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	<title>अरविन्द आचार्य - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>गोविन्द राम 19 मई 2015 को 14:17 बजे</title>
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		<author><name>गोविन्द राम</name></author>
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		<title>गोविन्द राम: ''''अरविन्द आचार्य''' (अंग्रेज़ी: ''Arvind Acharya'') जल की सतह पर [[र...' के साथ नया पन्ना बनाया</title>
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==सिर्फ़ 10 घंटों में पानी पर बनाया ताजमहल==&lt;br /&gt;
दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारत [[ताजमहल]] यूं तो हर हिंदुस्तानी के दिल में बसी है, लेकिन अब प्रेम के इस नायब प्रतीक को विश्व के सात अजूबों में शामिल कराने के लिए अभियान जारी है। इस अभियान में भागीदारी के लिए [[इंदौर]] के कलाकार अरविंद आचार्य ने जल रंगोली के जरिये ताजमहल का तैरता नमूना बनाया। ट्रेजर आईलैंड में आचार्य ने पानी पर 15 X 15 आकार का ताजमहल क़रीब दस घंटों में पूरा किया। पानी पर ताज महल का चित्र बनाने में क़रीब 20 किलो वाटरप्रूफ रंगों का उपयोग किया गया। चित्र पूरा करने के बाद अरविंद आचार्य ने कहा कि ताज महल का सौन्दर्य और भव्यता उन्हें हमेशा से आकर्षित करती रही है पहले भी वे पानी पर ताज महल बना चुके हैं, लेकिन इस बार बड़े आकार में ताजमहल का चित्र बनाकर वे लोगों को जागरूक करना चाहते हैं कि वे ताज को सरताज बनाने के अभियान में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें। चित्र बनाने के दौरान कई लोगों ने खड़े होकर इस नजारे को देखा।&lt;br /&gt;
==5 पांच घंटे में पानी पर बनाये राम और हुनमान==&lt;br /&gt;
अरविन्द आचार्य ने पानी की सतह पर भगवान [[राम]] और [[हनुमान]] के चित्र उकेरकर अपनी रचनात्मकता से भगवान की आराधना की। पानी पर तैरते हुए राम और हनुमान को देखने के लिए लोगों की खूब भीड इकट्ठा हो गई। पानी पर चित्र बनाना आसान काम नहीं है। पानी की सतह पर [[रंग]] डालते ही रंग पानी में घुल जाते हैं और पानी रंगीन हो जाता है। रंग पानी में ना घुले और हर रंग अलग-अलग नज़र आए इसलिए अरविन्द ने रंगों में एक खास तरह का मटेरियल मिलाया। लेकिन इसके बाद भी पानी में चित्र बनाना आसान नहीं होता क्योंकि पानी पर ना तो चित्र के लिए कोई आउट लाइन बन सकती है और ना ही गलत होने पर उसे सुधारा जा सकता है। ऐसे में अरविन्द को बिना करेक्शन किए पानी पर अपने आराध्य को उतारना था। अरविन्द बताते है कि मैं भगवान का नाम लेकर इसमें जुट गया। मुझे ये विश्वास था कि जिसके नाम से पानी में पत्थर तैर सकते है पानी में उसका चित्र भी ज़रूर उभरकर आएगा। बस ये सोचकर उन्होंने चित्र बनाना शुरू कर दिया। लगभग 5 घंटे की मेहनत से उन्होंने पानी से भरे बर्तनों में भगवान राम और हनुमान जी की तस्वीर उकेर दी। आमतौर पर जब भी कोई कलाकर किसी भी देवी या देवता की प्रतिमा या चित्र बनाता है तो वो अपने सामने उनका कोई चित्र या फोटो ज़रूर रखता है। मगर अरविन्द ने ऐसा नहीं किया। अरविन्द कहते हैं कि जिस भगवान की ज़िन्दगी भर पूजा की है यदि उसका चित्र भी देखकर बनाना पड़े तो पूजा करने का मतलब ही क्या रहा। जैसे ही लोगों को अरविन्द के इन चित्रों के बारे में पता चला वैसे ही वहां भीड़ उमड़ने लगी। लोग पानी पर तैरते हुए भगवानों को देखकर हैरान थे। बीजलपुर के लोगों ने चित्र देखकर कहा कि उन्होंने कला और आस्था का इतना सुन्दर मेल कभी नहीं देखा।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=http://www.bhaskar.com/news/c-8-1123948-NOR.html |title= पांच घंटे में पानी पर रंगों से उकेर दिए भगवान राम और हनुमान  |accessmonthday= 19 मई|accessyear=2015 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दैनिक भास्कर |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.bhaskar.com/news/c-8-1123948-NOR.html?seq=5 पांच घंटे में पानी पर रंगों से उकेर दिए भगवान राम और हनुमान ]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:व्यक्ति परिचय]][[Category:चित्रकार]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>गोविन्द राम</name></author>
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