चार्ल्स कोरिया  

चार्ल्स कोरिया
चार्ल्स कोरिया
पूरा नाम चार्ल्स कोरिया
जन्म 1 सितम्बर, 1930
जन्म भूमि हैदराबाद राज्य (अब तेलंगाना राज्य)
मृत्यु 16 जून, 2015
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
कर्म भूमि भारत
विद्यालय मुंबई विश्वविद्यालय, मिशिगन युनिवर्सिटी और मेसाच्युसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
प्रसिद्धि वास्तुकार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी 'रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स' (रीबा) ने लंदन में भारतीय वास्तुकार चार्ल्स कोरिया की डिजाइनों और उनके अब तक के काम पर एक प्रदर्शनी आयोजित की थी। रीबा ने उस समय कोरिया को भारत के महानतम वास्तुकार का खिताब दिया था।

चार्ल्स कोरिया (अंग्रेज़ी: Charles Correa, जन्म- 1 सितम्बर, 1930, हैदराबाद; मृत्यु- 16 जून, 2015, मुम्बई) भारतीय वास्तुकार और शहरी नियोजक थे। आज़ादी के बाद भारत में आधुनिक वास्तुकला के निर्माण का श्रेय उन्हें दिया जाता है। शहरी ग़रीबों की ज़रूरतों और पारंपरिक तरीकों और सामग्रियों के इस्तेमाल के लिए उन्हें उनकी संवेदनशीलता के लिए जाना जाता है। पद्म पुरस्कारों से अलंकृत चार्ल्स कोरिया ने स्वतंत्रता के बाद भारत की वास्तुकला को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई और कई बेहद उत्कृष्ट संरचनाएं डिज़ाइन कीं। अहमदाबाद में 'महात्मा गांधी मेमोरियल' और मध्य प्रदेश में विधान भवन की उत्कृष्ट संरचनाएं उनके हुनर का ही नमूना हैं।

परिचय

चार्ल्स कोरिया का जन्म 1 सितम्बर सन 1930 को सिकंदराबाद, हैदराबाद राज्य (अब तेलंगाना राज्य) में हुआ था। उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन और प्रतिष्ठित मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से शिक्षा ग्रहण की। कोरिया ने भारत और विदेश के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाया। उन्होंने 1984 में मुंबई में 'शहरी डिजाइन अनुसंधान संस्थान' की स्थापना की थी। यह संस्थान पर्यावरण संरक्षण और शहरी समुदायों में सुधार के लिए समर्पित है।

जब चार्ल्स कोरिया भवन डिजाइन के क्षेत्र में अपने पैर जमा रहे थे, तब हर तरह की बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते भारत में सुंदर इमारतों से ज्यादा आम लोगों के लिए शहरों का विकास एक बड़ी चुनौती था। मुंबई विश्वविद्यालय से आर्किटेक्चर की पढ़ाई करने वाले इस युवा के मन पर नए-नए आज़ाद हुए देश के संघर्ष व उसके आम लोगों की चुनौतियों की छाप हमेशा रही। मिशिगन युनिवर्सिटी और मेसाच्युसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आगे की पढ़ाई करके लौटे चार्ल्स कोरिया जब 28 साल के थे, तब उन्हें अपने कॅरियर का पहला बड़ा प्रोजेक्ट मिला। उन्हें अहमदाबाद में गांधी स्मारक संग्रहालय का डिजाइन करना था। ट्यूब हाउस भी उन्होंने इसी दौर में बनाया। इन सालों में चार्ल्स कोरिया ने कई अकादमिक संस्थानों की इमारतों को भी डिजाइन किया।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 चार्ल्स कोरिया : ऐसा आर्किटेक्ट जिसके लिए इमारत की खूबसूरती इंसानों के साथ ही मुकम्मल होती थी (हिंदी) satyagrah.scroll.in। अभिगमन तिथि: 14 दिसम्बर, 2017।
  2. भारत के प्रसिद्ध वास्तुकार चार्ल्स कोरिया का निधन (हिंदी) khabar.ndtv.com। अभिगमन तिथि: 14 दिसम्बर, 2017।

बाहरी कड़ियाँ

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