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''' भारत कोकिला श्रीमती सरोजनी नायडू'''<br />
{{माह क्रम |पिछला=[[मई 2026]]|अगला=[[जुलाई 2026]]}}
<poem>
{{Calendar-Mon
'श्रम करते हैं हम
| राष्ट्रीय शाके =1948<br/>राष्ट्रीय ज्येष्ठ 11 से राष्ट्रीय आषाढ़ 09 तक<br />
कि समुद्र हो तुम्हारी जागृति का क्षण
| विक्रम संवत =2083<br/>ज्येष्ठ बदी 01 से आषाढ़ बदी 01 तक
हो चुका जागरण
| अंग्रेज़ी =जून 2026
अब देखो, निकला दिन कितना उज्जवल।'
| इस्लामी हिजरी =1447-48<br/>[[ज़िलहिज्ज]] 14 से [[मोहर्रम]] 14 तक<br/>
</poem>
| बंगला संवत =1433<br/>बंग ज्येष्ठ 17 से बंग आषाढ़ 15 तक
ये पंक्तियाँ सरोजिनी नायडू की एक कविता से हैं, जो उन्होंने अपनी मातृभूमि को सम्बोधित करते हुए लिखी थी। सरोजिनी नायडू भारत देश के सर्वोत्तम राष्ट्रीय नेताओं में से एक थीं। वह भारत के स्वाधीनता संग्राम में सदैव आगे रहीं। उनके संगी साथी उनसे शक्ति, साहस और ऊर्जा पाते थे। युवा शक्ति को उनसे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती थी।
| सोम1 ={{DATE
==परिचय==
| दिनांक =[[1 जून|01]]
{{tocright}}
| दिनांक/माह/वर्ष=01062026
सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी सन 1879  को [[हैदराबाद]] में हुआ था। श्री अघोरनाथ चट्टोपाध्याय और वरदासुन्दरी की आठ संतानों में वह सबसे बड़ी थीं। अघोरनाथ एक वैज्ञानिक और शिक्षाशास्त्री थे। वह कविता भी लिखते थे। वरदासुन्दरी भी कविता लिखती थीं। अपने कवि भाई [[हरीन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय]] की तरह सरोजिनी को भी अपने माता-पिता से कविता–सृजन की प्रतिभा प्राप्त हुई थी। अघोरनाथ चट्टोपाध्याय 'निज़ाम कॉलेज' के संस्थापक रसायन वैज्ञानिक थे। वे चाहते थे कि उनकी पुत्री सरोजनी अंग्रेज़ी और गणित में निपुण हों। वह चाहते थे कि सरोजनी जी बहुत बड़ी वैज्ञानिक बनें। यह बात मनवाने के लिए उनके  पिता ने सरोजनी को एक कमरे में बंद कर दिया। वह रोती रहीं। सरोजिनी के लिए गणित के सवालों में मन लगाने के बजाय एक कविता लेख लिखना ज्यादा आसान था। सरोजनी ने महसूस किया कि वह  अंग्रेज़ी भाषा में भी आगे बढ़ सकती हैं और पारंगत हो सकती हैं। उन्होंने अपने पिताजी से कहा कि वह अंग्रेज़ी में आगे बढ़ कर दिखाएगीं। थोड़े ही परिश्रम के फलस्वरूप वह धाराप्रवाह अंग्रेज़ी भाषा बोलने और लिखने लगीं। इस समय लगभग 13 वर्ष की आयु में  सरोजनी ने 1300 पदों की 'झील की रानी' नामक लंबी कविता और लगभग 2000 पंक्तियों का एक विस्तृत नाटक लिखकर अंग्रेज़ी भाषा पर अपना अधिकार सिद्ध कर दिया। अघोरनाथ सरोजिनी की अंग्रेजी कविताओं से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने एस. चट्टोपाध्याय कृत 'पोयम्स' के नाम से सन 1903 में एक छोटा-सा कविता संग्रह प्रकाशित किया। डा. एम गोविंद राजलु नायडू से उनका विवाह हुआ। सरोजनी नायडू ने राजनीति और गृह प्रबंधन में संतुलन रखा।
| तिथि सूचना =शाके 11 गते 18<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[प्रतिपदा]],  [[ज्येष्ठा नक्षत्र|ज्येष्ठा]]<br />हि. 14, पीर, क़ल्ब<br />बंगला- 17
==भारत कोकिला==
| घटनाएँ =[[विश्व दुग्ध दिवस]], [[अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस]]<br />
मद्रास विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में उन्हें इतने अधिक अंक प्राप्त हुए जितने इससे पहले किसी को भी प्राप्त नहीं हुए थे। उनके पिता गर्व से कहते थे कि वह वैज्ञानिक न बन सकीं, किंतु उन्होंने माँ से प्रेरणा लेकर कविताएं लिखीं, बंगला भाषा में नहीं अपितु अंग्रेज़ी में। स्वदेश में उन्हें 'गाने वाली चिड़िया' का नाम मिला और विदेश, इंग्लैंड में उन्हें 'भारत कोकिला' कहकर सम्मानित किया गया। डायरी लेखन, नाटक, उपन्यास आदि सभी विधाओं में उन्होंने रचनायें की।   
'''जन्म'''- [[अशोक कुमार (हॉकी खिलाड़ी)|अशोक कुमार]], [[नर्गिस]], [[कर्णम मल्लेश्वरी]], [[बलदेव वंशी]], [[राजेश्वरी गायकवाड़]], [[मनसुख मंडाविया]], [[सुरेश अंगदी]], [[भगवंत खुबा]]<br />
==भाषा==
'''मृत्यु''' - [[नीलम संजीव रेड्डी]], [[ख़्वाजा अहमद अब्बास]], [[वाजिद ख़ान (संगीत निर्देशक)|वाजिद ख़ान]]}}
सरोजनी चट्टोपाध्याय  ने अपनी माता वरदा सुंदरी से [[बंगला भाषा|बंगला]] सीखी और [[हैदराबाद]] के परिवेश से [[तेलुगु भाषा|तेलुगु]] में प्रवीणता प्राप्त की। वे शब्दों की जादूगरनी थीं। शब्दों का रचना संसार उन्हें आकर्षित करता था और उनका मन शब्द जगत में ही रमता था। वे बहुभाषाविद थीं। वह क्षेत्रानुसार अपना भाषण अंग्रेज़ी, हिन्दी, बंगला या गुजराती भाषा में देती थीं। लंदन की सभा में अंग्रेज़ी में बोलकर उन्होंने वहां उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था।
| मंगल1 ={{DATE
==शिक्षा==  
| दिनांक =[[2 जून|02]]
बारह साल की छोटी सी उम्र में ही सरोजिनी ने मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली थी और मद्रास प्रेसीडेंसी में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद उच्चतर शिक्षा के लिए उन्हें इंग्लैड भेजा दिया गया जहाँ उन्होंने क्रमश: लंदन के 'किंग्ज़ कॉलेज' में और उसके बाद 'कैम्ब्रिज के गर्टन कॉलेज' में शिक्षा ग्रहण की। कॉलेज की शिक्षा में सरोजिनी की विशेष रुचि नहीं थी और इंग्लैंड का ठंडा तापमान भी उनके स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं था। वह स्वदेश लौट आयी।
| दिनांक/माह/वर्ष=02062026
==कविता में उड़ान==  
| तिथि सूचना =शाके 12 गते 19<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[द्वितीया]], [[अश्विनी नक्षत्र|अश्विनी]]<br />हि. 11, मंगल, शुर्तैन-नत्‌ह<br />बंगला- 16
यद्यपि सरोजिनी इंग्लैंड में दो साल तक ही रहीं किंतु वहाँ के प्रतिष्ठित साहित्यकारों और मित्रों ने उनकी बहुत प्रशंसा की। उनके मित्र और प्रशंसकों में 'एडमंड गॉस' और 'आर्थर सिमन्स' भी थे। उन्होंने किशोर सरोजिनी को अपनी कविताओं में गम्भीरता लाने की राय दी। वह लगभग बीस वर्ष तक कविताएँ और लेखन कार्य करती रहीं और इस समय में, उनके तीन कविता-संग्रह प्रकाशित हुए। उनके कविता संग्रह 'बर्ड ऑफ टाइम' और 'ब्रोकन विंग' ने उन्हें एक प्रसिद्ध कवयित्री बनवा दिया। सरोजिनी नायडू को भारतीय और अंग्रेज़ी साहित्य जगत की स्थापित कवयित्री माना जाने लगा था किंतु वह स्वयं को कवि नहीं मानती थीं। <br />
| घटनाएँ =
'''प्रथम कविता-संग्रह'''<br />
'''जन्म''' - [[बाबूलाल गौर]], [[मणिरत्नम]], [[डोला बनर्जी]], [[नन्दन नीलेकणी]], [[अनंत गीते]], [[तमिलसाई सुंदरराजन]], [[इलैयाराजा]], [[बलबीर सिंह जूनियर]], [[नटराजन चंद्रशेखर]]<br/>
सरोजिनी के प्रथम कविता-संग्रह 'द गोल्डन थ्रेशहोल्ड' (1905) में बहुत ही उत्साह के साथ पढ़ा गया। उन्हें, सरोजिनी को एक सक्षम, होनहार और नवोदित कवयित्री के रूप में सम्मानित किया गया। इंग्लैंड के बड़े-बड़े अखबारों 'लंदन-टाइम्स' और 'द मेन्चैस्टर गार्ड्यन' में इस कविता-संग्रह की प्रशंसा युक्त समीक्षाएँ लिखी गईं। भारत में उन्हें एक नया उदीयमान  तेजस्वी तारा माना गया।
'''मृत्यु''' - [[विश्वनाथ दास]], [[राज कपूर]], [[प्राण कृष्ण पारिजा]], [[श्रीकांत जिचकर]]}}
*'द गोल्डन थ्रेशहोल्ड' के बाद 'बर्ड ऑफ टाइम' नामक संग्रह सन 1912 में प्रकाशित हुआ।
| बुध1 ={{DATE
<poem>
| दिनांक =[[3 जून|03]]
समय के पंछी का उड़ने को सीमित विस्तार
| दिनांक/माह/वर्ष=03062026
पर लो—पंछी तो यह उड़ चला।।
| तिथि सूचना =शाके 18 गते<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[त्रयोदशी]], [[भरणी नक्षत्र|भरणी]]<br />हि. 12, बुध, बुतैन<br />बंगला- 17
</poem>
| घटनाएँ =[[विश्व साइकिल दिवस]]<br />
*इसके बाद सन 1917 में उनका तीसरा कविता-संग्रह 'द ब्रोकन विंग' निकला। उसमें उन्होंने गाया—
'''जन्म''' - [[बालकृष्ण भट्ट]], [[हरविलास शारदा]], [[एम. करुणानिधि]], [[पणीक्कर, के. एम.|के. एम. पणीक्कर]], [[रूमा पाल]], [[जॉर्ज फ़र्नांडिस]], [[चिमनभाई पटेल]]<br />
<poem>
'''मृत्यु''' - [[त्रिभुवनदास कृषिभाई पटेल]], [[कृष्ण बल्लभ सहाय]], [[भजन लाल]]}}
ऊँची उठती हूँ मैं, कि पहुँचू नियत झरने तक
| गुरु1 ={{DATE
टूटे ये पंख लिए, मैं चढ़ती हूँ ऊपर तारों तक।
| दिनांक =[[4 जून|04]]
</poem>
| दिनांक/माह/वर्ष=04062026
तारों तक पहुँचने के लिए ऊपर उठने की यह भावना सरोजिनी नायडू के साथ सदैव रही। सन 1946 में [[दिल्ली]] में 'एशियन रिलेशन्स कॉन्फ्रेंस' को सम्बोधित करते हुए उन्होंने इसी भाव को व्यक्त किया। उन्होंने कहा—'हम आगे, और भी आगे, ऊँचे, और ऊँचे जायेंगे, जब तक हम तारों तक न पहुँच जाएँ। आइए, तारों तक पहुँचने के लिए हम लोग बढ़ें।' उन्होंने कहा-- 'हम चाँद के लिए चिल्लाते नहीं हैं। हम तो उसे आकाश में से तोड़कर ले आएंगे और एशिया की मुक्ति के ताज में उसे लगा कर पहन लेंगे।' हार कर हताश हो बैठने का उनका स्वभाव नहीं था। अपने निश्चित उद्देश्य तक पहुँचने के लिए वह केवल आगे बढ़ना और आगे बढ़ना चाहती थीं। कविताओं और जीवन, दोनों में ही सरोजिनी नायडू यही करती थीं। <br />
| तिथि सूचना =शाके 19 गते<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[चतुर्दशी]]/[[पूर्णिमा]], [[कृत्तिका नक्षत्र|कृत्तिका]]<br />हि. 13, जुमेरात, सुरैया<br />बंगला- 18
'''लम्बा अंतराल और कविता''' <br />
| घटनाएँ =[[संकष्टी चतुर्थी]]<br />
वर्षों बाद सन 1937 में सरोजिनी नायडू का आख़िरी कविता-संग्रह 'द सेप्टर्ड फ्लूट' एक आश्चर्यजनक और गम्भीर रूप में सामने आया। इस समय वह देश की राजनीति में रची बसी थीं और बहुत लम्बे समय से उन्होंने कविता लिखना लगभग छोड़ ही दिया था। राजनैतिक तनावों में यह कविता-संग्रह हवा के ताज़े झोंके की एक लहर बनकर सबके सामने आया।
'''जन्म''' - [[अनिल शास्त्री]], [[नूतन]], [[एस. पी. बालासुब्रमण्यम]]<br />
जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में ही सरोजिनी नायडू को एक होनहार कवयित्री के रूप में प्रशंसा और प्रसिद्धि मिल चुकी थी, किंतु वह स्वयं अपनी रचनाओं को बहुत ही साधारण मानती थीं। 'मैं सचमुच कोई कवि नहीं हूँ,' उन्होंने कहा - 'मेरे सामने एक दर्शन है, मगर मेरे पास आवाज़ नहीं है।' उन्होंने स्वयं को केवल 'गीतों की गायिका' बताया। किंतु उनके गीत बहुत मधुर थे जो कोमल भावों और प्रेम की भावना से ओतप्रोत थे।
'''मृत्यु''' - [[अभिमन्यु अनत]], [[अचंत लक्ष्मीपति]], [[सुलभा देशपांडे]]}}
*'द गोल्डन थ्रेशहोल्ड' की पंक्तियाँ हैं—
| शुक्र1 ={{DATE
<poem>
| दिनांक =[[5 जून|05]]
लिए बांसुरी हाथों में हम घूमें गाते-गाते
| दिनांक/माह/वर्ष=05062026
मनुष्य सब हैं बंधु हमारे, जग सारा अपना है।
| तिथि सूचना =शाके 20 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[प्रतिपदा]], [[रोहिणी नक्षत्र|रोहिणी]]<br />हि. 14, जुम्मा, दबरान<br />बंगला- 19
</poem>
| घटनाएँ =[[विश्व पर्यावरण दिवस]]<br />
सरोजिनी नायडू ने ख़ुद के लिए कुछ भी कहा हो, भारतीय साहित्य में कवयित्री के रूप में उनका स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण है। उनके शब्दों में संगीत है। उनकी कविताएँ सुन्दर प्रतीकों से भरी हैं। सच्चे दिल से वह भारत के श्रमिक वर्ग के लिए चिंतित रहा करती थीं। अपनी मातृभूमि को दासता से मुक्त करने का स्वप्न वह सदैव देखती रहीं, उनके मन में समस्त मानव जाति के लिए प्रेम था। उनकी कविताओं ने आधुनिक भारतीय साहित्य पर अपनी विशिष्ट छाप अंकित की है।
'''जन्म''' - [[योगी आदित्यनाथ]], [[रमेश कृष्णन]], [[गोविंद शंकर कुरुप]], [[एन. एम. जोशी]]<br />
==विवाह और उसके बाद==
'''मृत्यु''' - [[वेद मारवाह]], [[मास्टर मदन]], [[कुबेरनाथ राय]]}}
सरोजिनी नायडू सन 1898 में इंग्लैंड से लौटीं। अब वह डा0 गोविन्दराजुलु नायडू के साथ विवाह करने के लिए उत्सुक थीं। डा0 गोविन्दराजुलु एक फौजी डाक्टर थे, जिन्होंने तीन साल पहले सरोजिनी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा था। पहले तो सरोजिनी के पिता इस विवाह के विरुद्ध थे किन्तु बाद में यह सम्बन्ध तय कर दिया गया। सरोजिनी नायडू ने हैदराबाद में अपना सुखमय वैवाहिक जीवन का आरम्भ किया। डा0 नायडू की वह बड़े प्यार से देखभाल करतीं। उन्होंने स्नेह और ममता के साथ अपने चार बच्चों की परवरिश की। उनके हैदराबाद के घर में हमेशा हंसी, प्यार और सुन्दरता का वातावरण छाया रहता था।
| शनि1 ={{DATE
| दिनांक =[[6 जून|06]]
| दिनांक/माह/वर्ष=06062026
| तिथि सूचना =शाके 21 गते 23<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[द्वितीया]], [[मृगशिरा नक्षत्र|मृगशिरा]]<br />हि. 15, हफ़्ता, हक़आ<br />बंगला- 20
| घटनाएँ =
'''जन्म''' - [[मास्ति वेंकटेश अय्यंगार]], [[सुनील दत्त]], [[डी. रामानायडू]], [[गुरबचन सिंह रंधावा]], [[उपेन्द्रनाथ बंधोपाध्याय]], [[शौक़ बहराइची]], [[ए.ओ. ह्यूम]], [[अरविंद केजरीवाल]], [[वेद प्रकाश शर्मा]], [[राजेन्द्र कृष्ण]], [[गिरिधर शर्मा नवरत्न]], [[रघुवंश प्रसाद सिंह]], [[एनी मसकैरिनी]], [[पशुपति कुमार पारस]]<br />
'''मृत्यु''' - [[कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह]], [[मास्ति वेंकटेश अय्यंगार]], [[बासु चटर्जी]], [[डी. देवराज अर्स]]}}
| रवि2 ={{DATE
| दिनांक =[[7 जून|07]]
| दिनांक/माह/वर्ष=07062026
| तिथि सूचना =शाके 22 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[तृतीया]]/[[चतुर्थी]], [[आर्द्रा नक्षत्र|आर्द्रा]]<br />हि. 16, इतवार, आर्द्रा<br />बंगला- 21
| घटनाएँ =
'''जन्म''' - [[महेश भूपति]], [[ख़्वाजा अहमद अब्बास]]<br />
'''मृत्यु''' - [[बी डी जत्ती]], [[नटराज रामकृष्ण]]}}
| सोम2 ={{DATE
| दिनांक =[[8 जून|08]]
| दिनांक/माह/वर्ष=08062026
| तिथि सूचना =शाके 23 गते <br />[[कृष्ण पक्ष]], [[चतुर्थी]], [[पुनर्वसु नक्षत्र|पुनर्वसु]]<br />हि. 17, पीर, ज़िराअ<br />बंगला- 22
| घटनाएँ =[[विश्व महासागर दिवस]], [[विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[एम. पी. जबीर]]<br />
'''मृत्यु''' - [[हबीब तनवीर]], [[मदुराई मणि अय्यर]]}}
| मंगल2 ={{DATE
| दिनांक =[[9 जून|09]]
| दिनांक/माह/वर्ष=09062026
| तिथि सूचना =शाके 24 गते 26<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[पंचमी]], [[पुष्य नक्षत्र|पुष्य]]<br />हि. 18, मंगल, नस्त्रा<br />बंगला- 23
| घटनाएँ =[[अन्तरराष्ट्रीय अभिलेख दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[चौधरी दिगम्बर सिंह]], [[किरण बेदी]], [[नंदिनी सत्पथी]], [[वसन्त देसाई]], [[लक्ष्मण प्रसाद दुबे]], [[अजित शंकर चौधरी]], [[डॉ. किरण मार्टिन]]<br />
'''मृत्यु''' - [[बिरसा मुंडा]], [[हरि किशन सरहदी]], [[दिनेश चंद्र मजूमदार]], [[अब्बास तैयबजी]], [[असद भोपाली]], [[धीरेन्द्र ब्रह्मचारी]], [[राज खोसला]], [[एन.जी. रंगा]], [[मक़बूल फ़िदा हुसैन]]}}
| बुध2 ={{DATE
| दिनांक =[[10 जून|10]]
| दिनांक/माह/वर्ष=10062026
| तिथि सूचना =शाके 25 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[षष्ठी]], [[आश्लेषा नक्षत्र|आश्लेषा]]<br />हि. 19, बुध, तर्फ़ा<br />बंगला- 24
| घटनाएँ =[[विश्व नेत्रदान दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[बलराज भल्ला]], [[देवेन्द्र झाझरिया]], [[प्रकाश पादुकोण]], [[शिवदीन राम जोशी]], [[एम. एस. गोपालकृष्णन]], [[राहुल बजाज]], [[गोपीनाथ बोरदोलोई]], [[दामोदर मेनन]], [[आर. वी. जानकीरमन]]<br />
