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	<title>पंचशील समझौता - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>रविन्द्र प्रसाद: ''''पंचशील समझौता''' (अंग्रेज़ी: ''Panchsheel Treaty'' or ''Panchsheel Agreement'') 29...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
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		<updated>2020-05-16T15:48:02Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;पंचशील समझौता&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (&lt;a href=&quot;/india/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A5%80&quot; title=&quot;अंग्रेज़ी&quot;&gt;अंग्रेज़ी&lt;/a&gt;: &amp;#039;&amp;#039;Panchsheel Treaty&amp;#039;&amp;#039; or &amp;#039;&amp;#039;Panchsheel Agreement&amp;#039;&amp;#039;) 29...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''पंचशील समझौता''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Panchsheel Treaty'' or ''Panchsheel Agreement'') [[29 अप्रैल]], [[1954]] को [[भारत]] और [[चीन]] के बीच हुआ था। आजादी के बाद से ही चीन, भारत की विदेश नीति का महत्त्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है। भारत और चीन के बीच लगभग 3,500 कि।मी। की सीमा रेखा है। सीमा को लेकर दोनों देशों के बीच कई मतभेद हैं, जिसके चलते बीच-बीच में दोनों देशों में तनाव पैदा हो जाता है। भारत-चीन के बीच जब भी तनाव पैदा होता तो पंचशील सिद्धांत की बात जरूर आती है।&lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
[[भारत]] [[1947]] में आजाद हुआ और उसके ठीक दो साल बाद [[चीन]] 'पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना' के नाम से एक साम्यवादी देश बना। दोनों देशों का मौजूदा सफ़र एक साथ ही शुरू हुआ। चीन ने [[1950]] में एक बड़ी घटना को अंजाम दिया। चीन ने भारत और उसके बीच अलग आजाद मुल्क [[तिब्बत]] पर हमला कर दिया और देखते-ही-देखते उस पर कब्ज़ा कर लिया। चीन ने तिब्बत को अपना एक राज्य घोषित कर दिया। तिब्बत के भारत और चीन में होने के कारण दोनों देशों में हमेशा फासला रहा था। चीन के इस कब्जे ने उस फासले को हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया और अब तक जो शरहद सिर्फ [[कश्मीर]] के एक छोटे से हिस्से तक ही सीमित थी, वह बढ़कर आज के [[उत्तराखंड]] से लेकर भारत के उत्तर-पूर्व तक फ़ैल गई थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
साफ़ था कि तिब्बत पर चीन के कब्जे का असर सबसे ज्यादा भारत पर पड़ने वाला था। तिब्बत पर चीन के कब्जे ने भारत के सुरक्षा के लिए नए सवाल खड़े कर दिए। [[जवाहरलाल नेहरू]] ने इस पर बयान दिया कि चीन के साथ हमें अपनी दोस्ती में ही सुरक्षा ढूँढनी चाहिए। प्रधानमंत्री नेहरू तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद भी सीमा का मामला उठाने के लिए तैयार नहीं थे। प्रधानमंत्री की यह सोच थी कि जब तक चीन अपनी तरफ से सीमा का मामला नहीं उठाता, इसके बारे में किसी भी स्तर पर बातचीत की जरुरत नहीं है। गृहमंत्री [[वल्लभभाई पटेल]] ने चीन के मामले पर 1950 में एक चिट्ठी प्रधानमंत्री नेहरू जी को लिखी थी। उन्होंने लिखा था कि- &amp;quot;चीन ने हमारे देश के साथ धोखा और विश्वासघात किया है। चीन [[असम]] के कुछ हिस्सों पर भी नज़र गड़ाए हुए है। समस्या का तत्काल समाधान करें।&amp;quot;&lt;br /&gt;
==सीमा रेखा==&lt;br /&gt;
