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	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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	<updated>2026-07-11T05:11:23Z</updated>
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		<title>राजस्थान के लोकदेवता</title>
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		<updated>2013-01-23T02:48:34Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: /* जाम्भोजी */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको यह दिखेगा कि लेख बनकर कैसा लगेगा --&amp;gt;&lt;br /&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==रामदेवजी==&lt;br /&gt;
- राजस्थान में रामदेवजी को बहुत अधिक पूजा जाता है। गरीबों के रखवाले रामदेव जी का अवतार ही भक्तों के संकट हरने के लिए ही हुआ था। राजस्थान में जोतपुर के पास रामदेवरा नामक स्थान है। जहाँ प्रतिवर्ष रामदेव जंयती पर विशाल मेला लगता है। दूर-दूर से भक्त इस दिन रामदेवरा पहुँचते है। कई लोग तो नंगे पैर चलकर रामदेवरा जाते है। &lt;br /&gt;
रुणिचा, नवलगढ़&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==जाम्भोजी==&lt;br /&gt;
 - जाम्भोजी का जन्म नागौर जिले के पीपासर ग्राम मे विक्रम सम्वत १५०८ मे हुआ था&lt;br /&gt;
सुरापुर, जांगला&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==गोगाजी==&lt;br /&gt;
- एकता व सांप्रदायिक सद़भावना का प्रतीक धार्मिक पर्व गोगामेडी (राजस्थान) में गोगाजी की समाधि स्थल पर मेला लाखों भक्तों के आकर्षण का केंद्र है। &lt;br /&gt;
गोगामेडी&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==जीणमाता==&lt;br /&gt;
- जयपुर बीकानेर मार्ग पर सीकर से 11 कि.मी. दूर गोरिया से जीण माता मंदिर केलिए मार्ग है | &lt;br /&gt;
सीकर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==शाकम्भरी माता==&lt;br /&gt;
सांभर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==सीमल माता==&lt;br /&gt;
बसंतगढ़ , सिरोही&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==हर्षनाथ जी==&lt;br /&gt;
सीकर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==केसरिया जी==&lt;br /&gt;
धुवेल (उदयपुर)&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==मल्लीनाथ जी==&lt;br /&gt;
तिलवाडा&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==शिला देवी==&lt;br /&gt;
आमेर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==कैला देवी==&lt;br /&gt;
करौली&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==ज्वाला देवी==&lt;br /&gt;
जोबनेर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==कल्ला देवी==&lt;br /&gt;
सिवाना&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==तेजा जी==&lt;br /&gt;
परबतसर, मोठपुर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==पाबूजी==&lt;br /&gt;
कोलुमंड&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==खैरतल जी==&lt;br /&gt;
अलवर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==करणी माता==&lt;br /&gt;
देशनोक (बीकानेर)&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==राजेश्वरी माता==&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- कृपया इस संदेश से ऊपर की ओर ही सम्पादन कार्य करें। ऊपर आप अपनी इच्छानुसार शीर्षक और सामग्री डाल सकते हैं --&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<title>राजस्थान के लोकदेवता</title>
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		<updated>2013-01-23T02:47:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==रामदेवजी==&lt;br /&gt;
- राजस्थान में रामदेवजी को बहुत अधिक पूजा जाता है। गरीबों के रखवाले रामदेव जी का अवतार ही भक्तों के संकट हरने के लिए ही हुआ था। राजस्थान में जोतपुर के पास रामदेवरा नामक स्थान है। जहाँ प्रतिवर्ष रामदेव जंयती पर विशाल मेला लगता है। दूर-दूर से भक्त इस दिन रामदेवरा पहुँचते है। कई लोग तो नंगे पैर चलकर रामदेवरा जाते है। &lt;br /&gt;
रुणिचा, नवलगढ़&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==जाम्भोजी==&lt;br /&gt;
 - जाम्भोजी का जन्म नागौर जिले के पीपासर ग्राम मे विक्रम सम्वत १५०८ मे हुआ था&lt;br /&gt;
सुरापुर, जांगला&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==गोगाजी== - एकता व सांप्रदायिक सद़भावना का प्रतीक धार्मिक पर्व गोगामेडी (राजस्थान) में गोगाजी की समाधि स्थल पर मेला लाखों भक्तों के आकर्षण का केंद्र है। &lt;br /&gt;
गोगामेडी&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==जीणमाता== - जयपुर बीकानेर मार्ग पर सीकर से 11 कि.मी. दूर गोरिया से जीण माता मंदिर केलिए मार्ग है | &lt;br /&gt;
सीकर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==शाकम्भरी माता==&lt;br /&gt;
सांभर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==सीमल माता==&lt;br /&gt;
बसंतगढ़ , सिरोही&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==हर्षनाथ जी==&lt;br /&gt;
सीकर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==केसरिया जी==&lt;br /&gt;
धुवेल (उदयपुर)&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==मल्लीनाथ जी==&lt;br /&gt;
तिलवाडा&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==शिला देवी==&lt;br /&gt;
आमेर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==कैला देवी==&lt;br /&gt;
करौली&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==ज्वाला देवी==&lt;br /&gt;
जोबनेर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==कल्ला देवी==&lt;br /&gt;
सिवाना&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==तेजा जी==&lt;br /&gt;
परबतसर, मोठपुर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==पाबूजी==&lt;br /&gt;
कोलुमंड&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==खैरतल जी==&lt;br /&gt;
अलवर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==करणी माता==&lt;br /&gt;
देशनोक (बीकानेर)&lt;br /&gt;
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==राजेश्वरी माता==&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<title>राजस्थान की होली</title>
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		<updated>2013-01-23T02:41:29Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[राजस्थान की होली]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राजस्थान की होली&lt;br /&gt;
राजस्थान के विभिन्न इलाकों में होली मनाने का अलग और खास अंदाज है। होली के मौके पर जानिए राज्य की होली से जुडी अनूठी परंपराओं के बारे में।&lt;br /&gt;
==लट्ठमार होली==&lt;br /&gt;
भरतपुर के ब्रजांचल में फाल्गुन का आगमन कोई साधारण बात नहीं है। यहां की वनिताएं इसके आते ही गा उठतीं हैं &amp;quot;सखी री भागन ते फागुन आयौ, मैं तो खेलूंगी श्याम संग फाग।&amp;quot; ब्रज के लोकगायन के लिए कवि ने कहा है &amp;quot;कंकड&amp;quot; हूं जहां कांकुरी है रहे, संकर हूं कि लगै जहं तारी, झूठे लगे जहं वेद-पुराण और मीठे लगे रसिया रसगारी।&amp;quot; यह रसिया ब्रज की धरोहर है, जिनमें नायक ब्रजराज कृष्ण और नायिका ब्रजेश्वरी राधा को लेकर ह्वदय के अंतरतम की भावना और उसके तार छेडे जाते हैं। गांव की चौपालों पर ब्रजवासी ग्रामीण अपने लोकवाद्य &amp;quot;बम&amp;quot; के साथ अपने ढप, ढोल और झांझ बजाते हुए रसिया गाते हैं। डीग क्षेत्र ब्रज का ह्वदय है, यहां की ग्रामीण महिलाएं अपने सिर पर भारी भरकम चरकुला रखकर उस पर जलते दीपकों के साथ नृत्य करती हैं। संपूर्ण ब्रज में इस तरह आनंद की अमृत वर्षा होती है। यह परंपरा ब्रज की धरोहर है। रियासती जमाने में भरतपुर के ब्रज अनुरागी राजाओं ने यहां सर्वसाधारण जनता के सामने स्वांगों की परंपरा को संरक्षण दिया। दामोदर जैसे गायकों के रसिक आज भी भरतपुर के लोगों की जबान पर हैं जिनमें शृंगार के साथ ही अध्यात्म की धारा बहती थी। बरसाने, नंदगांव, कामां, डीग आदि स्थानों पर ब्रज की लट्ठमार होली की परंपरा आज भी यहां की संस्कृति को पुष्ट करती है। चैत्र कृष्ण द्वितीया को दाऊजी का हुरंगा भी प्रसिद्ध है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==गेर नृत्य==&lt;br /&gt;