'''मृत्यु''' - [[भाई वीर सिंह ]], [[जीवन (अभिनेता)|अभिनेता जीवन]], [[गिरीश कर्नाड]]}}
| गुरु2 ={{DATE
| दिनांक =[[11 जून|11]]
| दिनांक/माह/वर्ष=11062026
| तिथि सूचना =शाके 26 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[सप्तमी]], [[मघा नक्षत्र|मघा]]<br />हि. 20, जुमेरात, ज़ब्‌हा<br />बंगला- 25
| घटनाएँ =
'''जन्म''' - [[राम प्रसाद बिस्मिल]], [[लालू प्रसाद यादव]], [[के. एस. हेगड़े]], [[शाहबुद्दीन याक़ूब क़ुरैशी]], [[मानसी जोशी]]<br />
'''मृत्यु''' - [[मिहिर सेन]], [[वासुदेव वामन शास्त्री खरे]], [[घनश्याम दास बिड़ला]], [[लीला नाग]]}}
| शुक्र2 ={{DATE
| दिनांक =[[12 जून|12]]
| दिनांक/माह/वर्ष=12062026
| तिथि सूचना =शाके 27 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[अष्टमी]], [[पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र|पूर्वाफाल्गुनी]]<br />हि. 21, जुम्मा, ज़ुब्रा<br />बंगला- 26
| घटनाएँ =[[प्रदोष व्रत]], [[विश्व बालश्रम निषेध दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[श्यामा]], [[नरेन्द्र सिंह तोमर]], [[सी. के. नागराज राव]], [[सुरुज बाई खांडे]], [[ई. श्रीधरन]], [[गीतांजलि श्री]]<br />
'''मृत्यु''' - [[सी. नारायण रेड्डी]], [[गोपीनाथ कविराज]], [[पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे]], [[निलोफर (राजकुमारी)]]}}
| शनि2 ={{DATE
| दिनांक =[[13 जून|13]]
| दिनांक/माह/वर्ष=13062026
| तिथि सूचना =शाके 28 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[नवमी]], [[उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र|उत्तराफाल्गुनी]]<br />हि. 22, हफ़्ता, सर्फ़ा<br />बंगला- 27
| घटनाएँ =[[मासिक शिवरात्रि]]<br />
'''जन्म''' - [[प्रेम धवन]], [[दीपिका कुमारी]], [[पीयूष गोयल]]<br />
'''मृत्यु''' - [[मुद्राराक्षस]], [[मेहदी हसन]], [[कीर्ति चौधरी]], [[मेजर मनोज तलवार]], [[नानक भील]]}}
| रवि3 ={{DATE
| दिनांक =[[14 जून|14]]
| दिनांक/माह/वर्ष=14062026
| तिथि सूचना =शाके 29 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[दशमी]], [[हस्त नक्षत्र|हस्त]]<br />हि. 23, इतवार, अव्वा<br />बंगला- 28
| घटनाएँ =[[विश्व रक्तदान दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[गुरु हरगोबिंद सिंह]], [[के. आसिफ़]], [[केदार पांडे]], [[सतीश चंद्र दासगुप्ता]]<br />
'''मृत्यु''' - [[असद अली ख़ाँ]], [[कार्यमाणिवकम श्रीनिवास कृष्णन]], [[सुशांत सिंह राजपूत]]}}
| सोम3 ={{DATE
| दिनांक =[[15 जून|15]]
| दिनांक/माह/वर्ष=15062026
| तिथि सूचना =शाके 01 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[एकादशी]], [[चित्रा नक्षत्र|चित्रा]]<br />हि. 24, पीर, सिमाक<br />बंगला- 29
| घटनाएँ =
'''जन्म''' - [[सुरैया]], [[सज्जाद हुसैन]], [[ज़िया फ़रीदुद्दीन डागर]], [[तारकनाथ दास]], [[राजेन्द्र सिंहजी जडेजा]], [[श्रीमन्नारायण अग्रवाल]], [[देवी प्रसाद राय चौधरी]], [[अण्णा हज़ारे]], [[मनिका बत्रा]]<br />
'''मृत्यु''' - [[शिव दयाल साहब]]}}
| मंगल3 ={{DATE
| दिनांक =[[16 जून|16]]
| दिनांक/माह/वर्ष=16062026
| तिथि सूचना =शाके 02 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[द्वादशी]], [[स्वाती नक्षत्र|स्वाती]]<br />हि. 25, मंगल, अफ़रा<br />बंगला- 30
| घटनाएँ =
'''जन्म''' - [[महमूद अली ख़ाँ]], [[चौधरी ब्रह्म प्रकाश]], [[डॉ. ब्रह्मदेव शर्मा]], [[हेमन्त कुमार]], [[अख़लाक़ मुहम्मद ख़ान 'शहरयार']], [[मिथुन चक्रवर्ती]], [[सी. एम. पुनाचा]], [[सुरेश कांत]], [[रोहित श्रीवास्तव]]<br />
'''मृत्यु''' - [[चित्तरंजन दास]], [[प्रफुल्ल चंद्र राय]], [[चार्ल्स कोरिया]], [[चंद्रशेखर वैद्य]]}}
| बुध3 ={{DATE
| दिनांक =[[17 जून|17]]
| दिनांक/माह/वर्ष=17062026
| तिथि सूचना =शाके 03 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[त्रयोदशी]], [[विशाखा नक्षत्र|विशाखा]]<br />हि. 26, बुध,  ज़ुबाना<br />बंगला- 01
| घटनाएँ =जून
'''जन्म''' - [[लिएंडर पेस]], [[ज्योति प्रसाद अग्रवाल]], [[कैलाश नाथ काटजू]], [[निशिकांत कामत]], [[भगत सिंह कोश्यारी]]<br />
'''मृत्यु''' - [[जीजाबाई]], [[गोपबंधु दास]], [[गोपाल गणेश आगरकर]], [[रानी लक्ष्मीबाई]], [[मुमताज़ महल]]}}
| गुरु3 ={{DATE
| दिनांक =[[18 जून|18]]
| दिनांक/माह/वर्ष=18062026
| तिथि सूचना =शाके 04 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[चतुर्दशी]], [[अनुराधा नक्षत्र|अनुराधा]]<br />हि. 27, जुमेरात, इक़्लील<br />बंगला- 02
| घटनाएँ =[[गोवा क्रान्ति दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[होमी मोतीवाला]], [[के एस सुदर्शन]], [[दादा धर्माधिकारी]], [[अनुग्रह नारायण सिंह]], [[सी. विजय राघवा चारियर]]<br />
'''मृत्यु''' - [[मिलखा सिंह]], [[अली अकबर ख़ाँ]], [[सेठ गोविन्द दास]], [[युधवीर सिंह]], [[नसीम बानो]]}}
| शुक्र3 ={{DATE
| दिनांक =[[19 जून|19]]
| दिनांक/माह/वर्ष=19062026
| तिथि सूचना =शाके 05 गते<br />[[कृष्ण पक्ष]], [[अमावस्या]], [[ज्येष्ठा नक्षत्र|ज्येष्ठा]]<br />हि. 28, जुम्मा, क़ल्ब<br />बंगला- 03
| घटनाएँ =[[विश्व एथनिक दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[सुदर्शन अग्रवाल]], [[माधवराव सप्रे]], [[राहुल गांधी]], [[ओकरम इबोबी सिंह]]<br />
'''मृत्यु''' - [[नेरेला वेणु माधव]], [[सुभाष मुखोपाध्याय (चिकित्सक)|सुभाष मुखोपाध्याय]], [[गुरुप्रसाद मोहापात्रा]]}}
| शनि3 ={{DATE
| दिनांक =[[20 जून|20]]
| दिनांक/माह/वर्ष=20062026
| तिथि सूचना =शाके 06 गते<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[प्रतिपदा]], [[मूल नक्षत्र|मूल]]<br />हि. 29, हफ़्ता, शौला<br />बंगला- 04
| घटनाएँ =[[विश्व शरणार्थी दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[भुवनेश्वर (साहित्यकार)]], [[लक्ष्मण काशीनाथ किर्लोस्कर]], [[गौर किशोर घोष]], [[विश्वनाथ प्रसाद तिवारी]], [[द्रौपदी मुर्मू]]<br />
'''मृत्यु''' - [[वेंकटेश नारायण तिवारी]]}}
| रवि4 ={{DATE
| दिनांक =[[21 जून|21]]
| दिनांक/माह/वर्ष=21062026
| तिथि सूचना =शाके 07 गते<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[प्रतिपदा]], [[पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र|पूर्वाषाढ़ा]]<br />हि. 30, इतवार, नआइम<br />बंगला- 05
| घटनाएँ =[[अंतरराष्ट्रीय योग दिवस]], [[पितृ दिवस]], [[विश्व संगीत दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[मुद्राराक्षस]], [[बी. जी. वर्गीज़]], [[विष्णु प्रभाकर]], [[एस. पी. सिंह बघेल]]<br />
'''मृत्यु''' - [[केशव बलिराम हेडगेवार]], [[जीत सिंह नेगी]], [[राजिंदर गोयल]]}}
| सोम4 ={{DATE
| दिनांक =[[22 जून|22]]
| दिनांक/माह/वर्ष=22062026
| तिथि सूचना =शाके 08 गते 07<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[द्वितीया]], [[उत्तराषाढ़ा नक्षत्र|उत्तराषाढ़ा]]<br />हि. 01, पीर, बल्दा<br />बंगला- 06
| घटनाएँ =
'''जन्म''' - [[गणेश घोष]], [[अमरीश पुरी]], [[टॉम अल्टर]], [[अनीता पौलदुरई]]<br />
'''मृत्यु''' - [[जगन्नाथदास 'रत्नाकर']], [[एल. वी. प्रसाद]], [[केदारनाथ अग्रवाल]], [[भदन्त आनन्द कौसल्यायन]]}}v
| मंगल4 ={{DATE
| दिनांक =[[23 जून|23]]
| दिनांक/माह/वर्ष=23062026
| तिथि सूचना =शाके 09 गते<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[तृतीया]], [[श्रवण नक्षत्र|श्रवण]]<br />हि. 02, मंगल,  सा-देज़ाबेह<br />बंगला- 07
| घटनाएँ =[[अन्तरराष्ट्रीय विधवा दिवस]], [[संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[प्रदीप कुमार बनर्जी]], [[चण्डी प्रसाद भट्ट]], [[वीरभद्र सिंह]], [[राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी]], [[संजीव कुमार बालयान]], [[सैयद शाहिद हाकिम]]<br />
'''मृत्यु''' - [[श्यामा प्रसाद मुखर्जी]], [[गंगाप्रसाद वर्मा]], [[गिजुभाई बधेका]], [[श्रीप्रकाश]], [[संजय गाँधी]], [[वी. वी. गिरि]], [[निर्मला जोशी]], [[बालाजी बाजीराव]]}}
| बुध4 ={{DATE
| दिनांक =[[24 जून|24]]
| दिनांक/माह/वर्ष=24062026
| तिथि सूचना =शाके 10 गते<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[चतुर्थी]], [[धनिष्ठा नक्षत्र|धनिष्ठा]]<br />हि. 03, बुध, बुला<br />बंगला- 08
| घटनाएँ =
'''जन्म''' - [[ओंकारनाथ ठाकुर]], [[तारा सिंह]], [[विश्वनाथ काशीनाथ राजवाडे]]<br />
'''मृत्यु''' - [[दरबान सिंह नेगी]], [[रानी दुर्गावती]], [[पंडित श्रद्धाराम शर्मा]], [[अवधानम सीता रमन]]}}
| गुरु4 ={{DATE
| दिनांक =[[25 जून|25]]
| दिनांक/माह/वर्ष=25062026
| तिथि सूचना =शाके 11 गते <br />[[शुक्ल पक्ष]], [[पंचमी]], [[शतभिषा नक्षत्र|शतभिषा]]<br />हि. 04, जुमेरात, आव्‌बिय<br />बंगला- 09
| घटनाएँ =
'''जन्म''' -[[चन्द्रशेखर पाण्डे]], [[सुचेता कृपलानी]], [[उदय चंद]], [[विश्वनाथ प्रताप सिंह]], [[मदन मोहन]], [[मनोज कुमार पांडेय]], [[सतीश शाह]], [[सुधा सिंह]]<br />
'''मृत्यु''' - [[स्वामी सहजानंद सरस्वती]], [[मोहन रानाडे]], [[शिव चरण माथुर]]}}
| शुक्र4 ={{DATE
| दिनांक =[[26 जून|26]]
| दिनांक/माह/वर्ष=26062026
| तिथि सूचना =शाके 12 गते 11<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[षष्ठी]], [[पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र|पूर्वाभाद्रपद]]<br />हि. 05, जुम्मा,  सऊद<br />बंगला- 10
| घटनाएँ =[[अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय]], [[बाल गन्धर्व]], [[रामा राघोबा राणे]], [[धर्मेन्द्र प्रधान]], [[योगेन्द्र नारायण]], [[तरुण सागर]], [[एस. मल्लिकार्जुनैय्या]], [[मनप्रीत सिंह]], [[गौहर जान]]<br />
'''मृत्यु''' - [[गोविंद शास्त्री दुगवेकर]], [[गोपाल रामानुजम]]}}
| शनि4 ={{DATE
| दिनांक =[[27 जून|27]]
| दिनांक/माह/वर्ष=27062026
| तिथि सूचना =शाके 13 गते<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[सप्तमी]], [[उत्तराभाद्रपद नक्षत्र|उत्तराभाद्रपद]]<br />हि. 06, हफ़्ता, मुक़द्दम<br />बंगला- 11
| घटनाएँ =[[प्रदोष व्रत]]<br />
'''जन्म''' - [[पी. टी. उषा]], [[राहुल देव बर्मन]], [[आर. डी. प्रधान]], [[अकिलन]], [[पूर्णिमा वर्मन]], [[अमला शंकर]], [[नितिन मुकेश]]<br />
'''मृत्यु''' - [[रणजीत सिंह]], [[सैम मानेकशॉ]]}}
| रवि5 ={{DATE
| दिनांक =[[28 जून|28]]
| दिनांक/माह/वर्ष=28062026
| तिथि सूचना =शाके 14 गते<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[अष्टमी]], [[रेवती नक्षत्र|रेवती]]<br />हि. 07, इतवार, अफ़रा<br />बंगला- 12
| घटनाएँ =
'''जन्म''' - [[मरियप्पन थंगावेलु]], [[नरसिंह राव पी. वी.|पी. वी. नरसिंह राव]], [[जसपाल राणा]], [[शिवप्रसाद गुप्त]], [[प्रहलाद सिंह पटेल]]<br />
'''मृत्यु''' - [[अमर गोस्वामी]], [[पी. सी. महालनोबिस]]}}
| सोम5 ={{DATE
| दिनांक =[[29 जून|29]]
| दिनांक/माह/वर्ष=29062026
| तिथि सूचना =शाके 15 गते<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[नवमी]]/[[दशमी]], [[अश्विनी नक्षत्र|अश्विनी]]<br />हि. 08, पीर, शुर्तैन-नत्‌ह<br />बंगला- 13
| घटनाएँ =[[सांख्यिकी दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[देवकीनन्दन खत्री]], [[पी. सी. महालनोबिस]], [[आशुतोष मुखर्जी]]<br />
'''मृत्यु''' - [[माइकल मधुसूदन दत्त]], [[दामोदर धर्मानंद कोसांबी]], [[सरदार बलदेव सिंह]], [[के.जी. सुब्रह्मण्यम]], [[गवरी देवी]], [[मेहता लज्जाराम शर्मा]]}}
| मंगल5 ={{DATE
| दिनांक =[[30 जून|30]]
| दिनांक/माह/वर्ष=30062026
| तिथि सूचना =शाके 16 गते<br />[[शुक्ल पक्ष]], [[एकादशी]], [[भरणी नक्षत्र|भरणी]]<br />हि. 09, मंगल, बुतैन<br />बंगला- 14
| घटनाएँ =[[हूल क्रान्ति दिवस]], [[अन्तरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस]], [[अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस]]<br />
'''जन्म''' - [[नागार्जुन]], [[कल्याणजी (संगीतकार)|कल्याणजी]], [[सी. एन. आर. राव]], [[मुकुट बिहारी लाल भार्गव]], [[हरिवंश नारायण सिंह]], [[रघुवंश (साहित्यकार)|रघुवंश]], [[भूपेन्द्र यादव]]<br />
'''मृत्यु''' - [[दादा भाई नौरोजी]], [[साहिब सिंह वर्मा]], [[के. एच. आरा]], [[आशा देवी आर्यनायकम]]}}
}}
{{Month-Festival
| प्रमुख घटनाएँ =
*01 [[विश्व दुग्ध दिवस]], [[अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस]]
*03 [[विश्व साइकिल दिवस]]
*05 [[विश्व पर्यावरण दिवस]]
*08 [[विश्व महासागर दिवस]], [[विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस]]
*09 [[अन्तरराष्ट्रीय अभिलेख दिवस]]
*10 [[विश्व नेत्रदान दिवस]]
*12 [[विश्व बालश्रम निषेध दिवस]]
*14 [[विश्व रक्तदान दिवस]]
*18 [[गोवा क्रान्ति दिवस]]
*19 [[विश्व एथनिक दिवस]]
*20 [[विश्व शरणार्थी दिवस]]
*21 [[अंतरराष्ट्रीय योग दिवस]], [[पितृ दिवस]], [[विश्व संगीत दिवस]]
*23 [[अन्तरराष्ट्रीय विधवा दिवस]], [[संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा दिवस]]
*26 [[अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस]]
*29 [[सांख्यिकी दिवस]]
*30 [[हूल क्रान्ति दिवस]], [[अन्तरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस]], [[अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस]]
| व्रत-उत्सव =  
*04 [[संकष्टी चतुर्थी]]
*12, 27 [[प्रदोष व्रत]]
*13 [[मासिक शिवरात्रि]]
*14 [[अमावस्या|देवपितृकार्य अमावस्या]]
*15 [[मिथुन संक्रांति]], [[सोमवती अमावस्या]]
*17 महाराणा प्रताप जयंंती
*18 [[गणेश चतुर्थी]]
*20 [[अरण्य षष्ठी]]
*21 [[दशाश्वमेध घाट वाराणसी|दशाश्वमेध घाट स्नान प्रारम्भ (वाराणसी)]],
*22। [[दुर्गाष्टमी]]
*23। [[महेश नवमी]]
*25 [[निर्जला एकादशी]]
*26 [[मुहर्रम]], [[हिजरी|हिजरी नववर्ष]]
*29 [[ज्येष्ठ पूर्णिमा]], [[कबीर|कबीरदास जयंती]]
| जन्म दिवस =  
* 02 [[मणिरत्नम]]
* 03 [[जॉर्ज फ़र्नांडिस]]
* 05 [[योगी आदित्यनाथ]]
* 06 [[सुनील दत्त]]
* 07 [[महेश भूपति]]
* 09 [[चौधरी दिगम्बर सिंह]], [[किरण बेदी]]
* 11 [[राम प्रसाद बिस्मिल]]
* 16 [[हेमन्त कुमार]], [[अख़लाक़ मुहम्मद ख़ान 'शहरयार']]
* 20 [[भुवनेश्वर (साहित्यकार)]]
* 21 [[विष्णु प्रभाकर]]
* 22 [[अमरीश पुरी]]
* 25 [[सुचेता कृपलानी]], [[विश्वनाथ प्रताप सिंह]], [[उदय चंद]]
* 26 [[ बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय]], [[बाल गन्धर्व]]
* 27 [[ पी. टी. उषा]], [[राहुल देव बर्मन]]
* 28 [[पी. वी. नरसिंह राव]], [[जसपाल राणा]]
* 29 [[देवकीनन्दन खत्री]]
* 30 [[नागार्जुन]]
| मृत्यु दिवस =
* 01 [[नीलम संजीव रेड्डी]]
* 02 [[राज कपूर]]
* 06 [[बासु चटर्जी]]
* 07 [[बी डी जत्ती]]
* 08 [[हबीब तनवीर]]
* 09 [[बिरसा मुंडा]], [[मक़बूल फ़िदा हुसैन]]
* 10 [[गिरीश कर्नाड]]
* 11 [[मिहिर सेन]], [[घनश्याम दास बिड़ला]]
* 17 [[रानी लक्ष्मीबाई]]
* 22 [[जगन्नाथदास 'रत्नाकर']], [[भदन्त आनन्द कौसल्यायन]]
* 23 [[श्यामा प्रसाद मुखर्जी]]
* 25 [[स्वामी सहजानंद सरस्वती]]
* 27 [[रणजीत सिंह|महाराजा रणजीत सिंह]], [[सैम मानेकशॉ]]
* 29 [[दामोदर धर्मानंद कोसांबी]]
* 30 [[दादा भाई नौरोजी]], [[साहिब सिंह वर्मा]]
}}
{{माह क्रम |पिछला=[[मई 2026]]|अगला=[[जुलाई 2026]]}}
[[Category:जून]][[Category:भारतकोश कॅलण्डर]][[Category:कैलंडर]][[Category:2026]]
__INDEX__


