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| {द्विसदनवाद निम्नलिखित शासन प्रणालियों में से किस एक की अनिवार्य विशिष्टता है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-94,प्रश्न-7 | | {[[भारतीय संविधान]] को निम्नलिखित में से कौन-सी अनुसूची राज्यसभा में स्थानों के आवंटन से संबंधित है? |
| |type="()"} | | |type="()"} |
| -अध्यात्मक व्यवस्था | | -[[भारत का संविधान- तीसरी अनुसूची |तीसरी अनुसूची]] |
| -संसदात्मक व्यवस्था | | +[[भारत का संविधान- चौथी अनुसूची|चौथी अनुसूची]] |
| +संघात्मक व्यवस्था
| | -[[भारत का संविधान- पांचवीं अनुसूची|पांचवीं अनुसूची]] |
| -एकात्मक व्यवस्था | | -[[भारत का संविधान- छठी अनुसूची|छठीं अनुसूची]] |
| ||द्विसदनवाद संघात्मक शासन प्रणाली की अनिवार्य विशिष्टता है। | | ||[[भारतीय संविधान]] की चौथी अनुसूची [[राज्य सभा]] में स्थानों के आवंटन से संबंधित है। |
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| {दबाव समूह की प्रमुख विशेषता है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-107,प्रश्न-22
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| -अनिश्चित कार्यकाल
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| +प्रशासन में परोक्ष भूमिका
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| -सर्वव्यापक प्रकृति
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| -संवैधानिक साधनों का आवश्यक रूप से प्रयोग
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| ||दबाव समूह की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह राजनीति एवं प्रशासन में परोक्ष भूमिका निभाता है।
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| {'अहस्तक्षेप की नीति' किसकी विशेषता है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-38, प्रश्न-15
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| -श्रेणी समाजवाद
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| -समाजवाद
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| -अकारात्मक उदारवाद
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| +नकारात्मक उदारवाद
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| ||'अहस्तक्षेप की नीति', नकारात्मक उदारवाद की विशेषता है। यह व्यक्ति की स्वतंत्रता में राज्य के किसी भी तरह के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करता है। नकारात्मक उदारवाद 16वीं से 18वीं सदी के बीच विकसित अवधारणा है जिसके प्रमुख प्रतिपादक विचारक जॉन लॉक, एडम स्मिथ एवं रिकार्डो हैं। इसके अनुसार, राज्य एक आवश्यक बुराई है तथा आर्थिक व सामाजिक क्षेत्र में राज्य की न्यूनतम भूमिका होनी चाहिए, यह व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों में विश्वास रखता है जिसमें संपत्ति का अधिकार सबसे महत्त्वपूर्ण है।
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| {'जनवादी लोकतंत्र' की अवधारणा संबंधित हैं- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-54,प्रश्न-25
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| +लोकतंत्र की मार्क्सवादी अवधारणा से
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| -लोकतंत्र कि विशिष्ट वर्गीय सिद्धांत से
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| -लोकतंत्र के बहुलवादी सिद्धांत से
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| -उपर्युक्त में से कोई नहीं
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| ||जनवादी लोकतंत्र (People's Democracy) की अवधारणा का संबंध लोकतंत्र की मार्क्सवादी धारणा से है। जनवादी लोकतंत्र की अवधारणा को विकसित करने का श्रेय [[चीन]] के साम्यवादी नेता 'माओत्से तुंग' को जाता है जिन्होंने मार्क्सवाद को एशिया की परिस्थितियों के अनुरूप ढाला जनवादी लोकतंत्र में सरकार के अंग के रूप में कुछ बुर्जुआ, पेटी बुर्जुआ, किसान और सर्वहारा वर्ग रहते हैं।
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| {लोकप्रिय संप्रभुता किसमें निहित होती है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-26,प्रश्न-24 | | {'पैकेज डील' का संबंध है: (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-121,प्रश्न-25 |
| |type="()"} | | |type="()"} |
| -[[राष्ट्रपति]] | | -[[भारत]]-[[चीन]] वार्ता से |
| -[[प्रधानमंत्री]] | | -[[भारत]]-[[पाक]] वार्ता से |
| +जनता | | +[[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की सदस्यता से |
| -संसद | | -कॉमनवेल्थ की सदस्यता से |
| ||लोकप्रिय संप्रभुता जनता में निहित है। लोकप्रिय प्रभुसत्ता का विचार नैतिक आधार पर जनता को प्रभुसत्ता का उपयुक्त पात्र मानता है। | | ||पैकेज डील का संबंध संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता से था। |
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| {किसने कहा कि "राष्ट्र दैविक आदर्श की अभिव्यक्ति एवं उसका रहस्योद्घाटन" है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-72,प्रश्न-47
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| |type="()"}
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| -[[विपिन चन्द्र पाल]]