पाली के ग्रामीण इलाकों में फाल्गुन लगते ही गेर नृत्य शुरू हो जाता है। वहीं यह नृत्य डंका पंचमी से भी शुरू होता है। फाल्गुन के पूरे महीने रात में चौहटों पर ढोल और चंग की थाप पर गेर नृत्य किया जाता है। मारवाड गोडवाड इलाके में डांडी गैर नृत्य बहुत होता है और यह नृत्य इस इलाके में खासा लोकप्रिय है। यहां फाग गीत के साथ गालियां भी गाई जाती हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मुर्दे की सवारी== &lt;br /&gt;
मेवाड अंचल के भीलवाडा जिले के बरून्दनी गांव में होली के सात दिन बाद शीतला सप्तमी पर खेली जाने वाली लट्ठमार होली का अपना एक अलग ही मजा रहा है। माहेश्वरी समाज के स्त्री-पुरूष यह होली खेलते हैं। डोलचियों में पानी भरकर पुरूष महिलाओं पर डालते हैं और महिलाएं लाठियों से उन्हें पीटती हैं। पिछले पांच साल से यह परंपरा कम ही देखने को मिलती है। यहां होली के बाद बादशाह की सवारी निकाली जाती है, वहीं शीतला सप्तमी पर चित्तौडगढ वालों की हवेली से मुर्दे की सवारी निकाली जाती है। इसमें लकडी की सीढी बनाई जाती है और जिंदा व्यक्ति को उस पर लिटाकर अर्थी पूरे बाजार में निकालते हैं। इस दौरान युवा इस अर्थी को लेकर पूरे शहर में घूमते हैं। लोग इन्हें रंगों से नहला देते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==चंग-गींदड== &lt;br /&gt;
फाल्गुन शुरू होते ही शेखावाटी में होली का हुडदंग शुरू हो जाता है। हर मोहल्ले में चंग पार्टी होती है। होली के एक पखवाडे पहले गींदड शुरू हो जाता है। जगह- जगह भांग घुटती है। हालांकि अब ये नजारे कम ही देखने को मिलते हैं। जबकि, शेखावाटी में ढूंढ का चलन अभी है। परिवार में बच्चे के जन्म होने पर उसका ननिहाल पक्ष और बुआ कपडे और खिलौने होली पर बच्चे को देते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==तणी काटना== &lt;br /&gt;
बीकानेर क्षेत्र में भी होली मनाने का खास अंदाज है। यहां रम्मतें, अनूठे फागणियां, फुटबाल मैच, तणी काटने और पानी डोलची का खेल होली के दिन के खास आयोजन हैं। रम्मतों में खुले मंच पर विभिन्न कथानकों और किरदारों का अभिनय होता है। रम्मतों में शामिल होता है हास्य, अभिनय, होली ठिठोली, मौजमस्ती और साथ ही एक संदेश। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कोडे वाली होली== &lt;br /&gt;
श्रीगंगानगर में भी होली मनाने का खास अंदाज है। यहां देवर भाभी के बीच कोडे वाली होली काफी चर्चित रही है। होली पर देवर- भाभी को रंगने का प्रयास करते हैं और भाभी-देवर की पीठ पर कोडे मारती है। इस मौके पर देवर- भाभी से नेग भी मांगते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81&amp;diff=311856</id>
		<title>राजस्थान की जनजातियाँ</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81&amp;diff=311856"/>
		<updated>2013-01-23T02:35:42Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: /* साँसी जनजाति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको यह दिखेगा कि लेख बनकर कैसा लगेगा --&amp;gt;&lt;br /&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
[[राजस्थान की जनजातियाँ]]&lt;br /&gt;
==भील जनजाति==&lt;br /&gt;
* कर्नल जेम्स टोड ने भीलों को वनपुत्र कहा था.&lt;br /&gt;
* ‘भील’ शब्द की उत्पति ‘बील’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘ कमान; है.&lt;br /&gt;
* सबसे प्राचीन जनजाति&lt;br /&gt;
* बासवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर (सर्वाधिक), चित्तौड़गढ़ जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* दूसरी सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* प्रथाएँ&lt;br /&gt;
इस जनजाति के बड़े गाँव को पाल तथा छोटे गाँव को फला कहा जाता है.&lt;br /&gt;
पाल का नेता मुखिया या ग्रामपति कहलाता है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अटक –किसी एक हि पूर्वज से उत्पन्न गौत्रो को भील जनजाति में अटक कहते है.&lt;br /&gt;
* कू – भीलों के घरों को कू कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* टापरा - भीलों के घरों को टापरा भी कहते है.&lt;br /&gt;
* झूमटी(दाजिया)-आदिवासियों द्वारा मैदानी भागों को जलाकर जो कृषि की जाती उसे झूमटी कहते है.&lt;br /&gt;
* चिमाता- भीलों द्वारा पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली कृषि को चिमाता कहते है.&lt;br /&gt;
* गमेती- भीलों के गाँवो के मुखिया को गमेती कहते है.&lt;br /&gt;
* भील केसरिनाथ के चढ़ी हुई केसर का पानी पीकर कभी झूट नहीं बोलते है.&lt;br /&gt;
* ठेपाडा- भील जनजाति के लोग जो तंग धोती पहनते है.&lt;br /&gt;
* पोत्या-सफेद साफा जो सिर पर पहनते है.&lt;br /&gt;
* पिरिया- भील जाती में विवाह के अवसर पर दुल्हन जो पीले रंग का जो लहंगा पहनती है. लाल रंग की साड़ी को ‘सिंदूरी’ कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* भराड़ी – वैवाहिक अवसर पर जिस लोक देवी का भित्ति चित्र बनाया जाता है.&lt;br /&gt;
* फाइरो -फाइररो भील जनजाति का रणघोष&lt;br /&gt;
* टोटम à भील जनजाति के लोग टोटम (कुलदेवता) की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
ये लोग झूम कृषि भी करते है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मीणा जनजाति==&lt;br /&gt;
* मीणा का शाब्दिक अर्थ ‘मछली’ है. मीणा ‘मीन’ धातु से बना है.&lt;br /&gt;
* सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* सबसे अधिक मीणा जयपुर(सर्वाधिक), सवाई माधोपुर, उदयपुर, आदि जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* मीणा पुराण – रचियता –आचार्य मुनि मगन सागर&lt;br /&gt;
* लोक देवी – जीणमाता (रैवासा, सीकर)&lt;br /&gt;
* नाता प्रथा – इस प्रथा में स्त्री अपने पति, बच्चो को छोड़कर दूसरे पुरष से विवाह कर लेती है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के मुख्यत: दो वर्ग है - प्रथम वर्ग जमीदारो का है तथा द्वितीय वर्ग चौकीदारो का है .&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति २४ खापो में विभाजित है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के बहिभाट को 'जागा' कहा जाता है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति में संयुक्त परिवार प्रणाली पाई जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग मांसाहारी होते है.&lt;br /&gt;
इनका नेता - पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
गाँव का पटेल पंच पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
विवाह - राक्षस विवाह, ब्रह्मा विवाह, गांधर्व विवाह&lt;br /&gt;
ये लोग दुर्गा माता और शिवजी की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==गरासिया जनजाति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गरासिया जनजाति अपने को चौहान राजपूतो का वंशज मानती है&lt;br /&gt;
ये लोग शिव दुर्गा और भैरव की पूजा करते है&lt;br /&gt;
* सिरोही, गोगुन्दा (उदयपुर), बाली(पाली), जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* सोहरी – जिन कोठियों में गरासिया अपने अन्नाज का भंडारण करते है. उसे सोहरी कहते है.&lt;br /&gt;
* हूरें – व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्मारक बनाते है.&lt;br /&gt;
* सहलोत – मुखिया को सहलोत कहते है.&lt;br /&gt;
