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	<title>अरूणिमा सिन्हा - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>रविन्द्र प्रसाद: '{{सूचना बक्सा प्रसिद्ध व्यक्तित्व |चित्र=Arunima-Sinha.jpg |चि...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
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		<updated>2021-03-16T08:12:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;{{सूचना बक्सा प्रसिद्ध व्यक्तित्व |चित्र=Arunima-Sinha.jpg |चि...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा प्रसिद्ध व्यक्तित्व&lt;br /&gt;
|चित्र=Arunima-Sinha.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=अरूणिमा सिन्हा&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=अरूणिमा सिन्हा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[20 जुलाई]], [[1989]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=सुल्तानपुर, [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=गौरव सिंग&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|गुरु=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=पर्वतारोहण&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|खोज=&lt;br /&gt;
|भाषा=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=अम्बेडकरनगर रत्न पुरस्कार ([[2016]]), सुल्तानपुर रत्न अवॉर्ड, मलाला अवॉर्ड, यशभारती अवॉर्ड&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=[[माउंट एवरेस्ट]] फतह करने वाली पहली भारतीय दिव्यांग।&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय &lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=&lt;br /&gt;
|पाठ 3=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 4=&lt;br /&gt;
|पाठ 4=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 5=&lt;br /&gt;
|पाठ 5=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=[[21 मई]], [[2013]] को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी [[माउंट एवरेस्ट]] को फतह कर एक नया इतिहास रचते हुए अरूणिमा सिन्हा ने ऐसा करने वाली पहली विकलांग भारतीय महिला होने का रिकार्ड अपने नाम किया।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}'''अरूणिमा सिन्हा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Arunima Sinha'', जन्म- [[20 जुलाई]], [[1989]], सुल्तानपुर, [[उत्तर प्रदेश]]) [[भारत]] की राष्ट्रीय स्तर की पूर्व बॉलीबॉल खिलाड़ी तथा [[माउंट एवरेस्ट]] फतह करने वाली पहली भारतीय विकलांग हैं। कृत्रिम पैर के सहारे एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की एकमात्र महिला अरूणिमा सिन्हा अब तक [[किलिमंजारो पर्वत|किलिमंजारो]], [[माउंट एल्ब्रुस]], [[विन्सन मैसिफ़]], कास्टेन पिरामिड, किजाश्को और [[अकोंकागुआ|माउंट अंककागुआ]] पर्वत चोटियों को फतह कर चुकी हैं।&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
अरूणिमा सिन्हा का जन्म 20 जुलाई, 1988 में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में हुआ। उनकी रुचि बचपन से ही [[खेल]] में रही। वह एक नेशनल वॉलीबॉल खिलाड़ी भी थीं। उनके जीवन में सब कुछ समान्य चल रहा था। तभी उनके साथ कुछ ऐसा घटित हुआ, जिसके चलते उनकी जिंदगी का [[इतिहास]] ही बदल गया।&lt;br /&gt;
==रेल दुर्घटना==&lt;br /&gt;
अरूणिमा सिन्हा [[11 अप्रैल]], [[2011]] को पद्मावती एक्सप्रेस से [[लखनऊ]] से [[दिल्ली]] जा रही थीं। रात के लगभग एक बजे कुछ शातिर अपराधी ट्रैन के डिब्बों में दाखिल हुए और अरूणिमा सिन्हा को अकेला देखकर उनके गले की चैन छीनने का प्रयास करने लगे, जिसका विरोध उन्होंने किया। उन शातिर चोरों ने अरूणिमा सिन्हा को चलती हुई ट्रैन से [[बरेली]] के पास बाहर फेक दिया जिसकी वजह से उनका बायां पैर पटरियों के बीच में आ जाने से कट गया। पूरी रात अरूणिमा सिन्हा कटे हुए पैर के साथ दर्द से चीखती-चिल्लाती रही। लगभग 40-50 ट्रैन गुजरने के बाद पूरी तरह से अरूणिमा सिन्हा अपने जीवन की आस खो चुकी थीं; लेकिन शायद उनके जीवन की किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लोगों को इस घटना के बारे में पता चलने के बाद उन्हें [[नई दिल्ली]] के ऐम्स में भर्ती कराया गया। जहां अरूणिमा सिन्हा अपनी जिंदगी और मौत से लगभग चार महीने तक लड़ती रहीं। जिंदगी और मौत की जंग में उनकी जीत हुई और फिर अरुणिमा सिन्हा के बाये पैर को कृत्रिम पैर के सहारे जोड़ दिया गया। अरूणिमा सिन्हा की इस हालत को देखकर डॉक्टर भी हार मान चुके थे और उन्हें आराम करने की सलाह दे रहे थे जबकि [[परिवार]] वाले और रिस्तेदारों की नजर में अब अरूणिमा सिन्हा कमजोर और विंकलांग हो चुकी थीं लेकिन उन्होंने अपने हौसलों में कोई कमी नहीं आने दी और किसी के आगे खुद को बेबस और लाचार घोषित नहीं किया। &lt;br /&gt;
==एवरेस्ट विजय==&lt;br /&gt;
अरूणिमा सिन्हा यहीं नहीं रुकीं। युवाओं और जीवन में किसी भी प्रकार के अभाव के चलते निराशापूर्ण जीवन जी रहे लोगों में प्रेरणा और उत्साह जगाने के लिए उन्होंने अब दुनिया के सभी सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को लांघने का लक्ष्य तय किया। अपराधियों द्वारा चलती ट्रेन से फेंक दिए जाने के कारण एक पैर गंवा चुकने के बावजूद अरूणिमा ने गजब के जीवट का परिचय देते हुए [[21 मई]], [[2013]] को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी [[माउंट एवरेस्ट]] को फतह कर एक नया इतिहास रचते हुए ऐसा करने वाली पहली विकलांग भारतीय महिला होने का रिकार्ड अपने नाम कर लिया। ट्रेन दुर्घटना से पूर्व उन्होंने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य की वॉलीबाल और [[फ़ुटबॉल]] टीमों में प्रतिनिधित्व किया था।&lt;br /&gt;
==सम्मान व पुरस्कार==&lt;br /&gt;
[[उत्तर प्रदेश]] में सुल्तानपुर जिले के 'भारत भारती संस्था' ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर [[तिरंगा]] फहराने वाली इस विकलांग महिला को 'सुल्तानपुर रत्न अवॉर्ड' से सम्मानित किये जाने की घोषणा की। सन [[2016]] में अरूणिमा सिन्हा को 'अम्बेडकरनगर रत्न पुरस्कार' से 'अम्बेडकरनगर महोत्सव समिति' की तरफ से नवाजा गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{पर्वतारोही}}&lt;br /&gt;
[[Category:पर्वतारोही]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]][[Category:चरित कोश]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>रविन्द्र प्रसाद</name></author>
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