रक्षा मंत्रालय  

रक्षा मंत्रालय
भारत का कुलचिह्न
विवरण रक्षा मंत्रालय का प्रमुख कार्य है रक्षा और सुरक्षा संबंधी मामलों पर नीति निर्देश बनाना और उनके कार्यान्वयन के लिए उन्हें सुरक्षा बलों के मुख्यालयों, अंतर सेना संगठनों, रक्षा उत्पाद प्रतिष्ठानों और अनुसंधान व विकास संगठनों तक पहुंचाना।
न्याय सीमा भारत सरकार
मुख्यालय रायसीना हिल, नई दिल्ली
वर्तमान रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर
भारतीय सशस्त्र बल भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, भारतीय थलसेना
संबंधित लेख वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय
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रक्षा मंत्रालय (अंग्रेज़ी: Ministry of Defence) भारत का प्रमुख मंत्रालय है जिसका प्रमुख कार्य है रक्षा और सुरक्षा संबंधी मामलों पर नीति निर्देश बनाना और उनके कार्यान्वयन के लिए उन्हें सुरक्षा बलों के मुख्यालयों, अंतर सेना संगठनों, रक्षा उत्पाद प्रतिष्ठानों और अनुसंधान व विकास संगठनों तक पहुंचाना। भारत के पड़ोसी देश विभिन्न राजनीतिक अनुभवों, प्रयोगों और परिस्थितियों के बीच परिवर्तन के दौर से गुजरते हैं। भारत सरकार देश के सीमा क्षेत्र की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी जिम्मेदार है। भारतीय सशस्त्र सेनाओं की कमान राष्ट्रपति के पास है और देश की रक्षा की जिम्मेदारी मंत्रिमंडल के पास है। यह कार्य रक्षा मंत्रालय द्वारा होता है जो देश में रक्षा के संदर्भ में नीतिगत ढांचे और सशस्त्र बलों को जिम्मेदारियां प्रदान करता है। रक्षा मंत्री रक्षा मंत्रालय का प्रमुख होता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी की सर्वोच्च सरकार में वर्ष 1776 में एक सैन्य विभाग बनाया गया था जिसका मुख्य कार्य ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा जारी किए सेना से संबंधित आदेशों की पूर्णतया जांच करना तथा उन्हें रिकार्ड करना था। सैन्य विभाग ने शुरू में लोक विभाग की एक शाखा के रूप में काम किया और सेना कार्मिकों की सूची बनाए रखने का काम किया। 1883 के चार्टर अधिनियम के अनुसार ईस्ट इंडिया कंपनी की सरकार के सचिवालय को एक सैन्य विभाग सहित चार विभागों में पुनर्गठित किया गया था जिनमें से प्रत्येक विभाग का प्रमुख सरकार का एक सचिव था । बंगाल, बम्बई और मद्रास प्रेसीडेंसियों में सेना ने अप्रैल, 1895 तक संबंधित प्रेसीडेंसी की सेना के रूप में काम किया और तब से उन्हें एक एकल भारतीय सेना के रूप में एकीकृत कर दिया गया था। प्रशासनिक सुविधा के लिए इसे चार कमानों अर्थात पंजाब (उत्तर-पश्चिम फ्रंटियर सहित), बंगाल, मद्रास (बर्मा सहित) तथा बम्बई (सिंध, क्वेटा तथा अदन सहित) में विभाजित किया गया था। भारतीय सेना के ऊपर सर्वोच्च प्राधिकार सम्राट के नियंत्रण के अध्यधीन, जिसका प्रयोग भारत के लिए सेक्रेटरी ऑफ स्टेट द्वारा किया जाता था, गर्वनर जनरल-इन-काउंसिल के पास निहित था। परिषद में दो सदस्य सैन्य कार्यों के लिए जिम्मेवार थे, जिनमें से एक सैन्य सदस्य था, जो सभी प्रशासनिक तथा वित्तीय मामले देखता था जबकि दूसरा कमांडर-इन-चीफ था जो सभी संक्रियात्मक मामलों के लिए जिम्मेवार था। सैन्य विभाग मार्च 1906 में समाप्त कर दिया गया और इसे दो विभागों द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया था अर्थात, सेना विभाग और सैन्य आपूर्ति विभाग। अप्रैल, 1909 में सैन्य आपूर्ति विभाग समाप्त कर दिया गया था और इसके कार्यों का प्रभार सेना विभाग ने ले लिया था। सेना विभाग को जनवरी 1938 में रक्षा विभाग के रूप में पदनामित कर दिया गया था। अगस्त 1947 में रक्षा विभाग एक केबिनेट मंत्री के अधीन रक्षा मंत्रालय बन गया।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. मंत्रालय के विषय में (हिन्दी) आधिकारिक वेबसाइट। अभिगमन तिथि: 18 मार्च, 2015।

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