सत्तू  

सत्तू का घोल

सत्तू एक प्रकार का व्यंजन है जो चना, मकई या जौ वगैरह को बालू में भूनने के बाद उसको आटा-चक्की में पीसकर बनाया जाता है। उत्तर भारत (मुख्यत: बिहार और उत्तर प्रदेश) में यह काफ़ी लोकप्रिय है और कई रूपों में प्रयुक्त होता है। सामान्यतया यह चूर्ण के रूप में रहता है जिसे पानी में घोलकर या अन्य रूपों में खाया अथवा पीया जाता है। सत्तू के सूखे (चूर्ण) तथा घोल दोनों ही रूप को सत्तू कहते हैं। ग़्रीष्मकाल शुरू होते ही भारत में अधिकांश लोग सत्तू का प्रयोग करते हैं। ख़ासकर दूर-दराज के छोटे क्षेत्रों व कस्बों में यह भोजन का काम करता है। चने वाले सत्तू में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है और मकई वाले सत्तू में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। इन दोनों प्रकार के सत्तू का अकेले-अकेले या दोनों को किसी भी अनुपात में मिलाकर सेवन किया जा सकता है।

अन्य नाम

भारत की लगभग सभी आर्य भाषाओं में सत्तू शब्द का प्रयोग मिलता है, जैसे पाली प्राकृत में सत्तू, प्राकृत और भोजपुरी में सतुआ, कश्मीरी में सोतु, कुमाँऊनी में सातु-सत्तू, पंजाबी में सत्तू, सिन्धी में सांतू, गुजराती में सातु तथा हिन्दी में सत्तू एवं सतुआ। यह सत्तू नाम से बना बनाया बाज़ार में मिलता है। गुड़ का सत्तू व शक्कर का सत्तू दोनों अपने स्वाद के अनुसार लोगों में प्रसिद्ध हैं। सत्तू एक ऐसा आहार है जो बनाने, खाने में सरल है, सस्ता है, शरीर व स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और निरापद भी है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 सत्तू : स्वादिष्ट और पौष्टिक आहार (हिंदी) वेबदुनिया हिंदी। अभिगमन तिथि: 13 अप्रॅल, 2013।
  2. सत्तू-प्रेम या सत्तू-आसक्ति… (हिंदी) शब्दों का सफ़र। अभिगमन तिथि: 13 अप्रॅल, 2013।

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