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{उत्तर-व्यवहारवाद की श्रेष्ठ व्याख्या किसने की? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-35, प्रश्न-29
|type="()"}
-हरोल्ड लॉस्की ने
-लॉस्वेल ने
-चार्ल्स बेल ने
+डेविड इस्टन ने
||वीसवीं शताब्दी के अंत में डेविड ईस्टन ने व्यवहारवाद की तत्कालीन प्रवृत्तियों पर प्रबल प्रहार किया और 'उत्तर-व्यवहारवादी क्रांति' का शंखनाद किया।
उत्तर व्यवहारवाद की दो मुख्य मांगें थी- 1.प्रासंगिकता (Relevance) 2. कार्रवाई (Action)।


{निम्नलिखित में से कौन संप्रभुता की विशेषता नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-25,प्रश्न-18
{'विधि के शासन' वाक्यांश में प्रयुक्त 'विधि' पद का अभिप्राय है: (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-69,प्रश्न-32
|type="()"}
|type="()"}
-सर्वव्यापकता
+मानव स्थापित विधि
-स्थायित्व
-प्राकृतिक विधि
-अविभाज्यता
-स्थापित के अधिसमय
+जनसंख्या
-सामान्य विधि
||संप्रभुता के कानूनी सिद्धांत के अंतर्गत संप्रभुता की निम्न विशेषताएं निर्धारित की गई हैं- 1.पूर्णता (Absoluteness) 2.सार्वभौमता (Universality) 3.अदेयता (Inalienability) 4.स्थायित्व ( Permanence) 5.अविभाज्यता (Indivisibility)।
||'विधि के शासन' वाक्यांश में प्रयुक्त 'विधि' पद का अभिप्राय 'मानव स्थापित विधि' से है। इस सिद्धांतानुसार, प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसकी अवस्था या पद जो कुछ भी हो, देश की सामान्य विधियों के अधीन और साधारण न्यायालयों की अधिकारिता के भीतर है।


{व्यवहारवाद प्रेरणा लेता है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-35, प्रश्न-28
{नाटो (NATO) संधि पर किस वर्ष में हस्ताक्षर हुए थे? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-20
|type="()"}
|type="()"}
-फॉसीवाद से
-सन् 1948 में
+प्रत्यक्षवाद से
+सन् 1949 में
-उपयोगितावाद से
-सन् 1950 में
-आदर्शवाद से
-सन् 1951 में
||व्यवहारवाद प्रत्यक्षवाद से प्रेरणा लेता है। तार्किक व अनुभव जन्य प्रत्यक्षवाद से किसी व्यक्ति का व्यवहार निर्धारित होता है। प्रत्यक्षवाद वह सिद्धांत है जो केवल वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method) से प्राप्त ज्ञान को उपयुक्त (Relevant), विश्वस्त (Relible) और प्रामाणित (Valid) मानता है। प्रत्यक्षवाद के समर्थक यह मांग करते हैं कि सामाजिक विज्ञानों की सामग्री को प्रामाणित रूप देने के लिए उसे प्राकृतिक विज्ञानों की पद्धति के अनुरूप ढालना ज़रूरी है, इसलिए व्यवहारवादी तार्किक प्रत्यक्षवाद से विशेष रूप से प्रमाणित थे।
||नाटो (NATO- North Atlantic Treaty Organization) एक सैन्य संगठन है, जिसकी स्थापना [[4 अप्रैल]], [[1949]] को उत्तर अटलांटिक संघि पर हस्ताक्षर के साथ हुई। नाटो का मुख्यालय ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में है। इस संगठन के अंतर्गत सामूहिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से सदस्य राज्य बाहरी हमले की स्थिति में सहयोग के लिए सहमत होंगे। वर्तमान में 28 राज्य इसके सदस्य सदस्य हैं।