सरोजिनी नायडू के घर के दरवाज़े सबके लिए खुले रहते थे। दूर-दूर से कितने ही दोस्त उस घर में आते रहते थे और सबका वह प्रेम से सत्कार करतीं। वह उन्हें स्वादिष्ट भोजन खिलातीं और ज़िन्दादिली और विनोदप्रियता से उनका मन बहलातीं। वह अपने और परिवार से हमेशा प्यार करती थीं। उन्हें हैदराबाद शहर से बहुत प्यार था जिसकी समृद्ध सभ्यता उनके खून में घुलमिल गई थी। वह उर्दू शायरी की शौकीन थीं। हालाँकि आम भाषाओं मे वह ज्यादातर अंग्रेजी में भाषण दिया करतीं थीं, उर्दू भाषा के प्रति भी वह बड़ी आकर्षित थीं और काफ़ी अच्छी उर्दू बोल लेती थीं। वह सुखी थीं और संतुष्ट थीं। उस समय की उनकी कविता में उनके मन में उमड़ रहे उल्लास की झलक मिलती है।
लेकिन अपने घर की दुनिया में इतनी सुखी होने पर भी वह जो कुछ थीं उसके अधिक कुछ और बनना चाहती थीं। उनकी आँखें अपने सुखमय घर की दीवारों से बाहर कुछ ढूँढ रहीं थीं। [[गोपाल कृष्ण गोखले]] उनके अच्छे मित्र थे। वह भारत को अंग्रेज़ी हुकूमत से आजाद करने के काम में लगे हुए थे। उन्होंने सरोजिनी नायडू को अपने घर के एकान्त से बाहर निकल कर, अपने जीवन और गीतों को राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर देने के लिए प्रेरित किया। सरोजिनी नायडू गांधीजी से सन 1914 में लंदन में मिली। उस मुलाकात के बाद जीवन को भविष्य का पथ मिल गया। उन्होंने पूरी तरह से राजनीति को अपना लिया और इसके बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
==राष्ट्रीय राजनीति में==
देश की राजनीति में कदम रखने से पहले सरोजिनी नायडू दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी के साथ काम कर चुकी थी। गांधी जी वहाँ की जातीय सरकार के विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे और सरोजिनी नायडू ने स्वयंसेवक के रूप में उन्हें सहयोग दिया था। भारत लौटने के बाद तुरन्त ही वह राष्ट्रीय आंदोलन में सम्मिलित हो गई। शुरू से ही वह गांधी जी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रति वफादार रहीं। उन्होंने विद्यार्थी और युवाओं की सभाओं में भाषण दिए। अनेक शहरों और गाँवों में महिलाओं और आम सभाओं को सम्बोधित किया।


