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	<title>स्वयं प्रकाश - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>रविन्द्र प्रसाद: '{{सूचना बक्सा साहित्यकार |चित्र=Swayam-Prakash.jpg |चित्र का नाम...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
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		<updated>2020-08-29T09:20:34Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;{{सूचना बक्सा साहित्यकार |चित्र=Swayam-Prakash.jpg |चित्र का नाम...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Swayam-Prakash.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=स्वयं प्रकाश&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=स्वयं प्रकाश&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[20 जनवरी]], [[1947]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[इंदौर]], [[मध्य प्रदेश]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[7 दिसम्बर]], [[2019]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[मुम्बई]], [[महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पालक माता-पिता=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=[[हिंदी साहित्य]]&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=जलते जहाज पर, ज्योति रथ के सारथी, उत्तर जीवन कथा, बीच में विनय, 'ईंधन' और सूरज कब निकलेगा आदि।&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=एमए ([[हिंदी]]), पीएचडी ([[1980]]), मैकेनिकल इंजीनियरिंग&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=राजस्थान साहित्य अकादमी, रांघेय राघव पुरस्कार, पहल सम्मान, सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार, विशिष्ट साहित्यकार सम्मान आदि।&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=[[साहित्यकार]], [[कहानीकार]], [[उपन्यासकार]]&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=स्वयं प्रकाश को [[प्रेमचंद]] की परंपरा का महत्वपूर्ण कथाकार माना जाता है। इनकी कहानियों का अनुवाद रूसी भाषा में भी हो चुका है।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}'''स्वयं प्रकाश''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Swayam Prakash'', जन्म- [[20 जनवरी]], [[1947]]; मृत्यु- [[7 दिसम्बर]], [[2019]]) [[हिंदी]] [[साहित्यकार]] थे। मुख्य रूप से उन्होंने एक [[कहानीकार]] के रूप में प्रसिद्धि पाई। [[उपन्यास]] तथा हिंदी की और भी कई विधाओं को उन्होंने अपनी कलम से समृद्ध बनाया। स्वयं प्रकाश के लिखे उपन्यास 'जलते जहाज पर' ([[1982]]), 'ज्योति रथ के सारथी' ([[1987]]), 'उत्तर जीवन कथा' ([[1993]]), 'बीच में विनय' ([[1994]]) और 'ईंधन' ([[2004]]) हैं। ‘सूरज कब निकलेगा’ [[राजस्थान]] के मारवाड़ इलाके में 70 के दशक में आई [[बाढ़]] पर लिखी गयी [[कहानी]] है। राजस्थान स्वयं प्रकाश की कहानियों में अक्सर पाया जाता था।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
20 जनवरी, 1947 को [[इंदौर]] में जन्मे स्वयं प्रकाश अपनी कहानियों और उपन्यासों के लिये विख्यात थे। उन्होंने हिंदी से एमए किया था और साल [[1980]] में उन्हें पीएचडी की उपाधि मिली। इसके अलावा उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री भी हासिल की थी। कहानी लेखन शुरू करने से पहले वह कविताएं लिखते थे और विभिन्न मंचों पर इनका पाठ भी किया करते थे। उन्होंने पांच उपन्यास लिखे जबकि उनके नौ कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वरिष्ठ कथाकार स्वयं प्रकाश को [[प्रेमचंद]] की परंपरा का महत्वपूर्ण कथाकार माना जाता है। इनकी कहानियों का अनुवाद रूसी भाषा में भी हो चुका है। स्वयं प्रकाश 'हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड' में सतर्कता अधिकारी और [[हिंदी]] अधिकारी रहे थे। विगत लगभग दो दशकों से वह [[भोपाल]] में रह रहे थे। प्रगतिशील लेखक संघ की मुखपत्रिका ‘वसुधा’ और बच्चों की चर्चित पत्रिका ‘चकमक’ के संपादक रहे स्वयं प्रकाश के एक दर्जन से अधिक कहानी संग्रह और पांच उपन्यास प्रकाशित हुए थे। &lt;br /&gt;