* मोर बंधिया – विशेष प्रकार का विवाह जिसमे हिन्दुओ की भांति फेरे लिए जाते है.&lt;br /&gt;
* पहराबना विवाह – नाममात्र के फेरे लिए जाते है , इस विवाह में ब्राह्मण की आवश्यकता नही पडती है.&lt;br /&gt;
* ताणना विवाह – इसमें न सगाई के जाती है, न फेरे है . इस विवाह में वर पक्ष वाले कन्या पक्ष वाले को कन्या मूल्य वैवाहिक भेंट के रूप में प्रदान करता है.&lt;br /&gt;
इनमे सफेद रंग के पशुओं को पवित्र माना जाता है.&lt;br /&gt;
==साँसी जनजाति==&lt;br /&gt;
*भरतपुर जिले में निवास करती है.&lt;br /&gt;
यह एक खानाबदोश जीवन व्यतीत करने वाली जनजाति है.&lt;br /&gt;
* साँसी जनजाति की उत्पति सांसमल नामक व्यक्ति से मानी जाती है.&lt;br /&gt;
* विवाह – युवक-युवतियों के वैवाहिक संबंध उनके माता-पिता द्वारा किये जाते है. विवाह पूर्व यौन संबंध को अत्यन्त गंभीरता से लिया जाता है.&lt;br /&gt;
* सगाई – यह रस्म इनमे अनोखी होती है , जब दो खानाबदोश समूह संयोग से घूमते-घूमते एक स्थान पर मिल जाते है, तो सगाई हो जाती है.&lt;br /&gt;
* साँसी जनजाति को दो भागों में विभिक्त है à बीजा और माला .&lt;br /&gt;
इनमे होली और दिवाली के अवसर पर देवी माता के सम्मुख बकरों की बली दी जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग वृक्षों की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
मांस और शराब इनका प्रिय भोजन है.&lt;br /&gt;
मांस में ये लोमड़ी और सांड का मांस पसन्द करते है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सहरिया जनजाति==&lt;br /&gt;
सहरिया –&lt;br /&gt;
* बारां जिले की किशनगंज तथा शाहाबाद तहसीलों में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* सहराना – इनकी बस्ती को सहराना कहते है.&lt;br /&gt;
इनमे वधूमूल्य तथा बहुपत्नी प्रथा का प्रचलन है.&lt;br /&gt;
ये लोग काली माता की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
ये दुर्गा पूजा विशेष उत्साह के साथ करते है.&lt;br /&gt;
* कोतवाल – मुखिया को कोतवाल कहते है.&lt;br /&gt;
* ये लोग स्थानांतरित खेती करते है.&lt;br /&gt;
* ये लो जंगलो से जड़ी-बूटियों को एकत्रत कर विभिन्न प्रकार की दवाएं बनाने में दक्ष होते है.&lt;br /&gt;
ये राजस्थान की एकमात्र आदिम जनजाति है.&lt;br /&gt;
* सहरिया जनजाति राज्य की सर्वाधिक पिछड़ी जनजाति होने के कारण भारत सरकार ने राज्य की केवल इसी जनजाति को आदिम जनजाति समूह की सूची में रखा गया है.&lt;br /&gt;
* सहरिया शब्द की उत्पति ‘सहर’ से हुई है जिसका अर्थ जगह होता है.&lt;br /&gt;
इस जनजाति के लोग जंगलो से कंदमूल एवं शहद एकत्रित कर अपनी जीविका चलाते है.&lt;br /&gt;
ये लोग मदिरा पान भी करते है.&lt;br /&gt;
==कंजर जनजाति==&lt;br /&gt;
* ‘कंजर’ शब्द की उत्पति ‘काननचार’/’कनकचार’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘ जंगलो में विचरण करने वाला’.&lt;br /&gt;
* झालावाड, बारां, कोटा ओर उदयपुर जिलो में रहती है.&lt;br /&gt;
* कंजर एक अपराध प्रवृति के लिए कुख्यात है.&lt;br /&gt;
* पटेल – कंजर जनजाति के मुखिया&lt;br /&gt;
* पाती माँगना –ये अपराध करने से पूर्व इश्वर का आशीर्वाद लेते है.उसको पाती माँगना कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* हाकम राजा का प्याला – ये हाकम राजा क प्याला पीकर  कभी झूठ नही बोलते है.&lt;br /&gt;
इन लोगो के घरों में भागने के लिए पीछे की तरफ खिडकी होती है परन्तु दरवाजे पर किवाड़ नही होते है.&lt;br /&gt;
ये लोग हनुमान और चौथ माता की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
==डामोर==&lt;br /&gt;
*बाँसवाड़ा और डूंगरपुर जिले की सीमलवाडा पंचायत समिति में निवास करती है.&lt;br /&gt;
*मुखी – डामोर जनजाति की पंचायत का मुखिया&lt;br /&gt;
*ये लोग अंधविश्वासी होते है.&lt;br /&gt;
*ये लोग मांस और शराब के काफी शौक़ीन होते है.&lt;br /&gt;
==कथौडी==&lt;br /&gt;
*यह जनजाति बारां जिले और दक्षिणी-पश्चिम राजस्थान में निवास करते है.&lt;br /&gt;
*मुख्य व्यवसाय – खेर के वृक्षों से कत्था तैयार करना.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कालबेलिया==&lt;br /&gt;
*मुख्य व्यवसाय – साँप पकडना है.&lt;br /&gt;
*इस जनजाति के लोग सफेरे होते है.&lt;br /&gt;
*ये साँप का खेल दिखाकर अपना पेट भरते है.&lt;br /&gt;
*राजस्थान का कालबेलिया नृत्य यूनेस्को की विरासत सूची में (पारंपरिक छाऊ नृत्य )&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- कृपया इस संदेश से ऊपर की ओर ही सम्पादन कार्य करें। ऊपर आप अपनी इच्छानुसार शीर्षक और सामग्री डाल सकते हैं --&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- यदि आप सम्पादन में नये हैं तो कृपया इस संदेश से नीचे सम्पादन कार्य न करें --&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81&amp;diff=311855</id>
		<title>राजस्थान की जनजातियाँ</title>
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		<updated>2013-01-23T02:32:28Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: /* मीणा जनजाति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको यह दिखेगा कि लेख बनकर कैसा लगेगा --&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:{{PAGENAME}}|thumb|{{PAGENAME}} लिंक पर क्लिक करके चित्र अपलोड करें]]&lt;br /&gt;
{{पुनरीक्षण}}&amp;lt;!-- कृपया इस साँचे को हटाएँ नहीं (डिलीट न करें)। इसके नीचे से ही सम्पादन कार्य करें। --&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
[[राजस्थान की जनजातियाँ]]&lt;br /&gt;
==भील जनजाति==&lt;br /&gt;
* कर्नल जेम्स टोड ने भीलों को वनपुत्र कहा था.&lt;br /&gt;
* ‘भील’ शब्द की उत्पति ‘बील’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘ कमान; है.&lt;br /&gt;
* सबसे प्राचीन जनजाति&lt;br /&gt;
* बासवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर (सर्वाधिक), चित्तौड़गढ़ जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* दूसरी सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* प्रथाएँ&lt;br /&gt;
इस जनजाति के बड़े गाँव को पाल तथा छोटे गाँव को फला कहा जाता है.&lt;br /&gt;
पाल का नेता मुखिया या ग्रामपति कहलाता है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अटक –किसी एक हि पूर्वज से उत्पन्न गौत्रो को भील जनजाति में अटक कहते है.&lt;br /&gt;
* कू – भीलों के घरों को कू कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* टापरा - भीलों के घरों को टापरा भी कहते है.&lt;br /&gt;
* झूमटी(दाजिया)-आदिवासियों द्वारा मैदानी भागों को जलाकर जो कृषि की जाती उसे झूमटी कहते है.&lt;br /&gt;
* चिमाता- भीलों द्वारा पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली कृषि को चिमाता कहते है.&lt;br /&gt;
* गमेती- भीलों के गाँवो के मुखिया को गमेती कहते है.&lt;br /&gt;
* भील केसरिनाथ के चढ़ी हुई केसर का पानी पीकर कभी झूट नहीं बोलते है.&lt;br /&gt;
* ठेपाडा- भील जनजाति के लोग जो तंग धोती पहनते है.&lt;br /&gt;
* पोत्या-सफेद साफा जो सिर पर पहनते है.&lt;br /&gt;
* पिरिया- भील जाती में विवाह के अवसर पर दुल्हन जो पीले रंग का जो लहंगा पहनती है. लाल रंग की साड़ी को ‘सिंदूरी’ कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* भराड़ी – वैवाहिक अवसर पर जिस लोक देवी का भित्ति चित्र बनाया जाता है.&lt;br /&gt;
* फाइरो -फाइररो भील जनजाति का रणघोष&lt;br /&gt;
* टोटम à भील जनजाति के लोग टोटम (कुलदेवता) की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
ये लोग झूम कृषि भी करते है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मीणा जनजाति==&lt;br /&gt;
* मीणा का शाब्दिक अर्थ ‘मछली’ है. मीणा ‘मीन’ धातु से बना है.&lt;br /&gt;
* सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* सबसे अधिक मीणा जयपुर(सर्वाधिक), सवाई माधोपुर, उदयपुर, आदि जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* मीणा पुराण – रचियता –आचार्य मुनि मगन सागर&lt;br /&gt;
* लोक देवी – जीणमाता (रैवासा, सीकर)&lt;br /&gt;
* नाता प्रथा – इस प्रथा में स्त्री अपने पति, बच्चो को छोड़कर दूसरे पुरष से विवाह कर लेती है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के मुख्यत: दो वर्ग है - प्रथम वर्ग जमीदारो का है तथा द्वितीय वर्ग चौकीदारो का है .&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति २४ खापो में विभाजित है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के बहिभाट को 'जागा' कहा जाता है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति में संयुक्त परिवार प्रणाली पाई जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग मांसाहारी होते है.&lt;br /&gt;
इनका नेता - पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
गाँव का पटेल पंच पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
विवाह - राक्षस विवाह, ब्रह्मा विवाह, गांधर्व विवाह&lt;br /&gt;
ये लोग दुर्गा माता और शिवजी की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==गरासिया जनजाति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गरासिया जनजाति अपने को चौहान राजपूतो का वंशज मानती है&lt;br /&gt;
ये लोग शिव दुर्गा और भैरव की पूजा करते है&lt;br /&gt;
* सिरोही, गोगुन्दा (उदयपुर), बाली(पाली), जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* सोहरी – जिन कोठियों में गरासिया अपने अन्नाज का भंडारण करते है. उसे सोहरी कहते है.&lt;br /&gt;
* हूरें – व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्मारक बनाते है.&lt;br /&gt;
* सहलोत – मुखिया को सहलोत कहते है.&lt;br /&gt;
* मोर बंधिया – विशेष प्रकार का विवाह जिसमे हिन्दुओ की भांति फेरे लिए जाते है.&lt;br /&gt;
* पहराबना विवाह – नाममात्र के फेरे लिए जाते है , इस विवाह में ब्राह्मण की आवश्यकता नही पडती है.&lt;br /&gt;
* ताणना विवाह – इसमें न सगाई के जाती है, न फेरे है . इस विवाह में वर पक्ष वाले कन्या पक्ष वाले को कन्या मूल्य वैवाहिक भेंट के रूप में प्रदान करता है.&lt;br /&gt;
इनमे सफेद रंग के पशुओं को पवित्र माना जाता है.&lt;br /&gt;
===साँसी जनजाति===&lt;br /&gt;
*भरतपुर जिले में निवास करती है.&lt;br /&gt;
यह एक खानाबदोश जीवन व्यतीत करने वाली जनजाति है.&lt;br /&gt;
* साँसी जनजाति की उत्पति सांसमल नामक व्यक्ति से मानी जाती है.&lt;br /&gt;
* विवाह – युवक-युवतियों के वैवाहिक संबंध उनके माता-पिता द्वारा किये जाते है. विवाह पूर्व यौन संबंध को अत्यन्त गंभीरता से लिया जाता है.&lt;br /&gt;
* सगाई – यह रस्म इनमे अनोखी होती है , जब दो खानाबदोश समूह संयोग से घूमते-घूमते एक स्थान पर मिल जाते है, तो सगाई हो जाती है.&lt;br /&gt;
* साँसी जनजाति को दो भागों में विभिक्त है à बीजा और माला .&lt;br /&gt;
इनमे होली और दिवाली के अवसर पर देवी माता के सम्मुख बकरों की बली दी जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग वृक्षों की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
मांस और शराब इनका प्रिय भोजन है.&lt;br /&gt;
मांस में ये लोमड़ी और सांड का मांस पसन्द करते है.&lt;br /&gt;
==सहरिया जनजाति==&lt;br /&gt;
सहरिया –&lt;br /&gt;
* बारां जिले की किशनगंज तथा शाहाबाद तहसीलों में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* सहराना – इनकी बस्ती को सहराना कहते है.&lt;br /&gt;
इनमे वधूमूल्य तथा बहुपत्नी प्रथा का प्रचलन है.&lt;br /&gt;
ये लोग काली माता की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
ये दुर्गा पूजा विशेष उत्साह के साथ करते है.&lt;br /&gt;
* कोतवाल – मुखिया को कोतवाल कहते है.&lt;br /&gt;
* ये लोग स्थानांतरित खेती करते है.&lt;br /&gt;
* ये लो जंगलो से जड़ी-बूटियों को एकत्रत कर विभिन्न प्रकार की दवाएं बनाने में दक्ष होते है.&lt;br /&gt;
ये राजस्थान की एकमात्र आदिम जनजाति है.&lt;br /&gt;
* सहरिया जनजाति राज्य की सर्वाधिक पिछड़ी जनजाति होने के कारण भारत सरकार ने राज्य की केवल इसी जनजाति को आदिम जनजाति समूह की सूची में रखा गया है.&lt;br /&gt;
* सहरिया शब्द की उत्पति ‘सहर’ से हुई है जिसका अर्थ जगह होता है.&lt;br /&gt;
इस जनजाति के लोग जंगलो से कंदमूल एवं शहद एकत्रित कर अपनी जीविका चलाते है.&lt;br /&gt;
ये लोग मदिरा पान भी करते है.&lt;br /&gt;
==कंजर जनजाति==&lt;br /&gt;
* ‘कंजर’ शब्द की उत्पति ‘काननचार’/’कनकचार’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘ जंगलो में विचरण करने वाला’.&lt;br /&gt;
* झालावाड, बारां, कोटा ओर उदयपुर जिलो में रहती है.&lt;br /&gt;
* कंजर एक अपराध प्रवृति के लिए कुख्यात है.&lt;br /&gt;
* पटेल – कंजर जनजाति के मुखिया&lt;br /&gt;
* पाती माँगना –ये अपराध करने से पूर्व इश्वर का आशीर्वाद लेते है.उसको पाती माँगना कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* हाकम राजा का प्याला – ये हाकम राजा क प्याला पीकर  कभी झूठ नही बोलते है.&lt;br /&gt;
इन लोगो के घरों में भागने के लिए पीछे की तरफ खिडकी होती है परन्तु दरवाजे पर किवाड़ नही होते है.&lt;br /&gt;
ये लोग हनुमान और चौथ माता की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
==डामोर==&lt;br /&gt;
*बाँसवाड़ा और डूंगरपुर जिले की सीमलवाडा पंचायत समिति में निवास करती है.&lt;br /&gt;
*मुखी – डामोर जनजाति की पंचायत का मुखिया&lt;br /&gt;
*ये लोग अंधविश्वासी होते है.&lt;br /&gt;
*ये लोग मांस और शराब के काफी शौक़ीन होते है.&lt;br /&gt;
==कथौडी==&lt;br /&gt;
*यह जनजाति बारां जिले और दक्षिणी-पश्चिम राजस्थान में निवास करते है.&lt;br /&gt;
*मुख्य व्यवसाय – खेर के वृक्षों से कत्था तैयार करना.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कालबेलिया==&lt;br /&gt;
*मुख्य व्यवसाय – साँप पकडना है.&lt;br /&gt;
*इस जनजाति के लोग सफेरे होते है.&lt;br /&gt;
*ये साँप का खेल दिखाकर अपना पेट भरते है.&lt;br /&gt;
*राजस्थान का कालबेलिया नृत्य यूनेस्को की विरासत सूची में (पारंपरिक छाऊ नृत्य )&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- कृपया इस संदेश से ऊपर की ओर ही सम्पादन कार्य करें। ऊपर आप अपनी इच्छानुसार शीर्षक और सामग्री डाल सकते हैं --&amp;gt; &lt;br /&gt;
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{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81&amp;diff=311854</id>
		<title>राजस्थान की जनजातियाँ</title>
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		<updated>2013-01-23T02:31:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: /* शीर्षक उदाहरण 3 */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
[[राजस्थान की जनजातियाँ]]&lt;br /&gt;
==भील जनजाति==&lt;br /&gt;
* कर्नल जेम्स टोड ने भीलों को वनपुत्र कहा था.&lt;br /&gt;
* ‘भील’ शब्द की उत्पति ‘बील’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘ कमान; है.&lt;br /&gt;
* सबसे प्राचीन जनजाति&lt;br /&gt;
* बासवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर (सर्वाधिक), चित्तौड़गढ़ जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* दूसरी सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* प्रथाएँ&lt;br /&gt;
इस जनजाति के बड़े गाँव को पाल तथा छोटे गाँव को फला कहा जाता है.&lt;br /&gt;
पाल का नेता मुखिया या ग्रामपति कहलाता है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अटक –किसी एक हि पूर्वज से उत्पन्न गौत्रो को भील जनजाति में अटक कहते है.&lt;br /&gt;