सरोजिनी नायडू का स्वास्थ्य कभी अच्छा नहीं रहा। लेकिन उनका मनोबल दृढ़ था। युवावस्था में नहीं, बल्कि बड़ी उम्र होने पर भी वह जोश और उत्साह के साथ काम करती रहीं। यह देखकर सब विस्मित रह जाते थे। उनके साथियों और प्रशंसकों को हैरानी होती थी कि इतनी अजेय शक्ति उन्होंने कहाँ से पाई है।
==गांधी जी का सानिध्य==
सरोजिनी नायडू की राजनैतिक यात्रा लगभग चौबीस वर्ष की आयु में प्रारंभ होती है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम से पहले ही 'महिला स्वशक्तिकरण आन्दोलन' शुरू हो गया था। इस समय सरोजनी नायडू हाथ में स्वतंत्रता संग्राम का झंड़ा उठाकर देश के लिए मर मिटने निकल पड़ी थीं और दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी की प्रमुख बन महिला सशक्तिकरण को बल दिया। 


1902 में कोलकाता (कलकत्ता) में उन्होंने बहुत ही ओजस्वी भाषण दिया जिससे [[गोपालकृष्ण गोखले]] बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने सरोजिनी जी का राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन किया । इस घटना के बाद सरोजिनी जी को [[महात्मा गांधी]] का सानिध्य मिला। गांधी जी से उनकी मुलाकात कई वर्षों के बाद सन 1914 में लंदन में हुई। गांधी जी के साथ रहकर सरोजिनी की राजनैतिक सक्रियता बढ़ती गयी। वह गांधी जी से बहुत प्रभावित थीं। उनकी सक्रियता के कारण देश की असंख्य महिलाओं में आत्मविश्वास लौट आया और उन्होंने भी स्वाधीनता आंदोलन के साथ साथ समाज के अन्य क्षेत्रों में  भी सक्रियता से भाग लेना प्रारम्भ कर दिया।
====================