{फॉसीवाद विश्वास करता है कि- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-43,प्रश्न-20
{[[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की स्थापना कब हुई थी? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-134,प्रश्न-23
|type="()"}
|type="()"}
+राज्य दल से श्रेष्ठ है
-24 जनवरी, 1943 को
-दल राज्य से श्रेष्ठ है
-24 अगस्त, 1945 को
-राज्य और दल दोनों एक-दूसरे से अलग हैं
+24 अगस्त, 1949 को
-राज्य और दल एक ही हैं
-4 अक्टूबर, 1945 को
||फॉसीवाद के अनुसार राज्य दल से श्रेष्ठ है। फॉसीवाद शब्द का प्रयोग उस सामाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक व्यवस्था के रूप का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो मुसोलिनी के नेतृत्व में 1922 में [[इटली]] में स्थापित हुई।
||[[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की स्थापना 24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र अधिकार-पत्र पर 50 देशों के हस्ताक्षर होने के साथ हुई। इसकी संरचना में सुरक्षा परिषद वाले सबसे शक्तिशाली देश ([[संयुक्त राज्य अमेरिका]], [[फ्रांस]], [[रूस]] और [[ब्रिटेन]]) द्वितीय विश्व युद्ध में बहुत अहम देश थे। वर्तमान में 193 देश उसके सदस्य हैं इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में हैं।


{मांतेस्क्यू ने किस संस्था की व्याख्या करने में त्रुटि की? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-69,प्रश्न-31
{ऐसा कौन-सा देश है जहां 'लूट पद्धति' के आधार पर लोक सेवा में भर्ती का लंबा इतिहास रहा है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-135,प्रश्न-41
|type="()"}
|type="()"}
-फ्रांसीसी राजतंत्र की व्याख्या में
-[[भारत]]
-अमेरिकी राष्ट्रपति की व्याख्या में
+[[अमेरिका]]
-स्विस संसद की व्याख्या में
-[[फ्रांस]]
+ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था की व्याख्या में
-[[चीन]]
||मान्तेस्क्यू ने ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था की व्याख्या करने में त्रुटि की थी। मांतेस्क्यू का मानना था कि इंग्लैंड का संविधान 'शक्तियों के पृथक्करण' के सिद्धांत पर आधारित है जबकि शक्तियों का पृथक्करण [[इंग्लैंड]] के अलिखित संविधान की विशेषता नहीं है।
||[[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में नागरिक सेवा (सिविल सर्विसेज) की शुरुआत वर्ष 1871 में हुई। 19वीं सदी के शुरुआती दौर में उच्च सरकारी पदों पर नियुक्तियां राष्ट्रपति की इच्छा तथा आज्ञा से होती थीं तथा नियुक्त नौकरशाहों कि किसी भी समय सेवामुक्त कर दिया जाता था। नौकरशाही की इस लूट प्रणाली को राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य  से उपयोग किया गया। इसी समस्या के समाधनार्थ पेंडलेटन सिविल सेवा सुधार अधिनियम, 1883 तथा हैच अधिनियम, 1939 बना।


{उरुग्वे चर्चा के दौर का परिणाम क्या हुआ? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-113,प्रश्न-19
{'पॉलिटिक्स: हू गेट्स, व्हाट एंड हाउ?' इस पुस्तक के लेखक- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-10,प्रश्न-20
|type="()"}
|type="()"}
-एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग की स्थापना
-चार्ल्स मेरियम हैं
-एन.ए.एफ.टी.ए. की स्थापना
-जान बोल्टन हैं
-77वें समूह की स्थापना
+हेरोल्ड लॉस्वेल हैं
+विश्व व्यापार संगठन की स्थापना
-नेभन ग्लेजर हैं
||बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के 8वें एवं अंतिम चक्र का प्रारंभ [[दिसंबर]], 1986 में पुंटा-डेल-एस्टे, उरुग्वे में हुआ। अंतिम रूप से उरुग्वे समझौते पर [[अप्रैल]], 1994 में मराकेश (मोरक्को) में हस्ताक्षर किए गए। इसी समझौते पर [[1 जनवरी]], [[1995]] को विश्व व्यापार संगठन की स्थापना की गई।
||पॉलिटिक्स: हू गेट्स, व्हाट एंड हाउ? पुस्तक के लेखक हेरोल्ड लॉस्वेल हैं।