* कू – भीलों के घरों को कू कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* टापरा - भीलों के घरों को टापरा भी कहते है.&lt;br /&gt;
* झूमटी(दाजिया)-आदिवासियों द्वारा मैदानी भागों को जलाकर जो कृषि की जाती उसे झूमटी कहते है.&lt;br /&gt;
* चिमाता- भीलों द्वारा पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली कृषि को चिमाता कहते है.&lt;br /&gt;
* गमेती- भीलों के गाँवो के मुखिया को गमेती कहते है.&lt;br /&gt;
* भील केसरिनाथ के चढ़ी हुई केसर का पानी पीकर कभी झूट नहीं बोलते है.&lt;br /&gt;
* ठेपाडा- भील जनजाति के लोग जो तंग धोती पहनते है.&lt;br /&gt;
* पोत्या-सफेद साफा जो सिर पर पहनते है.&lt;br /&gt;
* पिरिया- भील जाती में विवाह के अवसर पर दुल्हन जो पीले रंग का जो लहंगा पहनती है. लाल रंग की साड़ी को ‘सिंदूरी’ कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* भराड़ी – वैवाहिक अवसर पर जिस लोक देवी का भित्ति चित्र बनाया जाता है.&lt;br /&gt;
* फाइरो -फाइररो भील जनजाति का रणघोष&lt;br /&gt;
* टोटम à भील जनजाति के लोग टोटम (कुलदेवता) की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
ये लोग झूम कृषि भी करते है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मीणा जनजाति==&lt;br /&gt;
मीणा –&lt;br /&gt;
* मीणा का शाब्दिक अर्थ ‘मछली’ है. मीणा ‘मीन’ धातु से बना है.&lt;br /&gt;
* सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* सबसे अधिक मीणा जयपुर(सर्वाधिक), सवाई माधोपुर, उदयपुर, आदि जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* मीणा पुराण – रचियता –आचार्य मुनि मगन सागर&lt;br /&gt;
* लोक देवी – जीणमाता (रैवासा, सीकर)&lt;br /&gt;
* नाता प्रथा – इस प्रथा में स्त्री अपने पति, बच्चो को छोड़कर दूसरे पुरष से विवाह कर लेती है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के मुख्यत: दो वर्ग है - प्रथम वर्ग जमीदारो का है तथा द्वितीय वर्ग चौकीदारो का है .&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति २४ खापो में विभाजित है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के बहिभाट को 'जागा' कहा जाता है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति में संयुक्त परिवार प्रणाली पाई जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग मांसाहारी होते है.&lt;br /&gt;
इनका नेता - पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
गाँव का पटेल पंच पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
विवाह - राक्षस विवाह, ब्रह्मा विवाह, गांधर्व विवाह&lt;br /&gt;
ये लोग दुर्गा माता और शिवजी की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
==गरासिया जनजाति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गरासिया जनजाति अपने को चौहान राजपूतो का वंशज मानती है&lt;br /&gt;
ये लोग शिव दुर्गा और भैरव की पूजा करते है&lt;br /&gt;
* सिरोही, गोगुन्दा (उदयपुर), बाली(पाली), जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* सोहरी – जिन कोठियों में गरासिया अपने अन्नाज का भंडारण करते है. उसे सोहरी कहते है.&lt;br /&gt;
* हूरें – व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्मारक बनाते है.&lt;br /&gt;
* सहलोत – मुखिया को सहलोत कहते है.&lt;br /&gt;
* मोर बंधिया – विशेष प्रकार का विवाह जिसमे हिन्दुओ की भांति फेरे लिए जाते है.&lt;br /&gt;
* पहराबना विवाह – नाममात्र के फेरे लिए जाते है , इस विवाह में ब्राह्मण की आवश्यकता नही पडती है.&lt;br /&gt;
* ताणना विवाह – इसमें न सगाई के जाती है, न फेरे है . इस विवाह में वर पक्ष वाले कन्या पक्ष वाले को कन्या मूल्य वैवाहिक भेंट के रूप में प्रदान करता है.&lt;br /&gt;
इनमे सफेद रंग के पशुओं को पवित्र माना जाता है.&lt;br /&gt;
===साँसी जनजाति===&lt;br /&gt;
*भरतपुर जिले में निवास करती है.&lt;br /&gt;
यह एक खानाबदोश जीवन व्यतीत करने वाली जनजाति है.&lt;br /&gt;
* साँसी जनजाति की उत्पति सांसमल नामक व्यक्ति से मानी जाती है.&lt;br /&gt;
* विवाह – युवक-युवतियों के वैवाहिक संबंध उनके माता-पिता द्वारा किये जाते है. विवाह पूर्व यौन संबंध को अत्यन्त गंभीरता से लिया जाता है.&lt;br /&gt;
* सगाई – यह रस्म इनमे अनोखी होती है , जब दो खानाबदोश समूह संयोग से घूमते-घूमते एक स्थान पर मिल जाते है, तो सगाई हो जाती है.&lt;br /&gt;
* साँसी जनजाति को दो भागों में विभिक्त है à बीजा और माला .&lt;br /&gt;
इनमे होली और दिवाली के अवसर पर देवी माता के सम्मुख बकरों की बली दी जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग वृक्षों की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
मांस और शराब इनका प्रिय भोजन है.&lt;br /&gt;
मांस में ये लोमड़ी और सांड का मांस पसन्द करते है.&lt;br /&gt;
==सहरिया जनजाति==&lt;br /&gt;
सहरिया –&lt;br /&gt;
* बारां जिले की किशनगंज तथा शाहाबाद तहसीलों में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* सहराना – इनकी बस्ती को सहराना कहते है.&lt;br /&gt;
इनमे वधूमूल्य तथा बहुपत्नी प्रथा का प्रचलन है.&lt;br /&gt;
ये लोग काली माता की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
ये दुर्गा पूजा विशेष उत्साह के साथ करते है.&lt;br /&gt;
* कोतवाल – मुखिया को कोतवाल कहते है.&lt;br /&gt;
* ये लोग स्थानांतरित खेती करते है.&lt;br /&gt;
* ये लो जंगलो से जड़ी-बूटियों को एकत्रत कर विभिन्न प्रकार की दवाएं बनाने में दक्ष होते है.&lt;br /&gt;
ये राजस्थान की एकमात्र आदिम जनजाति है.&lt;br /&gt;
* सहरिया जनजाति राज्य की सर्वाधिक पिछड़ी जनजाति होने के कारण भारत सरकार ने राज्य की केवल इसी जनजाति को आदिम जनजाति समूह की सूची में रखा गया है.&lt;br /&gt;
* सहरिया शब्द की उत्पति ‘सहर’ से हुई है जिसका अर्थ जगह होता है.&lt;br /&gt;
इस जनजाति के लोग जंगलो से कंदमूल एवं शहद एकत्रित कर अपनी जीविका चलाते है.&lt;br /&gt;
ये लोग मदिरा पान भी करते है.&lt;br /&gt;
==कंजर जनजाति==&lt;br /&gt;
* ‘कंजर’ शब्द की उत्पति ‘काननचार’/’कनकचार’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘ जंगलो में विचरण करने वाला’.&lt;br /&gt;
* झालावाड, बारां, कोटा ओर उदयपुर जिलो में रहती है.&lt;br /&gt;
* कंजर एक अपराध प्रवृति के लिए कुख्यात है.&lt;br /&gt;
* पटेल – कंजर जनजाति के मुखिया&lt;br /&gt;
* पाती माँगना –ये अपराध करने से पूर्व इश्वर का आशीर्वाद लेते है.उसको पाती माँगना कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* हाकम राजा का प्याला – ये हाकम राजा क प्याला पीकर  कभी झूठ नही बोलते है.&lt;br /&gt;
इन लोगो के घरों में भागने के लिए पीछे की तरफ खिडकी होती है परन्तु दरवाजे पर किवाड़ नही होते है.&lt;br /&gt;
ये लोग हनुमान और चौथ माता की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
==डामोर==&lt;br /&gt;
*बाँसवाड़ा और डूंगरपुर जिले की सीमलवाडा पंचायत समिति में निवास करती है.&lt;br /&gt;
*मुखी – डामोर जनजाति की पंचायत का मुखिया&lt;br /&gt;
*ये लोग अंधविश्वासी होते है.&lt;br /&gt;
*ये लोग मांस और शराब के काफी शौक़ीन होते है.&lt;br /&gt;
==कथौडी==&lt;br /&gt;
*यह जनजाति बारां जिले और दक्षिणी-पश्चिम राजस्थान में निवास करते है.&lt;br /&gt;
*मुख्य व्यवसाय – खेर के वृक्षों से कत्था तैयार करना.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कालबेलिया==&lt;br /&gt;
*मुख्य व्यवसाय – साँप पकडना है.&lt;br /&gt;
*इस जनजाति के लोग सफेरे होते है.&lt;br /&gt;
*ये साँप का खेल दिखाकर अपना पेट भरते है.&lt;br /&gt;
*राजस्थान का कालबेलिया नृत्य यूनेस्को की विरासत सूची में (पारंपरिक छाऊ नृत्य )&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- कृपया इस संदेश से ऊपर की ओर ही सम्पादन कार्य करें। ऊपर आप अपनी इच्छानुसार शीर्षक और सामग्री डाल सकते हैं --&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>राजस्थान की जनजातियाँ</title>