गांधी जी से पहली बार मिलने के बाद सरोजिनी नायडू का ज़्यादातर वक्त राजनैतिक कार्यों में ही बीतने लगा। समय बीतने के साथ, वह कांग्रेस की प्रवक्ता बन गई। आंधी की तरह वह देश भर में घूमतीं और स्वाधीनता का संदेश फैलातीं। जहाँ भी और जिस वक़्त भी उनकी जरूरत पड़ी, वह फौरन ही हाजिर हो जातीं। राष्ट्रीय कांग्रेस की बहुत सी समितियों में उन्होंने काम किया और देश की राजनैतिक आजादी के बारे में बोलने का एक भी अवसर उन्होंने हाथ से जाने नहीं दिया।
==हिन्दू-मुस्लिम एकता==
ऐसे ही जोश के साथ उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता पर भी जोर दिया। शिक्षा के प्रचार को भी महत्व दिया। अपने श्रोताओं से उन्होंने अज्ञानता और अन्धविश्वास को दीवारों से निकल आने का अनुरोध किया। देश को आगे ले जाने के बजाय पीछे खींचने वाली परम्पराओं, रीति-रिवाजों के बोझ को उतार फेंकने की उन्होंने जोरदार अपील की।
==कांग्रेस अध्यक्ष==
देखते-देखते ही सरोजिनी नायडू एक राष्ट्रीय नेता बन गईं। वह 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' के प्रतिष्ठित नेताओं में से एक मानी जाने लगीं। सन 1925 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के [[कानपुर]] अधिवेशन की अध्यक्ष चुनी गईं। तब तक वह गांधी जी के साथ दस वर्ष तक काम कर चुकी थीं और गहरा राजनैतिक अनुभव पा चुकी थीं।


आजादी के पूर्व, भारत में कांग्रेस का अध्यक्ष होना बहुत बड़ा राष्ट्रीय सम्मान था और वह जब एक महिला को दिया गया तो उसका महत्व और भी बढ़ गया। गांधी जी ने सरोजिनी नायडू का कांग्रेस प्रमुख के रूप में बड़े ही उत्साह भरे शब्दों में स्वागत किया, 'पहली बार एक भारतीय महिला को देश की यह सबसे बड़ी सौगात पाने का सम्मान मिलेगा। अपने अधिकार के कारण ही इस साल यह सम्मान उन्हें प्राप्त होगा।'


