<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%85%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A4%B2%E0%A4%AE</id>
	<title>अल-क़लम - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%85%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A4%B2%E0%A4%AE"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A4%B2%E0%A4%AE&amp;action=history"/>
	<updated>2026-06-10T06:07:19Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.41.1</generator>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A4%B2%E0%A4%AE&amp;diff=514244&amp;oldid=prev</id>
		<title>आरिफ़ बेग: ''''अल-क़लम''' इस्लाम धर्म के पवित्र ग्रंथ क़ुरआन का 68...' के साथ नया पन्ना बनाया</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A4%B2%E0%A4%AE&amp;diff=514244&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2014-12-20T12:22:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अल-क़लम&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; &lt;a href=&quot;/india/%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE_%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE&quot; title=&quot;इस्लाम धर्म&quot;&gt;इस्लाम धर्म&lt;/a&gt; के पवित्र ग्रंथ &lt;a href=&quot;/india/%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%86%E0%A4%A8&quot; title=&quot;क़ुरआन&quot;&gt;क़ुरआन&lt;/a&gt; का 68...&amp;#039; के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''अल-क़लम''' [[इस्लाम धर्म]] के पवित्र ग्रंथ [[क़ुरआन]] का 68वाँ [[सूरा]] (अध्याय) है जिसमें 52 [[आयत (क़ुरआन)|आयतें]] होती हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:1- नून क़लम की और उस चीज़ की जो लिखती हैं (उसकी) क़सम है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:2- कि तुम अपने परवरदिगार के फ़ज़ल (व करम) से दीवाने नहीं हो।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:3- और तुम्हारे वास्ते यक़ीनन वह अज्र है जो कभी ख़त्म ही न होगा।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:4- और बेशक तुम्हारे एख़लाक़ बड़े आला दर्जे के हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:5- तो अनक़रीब ही तुम भी देखोगे और ये कुफ्फ़ार भी देख लेंगे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:6- कि तुममें दीवाना कौन है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:7- बेशक तुम्हारा परवरदिगार इनसे ख़ूब वाक़िफ़ है जो उसकी राह से भटके हुए हैं और वही हिदायत याफ्ता लोगों को भी ख़ूब जानता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:8- तो तुम झुठलाने वालों का कहना न मानना।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:9- वह लोग ये चाहते हैं कि अगर तुम नरमी एख्तेयार करो तो वह भी नरम हो जाएँ।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:10- और तुम (कहीं) ऐसे के कहने में न आना जो बहुत क़समें खाता ज़लील औक़ात ऐबजू।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:11- जो आला दर्जे का चुग़लख़ोर माल का बहुत बख़ील।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:12- हद से बढ़ने वाला गुनेहगार तुन्द मिजाज़।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:13- और उसके अलावा बदज़ात (हरमज़ादा) भी है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:14- चूँकि माल बहुत से बेटे रखता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:15- जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो बोल उठता है कि ये तो अगलों के अफ़साने हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:16- हम अनक़रीब इसकी नाक पर दाग़ लगाएँगे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:17- जिस तरह हमने एक बाग़ वालों का इम्तेहान लिया था उसी तरह उनका इम्तेहान लिया जब उन्होने क़समें खा खाकर कहा कि सुबह होते हम उसका मेवा ज़रूर तोड़ डालेंगे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:18- और इन्शाअल्लाह न कहा।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:19- तो ये लोग पड़े सो ही रहे थे कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (रातों रात) एक बला चक्कर लगा गयी।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:20- तो वह (सारा बाग़ जलकर) ऐसा हो गया जैसे बहुत काली रात।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:21- फिर ये लोग नूर के तड़के लगे बाहम गुल मचाने।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:22- कि अगर तुमको फल तोड़ना है तो अपने बाग़ में सवेरे से चलो।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:23- ग़रज़ वह लोग चले और आपस में चुपके चुपके कहते जाते थे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:24- कि आज यहाँ तुम्हारे पास कोई फ़क़ीर न आने पाए।