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		<updated>2013-01-23T02:24:23Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: /* भील जनजाति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको यह दिखेगा कि लेख बनकर कैसा लगेगा --&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:{{PAGENAME}}|thumb|{{PAGENAME}} लिंक पर क्लिक करके चित्र अपलोड करें]]&lt;br /&gt;
{{पुनरीक्षण}}&amp;lt;!-- कृपया इस साँचे को हटाएँ नहीं (डिलीट न करें)। इसके नीचे से ही सम्पादन कार्य करें। --&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
[[राजस्थान की जनजातियाँ]]&lt;br /&gt;
==भील जनजाति==&lt;br /&gt;
* कर्नल जेम्स टोड ने भीलों को वनपुत्र कहा था.&lt;br /&gt;
* ‘भील’ शब्द की उत्पति ‘बील’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘ कमान; है.&lt;br /&gt;
* सबसे प्राचीन जनजाति&lt;br /&gt;
* बासवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर (सर्वाधिक), चित्तौड़गढ़ जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* दूसरी सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* प्रथाएँ&lt;br /&gt;
इस जनजाति के बड़े गाँव को पाल तथा छोटे गाँव को फला कहा जाता है.&lt;br /&gt;
पाल का नेता मुखिया या ग्रामपति कहलाता है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अटक –किसी एक हि पूर्वज से उत्पन्न गौत्रो को भील जनजाति में अटक कहते है.&lt;br /&gt;
* कू – भीलों के घरों को कू कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* टापरा - भीलों के घरों को टापरा भी कहते है.&lt;br /&gt;
* झूमटी(दाजिया)-आदिवासियों द्वारा मैदानी भागों को जलाकर जो कृषि की जाती उसे झूमटी कहते है.&lt;br /&gt;
* चिमाता- भीलों द्वारा पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली कृषि को चिमाता कहते है.&lt;br /&gt;
* गमेती- भीलों के गाँवो के मुखिया को गमेती कहते है.&lt;br /&gt;
* भील केसरिनाथ के चढ़ी हुई केसर का पानी पीकर कभी झूट नहीं बोलते है.&lt;br /&gt;
* ठेपाडा- भील जनजाति के लोग जो तंग धोती पहनते है.&lt;br /&gt;
* पोत्या-सफेद साफा जो सिर पर पहनते है.&lt;br /&gt;
* पिरिया- भील जाती में विवाह के अवसर पर दुल्हन जो पीले रंग का जो लहंगा पहनती है. लाल रंग की साड़ी को ‘सिंदूरी’ कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* भराड़ी – वैवाहिक अवसर पर जिस लोक देवी का भित्ति चित्र बनाया जाता है.&lt;br /&gt;
* फाइरो -फाइररो भील जनजाति का रणघोष&lt;br /&gt;
* टोटम à भील जनजाति के लोग टोटम (कुलदेवता) की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
ये लोग झूम कृषि भी करते है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मीणा जनजाति==&lt;br /&gt;
मीणा –&lt;br /&gt;
* मीणा का शाब्दिक अर्थ ‘मछली’ है. मीणा ‘मीन’ धातु से बना है.&lt;br /&gt;
* सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* सबसे अधिक मीणा जयपुर(सर्वाधिक), सवाई माधोपुर, उदयपुर, आदि जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* मीणा पुराण – रचियता –आचार्य मुनि मगन सागर&lt;br /&gt;
* लोक देवी – जीणमाता (रैवासा, सीकर)&lt;br /&gt;
* नाता प्रथा – इस प्रथा में स्त्री अपने पति, बच्चो को छोड़कर दूसरे पुरष से विवाह कर लेती है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के मुख्यत: दो वर्ग है - प्रथम वर्ग जमीदारो का है तथा द्वितीय वर्ग चौकीदारो का है .&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति २४ खापो में विभाजित है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के बहिभाट को 'जागा' कहा जाता है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति में संयुक्त परिवार प्रणाली पाई जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग मांसाहारी होते है.&lt;br /&gt;
इनका नेता - पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
गाँव का पटेल पंच पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
विवाह - राक्षस विवाह, ब्रह्मा विवाह, गांधर्व विवाह&lt;br /&gt;
ये लोग दुर्गा माता और शिवजी की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
==गरासिया जनजाति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गरासिया जनजाति अपने को चौहान राजपूतो का वंशज मानती है&lt;br /&gt;
ये लोग शिव दुर्गा और भैरव की पूजा करते है&lt;br /&gt;
* सिरोही, गोगुन्दा (उदयपुर), बाली(पाली), जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* सोहरी – जिन कोठियों में गरासिया अपने अन्नाज का भंडारण करते है. उसे सोहरी कहते है.&lt;br /&gt;
* हूरें – व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्मारक बनाते है.&lt;br /&gt;
* सहलोत – मुखिया को सहलोत कहते है.&lt;br /&gt;
* मोर बंधिया – विशेष प्रकार का विवाह जिसमे हिन्दुओ की भांति फेरे लिए जाते है.&lt;br /&gt;
* पहराबना विवाह – नाममात्र के फेरे लिए जाते है , इस विवाह में ब्राह्मण की आवश्यकता नही पडती है.&lt;br /&gt;
* ताणना विवाह – इसमें न सगाई के जाती है, न फेरे है . इस विवाह में वर पक्ष वाले कन्या पक्ष वाले को कन्या मूल्य वैवाहिक भेंट के रूप में प्रदान करता है.&lt;br /&gt;
इनमे सफेद रंग के पशुओं को पवित्र माना जाता है.&lt;br /&gt;
====शीर्षक उदाहरण 3====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=====शीर्षक उदाहरण 4=====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<title>राजस्थान की जनजातियाँ</title>
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		<updated>2013-01-23T02:23:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: /* भील जनजाति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको यह दिखेगा कि लेख बनकर कैसा लगेगा --&amp;gt;&lt;br /&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
[[राजस्थान की जनजातियाँ]]&lt;br /&gt;
==भील जनजाति==&lt;br /&gt;
 :&lt;br /&gt;
* कर्नल जेम्स टोड ने भीलों को वनपुत्र कहा था.&lt;br /&gt;
* ‘भील’ शब्द की उत्पति ‘बील’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘ कमान; है.&lt;br /&gt;
* सबसे प्राचीन जनजाति&lt;br /&gt;
* बासवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर (सर्वाधिक), चित्तौड़गढ़ जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* दूसरी सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* प्रथाएँ&lt;br /&gt;
इस जनजाति के बड़े गाँव को पाल तथा छोटे गाँव को फला कहा जाता है.&lt;br /&gt;
पाल का नेता मुखिया या ग्रामपति कहलाता है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अटक –किसी एक हि पूर्वज से उत्पन्न गौत्रो को भील जनजाति में अटक कहते है.&lt;br /&gt;
* कू – भीलों के घरों को कू कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* टापरा - भीलों के घरों को टापरा भी कहते है.&lt;br /&gt;
* झूमटी(दाजिया)-आदिवासियों द्वारा मैदानी भागों को जलाकर जो कृषि की जाती उसे झूमटी कहते है.&lt;br /&gt;
* चिमाता- भीलों द्वारा पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली कृषि को चिमाता कहते है.&lt;br /&gt;
* गमेती- भीलों के गाँवो के मुखिया को गमेती कहते है.&lt;br /&gt;
* भील केसरिनाथ के चढ़ी हुई केसर का पानी पीकर कभी झूट नहीं बोलते है.&lt;br /&gt;
* ठेपाडा- भील जनजाति के लोग जो तंग धोती पहनते है.&lt;br /&gt;
* पोत्या-सफेद साफा जो सिर पर पहनते है.&lt;br /&gt;
* पिरिया- भील जाती में विवाह के अवसर पर दुल्हन जो पीले रंग का जो लहंगा पहनती है. लाल रंग की साड़ी को ‘सिंदूरी’ कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* भराड़ी – वैवाहिक अवसर पर जिस लोक देवी का भित्ति चित्र बनाया जाता है.&lt;br /&gt;