सरोजिनी ने स्वयं अपने बारे में कहा, 'अपने विशिष्ट सेवकों में मुझे मुख्य स्थान के लिए चुनकर आप लोगों ने कोई नई मिसाल नहीं रखी है। आप तो केवल पुरानी परम्परा की ओर ही लौटे हैं और भारतीय नारी को फिर से उसके उस पुरातन स्थान में ला खड़ा किया है जहाँ वह कभी थी.....।'


अपने अध्यक्षीय भाषण में सरोजिनी नायडू ने भारत के सामाजिक, आर्थिक औद्योगिक और बौद्धिक विकास की आवश्यकता की बात की। प्रभावशाली शब्दों में उन्होंने भारत की जनता को अपने देश की स्वाधीनता के लिए हिम्मत और एकता के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा, 'स्वाधीनता संग्राम में भय एक अक्षम्य विश्वासघात है और निराशा एक अक्षम्य पाप है।'
==हिंदी विश्वकोश पर बने लेखों की सूची==
उनका यह भी मानना था कि भारतीय नारी कभी भी कृपा की पात्र नहीं थी, वह सदैव से समानता की अधिकारी रही हैं। उन्होंने अपने इन विचारों के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास जाग्रत करने का काम किया।  पितृसत्ता के समर्थकों को भी नारियों के प्रति अपना नजरिया बदलने के लिये प्रोत्साहित किया। भारत के इतिहास में वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की प्रमुख नायिका के रूप में जानीं गयीं। भय को वह देशद्रोह के समान ही मानती थीं। 
*1925 के कानपुर कांग्रेस अधिवेशन में सरोजनी नायडू ने अधिवेशन की अध्यक्षता की।
*'गोलमेज कांफ्रेंस' में महात्मा गांधी के प्रतिनिधि मंडल में सरोजनी नायडू भी सम्मिलित थीं।
*रौलट एक्ट का विरोध करने के लिए सरोजनी नायडू ने महिलाओं को संगठित किया।
*जब 1932 में महात्मा गांधी जेल गये थे, उस समय आंदोलन को रफ्तार देने और बढ़ाने का दायित्व सरोजनी नायडू को सौंप कर गये थे।  गांधी जी ने कहा था- 'तुम्हारे हाथों में भारत की एकता का काम सौंपता हूं।'  भारत का पक्ष रखने के लिए महात्मा गांधी ने उन्हें अमेरिका भेजा था।
*सरोजनी नायडू ने महिलाओं का नेतृत्व करते समय नारी समाज की उन्नति के अथक प्रयास किये।
*भारत के स्वतंत्र होने पर उन्हें [[उत्तर प्रदेश]] का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
==साहस की प्रतीक==
सरोजिनी नायडू ने भय कभी नहीं जाना था और न ही निराशा कभी उनके समीप आई थी। वह साहस और निर्भीकता का प्रतीक थीं। पंजाब में सन 1919 में [[जलियाँवाला बाग़|जलियांवाला बाग]] में हुए हत्याकांड के बारे में कौन नहीं जानता होगा। आम सभाओं पर [[जनरल डायर]] के द्वारा लगाय गए प्रतिबंध के विरोध में जमा हुए सैकड़ों नर-नारियों की निर्दयता से हत्या कर दी गई थी। वैसे भी [[रॉलेट एक्ट]] के पारित होने से देश में पहले से ही काफ़ी तनाव था। इस एक्ट ने न्यायाधीश को राजनैतिक मुकदमों को बिना किसी पैरवी के फैसला करने और बिना किसी क़ानूनी कार्यवाही के संदिग्ध राजनीतिज्ञों को जेल में डालने की छूट दे दी थी। जलियांवाला हत्याकांड को लेकर समस्त देश में क्रोध भड़क उठा। उस पाशविक अत्याचार की [[रबीन्द्रनाथ ठाकुर|गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर]] के मन में उग्र प्रतिक्रिया हुई और उन्होंने अपनी 'नाइट हुड' की पदवी लौटा दी। सरोजिनी नायडू ने भी अपना 'कैसर-ए-हिन्द' का ख़िताब वापस कर दिया जो उन्हें सामाजिक सेवाओं के लिय कुछ समय पहले ही दिया गया था। [[अहमदाबाद]] में गांधी जी के [[साबरमती आश्रम]] में स्वाधीनता की प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर करने वाले आरम्भिक स्वयं सेवकों में वह एक थीं।
==सत्याग्रह और महिलायें==
शुरू में गांधीजी यह नहीं चाहते थे कि महिलाएँ सत्याग्रह में सक्रिय रूप से भाग लें। उनकी प्रवृत्तियों को गांधी जी कताई, स्वदेशी, शराब की दुकानों पर धरना आदि तक सीमित रखना चाहते थे। लेकिन सरोजिनी नायडू, कमला देवी चट्टोपाध्याय और उस समय की देश की प्रमुख महिलाओं के आग्रह को देखते हुए उन्हें अपनी राय बदल देनी पड़ी।
==नमक सत्याग्रह==
वास्तव में सन् 1930 के प्रसिद्ध नमक सत्याग्रह में सरोजिनी नायडू गांधी जी के साथ चलने वाले स्वयं सेवकों में से एक थीं। गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद [[गुजरात]] में [[धरासणा]] में लवण-पटल की पिकेटिंग करते हुए जब तक स्वयं गिरफ्तार न हो गईं तब तक वह आंदोलन का संचालन करती रहीं। धरासणा वह स्थान था जहाँ पुलिस ने शान्तिमय और अहिंसक सत्याग्रहियों पर घोर अत्याचार किए थे। सरोजिनी नायडू ने उस परिस्थिति का बड़े साहस के साथ सामना किया और अपने बेजोड़ विनोदी स्वभाव से वातावरण को सजीव बनाये रखा।
नमक सत्याग्रह खत्म कर दिया गया। गांधी-इरविन समझौते पर गांधी जी और भारत के वाइसराय लार्ड इरविन ने हस्ताक्षर किये। यह एक राजनैतिक समझौता था। बाद में गांधी जी को सन
==दूसरा गोलमेज सम्मेलन==
1931 में लंदन में होने वाले दूसरे गोलमेज सम्मेलन में आने के लिए आमंत्रित किया गया। उसमें भारत की स्व-शासन की माँग को ध्यान में रखतें हुए संवैधानिक सुधारों पर चर्चा होने वाली थी। उस समय गांधी जी के साथ, सम्मेलन में शामिल होने वाले अनेक लोगों में से सरोजिनी नायडू भी एक थीं।
 
सन 1935 के भारत सरकार के एक्ट ने भारत को कुछ संवैधानिक अधिकार प्रदान किए। लम्बी बहस के बाद, कांग्रेस, देश की प्रांतीय विधान सभाओं में प्रवेश करने के लिए तैयार हो गयी। उसने चुनाच लड़े और देश के अधिकतर प्रांतों में अपनी सरकारें बनाई जिन्हें अंतरिम सरकारों का नाम दिया गया।
==भारत छोड़ो आंदोलन==
इसके कुछ समय बाद ही दूसरा विश्व युद्ध छिड़ गया। अंग्रेज़ सरकार ने भारत को उस युद्ध में शामिल होने के लिए मज़बूर किया जिसके विरोध में कांग्रेस की प्रांतीय सरकारों ने त्यागपत्र दे दिए। फिर से समझौते के लिए कुछ प्रयास किए गए, जिसमे अंग्रेज सरकार के भारत के राज्यमंत्री सर स्टफर्ड क्रिप्स का प्रयास बहुत ही महत्वपूर्ण रहा। क्रिप्स मिशन असफल रहा। अब कांग्रेस के पास जन आंदोलन शुरू करने का ही एक रास्ता रह गया था।
 
8 अगस्त सन् 1942 को कांग्रेस के [[मुंबई|बम्बई]] में हुए अधिवेशन में गांधी जी ने ब्रिटिश शासकों को भारत छोड़कर चले जाने को आख़िरी बार कहा और साथ ही देश की जनता को 'करो या मरो' का आदेश दिया। 'भारत छोड़ो' आंदोलन की यह युद्ध-पुकार थी और भारत के स्वाधीनता संग्राम का वह आख़िरी पड़ाव था।
 
8 अगस्त की मध्यरात्रि में गांधी जी और कांग्रेस कार्यकारी समिति के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। गांधी जी को उनके निजी मंत्री [[महादेव देसाई]] और सरोजिनी नायडू के साथ [[पुणे]] के आगा ख़ाँ महल में रखा गया। वहीं कुछ समय बाद [[कस्तूरबा गाँधी|कस्तूरबा]] को भी लाया गया।
 