{निम्न में से किस देश में नौकरशाही की शुरुआत 'लूट प्रथा' के रूप में हुई? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-135,प्रश्न-40
{"राज्य एक संसार है जिसे आत्मा अपने लिए बनाती है।" यह कथन किसका है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-12,प्रश्न-45
|type="()"}
|type="()"}
-[[ब्रिटेन]]
-एम.पी. फॉलेट
+[[अमेरिका]]
+हीगल
-[[भारत]]
-प्लेटो
-[[फ्रांस]]
-उपर्युक्त में से कोई नहीं
||[[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में नागरिक सेवा (सिविल सर्विसेज) की शुरुआत वर्ष 1871 में हुई। 19वीं सदी के शुरुआती दौर में उच्च सरकारी पदों पर नियुक्तियां [[राष्ट्रपति]] की इच्छा तथा आज्ञा से होती थीं तथा नियुक्त नौकरशाहों को किसी भी समय सेवामुक्त कर दिया जाता था। नौकरशाही की इस लूट प्रणाली को राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य  से उपयोग किया गया। इसी समस्या के समाधनार्थ पेंडलेटन सिविल सेवा सुधार अधिनियम, 1883 तथा हैच अधिनियम, 1939 बना।
||राज्य की आदर्शवादी व्याख्या हीगल, प्लेटो, एम.पी. प्लेटो, एम.पी. फालेट, ग्रीन जैसे दार्शनिकों द्वारा की गई है। इनके अनुसार राज्य सर्वोच्च नैतिकता है। इसी संदर्भ में हीगल ने कहा कि "राज्य एक संसार है जिसे आत्मा अपने लिए बनाती है।" इसी संदर्भ में अपनी पुस्तक 'न्यू स्टेट' में एम.पी. फॉलेट ने लिखा है कि "मेरी आत्मा का निवास स्थान राज्य में है।"


{निम्न में से कौन-सा युग्म ग़लत है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-196,प्रश्न-23
{बहुलवाद ऑप्टिन के  संप्रभुता सिद्धांत का- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-25,प्रश्न-20
|type="()"}
|type="()"}
-फ्रांस-संवैधानिक परिषद
+विरोधी है
-स्विट्जरलैंड- लैंड्सजीमाइंड
-समर्थक है
-चीन- केंद्रीय सैन्य आयोग
-न तो विरोधी है और न समर्थक है
+अमेरिका- एक बार स्पीकर, सदैव स्पीकर
-उपर्युक्त में कोई नहीं
||बहुलवाद ऑस्टिन के संप्रभुता सिद्धांत का विरोधी है।
ऑस्टिन के संप्रभुता सिद्धांत के अनुसार, "यदि कोई निश्चित मानवीय सत्ता अपनी जैसी किसी अन्य सत्ता की आज्ञा मानने में अभ्यस्त न हो, बल्कि प्रस्तुत समाज के लोग उसकी आज्ञा मानने में अभ्यस्त हों, तो इस निश्चित मानवीय सत्ता को उस समाज में 'प्रभु सत्ताधारी' कहेंगे और उस समाज को राजनीतिक और स्वाधीन समाज कहा जायेगा।" ऑस्टिन का प्रभुसत्ता संबंधी उपर्युक्त मत प्रभुसत्ता के एकलवादी सिद्धांत की स्थापना करता है।
उन्नीसवीं शती में प्रबुसत्ता के बहुलवादी सिद्धांत का उदय हुआ जिसने राज्य के एक तत्वीय (Monistic) स्वरूप और उसकी अखंड प्रभुसत्ता का खंडन करके उसे समाज की अन्य संस्थाओं के समकक्ष रखा और सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु राज्य के साथ-साथ अन्य सामाजिक संस्थाओं के महत्त्व  पर बल दिया।