* फाइरो -फाइररो भील जनजाति का रणघोष&lt;br /&gt;
* टोटम à भील जनजाति के लोग टोटम (कुलदेवता) की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
ये लोग झूम कृषि भी करते है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मीणा जनजाति==&lt;br /&gt;
मीणा –&lt;br /&gt;
* मीणा का शाब्दिक अर्थ ‘मछली’ है. मीणा ‘मीन’ धातु से बना है.&lt;br /&gt;
* सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* सबसे अधिक मीणा जयपुर(सर्वाधिक), सवाई माधोपुर, उदयपुर, आदि जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* मीणा पुराण – रचियता –आचार्य मुनि मगन सागर&lt;br /&gt;
* लोक देवी – जीणमाता (रैवासा, सीकर)&lt;br /&gt;
* नाता प्रथा – इस प्रथा में स्त्री अपने पति, बच्चो को छोड़कर दूसरे पुरष से विवाह कर लेती है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के मुख्यत: दो वर्ग है - प्रथम वर्ग जमीदारो का है तथा द्वितीय वर्ग चौकीदारो का है .&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति २४ खापो में विभाजित है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के बहिभाट को 'जागा' कहा जाता है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति में संयुक्त परिवार प्रणाली पाई जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग मांसाहारी होते है.&lt;br /&gt;
इनका नेता - पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
गाँव का पटेल पंच पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
विवाह - राक्षस विवाह, ब्रह्मा विवाह, गांधर्व विवाह&lt;br /&gt;
ये लोग दुर्गा माता और शिवजी की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
==गरासिया जनजाति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गरासिया जनजाति अपने को चौहान राजपूतो का वंशज मानती है&lt;br /&gt;
ये लोग शिव दुर्गा और भैरव की पूजा करते है&lt;br /&gt;
* सिरोही, गोगुन्दा (उदयपुर), बाली(पाली), जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* सोहरी – जिन कोठियों में गरासिया अपने अन्नाज का भंडारण करते है. उसे सोहरी कहते है.&lt;br /&gt;
* हूरें – व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्मारक बनाते है.&lt;br /&gt;
* सहलोत – मुखिया को सहलोत कहते है.&lt;br /&gt;
* मोर बंधिया – विशेष प्रकार का विवाह जिसमे हिन्दुओ की भांति फेरे लिए जाते है.&lt;br /&gt;
* पहराबना विवाह – नाममात्र के फेरे लिए जाते है , इस विवाह में ब्राह्मण की आवश्यकता नही पडती है.&lt;br /&gt;
* ताणना विवाह – इसमें न सगाई के जाती है, न फेरे है . इस विवाह में वर पक्ष वाले कन्या पक्ष वाले को कन्या मूल्य वैवाहिक भेंट के रूप में प्रदान करता है.&lt;br /&gt;
इनमे सफेद रंग के पशुओं को पवित्र माना जाता है.&lt;br /&gt;
====शीर्षक उदाहरण 3====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=====शीर्षक उदाहरण 4=====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<title>राजस्थान की जनजातियाँ</title>
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		<updated>2013-01-23T02:22:09Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
[[राजस्थान की जनजातियाँ]]&lt;br /&gt;
==भील जनजाति==&lt;br /&gt;
 :&lt;br /&gt;
Ø कर्नल जेम्स टोड ने भीलों को वनपुत्र कहा था.&lt;br /&gt;
Ø ‘भील’ शब्द की उत्पति ‘बील’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘ कमान; है.&lt;br /&gt;
Ø सबसे प्राचीन जनजाति&lt;br /&gt;
Ø बासवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर (सर्वाधिक), चित्तौड़गढ़ जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
Ø दूसरी सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
Ø प्रथाएँ&lt;br /&gt;
इस जनजाति के बड़े गाँव को पाल तथा छोटे गाँव को फला कहा जाता है.&lt;br /&gt;
पाल का नेता मुखिया या ग्रामपति कहलाता है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
Ø अटक –किसी एक हि पूर्वज से उत्पन्न गौत्रो को भील जनजाति में अटक कहते है.&lt;br /&gt;
* कू – भीलों के घरों को कू कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* टापरा - भीलों के घरों को टापरा भी कहते है.&lt;br /&gt;
* झूमटी(दाजिया)-आदिवासियों द्वारा मैदानी भागों को जलाकर जो कृषि की जाती उसे झूमटी कहते है.&lt;br /&gt;
* चिमाता- भीलों द्वारा पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली कृषि को चिमाता कहते है.&lt;br /&gt;
* गमेती- भीलों के गाँवो के मुखिया को गमेती कहते है.&lt;br /&gt;
* भील केसरिनाथ के चढ़ी हुई केसर का पानी पीकर कभी झूट नहीं बोलते है.&lt;br /&gt;
* ठेपाडा- भील जनजाति के लोग जो तंग धोती पहनते है.&lt;br /&gt;
* पोत्या-सफेद साफा जो सिर पर पहनते है.&lt;br /&gt;
* पिरिया- भील जाती में विवाह के अवसर पर दुल्हन जो पीले रंग का जो लहंगा पहनती है. लाल रंग की साड़ी को ‘सिंदूरी’ कहा जाता है.&lt;br /&gt;
* भराड़ी – वैवाहिक अवसर पर जिस लोक देवी का भित्ति चित्र बनाया जाता है.&lt;br /&gt;
* फाइरो -फाइररो भील जनजाति का रणघोष&lt;br /&gt;
* टोटम à भील जनजाति के लोग टोटम (कुलदेवता) की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
ये लोग झूम कृषि भी करते है.&lt;br /&gt;
==मीणा जनजाति==&lt;br /&gt;
मीणा –&lt;br /&gt;
* मीणा का शाब्दिक अर्थ ‘मछली’ है. मीणा ‘मीन’ धातु से बना है.&lt;br /&gt;
* सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* सबसे अधिक मीणा जयपुर(सर्वाधिक), सवाई माधोपुर, उदयपुर, आदि जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* मीणा पुराण – रचियता –आचार्य मुनि मगन सागर&lt;br /&gt;
* लोक देवी – जीणमाता (रैवासा, सीकर)&lt;br /&gt;
* नाता प्रथा – इस प्रथा में स्त्री अपने पति, बच्चो को छोड़कर दूसरे पुरष से विवाह कर लेती है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के मुख्यत: दो वर्ग है - प्रथम वर्ग जमीदारो का है तथा द्वितीय वर्ग चौकीदारो का है .&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति २४ खापो में विभाजित है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के बहिभाट को 'जागा' कहा जाता है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति में संयुक्त परिवार प्रणाली पाई जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग मांसाहारी होते है.&lt;br /&gt;
इनका नेता - पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
गाँव का पटेल पंच पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
विवाह - राक्षस विवाह, ब्रह्मा विवाह, गांधर्व विवाह&lt;br /&gt;
ये लोग दुर्गा माता और शिवजी की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
==गरासिया जनजाति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गरासिया जनजाति अपने को चौहान राजपूतो का वंशज मानती है&lt;br /&gt;
ये लोग शिव दुर्गा और भैरव की पूजा करते है&lt;br /&gt;
* सिरोही, गोगुन्दा (उदयपुर), बाली(पाली), जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* सोहरी – जिन कोठियों में गरासिया अपने अन्नाज का भंडारण करते है. उसे सोहरी कहते है.&lt;br /&gt;
* हूरें – व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्मारक बनाते है.&lt;br /&gt;
* सहलोत – मुखिया को सहलोत कहते है.&lt;br /&gt;
* मोर बंधिया – विशेष प्रकार का विवाह जिसमे हिन्दुओ की भांति फेरे लिए जाते है.&lt;br /&gt;
* पहराबना विवाह – नाममात्र के फेरे लिए जाते है , इस विवाह में ब्राह्मण की आवश्यकता नही पडती है.&lt;br /&gt;
* ताणना विवाह – इसमें न सगाई के जाती है, न फेरे है . इस विवाह में वर पक्ष वाले कन्या पक्ष वाले को कन्या मूल्य वैवाहिक भेंट के रूप में प्रदान करता है.&lt;br /&gt;
