मीर क़ासिम  

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मीर क़ासिम
मीर क़ासिम
पूरा नाम मीर मुहम्मद क़ासिम अली ख़ान
मृत्यु तिथि 8 मई, 1777
मृत्यु स्थान दिल्ली
पिता/माता मीर रज़ा ख़ान
उपाधि नवाब नाज़िम (बंगाल, बिहार, उड़ीसा)
शासन 1760 ई. से 1764 ई.
धार्मिक मान्यता इस्लाम
युद्ध बक्सर की लड़ाई
संबंधित लेख मीर ज़ाफ़र, ईस्ट इण्डिया कम्पनी
विशेष कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) के अनुचित हस्तक्षेप से अपने राज्य को दूर रखने के लिए मीर क़ासिम राजधानी मुर्शिदाबाद से उठाकर मुंगेर ले गया।
अन्य जानकारी मीर क़ासिम, मीर ज़ाफ़र से अधिक योग्य तथा दृढ़ व्यक्ति था। उसने मालगुज़ारी की वसूली के नियम अधिक कठोर बना दिए थे और राज्य की आय लगभग दूनी कर दी। उसने फ़ौज का भी बेहतर संगठन किया था।

मीर क़ासिम 1760 ई. से 1764 ई. तक बंगाल का नवाब रहा था। उसका पूरा नाम 'मीर मुहम्मद क़ासिम अली ख़ान' था। मीर क़ासिम को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी की सहायता से नवाब बनाया गया था। अंग्रेज़ों ने 1760 ई. में उसके ससुर मीर ज़ाफ़र को गद्दी से उतार दिया और उसे बंगाल का सूबेदार बना दिया। मीर क़ासिम ने नवाबी पाने के लिए कम्पनी को बर्दवान, मिदनापुर तथा चटगाँव के तीन ज़िले सौंप दिये, कलकत्ता कौंसिल को 20 लाख रुपया नक़द दिया और मीर ज़ाफ़र का सारा क़र्जा बेबाक़ (ऋणमुक्त) कर देने का वायदा किया।

योग्य व्यक्ति

मीर क़ासिम के पिता का नाम 'मीर रज़ा ख़ान' था। मीर ज़ाफ़र से अधिक योग्य तथा अधिक दृढ़ व्यक्ति था। उसने मालगुज़ारी की वसूली के नियम अधिक कठोर बना दिए और राज्य की आय लगभग दूनी कर दी। उसने फ़ौज का भी संगठन किया और कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) के अनुचित हस्तक्षेप से अपने को दूर रखने के लिए राजधानी मुर्शिदाबाद से उठाकर मुंगेर ले गया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

भट्टाचार्य, सच्चिदानन्द भारतीय इतिहास कोश, द्वितीय संस्करण-1989 (हिन्दी), भारत डिस्कवरी पुस्तकालय: उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, 365।

  1. दरिद्रता, निर्धनता, कंगाली, ग़रीबी

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