||[[फ्रांस]] में संवैधानिक परिषद को सर्वोच्च संवैधानिक अधिकारिता प्राप्त है। स्विट्जरलैंड में लैंड्सजीमाइंड (कैंटोनल असेंबली) प्रत्यक्ष लोकतंत्र का एक प्राचीनतम प्रकार है। केंद्रीय सैन्य आयोग का गठन 18 जून, 1983 को [[चीन]] में किया गया। [[अमेरिका]] में स्पीकर का चुनाव बहुमत द्वारा होता है, एक बार स्पीकर, सदैव स्पीकर नहीं होता है।
{अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-52, प्रश्न-22
|type="()"}
-रूसो
+मार्क्स
-लास्की
-मिल
||अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत का प्रतिपादन राजनीतिक क्षेत्र में कार्य मार्क्स द्वारा किया गया। 'अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत' (Theory of Surplum Value) मूलत: रिकार्डो के 'मूल्य का श्रम सिद्धांत' (Labour Theory of value) से प्रभावित है। मार्क्स का अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत रिकार्डो के सिद्धांत का ही व्यापक रूप है। इसलिए रिकार्डो को अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत का जनक माना जाता है। मार्क्स के अनुसार, "अतिरिक्त मूल्य उन दो मूल्यों का अंतर है जिसे एक मजदूर पैदा करता है और जो वह वास्तव में पाता है।"


{'इंट्रोडक्शन टू दि स्टडी ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन' पुस्तक के लेखक हैं- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-203,प्रश्न-19
{इनमें से आधुनिक उदारवादी राज्य की कौन-सी विशेषता नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-38, प्रश्न-12
|type="()"}
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-आर.आर. माहेश्वरी
-स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव
-ए.पी. शर्मा
-जनता को मूल अधिकार
+एल.डी. व्हाइट
-एक से अधिक राजनीतिक दल
-वुड्रो विल्सन
+राज्य द्वारा आर्थिक नियोजन
||'इंट्रोडक्शन टू दि स्टडी ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन' पुस्तक के लेखक लेनॉर्ड डी. व्हाइट हैं। यह पुस्तक उनके मृत्यु वर्ष 1958 में प्रकाशित हुई। यह पुस्तक उनके सहयोगी जीन श्निडर (Jean schneider) द्वारा प्रकाशित की गई।
||'राज्य द्वारा आर्थिक नियोजन' समाजवादी राज्य की विशेषता है। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, जनता को मूल अधिकार, कर से अधिक राजनीतिक दल आदि आधुनिक उदारवादी राज्य की विशेषता है। इसके अतिरिक्त आधुनिक उदारवादी राज्य की विशेषताएं निम्नलिखित हैं-1.वैयक्तिक अस्तित्व को पहचान 2.वैयक्तिक तार्किकता में विश्वास 3.स्वतंत्रता को प्रमुखता 4.राज्य साधन तथा व्यक्ति साध्य 5.संवैधानिक एवं सीमित सरकार 6.लोकतंत्र को समर्थन 7.सेकुलरिज़्म में विश्वास 8,बहुलवादी समाज।


{"संकल्प न कि शक्ति राज्य का आधार है" किसने कहा था? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-12,प्रश्न-44
{निम्ननिखित में किन दो के राजनीतिक दर्शन में यह मत व्यक्त किया गया है कि समितियां राज्य-संप्रभुता के लिए हानिकारक हैं? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-25,प्रश्न-21
|type="()"}
|type="()"}
-[[प्लेटो]]
+ग्रीन
-हॉब्स
-हॉब्स
-मैकियावेली
-रूसो
||राज्य का आधार व्यक्तियों की सामाजिक और जन-कल्याणकारी इच्छा है। ग्रीन के अनुसार, "राज्य शक्ति नहीं, वरन् मानवीय इच्छा पर आधारित होता है"। व्यक्ति राज्य की आज्ञाओं का पालन स्वयं अथवा भय के कारण नहीं वरन् अपनी स्वाभाविक प्रवृति के कारण करते हैं।
+उपर्युक्त दोनों
-उपर्युक्त में से कोई नहीं
||हॉब्स और रूसो के राजनीतिक दर्शन में यह मत व्यक्त किया गया है कि समितियां राज्य-संप्रभुता के लिए हानिकारक हैं।
 
