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+यू.के. | +[[यू. के.|यू.के.]] | ||
||एकात्मक राज्य में सरकार की एक ही इकाई होती है जिसका क्षेत्राधिकार पूरा प्रदेश होता है। प्रदेश को छोटी-छोटी सरकारी इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है, जिन्हें सीमित शक्तियां प्राप्त होती हैं। ये शक्तियां उन्हें केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। अत: सरकारी विभागों के अपने क्षेत्रीय कार्यालय होते हैं जिनका एकमात्र लक्ष्य प्रशासनिक सुविधा प्राप्त करना होता है। नगर के कार्यों के निष्पादन के लिए स्थानीय संस्थाएं होती हैं और सरकारी निर्णयों को लागू करने हेतु संबंधित विभागों के क्षेत्रीय अभिकरण होते हैं। यू.के. की काउंटीज तथा फ्रांस के विभाग इस प्रकार की स्थानीय सरकार की प्रशासनिक इकाइयों के उदाहरण हैं। अत: यू.के. एक एकात्मक राज्य है। | ||एकात्मक राज्य में सरकार की एक ही इकाई होती है जिसका क्षेत्राधिकार पूरा प्रदेश होता है। [[प्रदेश]] को छोटी-छोटी सरकारी इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है, जिन्हें सीमित शक्तियां प्राप्त होती हैं। ये शक्तियां उन्हें [[केंद्र सरकार]] द्वारा प्रदान की जाती है। अत: सरकारी विभागों के अपने क्षेत्रीय कार्यालय होते हैं जिनका एकमात्र लक्ष्य प्रशासनिक सुविधा प्राप्त करना होता है। नगर के कार्यों के निष्पादन के लिए स्थानीय संस्थाएं होती हैं और सरकारी निर्णयों को लागू करने हेतु संबंधित विभागों के क्षेत्रीय अभिकरण होते हैं। यू.के. की काउंटीज तथा [[फ्रांस]] के विभाग इस प्रकार की स्थानीय सरकार की प्रशासनिक इकाइयों के उदाहरण हैं। अत: यू.के. एक एकात्मक राज्य है। | ||
{दबाव समूह के विषय में क्या सत्य नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-108,प्रश्न-26 | {दबाव समूह के विषय में क्या सत्य नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-108,प्रश्न-26 | ||
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||दबाव समूह अपने हितों की पूर्ति हेतु चुनाव नहीं लड़ते, बल्कि परोक्ष रूप से नीति-निर्माताओं को प्रभावित करते हैं। | ||दबाव समूह अपने हितों की पूर्ति हेतु चुनाव नहीं लड़ते, बल्कि परोक्ष रूप से नीति-निर्माताओं को प्रभावित करते हैं। | ||
{भारत में 'इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की स्थापना किस रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर हुई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-131,प्रश्न-16 | {[[भारत]] में 'इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की स्थापना किस रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर हुई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-131,प्रश्न-16 | ||
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-गोरेवाला रिपोर्ट | -गोरेवाला रिपोर्ट | ||
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+एपलबी रिपोर्ट | +एपलबी रिपोर्ट | ||
-आयंगर रिपोर्ट | -आयंगर रिपोर्ट | ||
||वर्ष 1953 में लोक प्रशासन के प्रबुद्ध अमेरिकी विद्वान डीन पाल एपलबी ने भारतीय लोक सेवा के संदर्भ में अपनी अनुशंसाएं भारत सरकार को सौंपी। उनकी | ||वर्ष 1953 में लोक प्रशासन के प्रबुद्ध अमेरिकी विद्वान डीन पाल एपलबी ने भारतीय लोक सेवा के संदर्भ में अपनी अनुशंसाएं [[भारत सरकार]] को सौंपी। उनकी अनुशंसा के अनुसार 1954 में [[नई दिल्ली]] में भारतीय लोक 'इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन' की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य भारत में लोक प्रशासन के विधिवत अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करना तथा सरकारी कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान करना है। | ||
{निम्नलिखित में से कौन तृतीय विश्व के सदस्य हैं? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-25 | {निम्नलिखित में से कौन तृतीय विश्व के सदस्य हैं? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-25 | ||
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-जापान, कनाडा, पूर्व सोवियत संघ | -[[जापान]], कनाडा, पूर्व सोवियत संघ | ||
-अमेरिका, जर्मनी, नीदरलैंड | -[[अमेरिका]], [[जर्मनी]], नीदरलैंड | ||
+भारत, नाइजीरिया, श्रीलंका | +[[भारत]], नाइजीरिया, [[श्रीलंका]] | ||
-भारत, जापान, कनाडा | -भारत, [[जापान]], कनाडा | ||
||'तीसरी दुनिया' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग फ्रांसीसी जनांकिकीयविद् मानवशास्त्री एवं इतिहासकार अल्फ्रेड सॉवी ने फ्रांसीसी पत्रिका फल 'आब्जर्वफीयूर' में अपने एक प्रकाशित लेख में 14 अगस्त, 1952 को किया। तीसरी दुनिया के देशों में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, ओशीनिया तथा एशिया क्षेत्र के देश आते हैं जो यूरोपीय देशों के उपनिवेश रह चुके हैं। इनमें तटस्थ तथा गुट निरपेक्षा देश शामिल हैं। पहली दुनिया के देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन तथा उनके गठबंधन देश तथा दूसरी दुनिया में सोवियत संघ, चीन तथा उनके गठबंधन देश शामिल हैं। तीसरी दुनिया के देशों में भारत, पाकिस्तान बांग्लादेश, श्रीलंका, नाइजीरिया इत्यादि शामिल हैं। | ||'तीसरी दुनिया' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग फ्रांसीसी जनांकिकीयविद् मानवशास्त्री एवं इतिहासकार अल्फ्रेड सॉवी ने फ्रांसीसी पत्रिका फल 'आब्जर्वफीयूर' में अपने एक प्रकाशित लेख में 14 अगस्त, 1952 को किया। तीसरी दुनिया के देशों में [[अफ्रीका]], लैटिन अमेरिका, ओशीनिया तथा एशिया क्षेत्र के देश आते हैं जो यूरोपीय देशों के उपनिवेश रह चुके हैं। इनमें तटस्थ तथा गुट निरपेक्षा देश शामिल हैं। पहली दुनिया के देशों में [[संयुक्त राज्य अमेरिका]], ब्रिटेन तथा उनके गठबंधन देश तथा दूसरी दुनिया में सोवियत संघ, चीन तथा उनके गठबंधन देश शामिल हैं। तीसरी दुनिया के देशों में भारत, पाकिस्तान बांग्लादेश, श्रीलंका, नाइजीरिया इत्यादि शामिल हैं। | ||
{परमाणु अप्रसार संधि अस्तित्व में आई: (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-26 | {परमाणु अप्रसार संधि अस्तित्व में आई: (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-26 | ||
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-1972 में | -1972 में | ||
||1 जुलाई, 1968 को अमेरिका एवं अन्य 61 देशों ने परमाणु अप्रसार संधि (Non-Proliferation Treaty) पर हस्ताक्षर किए। परंतु यह संधि वास्तव में 5 मार्च, 1970 को प्रभावी हुई। | ||1 जुलाई, 1968 को अमेरिका एवं अन्य 61 देशों ने परमाणु अप्रसार संधि (Non-Proliferation Treaty) पर हस्ताक्षर किए। परंतु यह संधि वास्तव में 5 मार्च, 1970 को प्रभावी हुई। | ||
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12:35, 15 फ़रवरी 2018 का अवतरण
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