"प्रयोग:दीपिका3": अवतरणों में अंतर
भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
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{निम्ननिखित में किन दो के राजनीतिक दर्शन में यह मत व्यक्त किया गया है कि समितियां राज्य-संप्रभुता के लिए हानिकारक हैं? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-25,प्रश्न-21 | {निम्ननिखित में किन दो के राजनीतिक दर्शन में यह मत व्यक्त किया गया है कि समितियां राज्य-संप्रभुता के लिए हानिकारक हैं? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-25,प्रश्न-21 | ||
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+हॉब्स और रूसो | |||
-रूसो | -रूसो और वोदां | ||
-रूसो और ऑस्टिन | |||
- | -वोदां और ऑस्टिन | ||
||हॉब्स और रूसो के राजनीतिक दर्शन में यह मत व्यक्त किया गया है कि समितियां राज्य-संप्रभुता के लिए हानिकारक हैं। | ||हॉब्स और रूसो के राजनीतिक दर्शन में यह मत व्यक्त किया गया है कि समितियां राज्य-संप्रभुता के लिए हानिकारक हैं। | ||
{'परंपरागत राजनीति विज्ञान' का निम्न में से कौन लक्षण नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-71,प्रश्न-44 | {'परंपरागत राजनीति विज्ञान' का निम्न में से कौन-सा लक्षण नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-71,प्रश्न-44 | ||
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-अमूर्त स्वरूप | -अमूर्त स्वरूप | ||
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-धार्मिक एवं नास्तिक | -धार्मिक एवं नास्तिक | ||
-उपर्युक्त में कोई नहीं | -उपर्युक्त में कोई नहीं | ||
||जॉन स्टुअर्ट मिल ने स्वतंत्रता के संदर्भ में सभी मानवीय कार्यों को दो श्रेणियों स्वसंबंधित एवं परसंबंधित कार्यों में विभाजित | ||जॉन स्टुअर्ट मिल ने स्वतंत्रता के संदर्भ में सभी मानवीय कार्यों को दो श्रेणियों स्वसंबंधित एवं परसंबंधित कार्यों में विभाजित किया। मिल का मानना है कि स्वयं से संबंधित कार्यों पर कोई भी नियंत्रण नहीं होना चाहिए परंतु परसंबंधित कार्य, जो दूसरों को हानि तथा दु:ख पहुंचाते है, उन पर नियंत्रण होना चाहिए। | ||
{अध्यक्षात्मक व्यवस्था में कैबिनट के सदस्य जिम्मेदार होते हैं- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-94,प्रश्न-3 | {अध्यक्षात्मक व्यवस्था में कैबिनट के सदस्य जिम्मेदार होते हैं- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-94,प्रश्न-3 | ||
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-समाजवादी राज्य | -समाजवादी राज्य | ||
+कल्याणकारी राज्य | +कल्याणकारी राज्य | ||
||[[दिसंबर]], 1942 में इंग्लैंड में आधुनिक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा 'लॉर्ड विलियम बेवरिज प्रतिवेदन' के मध्य से प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट के माध्यम से पांच महाबुराइयों का अंत करने के लिए राज्य द्वारा कदम उठाने को कहा गया। ये पांच बुराइयां- कमी, बीमारी, अज्ञानता, | ||[[दिसंबर]], 1942 में इंग्लैंड में आधुनिक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा 'लॉर्ड विलियम बेवरिज प्रतिवेदन' के मध्य से प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट के माध्यम से पांच महाबुराइयों का अंत करने के लिए राज्य द्वारा कदम उठाने को कहा गया। ये पांच बुराइयां- कमी, बीमारी, अज्ञानता, गंदगी तथा आलस्य हैं। यह रिपोर्ट सरकार से नागरिकों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा, पर्याप्त शिक्षा, पर्याप्त आवास तथा पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने की मांग करती है। | ||
{'अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत' का प्रतिपादन किया था- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-54,प्रश्न-23 | {'अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत' का प्रतिपादन किसने किया था- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-54,प्रश्न-23 | ||
|type="()"} | |type="()"} | ||
-एडम स्मिथ | -एडम स्मिथ | ||
-मार्शल | -मार्शल | ||
