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	<title>शारदा (गायिका) - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>रविन्द्र प्रसाद: '{{सूचना बक्सा कलाकार |चित्र=Sharda-Rajan-Iyengar.jpeg |चित्र का नाम=श...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;{{सूचना बक्सा कलाकार |चित्र=Sharda-Rajan-Iyengar.jpeg |चित्र का नाम=श...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Sharda-Rajan-Iyengar.jpeg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=शारदा&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=शारदा राजन आयंगर&lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=शारदा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[25 अक्टूबर]], [[1937]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
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|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
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|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में=&lt;br /&gt;
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|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=सिने पार्श्वगायिका&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=सक्रियता&lt;br /&gt;
|पाठ 1=[[1960]]-[[1970]]&lt;br /&gt;
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|अन्य जानकारी=सन [[1969]] से लेकर [[1972]] तक फिल्मफेयर पुरस्कारों में उन्हें चार नामांकन प्राप्त हुए थे। शारदा को सर्वाधिक रूप से फ़िल्म 'सूरज' ([[1966]]) के गीत 'तितली उड़ी, उड़के चली&amp;quot; के लिये पहचाना जाता है।&lt;br /&gt;
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|अद्यतन={{अद्यतन|20:47, 9 अप्रॅल 2021 (IST)}}&lt;br /&gt;
}}'''शारदा राजन आयंगर''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Sharda Rajan Iyengar'' or ''Sharda'', जन्म- [[25 अक्टूबर]], [[1937]]) [[हिन्दी]] फिल्मों की प्रसिद्ध पार्श्वगायिका रही हैं। सन [[1960]] और [[1970]] के दशक में वह सक्रिय रहीं। सन [[1969]] से लेकर [[1972]] तक फिल्मफेयर पुरस्कारों में उन्हें चार नामांकन प्राप्त हुए थे। शारदा को सर्वाधिक रूप से फ़िल्म 'सूरज' ([[1966]]) के गीत 'तितली उड़ी, उड़के चली&amp;quot; के लिये पहचाना जाता है। इस गीत से ही उन्हें घर-घर में पहचान मिली।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
शारदा का जन्म हुआ 25 अक्टूबर, 1937 को [[तमिलनाडु]] के एक [[ब्राह्मण]] [[परिवार]] में हुआ। बचपन में इनके घर में एक रेडियो तक नहीं था। लेकिन तब भी [[संगीत]] के प्रति इनका ऐसा रुझान आश्चर्यचकित करता है। शारदा राजन आयंगर जी जब घर के बाहर निकलती रेडियो पर बजने वाले गानों को बड़े ध्यान से सुना करती थीं। वहीं से इनके मन में संगीत के प्रति गहरा प्रेम उत्पन्न हुआ। जो गाना वह बाहर से सुन कर आती उन्हीं गानों को अक्सर यह अपने घर में गुनगुनाया करती थी। यूँ तो वो तमिल से ताल्लुक रखती थीं पर उन्हें हिंदी गानों के प्रति ख़ास आकर्षण रहा।&lt;br /&gt;
==गायन शुरुआत==&lt;br /&gt;
एक दिन उनकी मां ने नहाते हुए शारदा राजन आयंगर को गाते हुए सुना तो वह हैरान हो गयीं। उन्होंने सोचा क्यों ना इसे संगीत की शिक्षा दिलाई जाए। बाद में उन्होंने अपने परिवार की आज्ञा से [[कर्नाटक संगीत]] की ट्रेनिंग ली। धीरे-धीरे उन्हें अपनी सुरीली आवाज से ख्याति मिलने लगी। गाना 'सुन सुन रे पवन दिल तुझको पुकारे'। अब पब्लिक प्लेटफॉर्म पर इनको गाने का काफी मौका मिलने लगा। अब एक ऐसा दिन भी आया जिसने इनकी किस्मत पलट कर रख दी। ईरान में एक संगीत समारोह में [[राज कपूर]] ने इन्हें गाते हुए सुना। हालांकि साउथ इंडियन होने की वजह से शारदा राजन आयंगर का [[हिंदी]] उच्चारण उतना अच्छा तो नहीं था। लेकिन तब भी राज कपूर साहब इनकी आवाज से काफी प्रभावित हुए। राज कपूर ने इनसे कहा आप अच्छा गाती हैं। आपको [[मुंबई]] आकर फिल्मों में ट्राई करना चाहिए।&lt;br /&gt;
==मुम्बई आगमन==&lt;br /&gt;
