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	<title>समता दिवस - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>रविन्द्र प्रसाद: 'समता दिवस '''समता दिवस''' प्रत्येक व...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
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		<updated>2021-04-27T04:17:38Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&lt;a href=&quot;/india/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Samta-Diwas.jpg&quot; title=&quot;चित्र:Samta-Diwas.jpg&quot;&gt;thumb|250px|समता दिवस&lt;/a&gt; &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;समता दिवस&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; प्रत्येक व...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;[[चित्र:Samta-Diwas.jpg|thumb|250px|समता दिवस]]&lt;br /&gt;
'''समता दिवस''' प्रत्येक वर्ष [[भारत]] में [[5 अप्रॅल]] को मनाया जाता है। [[जगजीवन राम|बाबू जगजीवन राम]] जिन्हें 'बाबूजी' के नाम से सम्बोधित किया जाता था, उन्हीं के जन्म दिवस को 'समता दिवस' के रूप में मनाया जाता है। बाबू जगजीवन राम वर्ष [[1979]] में भारत के उप प्रधानमंत्री बने थे।&lt;br /&gt;
==दलित हितैषी==&lt;br /&gt;
लगभग 50 वर्षो के संसदीय जीवन में राष्ट्र के प्रति जगजीवन राम का समर्पण और निष्ठा बेमिसाल है। उनका संपूर्ण जीवन राजनीतिक, सामाजिक सक्रियता और विशिष्ट उपलब्धियों से भरा हुआ है। सदियों से शोषण और उत्पीड़ित दलितों, मज़दूरों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा के लिए जगजीवन राम द्वारा किए गए क़ानूनी प्रावधान ऐतिहासिक हैं। जगजीवन राम का ऐसा व्यक्तित्व था जिसने कभी भी अन्याय से समझौता नहीं किया और दलितों के सम्मान के लिए हमेशा संघर्षरत रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अंग्रेज़ों ने भारत छोड़ा तो उनका प्रयास था कि पाकिस्तान की भांति [[भारत]] के कई टुकड़े कर दिए जाएं। [[शिमला]] में कैबिनेट मिशन के सामने बाबूजी ने दलितों और अन्य भारतीयों के मध्य फूट डालने की अंग्रेज़ों की कोशिश को नाकाम कर दिया। अंतरिम सरकार में जब बारह लोगों को लार्ड वावेल की कैबिनेट में शामिल होने के लिए बुलाया गया तो उसमें बाबू जगजीवन राम भी थे। उन्हें श्रम विभाग दिया गया। इस समय उन्होंने ऐसे क़ानून बनाए जो भारत के [[इतिहास]] में आम आदमी, मज़दूरों और दबे कुचले वर्गों के हित की दिशा में मील के पत्थर माने जाते हैं। उन्होंने 'मिनिमम वेजेज एक्ट', 'इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट' और 'ट्रेड यूनियन एक्ट' बनाया जिसे आज भी मज़दूरों के हित में सबसे बड़े हथियार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने 'एम्प्लाइज स्टेट इंश्योरेंस एक्ट' और 'प्रोवीडेंट फंड एक्ट' भी बनवाया।&lt;br /&gt;
==सच्चे राष्ट्रवादी==&lt;br /&gt;
जगजीवन राम उस समय [[महात्मा गाँधी]] के नेतृत्व में आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले दल में शामिल हुए, जब [[अंग्रेज़]] अपनी पूरी ताक़त के साथ आज़ादी के सपने को हमेशा के लिए कुचल देना चाहते थे। पृथक् निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अंग्रेजों ने अपनी सारी ताक़त झोंक दी थी। [[मुस्लिम लीग]] की कमान [[जिन्ना]] के हाथ में थी और वे अंग्रेजों के हाथ की कठपुतली बने थे। गाँधी जी ने साम्राज्यवादी अंग्रेजों के इरादे को भांप लिया था कि स्वतंत्रता आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए अंग्रेज़ों की फूट डालो, राज करो नीति को बाबूजी ने समझा। हिन्दू मुस्लिम विभाजन कर अंग्रेज़ों ने दलितों और सवर्णों के मध्य खाई बनाने प्रारम्भ की, जिसमें वह सफल भी हुए और दलितों के लिए 'निर्वाचन मंडल', 'मतांतरण' और 'अछूतिस्तान' की बातें होने लगीं। महात्मा गांधी ने इसके दूरगामी परिणामों को समझा और आमरण अनशन पर बैठ गए। यह राष्ट्रीय संकट का समय था। इस समय राष्ट्रवादी बाबूजी ज्योति स्तंभ बनकर उभरे।&lt;br /&gt;
==विशिष्ट क़ानूनी प्रावधान==&lt;br /&gt;
सन [[1946]] तक [[जगजीवन राम]] गांधी जी के हृदय में उतर गए थे। अब तक अंग्रेज़ों ने भी बाबूजी को भारतीय दलित समाज के सर्वमान्य नेता के रूप में स्वीकार कर लिया। आज़ादी के बाद जो पहली सरकार बनी उसमें उन्हें श्रम मंत्री बनाया गया। यह उनका प्रिय विषय था। वह [[बिहार]] के एक छोटे से गांव की माटी की उपज थे, जहां उन्होंने खेतिहर मज़दूरों का त्रासदी से भरा जीवन देखा था। विद्यार्थी के रूप में [[कोलकाता]] में मिल-मज़दूरों की दारुण स्थिति से भी उनका साक्षात्कार हुआ था। बाजूजी ने श्रम मंत्री के रूप में मज़दूरों की जीवन स्थितियों में आवश्यक सुधार लाने और उनकी सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा के लिए विशिष्ट क़ानूनी प्रावधान किए, जो आज भी हमारे देश की श्रम नीति का मूलाधार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{राष्ट्रीय दिवस}}{{महत्त्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दिवस}}&lt;br /&gt;
[[Category:राष्ट्रीय दिवस]][[Category:महत्त्वपूर्ण दिवस]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>रविन्द्र प्रसाद</name></author>
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