==भाषा-शैली==&lt;br /&gt;
अपनी अधिकतर रचनाओं में वे मध्यम वर्गीय जीवन के विविध पक्षों को सामने लाते हुए स्वयं प्रकाश अंतर्विरोधों, कमजोरियों और ताकतों को कुछ इस तरह से प्रस्तुत करते हैं कि वे हमारे अपने अनुभव संसार का हिस्सा बन जाते हैं। साम्प्रदायिकता एक और ऐसा इलाका है जहां स्वयं प्रकाश की रचनाशीलता अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शित होती है। स्वयं प्रकाश की खिलंदड़ी भाषा और अत्यधिक सहज शैली का निजी और मौलिक प्रयोग उन्हें हमारे समय के सर्वाधिक लोकप्रिय कथाकार बनाता हैं।&lt;br /&gt;
==लेखन कार्य==&lt;br /&gt;
स्वयं प्रकाश के लिखे [[उपन्यास]] 'जलते जहाज पर' ([[1982]]), 'ज्योति रथ के सारथी' ([[1987]]), 'उत्तर जीवन कथा' ([[1993]]), 'बीच में विनय' ([[1994]]) और 'ईंधन' ([[2004]]) हैं। ‘सूरज कब निकलेगा’ [[राजस्थान]] के मारवाड़ इलाके में 70 के दशक में आई [[बाढ़]] पर लिखी गयी कहानी थी। राजस्थान में रहते हुए स्वयं प्रकाश ने अपने मित्र मोहन श्रोत्रिय के साथ लघु पत्रिका ‘क्यों’ का संपादन-प्रकाशन किया तो ‘फीनिक्स’, ‘चौबोली’ और ‘सबका दुश्मन’ जैसे [[नाटक]] भी लिखे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके अलावा 'मात्रा और भार' ([[1975]]), 'सूरज कब निकलेगा' ([[1981]]), 'आसमां कैसे-कैसे' ([[1982]]), 'अगली किताब' ([[1988]]), 'आएंगे अच्छे दिन भी' ([[1991]]), 'आदमी जात का आदमी' ([[1994]]), 'अगले जनम' ([[2002]]), 'संधान' ([[2006]]), 'छोटू उस्ताद' ([[2015]]) नाम से उनके कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://thewirehindi.com/103561/hindi-writer-swayam-prakash-passes-away/ |title=हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार स्वयं प्रकाश का निधन|accessmonthday=29 अगस्त|accessyear=2020 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=thewirehindi.com |language=हिंदी}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
==सम्मान तथा पुरस्कार==&lt;br /&gt;
अपने समकालीन कथाकारों-कवियों-संस्कृतिकर्मियों पर केन्द्रित रेखाचित्रों के संकलन 'हमसफ़रनामा' के लिए स्वयं प्रकाश के गद्य और चित्रण की बड़ी चर्चा हुई है। इससे पहले स्वयं प्रकाश को 'राजस्थान साहित्य अकादमी' के 'रांघेय राघव पुरस्कार' तथा 'पहल सम्मान' से नवाजा जा चुका है। उन्हें 'वनमाना सम्मान', 'सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार', 'विशिष्ट साहित्यकार सम्मान', 'भवभूति सम्मान' भी मिला। वर्ष [[2011]] के प्रतिष्ठित ‘आनंद सागर कथाक्रम सम्मान’ से भी नवाजा गया। यह सम्मान हर वर्ष कथा लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान करने वाले लेखक को दिया जाता है।&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
कथाकार स्वयं प्रकाश की मृत्यु [[7 दिसम्बर]], [[2019]] को [[मुम्बई]], [[महाराष्ट्र]] में हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्यकार]][[Category:कहानीकार]][[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]][[Category:आधुनिक साहित्यकार]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>रविन्द्र प्रसाद</name></author>
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