कुछ समय बाद शारदा जब मुंबई पहुंची तो यह जानकर खुशी का ठिकाना ना रहा कि राज कपूर उन्हें याद रखे हुए थे। राज कपूर ने उन्हें झट से पहचान लिया। उसके बाद उन्होंने शारदा से एक गीत गवाया जो सबको बहुत पसंद आया। [[शंकर जयकिशन]] की जोड़ी के शंकर ने शारदा राजन आयंगर के शोख़ और कमसिन आवाज का इस्तेमाल अपनी संगीत में एक अलग सेठ देने के लिए करने का मन बना लिया। शंकर जयकिशन ने इन्हें संगीत की बारीकियां सिखाने के लिए बकायदा ट्रेनिंग दिलाई। फिर वह दिन भी आया जब शंकर जयकिशन ने फिल्म 'सूरज' के लिए दो गीत गवाए “तितली उड़ी” और “देखो मेरा मन मचल गया“। जिसने भी यह गीत सुने वह शारदा के गीतों पर फिदा हो गया। लोगों ने इस गीत को काफी ज्यादा पसंद किया। उनका यह गाना आज भी लोगों को पसंद है। लेकिन यह इत्तेफाक था कि 'सूरज' से पहले [[मनोज कुमार]] और [[नंदा]] स्टारर फिल्म 'गुमनाम' रिलीज हो गई। इसमें शारदा राजन आयंगर का मोहम्मद रफी के साथ गाया गीत ‘जाने चमन शोला बदन पहलू में आ जाओ‘ भी शामिल था। लेकिन सूरज के गाने 'किस औरत ने शोहरत' ने शारदा को रातों-रात स्टार बना दिया।&lt;br /&gt;
==पुरस्कार व सम्मान==&lt;br /&gt;
उस साल के फिल्म फेयर अवार्ड के लिए 'तितली उड़ी' और और [[मोहम्मद रफ़ी]] के गाए गीत 'बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है' दोनों गानों को बराबर वोट मिले। उन दिनों प्लेबैक सिंगर की कैटेगरी में पुरुष और महिला की आवाजों के लिए एक ही अवार्ड होता था। उस साल का अवार्ड मोहम्मद रफ़ी साहब को मिला था। लेकिन शारदा को भी एक स्पेशल अवार्ड दिया गया। इसके साथ ही शारदा जी ने [[इतिहास]] रच दिया। अब तक जो नहीं हुआ था वो हुआ। अगले साल से फिल्म फेयर ने पुरुष और महिला गायकों के लिए अलग-अलग अवार्ड देना शुरू किया। इनके गाये गानों को लगातार 4 वर्षों तक फिल्मफेयर अवार्ड्स में नामांकित किया गया। फ़िल्म ‘जहां प्यार मिले’ के गीत ‘बात जरा है आपस की…’ के लिए फिल्मफेयर अवाॅर्ड अपने नाम किया।  &lt;br /&gt;
==आलोचना==&lt;br /&gt;
सन [[1967]] में [[शंकर जयकिशन]] के संगीत से सजी फिल्म आई ‘अराउंड द वर्ल्ड‘। इस फिल्म में शारदा राजन आयंगर के आवाज के जादू ने फिर कमाल कर दिया। गाना 'चले जाना जरा ठहरो किसी का दम निकलता है ये मंजर देखते जाना'। शारदा के गाए गीतों की तारीफ तो हुई, मगर उनकी आवाज की काफी आलोचना भी होने लगी। कहा गया कि शारदा की आवाज बेकार, इतनी अच्छी नहीं है। लेकिन शंकर ने किसी की बातों पर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया। उन्हें शारदा की काबिलियत पर पूरा भरोसा था। वह लगातार शारदा को मौके देते जा रहे थे। अंततः उनके भरोसे ने रंग दिखाया और जिस दौर में [[लता मंगेशकर]], [[आशा भोंसले]] और [[सुमन कल्याणपुर]] ज्यादातर हीरोइनों के लिए गाने गा रही थीं। उसी दौर की फिल्म 'जहां प्यार मिले’ के गीत 'बात जरा है आपस की…’ के लिए फिल्मफेयर अवाॅर्ड अपने नाम किया।&lt;br /&gt;
==नया अवतार==&lt;br /&gt;
अब शारदा रुकने वाली नहीं थीं। अतः उन्होंने नया [[अवतार]] ले लिया और खुद को संगीतकार के रूप में गिनना शुरू किया। उन दिनों निजी गीतों का बाजार अस्तित्व में नहीं आया था। फिल्मी गीतों के अलावा या तो भजन गीत जारी किये जाते थे या फिर [[ग़ज़ल]] या [[क़व्वाली]] गीत जारी किये जाते थे। शारदा ने खुद के आठ गीत तैयार किए, जिसे एचएमवी ने जारी किया। शारदा राजन आयंगर का यह नया प्रयोग प्रचलित जरूर हुआ लेकिन उन्हें उतनी शोहरत नहीं मिली। शायद तब [[भारत]] में पॉप गानों के लिए माहौल नहीं बन पाया था। कहा जाये तो ये समय से आगे की गाने को प्रस्तुत कर रहीं थी। शायद इसलिए यह प्रयोग इतना सफल नहीं हुआ। ये उनकी दूरदर्शिता का एक प्रमाण है।&lt;br /&gt;
==संगीत से किनारा==&lt;br /&gt;
बावजूद इसके शारदा हालात का बहादुरी से मुकाबला कर रही थीं। पर नीति को कुछ और मंजूर था। शारदा राजन आयंगर के लिए साल [[1987]] बेहद ही मनहूस खबर लेकर आया। फिल्मी दुनिया में उनका 'गॉड फादर' उनका इकलौता सहारा यानी [[शंकर (संगीतकार)|शंकर]] दुनिया को छोड़ चले गए। अब तक किसी और संगीतकार से कुछ ख़ास काम न मिल पाना था, शायद आगे किसी और संगीतकार से काम न मिल पाने का उनके मन का विचार। शारदा को यकीन होने लगा कि उन्हें गाना गाने के लिए मौके शायद नहीं मिल पाएंगे और फिल्म जगत से, फिल्म संगीत से किनारा कर लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3|माध्यमिक=|पूर्णता=|शोध=}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पार्श्वगायक}}&lt;br /&gt;
[[Category:गायिका]][[Category:सिनेमा]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]][[Category:सिनेमा कोश]][[Category:संगीत कोश]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]][[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>रविन्द्र प्रसाद</name></author>
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