{'परंपरागत राजनीति विज्ञान' का निम्न में से कौन लक्षण नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-71,प्रश्न-44
|type="()"}
-अमूर्त स्वरूप
-काल्पनिकता
-दार्शनिकता  पर बल
+तथ्यों के अध्ययन पर बल
||परंपरागत राजनीति विज्ञान तथ्यों के अध्ययन पर बल नहीं देता है बल्कि व्यवहारवाद नई पद्धतियों, नई तकनीकों, नए तथ्यों और एक व्यवस्थित सिद्धांत के विकास के अध्ययन पर बल देता है, द्वितीय महायुद्ध के पश्चात, परंपरागत राजनीति विज्ञान के विरोध में एक व्यापक क्रांति हुई, इसे 'व्यवहारवाद' का नाम दिया गया। व्यवहारवाद की आधारभूत मान्यता यह है कि प्राकृतिक विज्ञानों और समाज विज्ञानों के बीच एक गुणात्मक निरंतरता है।
 
{जॉन स्टुअर्ट मिल ने स्वतंत्रता के संदर्भ में सभी मानवीय कार्यों का विभायन किस प्रकार किया है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-84,प्रश्न-11
|type="()"}
+स्वसंबंधित एवं परसंबंधित
-प्रभावात्मक एवं निष्प्रभावात्मक
-धार्मिक एवं नास्तिक
-उपर्युक्त में कोई नहीं
||जॉन स्टुअर्ट मिल ने स्वतंत्रता के संदर्भ में सभी मानवीय कार्यों को दो श्रेणियों स्वसंबंधित एवं परसंबंधित कार्यों में विभाजित किया मिल का मानना है कि स्वयं से संबंधित कार्यों पर कोई भी नियंत्रण नहीं होना चाहिए परंतु परसंबंधित कार्य, जो दूसरों को हानि तथा दु:ख पहुंचाते है, उन पर नियंत्रण होना चाहिए।


{कौन-सा सिद्धांत एकतत्त्ववादी संप्रभुता विरोधी है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-25,प्रश्न-19
{अध्यक्षात्मक व्यवस्था में कैबिनट के सदस्य जिम्मेदार होते हैं- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-94,प्रश्न-3
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-समाजवाद
+राष्ट्रपति के प्रति
+बहुलवाद
-व्यक्तिगत रूप से विधायिका के प्रति
-व्यक्तिवाद
-सामूहिक रूप से विधायिका के प्रति
-उदारवाद
-मतदाताओं के प्रति
||प्रभुसत्ता के एकतत्त्ववादी या एकलवादी सिद्धांत के अनुसार, प्रभुसत्ता राज्य का सारभूत और अनिवार्य लक्षण है। इसके बिना कोई समाज राज्य का रूप धारण नहीं कर सकता, जबकि बहुलवादी (Pluralists) विचारधारा के अनुसार राज्य की रचना  हेतु प्रभुसत्ता अनिवार्य नहीं है।
||अध्यक्षात्मक प्रणाली में कैबिनेट के सदस्य राष्ट्रपति के प्रति जिम्मेदार होते हैं। राष्ट्रपति अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों को नियुक्त करता है और उन्हें जब चाहे परच्युत करता है।


{भारत में राजनीतिक शक्ति का मुख्य स्त्रोत है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-107,प्रश्न-21
|type="()"}
+जनता
-संविधान
-संसद
-संसद एवं राज्य-विधान सभा
||भारत में राजनीतिक शक्ति का मुख्य स्त्रोत मतदाता या जनता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुसार, "उद्देशिका स्पष्ट करती है कि भारतीय संविधान का आधार जनता है एवं इसमें निहित प्राधिकार और प्रभुसत्ता सब जनता से प्राप्त हुई हैं"।


