
लिंगुआ से
लाइबर से
लिब्रा से

10 निम्न युग्मों में से कौन-सा युग्म गलत है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-96,प्रश्न-12

संसदात्मक शासन व्यवस्था-ब्रिटेन,जर्मनी
अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था-अमेरिका, ब्राजील, लैटिन अमेरिका के राज्य, दक्षिण अफ्रीका
संघात्मक शासन व्यवस्था- इंग्लैंड, जापान, चीन, फ्रांस
एकात्मक शासन व्यवस्था- ब्रिटेन, फ्रांस, चीन

11 दबाव समूहों का स्वभाव होता है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-108,प्रश्न-27

राजनीतिक दल के रूप में
न्यायपालिका के रूप में
समूह-अभिकरण के रूप में
अदृश्य सरकार के रूप में

12 भारत में 'एपलबी समिति' की स्थापना हुई थी, निम्नलिखित में सुधार करने के लिए- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-131,प्रश्न-17

कैबिनेट प्रणाली
केंद्र-राज्य संबंध
आंग्ल-भारतीय हेतु विशेष प्रावधान
भारतीय प्रशासन

13 परमाणु अप्रसार संधि पर अमेरिका और सोवियत संघ ने कब हस्ताक्षर किया था? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-115,प्रश्न-27

1971 के पूर्व
1971 के पश्चात
1975 के पश्चात
उपर्युक्त सभी असत्य है