तब के नेफा (NEFA- North-East Frontier Agency) और आज के [[अरुणाचल प्रदेश]] की सीमा जो चीन से लगती है, उसे मैकमोहन रेखा कहते हैं, जिसे [[शिमला]] में ब्रिटिश इंडिया, [[तिब्बत]] और [[चीन]] ने [[1914]] में मिलकर तय किया था। चीन की सरकार इसे जबरन तैयार की गई सीमा रेखा मानती थी। भारत के स्वतंत्रता के बाद इस सीमा को लेकर चीन ने चुप्पी साधी हुई थी। [[1952]] में भारत और चीन के बीच इस मामले को लेकर मीटिंग हुई, जिसमें भारत जानना चाहता था कि आखिर चीन के मन में चल क्या रहा है? भारत ने चीन की चुप्पी को चीन की सहमति समझा। भारत समझने लगा कि मैकमोहन रेखा के विषय में चीन को कोई दिक्कत नहीं है। पर बात यहीं नहीं रुकी।&lt;br /&gt;
==समझौता==&lt;br /&gt;
[[29 अप्रैल]], [[1954]] को [[भारत]] ने उस संधि पर दस्तखत कर दिया, जिसे '''पंचशील समझौता''' कहा जाता है। इसमें शान्ति के साथ-साथ रहने और दोस्ताना सम्बन्ध की बात कही गई थी। [[पंचशील]] शब्द ऐतिहासिक [[बौद्ध]] अभिलेखों से लिया गया है। बौद्ध अभिलेखों में भिक्षुओं के व्यवहार को निर्धारित करने के लिए पंचशील नियम मिलते हैं। बौद्ध अभिलेखों से ही [[भारत]] के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ने पंचशील शब्द को चुना था। [[31 दिसंबर]], [[1953]] और [[29 अप्रॅल]], [[1954]] को हुई बैठक के बाद भारत-चीन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के प्रस्तावना में इन पाँच बातों का उल्लेख किया गया था-&lt;br /&gt;
#एक दूसरे की अखंडता और संप्रुभता का सम्मान&lt;br /&gt;
#एक दूसरे पर आक्रमण न करना&lt;br /&gt;
#एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना&lt;br /&gt;
#सामान और परस्पर लाभकारी सम्बन्ध&lt;br /&gt;
#शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस समझौते के तहत भारत ने तिब्बत को चीन का एक क्षेत्र स्वीकार कर लिया। इस तरह उस समय इस संधि ने भारत और चीन के संबंधों के तनाव को काफ़ी हद तक दूर कर दिया था। भारत को [[1904]] की ऐंग्लो तिबतन संधि के तहत तिब्बत के संबंध में जो अधिकार मिले थे, भारत ने वे सारे इस संधि के बाद छोड़ दिए, हालाँकि बाद में ये भी सवाल उठे कि इसके एवज में भारत ने सीमा संबंधी सारे विवाद निपटा क्यों नहीं लिए। मगर इसके पीछे भी भारत की मित्रता की भावना मानी जाती है कि उसने चीन के शांति और मित्रता के वायदे को मान लिया और निश्चिंत हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पंडित नेहरू ने [[अप्रैल]] [[1954]] में [[संसद]] में इस संधि का बचाव करते हुए कहा था, &amp;quot;ये वहाँ के मौजूदा हालात को सिर्फ़ एक पहचान देने जैसा है। ऐतिहासिक और व्यावहारिक कारणों से ये क़दम उठाया गया।&amp;quot; उन्होंने क्षेत्र में शांति को सबसे ज़्यादा अहमियत दी और चीन में एक विश्वसनीय दोस्त देखा। इसके बाद भी जब भारत और चीन संबंधों की बात होती है, तब इस सिद्धांत का उल्लेख ज़रूर होता है। इस संधि को भले ही [[1962]] में ज़बरदस्त चोट पहुँची हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में इसका अमर दिशानिर्देशक सिद्धांत हमेशा जगमगाता रहेगा।&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[https://www.bbc.com/hindi/regionalnews/story/2004/06/040628_panchsheel.shtml भारत-चीन रिश्तों का आधार पंचशील]&lt;br /&gt;
*[https://www.sansarlochan.in/panchsheel-treaty-in-hindi/ पंचशील समझौता क्या है?]&lt;br /&gt;
*[https://aajtak.intoday.in/story/china-blames-india-over-panchseel-agreement-know-about-this-1-939313.html चीन ने भारत को याद दिलाया नेहरू का 'पंचशील समझौता']&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक काल}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक काल]][[Category:भारत का इतिहास]][[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>रविन्द्र प्रसाद</name></author>
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