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	<title>सप्त सिंधव - अवतरण इतिहास</title>
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	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<title>रविन्द्र प्रसाद: ''''सप्त सिंधव''' अथवा 'सप्त सिन्धु' आर्य लोगों का प्रा...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
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		<updated>2020-04-23T22:44:28Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सप्त सिंधव&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; अथवा &amp;#039;सप्त सिन्धु&amp;#039; &lt;a href=&quot;/india/%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF&quot; title=&quot;आर्य&quot;&gt;आर्य&lt;/a&gt; लोगों का प्रा...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''सप्त सिंधव''' अथवा 'सप्त सिन्धु' [[आर्य]] लोगों का प्रारम्भिक निवास स्थान माना जाता है। [[वेद|वेदों]] में [[गंगा]], [[यमुना]], [[सरस्वती नदी|सरस्वती]], [[सतलुज नदी|सतलुज]], [[परुष्णी नदी|परुष्णी]], [[मरुद्वधा नदी|मरुद्वधा]] और आर्जीकीया सात नदियों का उल्लेख है। सप्त सिंधव भारतवर्ष का उत्तर पश्चिमी भाग था। मान्यताओं के अनुसार यही सृष्टि का आरंभिक स्थल और आर्यों का आदि देश था।&lt;br /&gt;
==विस्तार==&lt;br /&gt;
सप्त सिंधव देश का फैलाव [[कश्मीर]], [[पाकिस्तान]] और [[पंजाब]] के अधिकांश भाग में था। आर्य, उत्तरी ध्रुव, मध्य [[एशिया]] अथवा किसी अन्य स्थान से [[भारत]] आये हों, भारतीय मान्यता में पूर्ण रूप से स्वीकार्य नहीं है। [[भारत]] में ही नहीं विश्व भर में संख्या 'सात' का आश्चर्यजनक मह्त्व है, जैसे सात सुर, सात [[रंग]], [[सप्तर्षि|सप्त-ॠषि]], सात [[सागर]], आदि। इसी तरह सात नदियों के कारण सप्त सिंधव देश का नामकरण हुआ था। वे नदियाँ हैं-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[सिंधु नदी|सिंधु]] (सिंध)&lt;br /&gt;
*विपासा([[व्यास नदी|व्यास]])&lt;br /&gt;
*आतुल([[सतलुज नदी|सतलुज]])&lt;br /&gt;
*वितस्ता([[झेलम नदी|झेलम]])&lt;br /&gt;
*अस्क्नी([[चिनाव नदी|चिनाव]])&lt;br /&gt;
*परूसी([[रावी नदी|रावी]])&lt;br /&gt;
*[[सरस्वती नदी|सरस्वती]]&lt;br /&gt;
==पुराण उल्लेख==&lt;br /&gt;
[[महाभारत]] के अनुसार- गंगा, यमुना, प्लक्षगा, रथस्था, [[सरयू नदी|सरयू]], [[गोमती नदी|गोमती]] और [[गण्डक नदी|गण्डक]] अथवा वस्कोकसारा, नलिनी, [[पावनी नदी|पावनी]], [[गंगा]], सीता, [[सिन्धु नदी|सिन्धु]] और [[जांबू नदी]] ही सात नदियाँ हैं। [[रामायण]] और पुराणानुसार [[शिव]] की जटा से गिरने के बाद गंगा की सात धाराएँ- नलिनी, हलादिनी और पावनी पूर्व की ओर बहने वाली तीन धाराएँ तथा तथा [[चक्षु नदी|चक्षु]], सीता और सिन्धु पश्चिम की ओर बहने वाली तीन धाराएँ और सातवीं [[भागीरथी नदी|भागीरथी]] दक्षिण की ओर बहने वाली धारा बनी। [[पुराण|पुराणों]] में क्षीरोद, दध्युद, धृतोद, सुनेद, लवणोद, ईक्षूद और स्वादूद। ये सात सप्त सिंधव माने गए हैं।&lt;br /&gt;
====अन्य तथ्य====&lt;br /&gt;
कई भाषाविदों के अनुसार हिन्द-आर्य भाषाओं की 'स' ध्वनि ईरानी भाषाओं की 'ह' [[ध्वनि]] में बदल जाती है। इसलिये 'सप्त सिन्धु' अवेस्तन भाषा&amp;lt;ref&amp;gt;पारसियों की धर्मभाषा&amp;lt;/ref&amp;gt; मे जाकर 'हफ्त हिन्दू' मे परिवर्तित हो गया।&amp;lt;ref&amp;gt;अवेस्ता : वेन्दीदाद, फ़र्गर्द 1.18&amp;lt;/ref&amp;gt; इसके बाद ईरानियों ने [[सिन्धु नदी]] के पूर्व में रहने वालों को [[हिन्दू]] नाम दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नई संभावनाओं से यह विचार और दृढ़ होता है कि प्राचीन सप्त सिंधव और निकटवर्ती प्रदेश [[ब्रह्मावर्त]] में [[वेद|वेदों]] का उदय और वैदिक संस्कृति का प्रादुर्भाव हुआ होगा।&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{जम्मू और कश्मीर के ऐतिहासिक स्थान}}&lt;br /&gt;
[[Category:जम्मू और कश्मीर]][[Category:जम्मू और कश्मीर के ऐतिहासिक स्थान]][[Category:ऐतिहासिक स्थान कोश]][[Category:भूगोल कोश]][[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>रविन्द्र प्रसाद</name></author>
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