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12:32, 23 जनवरी 2018 का अवतरण

1 उत्तर-व्यवहारवाद की श्रेष्ठ व्याख्या किसने की? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-35, प्रश्न-29

हरोल्ड लॉस्की ने
लॉस्वेल ने
चार्ल्स बेल ने
डेविड इस्टन ने

2 'विधि के शासन' वाक्यांश में प्रयुक्त 'विधि' पद का अभिप्राय है: (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-69,प्रश्न-32

मानव स्थापित विधि
प्राकृतिक विधि
स्थापित के अधिसमय
सामान्य विधि

3 नाटो (NATO) संधि पर किस वर्ष में हस्ताक्षर हुए थे? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-20

सन् 1948 में
सन् 1949 में
सन् 1950 में
सन् 1951 में

4 संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना कब हुई थी? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-134,प्रश्न-23

24 जनवरी, 1943 को
24 अगस्त, 1945 को
24 अगस्त, 1949 को
4 अक्टूबर, 1945 को

5 ऐसा कौन-सा देश है जहां 'लूट पद्धति' के आधार पर लोक सेवा में भर्ती का लंबा इतिहास रहा है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-135,प्रश्न-41

भारत
अमेरिका
फ्रांस
चीन

6 'पॉलिटिक्स: हू गेट्स, व्हाट एंड हाउ?' इस पुस्तक के लेखक- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-10,प्रश्न-20

चार्ल्स मेरियम हैं
जान बोल्टन हैं
हेरोल्ड लॉस्वेल हैं
नेभन ग्लेजर हैं

7 "राज्य एक संसार है जिसे आत्मा अपने लिए बनाती है।" यह कथन किसका है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-12,प्रश्न-45

एम.पी. फॉलेट
हीगल
प्लेटो
उपर्युक्त में से कोई नहीं

8 बहुलवाद ऑप्टिन के संप्रभुता सिद्धांत का- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-25,प्रश्न-20

विरोधी है
समर्थक है
न तो विरोधी है और न समर्थक है
उपर्युक्त में कोई नहीं

9 अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-52, प्रश्न-22

रूसो
मार्क्स
लास्की
मिल

10 इनमें से आधुनिक उदारवादी राज्य की कौन-सी विशेषता नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-38, प्रश्न-12

स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव
जनता को मूल अधिकार
एक से अधिक राजनीतिक दल
राज्य द्वारा आर्थिक नियोजन

11 निम्ननिखित में किन दो के राजनीतिक दर्शन में यह मत व्यक्त किया गया है कि समितियां राज्य-संप्रभुता के लिए हानिकारक हैं? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-25,प्रश्न-21

हॉब्स
रूसो
उपर्युक्त दोनों
उपर्युक्त में से कोई नहीं

12 'परंपरागत राजनीति विज्ञान' का निम्न में से कौन लक्षण नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-71,प्रश्न-44

अमूर्त स्वरूप
काल्पनिकता
दार्शनिकता पर बल
तथ्यों के अध्ययन पर बल

13 जॉन स्टुअर्ट मिल ने स्वतंत्रता के संदर्भ में सभी मानवीय कार्यों का विभायन किस प्रकार किया है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-84,प्रश्न-11

स्वसंबंधित एवं परसंबंधित
प्रभावात्मक एवं निष्प्रभावात्मक
धार्मिक एवं नास्तिक
उपर्युक्त में कोई नहीं

14 अध्यक्षात्मक व्यवस्था में कैबिनट के सदस्य जिम्मेदार होते हैं- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-94,प्रश्न-3

राष्ट्रपति के प्रति
व्यक्तिगत रूप से विधायिका के प्रति
सामूहिक रूप से विधायिका के प्रति
मतदाताओं के प्रति

15 भारत में राजनीतिक शक्ति का मुख्य स्त्रोत है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-107,प्रश्न-21

जनता
संविधान
संसद
संसद एवं राज्य-विधान सभा