"प्रयोग:दीपिका3": अवतरणों में अंतर
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-उपर्युक्त सभी असत्य है | -उपर्युक्त सभी असत्य है | ||
||परमाणु अप्रसार संधि पर [[अमेरिका]] और सोवियत संघ ने 1971 के पूर्व वर्ष 1968 में हस्ताक्षर किए थे। | ||परमाणु अप्रसार संधि पर [[अमेरिका]] और सोवियत संघ ने 1971 के पूर्व वर्ष 1968 में हस्ताक्षर किए थे। | ||
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{इनमें से किसका नाम वैज्ञानिक प्रबंधन सिद्धांत के साथ जुड़ा हुआ है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-136,प्रश्न-48 | |||
|type="()"} | |||
-राइमन ग्वोलो | |||
-विशप साइक्लो | |||
-हैंड्रिक गेलर | |||
+फ्रेडरिक टेलर | |||
||फ्रेडरिक टेलर का नाम वैज्ञानिक प्रबंध सिद्धांत के साथ जुड़ा हुआ है। | |||
{'लेनिन का मार्क्सवाद मार्क्स के सिद्धांतों की दृढ़ता में एवं कट्टरतम स्वीकृति होने के साथ परिस्थितियों के अनुसार इन सिद्धांतों की स्वतंत्रतम बदलती हुई व्यवस्था है।" यह कथन किसका है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-55,प्रश्न-31 | |||
|type="()"} | |||
-प्रो. लास्की | |||
+जार्ज एच. सेबाइन | |||
-कोकर | |||
-कैटलीन | |||
||जॉर्ज एच. सेबाइस ने अपनी पुस्तक "द हिस्ट्री ऑफ़ पॉलिटिकल थियरी" (1973) में लिखा है कि "लेनिन का मार्क्सवाद मार्क्स के सिद्धांतों की दृढ़तम एवं कट्टरतम स्वीकृत होने के साथ परिस्थितियों के अनुसार इन सिद्धांतों की स्वतंत्रतम बदलती हुई व्यवस्था है।" | |||
{के.सी. व्हीयर द्वारा प्रतिपादित 'व्यवस्थापिकाओं के ह्नास' का आर्थ है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-73,प्रश्न-52 | |||
|type="()"} | |||
-उनकी कानूनी शक्तियों में कमी | |||
-उनकी प्रतिष्ठा तथा स्थिति में अवनति | |||
+दूसरी संस्थाओं की बढ़ती हुई शक्तियों की तुलना में उनकी स्थिति में उतार | |||
-सरकार के बढ़ते हुई कार्यों को करने में उनकी अक्षमता | |||
||के.सी. व्हीयर ने अपनी पुस्तक 'लेजिस्लेचर्स' में एक अध्याय 'व्यवस्थापिकाओं का पतन' जोड़ा है। इनके अनुसार, व्यवस्थापिकाओं के ह्रास का अर्थ है कि दूसरी संस्थाओं की बढ़ती हुई शक्तियों की तुलना में उनकी स्थिति में उतार हुआ है। | |||
{'उदारवाद' शब्द की उत्पत्ति 'लिबर' शब्द से है जो लिया गया है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-86,प्रश्न-20 | |||
|type="()"} | |||
-फ्रेंच भाषा से | |||
+लैटिन भाषा से | |||
-ग्रीक भाषा से | |||
-जर्मन भाषा से | |||
||'कुबर्टी' शब्द लैटिन भाषा के 'लाइबर' शब्द से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है 'बंधनों का अभाव'। किंतु स्वतंत्रता शब्द की व्युत्पत्ति के आधार पर प्रचलित इस अर्थ को स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ नहीं माना जा सकता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहते हुए मनुष्य असीमित स्वतंत्रता का उपभोग नहीं कर सकता। उसे सामाजिक नियमों की मर्यादा के अंतर्गत रहना होता है। अत: स्वतंत्रता मानवीय प्रकृति और सामाजिक जीवन के इन दो विरोधी तत्वों (बंधनों का अभाव और नियमों का पालन) में सामंजस्य का नाम है। | |||
{किसकी देख-रेख में जिले में पुलिस बल शांति और व्यवस्था कायम करता है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-131,प्रश्न-18 | |||
|type="()"} | |||
+जिलाधीश | |||
-पुलिस कप्तान | |||
-राज्य के गृह मंत्री | |||
-मुख्यमंत्री | |||
||जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखना जिलाधीश का कर्तव्य होता है। जिलाधीश के अन्य संबंधित कर्त्तव्य हैं- पुलिस और जेलों का पर्यवेक्षण, अधीनस्थ कार्यकारी मजिस्ट्रेट का पद का पर्यवेडण, दंड प्रक्रिया संहिता की निवारक खंड के अंतर्गत मामलों की सुनवाई, आदि। | |||
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12:46, 24 फ़रवरी 2018 का अवतरण
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