उन कष्टप्रद दिनों में जब गांधी जी का मन उदास हुआ करता था तब अपने खराब स्वास्थ्य के बावजूद सरोजिनी नायडू अपने विनोद और हंसी से उनका मन बहलाने की कोशिश करतीं। आगा ख़ाँ महल में पहले महादेव देसाई, फिर कस्तूरबा की मृत्यु के बाद, सरोजिनी नायडू चट्टान की भाँति अडिग गांधी जी के साथ रहीं। जब गांधी जी ने आमरण अनशन शुरू किया और जब वह जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे तब सरोजिनी नायडू ने ही बड़ी ममता के साथ उनकी सेवा की।
==स्वाधीनता का प्रभात==
दो साल बाद, गांधी जी और दूसरे कांग्रेस नेता एक के बाद एक रिहा कर दिए गए और फिर से अंग्रेज़ सरकार और भारत के भिन्न-भिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत और समझौते के प्रयासों का दौर शुरू हो गया। इनमें [[मुस्लिम लीग]] और कांग्रेस एक-दूसरे के विचारों से असहमत थे। मार्च सन 1946 में ब्रिटिश कैबिनेट मिशन भारत आया लेकिन उसके प्रयास असफल रहे। इसके बावजूद केन्द्रीय तथा प्रांतीय विधान सभाओं के लिए चुनाव लड़ने के प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया गया।
==मुस्लिम लीग की माँग==
[[जवाहर लाल नेहरू]] के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाई गई। कांग्रेस यह चाहती थी कि अखंडित भारत को ही राजनैतिक सत्ता सौंप दी जाए, जबकि मुस्लिम लीग भारत के मुसलमानों के लिए अलग राज्य बनाने की माँग कर रही थी। समझौते के लिए बहुत से प्रस्ताव पेश किए गए, लेकिन जब मुस्लिम लीग के साथ समझौता नहीं हो सका तो न चाहते हुए भी कांग्रेस ने भारत के बंटवारे की बात को मंज़ूर कर लिया। बहुत बार कांग्रेस पार्टी के  भीतर उठे विवादों को हल करने में भी सरोजिनी जी ने 'संकटमोचक' की भूमिका निभायी। श्रीमती [[एनी बेसेन्ट]] की प्रिय मित्र और गांधी जी की प्रिय शिष्या ने अपना सम्पूर्ण जीवन देश के लिए अर्पित कर दिया।
==भारत का बंटवारा==
14 अगस्त सन् 1947 की रात ठीक 12 बजे भारत और पाकिस्तान, दो अलग-अलग राष्ट्र घोषित कर दिये गये और जवाहर लाल नेहरू को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। देश का बंटवारा होने के साथ ही भयानक साम्प्रदायिक दंगे हुए और खून की नदियाँ बहीं। संघर्ष और यंत्रणाओं के साथ हमें स्वाधीनता मिली।
==राज्यपाल==  
स्वाधीनता की प्राप्ति के बाद, देश को उस लक्ष्य तक पहुँचाने वाले नेताओं के सामने अब दूसरा ही कार्य था। आज तक उन्होंने संघर्ष किया था। किन्तु अब राष्ट्र निर्माण का उत्तरदायित्व उनके कंधों पर आ गया। कुछ नेताओं को सरकारी तंत्र और प्रशासन में नौकरी दे दी गई थी। उनमें सरोजिनी नायडू भी एक थीं। उन्हें [[उत्तर प्रदेश]] का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया। वह विस्तार और जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रांत था। उस पद को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं अपने को 'क़ैद कर दिये गये जंगल के पक्षी' की तरह अनुभव कर रही हूँ।' लेकिन वह प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की इच्छा को टाल न सकीं जिनके प्रति उनके मन में गहन प्रेम व स्नेह था। इसलिए वह [[लखनऊ]] में जाकर बस गईं और वहाँ सौजन्य और गौरवपूर्ण व्यवहार के द्वारा अपने राजनैतिक कर्तव्यों को निभाया।
==गांधी जी की हत्या==
*30 जनवरी सन् 1948 को गांधी जी की हत्या के बाद देश भर में उदासी छा गई। शोकातुर प्रधानमंत्री ने गांधी जी को श्रृद्धांजली देते हुए कहा कि 'हमारे बीच से एक रोशनी बुझ गई है।' *सरोजिनी नायडू ने कहा, 'यही उनके लिए एक महान मृत्यु थी.....व्यक्तिगत दुख मनाने का समय अब बीत चुका है। अब समय आ गया है कि हमें सीना तानकर यह कहना हैः 'महात्मा गांधी का विरोध करने वालों की चुनौती हम स्वीकार करेंगे।'
*सरोजिनी नायडू को विशेष रूप से राष्ट्रीय नेता और नारी-मुक्ति की समर्थक के रूप में याद किया जाता है। राष्ट्रीय नेता होने के कारण उन्हें हमेशा देश की राजनैतिक निर्भरता की चिन्ता रहती थी और एक नारी होने के कारण वह भारतीय नारी की दुखद स्थिति से परिचित थीं। नारी के प्रति हो रहे अन्यायों के विरुद्ध उन्होंने आवाज उठाई। नारियों को उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित रखने वाली सामाजिक व्यवस्था का उन्होंने विरोध किया। वह नारीवादी नहीं थीं लेकिन भारत की नारियों को जिन समस्याओं और कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था उनका उन्हें पूरा-पूरा ख़्याल था। नारियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता था और बहुत-सी सामाजिक रूढ़ियों ने उन्हें जकड़ रखा था।
==नारी अधिकारों की समर्थक==  
सरोजिनी नायडू 'नारी मुक्ति आंदोलन' को भारत के स्वाधीनता संग्राम का एक हिस्सा ही समझती थीं। वह अपने शब्दों की पूर्ण शक्ति के साथ पुरुष और स्त्रियों, दोनों के बीच जाकर नारी शिक्षा की आवश्यकताओं पर जोर देती थीं। अंधकारमय मध्य युग से पहले नारी को जो प्रतिष्ठा प्राप्त थी उसकी वह अपने श्रोताओं को हमेशा याद दिलाती थीं। सरोजनी नायडू की नज़रों में शिक्षा नारी मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम था। शिक्षित होकर ही नारी अपने परिवार और समाज को बेहतर बना सकती है। इस उक्ति में उनका पूर्ण विश्वास था कि 'जो हाथ पालना झुलाते हैं वही दुनिया पर शासन करते हैं।' लेकिन उनका यह भी विश्वास था कि किसी अज्ञानी और अशिक्षित नारी का हाथ यह नहीं कर सकता है।
 
स्त्रियों को अपनी क्षमता और अधिकारों का बोध होना भी उनके मत में नारी-शिक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण था। जहाँ-जहाँ वह गईं वहाँ-वहाँ उन्होंने इन बातों पर ज़ोर दिया। नारी के विकास के विषय में उनकी चिन्ता को देखते हुए उनका 'अखिल भारतीय महिला परिषद' (आल इंडिया विमेन्स कान्फ्रेंस) से जुड़ना स्वाभाविक ही था। यह देश की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण नारी संस्था है। आज भारत की नारियों को जो राजनैतिक, आर्थिक और क़ानूनी अधिकार प्राप्त हैं, उन्हें दिलाने में इस संस्था का बहुत बड़ा योगदान रहा है। लेडी धनवती रामा राव और दूसरी अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं की सेवाओं का इस संस्था को लाभ मिला है। [[विजयलक्ष्मी पंडित]], [[कमलादेवी चट्टोपाध्याय]], [[लक्ष्मी मेनन]], [[हंसाबेन मेहता]] जैसी बहुत सी महिलाएँ इससे जुड़ी रही हैं। ब्रिटेन की नारी-अधिकारों की प्रसिद्ध समर्थक मार्गरेट कजिन्स का सक्रिय मार्गदर्शन भी इस संस्था को प्राप्त हुआ। अपने जीवन के सक्रिय वर्षों में सरोजिनी नायडू इस संस्था की गतिविधियों की प्रेरणा रही। भारतीय नारी मुक्ति के आंदोलन में दिये गये उनके योगदान और इस संस्था के लिए उनकी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय महिला परिषद के नई दिल्ली स्थित केन्द्रीय दफ्तर को 'सरोजिनी हाउस' नाम दिया गया है। उन्होंने जो इस देश की महिलाओं के लिए किया है उसके लिए उन्हें याद किया जाएगा। उनके प्रभावशाली शब्दों के लिए याद किया जाएगा, जिन्होंने नारी को उसके अधिकारों और शक्ति के प्रति जागरूक किया और जिनके द्वारा वे बेहतर नागरिक और बेहतर इंसान बनीं।
==व्यक्तित्व और सौन्दर्य प्रेम==
राजनैतिक और सामाजिक उत्तरदायित्वों के बावजूद सरोजिनी नायडू हंसी और गीत की प्रतीक थीं। कोई बड़ी आम सभा हो या विद्यार्थियों और स्त्रियों का छोटा समुह, या किसी विश्वविद्यालय का दीक्षान्त हो, उनका व्याख्यान किसी गीत के समान ही होता। उनकी वक्तव्य संगीतमय शब्दों में होता था जो समय आने पर सिंह की गर्जना भी बन सकती थी। सौन्दर्य और रंगों के प्रति उनका प्रेम अदभुत था। उस समय के गम्भीर चेहरे वालों और सफेद खाकी की पोशाक पहनने वाले नेता और स्वयं सेवकों से भिन्न वह रंग-बिरंगी चमकीली रेशमी साड़ियाँ पहनती थीं। वह भारी नेक्लेस और खूबसूरत चीज में दिलचस्पी लेती थीं। जब वह सन 1928 में अमेरिका गईं तब जगमगाते सिने तारकों से भरे हालीवुड में जाना भी नहीं भूली थीं।
 
सुन्दर वस्त्रों की तरह स्वादिष्ट भोजन भी उन्हें बड़ा प्रिय था। चॉकलेट और कबाब तो उन्हें बहुत ही पसंद था। वह इतनी नटखट थीं कि खाने के बारे में डॉक्टरों की पाबन्दियों को नज़रअन्दाज करने में उन्हें बड़ा मजा आता था। औपचारिक भोजन दावतों में बैठने की सजा उन्हें भुगतनी पड़ती थी, लेकिन बम्बई के जुहू तट पर भेल-पुरी वह बड़ी लज्जत के साथ खाती थीं।
 
राज्यपाल होने पर भी, सरोजिनी नायडू का व्यवहार हमेशा अनौपचारिक होता था। लोगों की विशेषकर युवा लोगों की वह स्वयं कष्ट सह कर भी सहायता करती थीं। देश की युवा पीढ़ी को वह बहुत चाहती थीं और उन पर उनका गहरा विश्वास था। आखिर तक उन्होंने अपनी युवा भावनाओं को बनाये रखा था और बढ़ती उम्र और बीमारियों को चुनौती दी थी। अक़्सर सरोजिनी नायडू लखनऊ में अपने सरकारी निवास स्थान में जाड़ों की धूप में बैठी जासूसी उपन्यास पढ़ती हुई नज़र आ जाती थीं।
 