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:25- तो वह लोग रोक थाम के एहतमाम के साथ फल तोड़ने की ठाने हुए सवेरे ही जा पहुँचे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:26- फिर जब उसे (जला हुआ सियाह) देखा तो कहने लगे हम लोग भटक गए।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:27- (ये हमारा बाग़ नहीं फिर ये सोचकर बोले) बात ये है कि हम लोग बड़े बदनसीब हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:28- जो उनमें से मुनसिफ़ मिजाज़ था कहने लगा क्यों मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम लोग (ख़ुदा की) तसबीह क्यों नहीं करते।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:29- वह बोले हमारा परवरदिगार पाक है बेशक हमीं ही कुसूरवार हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:30- फिर लगे एक दूसरे के मुँह दर मुँह मलामत करने।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:31- (आख़िर) सबने इक़रार किया कि हाए अफसोस बेशक हम ही ख़ुद सरकश थे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:32- उम्मीद है कि हमारा परवरदिगार हमें इससे बेहतर बाग़ इनायत फ़रमाए हम अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करते हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:33- (देखो) यूँ अज़ाब होता है और आख़ेरत का अज़ाब तो इससे कहीं बढ़ कर है अगर ये लोग समझते हों।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:34- बेशक परहेज़गार लोग अपने परवरदिगार के यहाँ ऐशो आराम के बाग़ों में होंगे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:35- तो क्या हम फरमाबरदारों को नाफ़रमानो के बराबर कर देंगे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:36- (हरगिज़ नहीं) तुम्हें क्या हो गया है तुम तुम कैसा हुक्म लगाते हो।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:37- या तुम्हारे पास कोई ईमानी किताब है जिसमें तुम पढ़ लेते हो।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:38- कि जो चीज़ पसन्द करोगे तुम को वहाँ ज़रूर मिलेगी।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:39- या तुमने हमसे क़समें ले रखी हैं जो रोज़े क़यामत तक चली जाएगी कि जो कुछ तुम हुक्म दोगे वही तुम्हारे लिए ज़रूर हाज़िर होगा।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:40- उनसे पूछो तो कि उनमें इसका कौन ज़िम्मेदार है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:41- या (इस बाब में) उनके और लोग भी शरीक हैं तो अगर ये लोग सच्चे हैं तो अपने शरीकों को सामने लाएँ।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:42- जिस दिन पिंडली खोल दी जाए और (काफ़िर) लोग सजदे के लिए बुलाए जाएँगे तो (सजदा) न कर सकेंगे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:43- उनकी ऑंखें झुकी हुई होंगी रूसवाई उन पर छाई होगी और (दुनिया में) ये लोग सजदे के लिए बुलाए जाते और हटटे कटटे तन्दरूस्त थे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:44- तो मुझे उस कलाम के झुठलाने वाले से समझ लेने दो हम उनको आहिस्ता आहिस्ता इस तरह पकड़ लेंगे कि उनको ख़बर भी न होगी।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:45- और मैं उनको मोहलत दिये जाता हूँ बेशक मेरी तदबीर मज़बूत है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:46- (ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत का) कुछ सिला माँगते हो कि उन पर तावान का बोझ पड़ रहा है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:47- या उनके इस ग़ैब (की ख़बर) है कि ये लोग लिख लिया करते हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:48- तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तेज़ार में सब्र करो और मछली (का निवाला होने) वाले (यूनुस) के ऐसे न हो जाओ कि जब वह ग़ुस्से में भरे हुए थे और अपने परवरदिगार को पुकारा।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:49- अगर तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी उनकी यावरी न करती तो चटियल मैदान में डाल दिए जाते और उनका बुरा हाल होता।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:50- तो उनके परवरदिगार ने उनको बरगुज़ीदा करके नेकोकारों से बना दिया।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:51- और कुफ्फ़ार जब क़ुरान को सुनते हैं तो मालूम होता है कि ये लोग तुम्हें घूर घूर कर (राह रास्त से) ज़रूर फिसला देंगे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
68:52- और कहते हैं कि ये तो सिड़ी हैं और ये (क़ुरान) तो सारे जहाँन की नसीहत है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://tanzil.net/#trans/hi.hindi/68:1  अल-क़लम] &lt;br /&gt;
*[http://hi.quransharif.org/  Quran Sharif - हिन्दी अनुवाद (सभी सूरा)]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{क़ुरआन}}{{इस्लाम धर्म}}&lt;br /&gt;
[[Category:इस्लाम धर्म]]&lt;br /&gt;
[[Category:क़ुरान]][[Category:इस्लाम धर्म कोश]][[Category:धर्म कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>आरिफ़ बेग</name></author>
	</entry>
</feed>