-रॉबिंस | -रॉबिंस | ||
+[[कार्ल मार्क्स]] | +[[कार्ल मार्क्स]] | ||
||अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत का प्रतिपादन राजनीतिक क्षेत्र में | ||अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत का प्रतिपादन राजनीतिक क्षेत्र में कार्ल मार्क्स द्वारा किया गया। 'अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत' (Theory of Surplus Value) मूलत: रिकार्डो के 'मूल्य का श्रम सिद्धांत' (Labour Theory of value) से प्रभावित है। मार्क्स का अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत रिकार्डो के सिद्धांत का ही व्यापक रूप है। इसलिए रिकार्डो को अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत का जनक माना जाता है। मार्क्स के अनुसार, "अतिरिक्त मूल्य उन दो मूल्यों का अंतर है जिसे एक मजदूर पैदा करता है और जो वह वास्तव में पाता है।" | ||
{यदि [[संविधान]] परम संप्रभु है, तो तात्कालिक संप्रभुता आरोपित है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-26,प्रश्न-22 | {यदि [[संविधान]] परम संप्रभु है, तो तात्कालिक संप्रभुता आरोपित है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-26,प्रश्न-22 | ||
|type="()"} | |type="()"} | ||
-राष्ट्र में | |||
-निर्वाचक-गण में | -निर्वाचक-गण में | ||
+विधि निर्माता निकाय में | |||
-शासक दल में | -शासक दल में | ||
||यदि संविधान परम संप्रभु है तो तात्कालिक संप्रभुता संविधान का निर्माण करने वाले विधि निर्माता निकाय में आरोपित होगी। | ||यदि संविधान परम संप्रभु है तो तात्कालिक संप्रभुता संविधान का निर्माण करने वाले विधि निर्माता निकाय में आरोपित होगी। | ||
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-समानता का अर्थ है व्यवहार व पुरस्कारों की पहचान | -समानता का अर्थ है व्यवहार व पुरस्कारों की पहचान | ||
-समानता का अर्थ है समान आय | -समानता का अर्थ है समान आय | ||
-समानता का अर्थ है कि प्रकृति ने सब मनुष्यों को समान | -समानता का अर्थ है कि प्रकृति ने सब मनुष्यों को समान बनाया है | ||
+समानता का अर्थ है कि अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए सबको समान अवसर देने का प्रावधान हो | +समानता का अर्थ है कि अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए सबको समान अवसर देने का प्रावधान हो | ||
||समानता का अर्थ है कि 'अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए सबको समान अवसर देने का प्रावधान हो'। वास्तविक समानता उस स्थिति का नाम है जिसमें देश के संविधान और कानूनों द्वारा न केवल समानता की घोषणा की जाए, वरन व्यवहार में उन परिस्थितियों की भी व्यवस्था की जाए जिनके आधार पर नागरिकों के द्वारा वास्तव में समानता का उपभोग किया जा सके। यह कार्य राज्य द्वारा सभी व्यक्तियों को व्यक्तित्व के विकास के लिए समान अवसर दिए जाने से पूरा होता है। | ||समानता का अर्थ है कि 'अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए सबको समान अवसर देने का प्रावधान हो'। वास्तविक समानता उस स्थिति का नाम है जिसमें देश के संविधान और कानूनों द्वारा न केवल समानता की घोषणा की जाए, वरन व्यवहार में उन परिस्थितियों की भी व्यवस्था की जाए जिनके आधार पर नागरिकों के द्वारा वास्तव में समानता का उपभोग किया जा सके। यह कार्य राज्य द्वारा सभी व्यक्तियों को व्यक्तित्व के विकास के लिए समान अवसर दिए जाने से पूरा होता है। | ||
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-सर्वव्यापक प्रकृति | -सर्वव्यापक प्रकृति | ||
-संवैधानिक साधनों का आवश्यक रूप से प्रयोग | -संवैधानिक साधनों का आवश्यक रूप से प्रयोग | ||
||दबाव समूह की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह राजनीति एवं प्रशासन में | ||दबाव समूह की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह राजनीति एवं प्रशासन में परोछ भूमिका निभाता है। | ||
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11:40, 27 जनवरी 2018 का अवतरण
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