थंग-का  

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थंग-का
थंग-का चित्रकला
विवरण 'थंग-का' तिब्बत की एक प्रकार की प्रसिद्ध चित्रकला है। इस चित्रकला में तिब्बत के प्राचीन ग्रंथों में लिखे नियमों के अनुसार चित्रों को बनाया जाता है।
अन्य नाम 'थांका'
सम्बंधित धर्म तिब्बती बौद्ध धर्म
प्रचलन समय लगभग 10वीं सदी
महत्त्व 'महायान' और 'बज्रयान' बौद्ध धर्म मै थांका का बहुत बड़ा स्थान है। इस चित्रकला के बिना कोई भी 'गुम्बा' या अन्य धार्मिक स्थल अधूरा होता है।
संबंधित लेख तिब्बती बौद्ध धर्म, तिब्बत का पठार
अन्य जानकारी आमतौर पर थांका आयताकार होते हैं, हालांकि पहले ये चौकोर होते थे। एक सांचे पर मलमल या लिनन के पकड़े को कसकर उस पर पानी में बुझे चूने और जानवर से प्राप्त गोंद का मिश्रण लगाकर तैयार किया जाता है।

थंग-का एक प्रकार की तिब्बती चित्रकला है। सामान्यत: सूती कपड़े पर तिब्बती धार्मिक चित्र या रेखाचित्र को थंग-का कहते हैं। इसके निचले किनारे पर बाँस की छड़ी चिपकी होती है, जिसके सहारे इसे लपेटा जाता है। थंग-का एक तिब्बती शब्द है, जिसका अर्थ है- "लपेटी हुई कोई वस्तु"। इसे 'थांका' भी कहा जाता है। 'महायान' और 'बज्रयान' बौद्ध धर्म मै थांका का बहुत बड़ा स्थान है। इस चित्रकला के बिना कोई भी 'गुम्बा' या अन्य धार्मिक स्थल अधूरा होता है।

महत्त्व

'थांका' मूल रूप से ध्यान का साधन है, हालांकि इसे मंदिरों या पारिवारिक वेदिकाओं पर लटकाया और धार्मिक शोभा यात्रा में ले जाया जा सकता है या प्रवचनों की व्याख्या के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। थांका बनाना स्वच्छंद कला नहीं है, बल्कि ये धर्मशास्त्रीय नियमों के अनुसार चित्रित किए जाते हैं। इनकी विषय-वस्तु तिब्बती धर्म को समझने में बहुत सहायक है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 भारत ज्ञानकोश, खण्ड-2 |लेखक: इंदू रामचंदानी |प्रकाशक: एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 401 |
  2. आजकल उन्हें अक्सर मुद्रीत किया जाता है।
  3. विदेशों में बढ़ रही थांका पेटिंग्स की माँग (हिन्दी) दैनिक न्याय सेतु। अभिगमन तिथि: 26 दिसम्बर, 2014।

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