वाणी और व्यवहार में सरोजिनी नायडू स्नेह की मूर्ति थीं। वह स्नेहमयी पुत्री, पत्नी और माँ थीं। दुनिया भर में अपने मित्र बना लें ऐसी उनकी क्षमता थी। अपने उन मैत्री सम्बन्धों को उन्होंने बड़े प्यार से निभाया था। गांधी जी और गोखले के अतिरिक्त रवीन्द्रनाथ ठाकुर और [[सी0 एफ0 एन्ड्रूज]] उनके अच्छे मित्रों में से थे। गांधी जी को तो वह 'एक मित्र और गुरु' की तरह चाहती थीं। उनके साथ वह खुल कर हंसती थीं, जो गांधी जी का भी एक विशेष गुण था। गांधी जी के साथ जिस तरह आजादी के साथ वह व्यवहार करती थीं, ऐसा करने का और किसी नेता को शायद ही साहस होता था। जवाहरलाल नेहरू को वह अपना छोटा भाई समझती थीं और [[इन्दिरा गांधी]] के जन्म का उन्होंने 'भारत की नयी चेतना' कहकर स्वागत किया था। वह बात वास्तव में भविष्य की सूचक सिद्ध हुई।
==भारत कोकिला==
सरोजिनी नायडू की जब 2 मार्च सन 1949 को मृत्यु हुई तो उस समय वह राज्यपाल के पद पर ही थीं। लेकिन उस दिन मृत्यु तो केवल देह की हुई थी। अपनी एक कविता में उन्होंने मृत्यु को कुछ देर के लिए ठहर जाने को कहा था.....
<poem>
<poem>
मेरे जीवन की क्षुधा, नहीं मिटेगी जब तक
अंग्रेज़ी भाषा
मत आना हे मृत्यु , कभी तुम मुझ तक।
अक्षरअनन्य
अज्ञेय, सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन
अतिशयोक्ति अलंकार
अनुप्रास अलंकार
अनूप शर्मा
अपभ्रंश भाषा
अमरेश
अमीर ख़ुसरो
अमृता प्रीतम
अयोध्याप्रसाद खत्री
अयोध्यासिंह उपाध्याय
अरबिंदो घोष
अरबी भाषा
अर्जुनदास केडिया
अर्थालंकार
अलंकार
अली मुहिब खाँ
अवधी भाषा
अवहट्ट
अविकारी शब्द
अश्वघोष
अष्टछाप कवि
असमिया भाषा
आंडाल
आठवीं अनुसूची
आदि शंकराचार्य
आधुनिक हिंदी
आरमाइक भाषा
आरमाइक लिपि
आरसी प्रसाद सिंह
आलम
उड़िया भाषा
उत्प्रेक्षा अलंकार
उदय प्रकाश
उद्धरण चिह्न
उपमा अलंकार
उपमेयोपमा अलंकार
उपवाक्य
उपसर्ग
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उल्लेख अलंकार
उसमान
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कन्नौजी बोली
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कृष्णदास
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छन्द
छीतस्वामी
छीहल
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जमाल
जयदेव
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टोडरमल
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तुकाराम
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दूलह
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देव
देवनागरी लिपि
देवनागरी लिपि का विकास
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दोहा
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ध्रुवदास
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पश्चिमी पहाड़ी बोली
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बीरबल
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रामधारी सिंह दिनकर
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रामविलास शर्मा
राय कृष्णदास
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लालचंद
लिंग
लिपि
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वट्टेळुत्तु लिपि
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शूद्रक
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श्रीहर्ष
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संवत
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सैय्यद मुबारक़ अली बिलग्रामी
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स्त्रीलिंग
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स्वर (व्याकरण)
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हड़प्पा लिपि
हरियाणवी बोली
हरिवंश राय बच्चन
हरिषेण
हिंदी
हिंदी अकादमी
हिंदी अकादमी की संचालन समिति
हिंदी अकादमी के सम्मान और पुरस्कार
हिंदी अकादमी: योजनाएँ एवं कार्यक्रम
हिंदी का मानकीकरण
हिंदी की अखिल भारतीयता का इतिहास
हिंदी की उपभाषाएँ एवं बोलियाँ
हिंदी के अर्थ और नाम
हिंदी दिवस
हिंदी वर्णमाला (व्याकरण)
हिंदी साहित्य
हितहरिवंश
हृदयराम
हॉलैंडी हिंदी
</poem>
</poem>
उनका जीवन लाभदायक और परिपूर्ण था। उस जीवन से उन्हें आत्मसंतुष्टि प्राप्त हुई थी या नहीं यह तो कोई नहीं बता सकता लेकिन जितना उनके जीवन के बारे में जानते हैं उससे इतना तो ज़रूर कहा जा सकता है कि उन्होंने अपने जीवन को एक उद्देश्य दिया था और उसी के अनुरूप वह जीती रही थीं। ऐसा जीवन बहुत लोगों को नसीब नहीं होता। 'गीत के विषाद से जीवन का विषाद' मिटा देने के लिए वह प्रयास करती रहीं। उसी तरह उन्होंने जीवन बिताया। आने वाली पीढ़ियाँ इसी रूप में उन्हें याद करती रहेंगी। उन्हें याद रखने का यही एक ढंग है— 'सरोजिनी नायडू जो प्रेम और गीत के लिए जीती रहीं।' जैसा गांधी जी ने कहा था, सच्चे अर्थों में वह 'भारत कोकिला' थीं।
=================
==स्मृति में डाक टिकट==
पेज - 117
13 फरवरी 1964 को भारत सरकार ने उनकी जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में 15 नए पैसे का डाक टिकट भी चलाया। इस महान देशभक्त को देश ने बहुत सम्मान दिया। सरोजिनी नायडू को विशेषत: 'भारत कोकिला', 'राष्ट्रीय नेता' और 'नारी मुक्ति आन्दोलन की समर्थक' के रूप में सदैव याद किया जाता रहेगा।
 
==बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.poetseers.org/the_great_poets/in/sarojini_naidu/ सरोजनी नायडू की जीवनी और कविताएं]
*[http://www.rediff.com/freedom/19let1.htm सरोजनी नायडू द्वारा लिखे पत्र]


[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]
* महाभारत का फारसी अनुवाद अकबर के काल में हुआ जिसे 'रज्मनामा' के नाम से जाना गया।
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]
* रामचरितमानस को ग्रियर्सन ने  'करोड़ों लोगों की बाइबिल' कहा है।
[[Category:कवि]]
* कॉबेल ने मुकुंद राम को ' बंगाल का क्रेव' कहा है।
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]
* अकबर ने  बीरबल को 'कविप्रिय' कहा है।
__INDEX__
* नरहरि को 'महापात्र' की उपाधि दी गयी थी।
* मीर सैयद अली व ख्वाजा अब्दुस्समद कोप 'सिरिकलम' की उपाधि से विभूषित किया गया था।
* मुहम्मद हुसैन को 'जरींकलम' की उपाधि से विभूषित किया गया था।
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==
<references/>


 
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04:47, 6 अप्रैल 2026 के समय का अवतरण


मई 2026 Asha जुलाई 2026


राष्ट्रीय शाके- 1948
राष्ट्रीय ज्येष्ठ 11 से राष्ट्रीय आषाढ़ 09 तक
विक्रम संवत- 2083
ज्येष्ठ बदी 01 से आषाढ़ बदी 01 तक
जून 2026 इस्लामी हिजरी- 1447-48
ज़िलहिज्ज 14 से मोहर्रम 14 तक
बंगला संवत- 1433
बंग ज्येष्ठ 17 से बंग आषाढ़ 15 तक
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
रवि
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
रवि
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
रवि
सोम

v

मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
रवि
सोम
मंगल
बुध


इस महीने की विशेष तिथि एवं घटनाएँ

प्रमुख दिवस एवं घटनाएँ
व्रत-उत्सव
जन्म दिवस
मृत्यु दिवस


मई 2026 Asha जुलाई 2026



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हिंदी विश्वकोश पर बने लेखों की सूची

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अमृता प्रीतम
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अयोध्यासिंह उपाध्याय
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असमिया भाषा
आंडाल
आठवीं अनुसूची
आदि शंकराचार्य
आधुनिक हिंदी
आरमाइक भाषा
आरमाइक लिपि
आरसी प्रसाद सिंह
आलम
उड़िया भाषा
उत्प्रेक्षा अलंकार
उदय प्रकाश
उद्धरण चिह्न
उपमा अलंकार
उपमेयोपमा अलंकार
उपवाक्य
उपसर्ग
उर्दू भाषा
उल्लेख अलंकार
उसमान
कन्नड़ भाषा
कन्नौजी बोली
कबीर
कलकतिया हिंदी
कलिंग लिपि
कल्हण
कवींद्र
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बांग्ला लिपि
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बिहारी लाल
बीर
बीरबल
बुन्देली बोली
बेनी
बैरीसाल
बैसवाड़ी बोली
बोडो भाषा
ब्रजभाषा
ब्राह्मी लिपि
भक्तिकाल
भगवतीचरण वर्मा
भट्टोजिदीक्षित
भवभूति
भारत रत्न
भारतेन्दु हरिश्चंद्र
भारवि
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भिखारी दास
भूपति राज गुरुदत्त सिंह
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भोजपुरी भाषा
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मंझन
मंडन
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मतिराम
मनोहर
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मलयालम भाषा
मलूकदास
महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय
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महापात्र नरहरि बंदीजन
महावीर प्रसाद द्विवेदी
माखन लाल चतुर्वेदी
मागधी भाषा
माघ कवि
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मुक्तिबोध गजानन माधव
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पेज - 117

  • महाभारत का फारसी अनुवाद अकबर के काल में हुआ जिसे 'रज्मनामा' के नाम से जाना गया।
  • रामचरितमानस को ग्रियर्सन ने 'करोड़ों लोगों की बाइबिल' कहा है।
  • कॉबेल ने मुकुंद राम को ' बंगाल का क्रेव' कहा है।
  • अकबर ने बीरबल को 'कविप्रिय' कहा है।
  • नरहरि को 'महापात्र' की उपाधि दी गयी थी।
  • मीर सैयद अली व ख्वाजा अब्दुस्समद कोप 'सिरिकलम' की उपाधि से विभूषित किया गया था।
  • मुहम्मद हुसैन को 'जरींकलम' की उपाधि से विभूषित किया गया था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ


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