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| +[[अरविंद घोष|अरविंद]]
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| -[[महात्मा गांधी]]
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| -[[भीमराव अम्बेडकर|बी.आर. अम्बेडकर]]
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| ||[[अरविंद घोष]] ने राष्ट्र का महिमामंडन करते हुए कहा है कि 'राष्ट्र दैविक आदर्श की अभिव्यक्ति एवं उसका रहस्योद्घाटन' है।
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| {यह कथन कि "स्वतंत्रता और समानता साथ-साथ नहीं रह सकते" किससे संबंधित है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-85,प्रश्न-14
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| -डायसी
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| +लॉर्ड एक्टन
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| -बर्लिन
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| -रूसो
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| ||लॉर्ड एक्टन स्वतंत्रता एवं समानता को परस्पर विरोधी मानते हैं। इनके अनुसार, स्वतंत्रता प्रकृति प्रदत्त है जबकि समानता प्रकृति की देन नहीं है यह कृत्रिम है। लॉर्ड एक्टन ने कहा है कि "स्वतंत्रता एवं समानता साथ-साथ नहीं रह सकते"।
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| {निम्नलिखित सरकारों की व्यवस्थाओं में दोहरा शासन किसका आवश्यक लक्षण है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-95,प्रश्न-8 | | {सर आइवर जेनिंग्स द्वारा लिखित पुस्तक कौन नहीं है? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-205,प्रश्न-34 |
| |type="()"} | | |type="()"} |
| -अध्यक्षीय | | -सम कैरेक्टरस्टिक्स ऑफ़ दि इंडियन कांस्टीट्यूशन |
| -संसदीय व्यवस्था | | -दी लॉ एंड दी कांस्टीट्यूशन |
| +संघीय व्यवस्था | | +माडर्न कांस्टीट्यूशन |
| -एकात्मक व्यवस्था | | -कैबिनेट गवर्नमेंट |
| ||केंद्रीय और प्रान्तीय सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन संघात्मक संविधान का एक परमावश्यक तत्व है। संघीय व्यवस्था केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार के रूप में दोहोरी शासन पद्धति की व्यवस्था करती है। संविधान के वे उपबंध जो संघीय व्यवस्था से संबंध रखते हैं, उनमें राज्य सरकारों की सहमति के बिना परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। | | ||'मॉडर्न कांस्टीट्यूशन' नामक पुस्तक के.सी. व्हीयर द्वारा लिखी गई है। शेष पुस्तकों को सर आइवर जेनिंग्स द्वारा लिखा गया है। |
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| {1968 का मिन्नोब्रुक सम्मेलन संबंधित है- (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-131,प्रश्न-13 | | {यदि राज्य सभा किसी संविधान संशोधन विधेयक पर लोक सभा से असहमत हो तो ऐसी स्थिति में-(नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-141,प्रश्न-25 |
| |type="()"} | | |type="()"} |
| -लोक प्रशासन से | | +संशोधन विधेयक पारित नहीं माना जाता |
| +नवीन लोक प्रशासन से
| | -दोनों सदनों की संयुक्त बैठक द्वारा इसका निर्णय होगा |
| -निजी प्रशासन से | | -लोक सभा द्वारा दो-तिहाई बहुमत से यह विधेयक पारित कर दिया जाएगा |
| -संगठन से | | -लोक सभा राज्य सभा के मत को अस्वीकृत कर देगी |
| ||वर्ष 1968 के मिन्नोब्रुक सम्मेलन के शासन लोक प्रशासन के क्षेत्र में भी नवीन विचारों का सूत्रपात हुआ है और इन विचारों को 'नवीन लोक प्रशासन' की संज्ञा दी गयी है। वर्ष 1971 में फ्रेक मेरीनी द्वारा संपादित एक पुस्तक 'नवीन लोक प्रशासन की दिशाएं-मिन्नोब्रुक परिप्रेक्ष्य' के प्रकाशन के साथ ही 'नवीन लोक प्रशासन' को मान्यता प्राप्त हुई है। | | ||संविधान संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत से स्वीकृत किया जाना आवश्यक है। दोनों सदनों में असहमति की स्थिति में विधेयक अंतिम रूप से समाप्त हो जाएगा क्योंकि संविधान संशोधन के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की संविधान में कोई व्यवस्था नहीं हैं। |
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| {इनमें से किस घटना को तनाव शैथिल्य से जोड़ना अनुचित होगा? (नागरिक शास्त्र ,पृ.सं-114,प्रश्न-22
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| |type="()"}
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| +नाटो (NATO) का गठन
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| -निक्सन की चीन यात्रा
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| -साल्ट (SALT) की संधियां
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| -[[अमेरिका]] की वियतनाम से वापसी
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| ||नाटो (नार्थ एटलांटिक ट्रिटी आर्गेनाइजेशन) एक सैन्य गठबंधन है जिसकी स्थापना 4 अप्रैल, 1949 को हुई थी। इस संगठन ने सामूहिक सुरक्षा की व्यवस्था अपनायी है जिसके अनुसार इस संगठन के किसी सदस्य देश के ऊपर किसी अन्य देश द्वारा हमले की स्थिति में संगठन के सदस्य देश उसकी आक्रमणकारी देश से रक्षा करते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य तीनों घटनाएं तनाव शैथिल्य से संबंधित हैं।
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