इनमे सफेद रंग के पशुओं को पवित्र माना जाता है.&lt;br /&gt;
====शीर्षक उदाहरण 3====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=====शीर्षक उदाहरण 4=====&lt;br /&gt;
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&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<title>राजस्थान की जनजातियाँ</title>
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		<updated>2013-01-23T02:18:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: /* शीर्षक उदाहरण 2 */&lt;/p&gt;
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[[राजस्थान की जनजातियाँ]]&lt;br /&gt;
==मीणा जनजाति==&lt;br /&gt;
मीणा –&lt;br /&gt;
* मीणा का शाब्दिक अर्थ ‘मछली’ है. मीणा ‘मीन’ धातु से बना है.&lt;br /&gt;
* सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* सबसे अधिक मीणा जयपुर(सर्वाधिक), सवाई माधोपुर, उदयपुर, आदि जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* मीणा पुराण – रचियता –आचार्य मुनि मगन सागर&lt;br /&gt;
* लोक देवी – जीणमाता (रैवासा, सीकर)&lt;br /&gt;
* नाता प्रथा – इस प्रथा में स्त्री अपने पति, बच्चो को छोड़कर दूसरे पुरष से विवाह कर लेती है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के मुख्यत: दो वर्ग है - प्रथम वर्ग जमीदारो का है तथा द्वितीय वर्ग चौकीदारो का है .&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति २४ खापो में विभाजित है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के बहिभाट को 'जागा' कहा जाता है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति में संयुक्त परिवार प्रणाली पाई जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग मांसाहारी होते है.&lt;br /&gt;
इनका नेता - पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
गाँव का पटेल पंच पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
विवाह - राक्षस विवाह, ब्रह्मा विवाह, गांधर्व विवाह&lt;br /&gt;
ये लोग दुर्गा माता और शिवजी की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
==गरासिया जनजाति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गरासिया जनजाति अपने को चौहान राजपूतो का वंशज मानती है&lt;br /&gt;
ये लोग शिव दुर्गा और भैरव की पूजा करते है&lt;br /&gt;
* सिरोही, गोगुन्दा (उदयपुर), बाली(पाली), जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* सोहरी – जिन कोठियों में गरासिया अपने अन्नाज का भंडारण करते है. उसे सोहरी कहते है.&lt;br /&gt;
* हूरें – व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्मारक बनाते है.&lt;br /&gt;
* सहलोत – मुखिया को सहलोत कहते है.&lt;br /&gt;
* मोर बंधिया – विशेष प्रकार का विवाह जिसमे हिन्दुओ की भांति फेरे लिए जाते है.&lt;br /&gt;
* पहराबना विवाह – नाममात्र के फेरे लिए जाते है , इस विवाह में ब्राह्मण की आवश्यकता नही पडती है.&lt;br /&gt;
* ताणना विवाह – इसमें न सगाई के जाती है, न फेरे है . इस विवाह में वर पक्ष वाले कन्या पक्ष वाले को कन्या मूल्य वैवाहिक भेंट के रूप में प्रदान करता है.&lt;br /&gt;
इनमे सफेद रंग के पशुओं को पवित्र माना जाता है.&lt;br /&gt;
====शीर्षक उदाहरण 3====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=====शीर्षक उदाहरण 4=====&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<title>राजस्थान की जनजातियाँ</title>
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		<updated>2013-01-23T02:15:50Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
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[[राजस्थान की जनजातियाँ]]&lt;br /&gt;
==मीणा जनजाति==&lt;br /&gt;
मीणा –&lt;br /&gt;
* मीणा का शाब्दिक अर्थ ‘मछली’ है. मीणा ‘मीन’ धातु से बना है.&lt;br /&gt;
* सबसे बड़ी जनजाति&lt;br /&gt;
* सबसे अधिक मीणा जयपुर(सर्वाधिक), सवाई माधोपुर, उदयपुर, आदि जिलो में निवास करती है.&lt;br /&gt;
* मीणा पुराण – रचियता –आचार्य मुनि मगन सागर&lt;br /&gt;
* लोक देवी – जीणमाता (रैवासा, सीकर)&lt;br /&gt;
* नाता प्रथा – इस प्रथा में स्त्री अपने पति, बच्चो को छोड़कर दूसरे पुरष से विवाह कर लेती है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के मुख्यत: दो वर्ग है - प्रथम वर्ग जमीदारो का है तथा द्वितीय वर्ग चौकीदारो का है .&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति २४ खापो में विभाजित है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति के बहिभाट को 'जागा' कहा जाता है.&lt;br /&gt;
मीणा जनजाति में संयुक्त परिवार प्रणाली पाई जाती है.&lt;br /&gt;
ये लोग मांसाहारी होते है.&lt;br /&gt;
इनका नेता - पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
गाँव का पटेल पंच पटेल कहलाता है.&lt;br /&gt;
विवाह - राक्षस विवाह, ब्रह्मा विवाह, गांधर्व विवाह&lt;br /&gt;
ये लोग दुर्गा माता और शिवजी की पूजा करते है.&lt;br /&gt;
===शीर्षक उदाहरण 2===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====शीर्षक उदाहरण 3====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=====शीर्षक उदाहरण 4=====&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<title>मोतीलाल तेजावत</title>
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		<updated>2013-01-23T02:11:36Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: &lt;/p&gt;
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&lt;br /&gt;
मोतीलाल तेजावत जी का जन्म १८९६ को कोल्यारी गांव [[उदयपुर]] में हुआ|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन्हें 'आदिवासियों का मसीहा' के नाम से जाना जाता है इन्होंने वनवासी संघ की स्थापना की १४ जनवरी ,१९६९ को इनकी मृत्यु हो गई!&lt;br /&gt;
इन्होने आदिवासियों के हक के लिए लड़ाई लड़ी |&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<title>मोतीलाल तेजावत</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: &lt;/p&gt;
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मोतीलाल तेजावत जी का जन्म १८९६ को कोल्यारी गांव [[उदयपुर]] में हुआ|&lt;br /&gt;
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इन्हें 'आदिवासियों का मसीहा' के नाम से जाना जाता है इन्होंने वनवासी संघ की स्थापना की १४ जनवरी ,१९६९ को इनकी मृत्यु हो गई!&lt;br /&gt;
इन्होने आदिवासियों के हक के लिए लड़ाई लड़ी |&lt;br /&gt;
==राजनीतिक जागरण एवं स्वतन्त्रता आन्दोलन में विभिन्न तत्त्वों का योगदान==&lt;br /&gt;
1857 की क्रांति की भूमिका यद्यपि राजस्थान में कतिपय स्थानों पर अत्यधिक प्रभावी रही थी किंतु अधिकांश राज्य इससे अछूते रहे। 1857 की क्रांति की असफलता के कारण देश के अनुरूप राजस्थान में भी अंग्रेजो का वर्चस्व स्थापित हो गया (राजस्थान के अधिकांश शासक अंग्रेजो के प्रति श्रद्धा एवं भक्ति प्रदर्शन की दौड़ में शामिल हो गये। ऐसा करके वे स्वयं को गौरवान्वित समझने लगे। ऐसी परिस्थितियों में राज्य की प्रजा में भी अंग्रेजों की अजेयता की भावना का घर करना अस्वाभाविक नहीं था। राजकीय कार्यों एवं जन कल्याण की भावना के प्रति शासकों की उदासीनता ने प्रजा के कष्टों को असहनीय बना दिया। सामन्तों की शोषण प्रवृत्ति यथावत बनी। परन्तु सदैव एक स्थिति बनी नहीं रह सकती है। स्थिति में बदलाव के संकेत बाहर से नहीं, अन्दर से ही आने थे। राज्य की जनता ही बदलाव की अपवाहक बनी। देरी से ही सही, राजस्थान में राजनीतिक चेतना का विकास हुआ। राष्ट्र के सोच में परिवर्तन के साथ देशी रियासतों में भी राष्ट्रवादी भावनाओं ने जन्म लिया। जन आन्दोलनों ने भी स्थानीय स्तर पर अपनी जगह बनाकर माहौल को उत्तेजित कर दिया। राज्य की दमनात्मक नीतियों एवं ब्रिटिश सरकार के कठोर दृष्टिकोण के बावजूद जनता ने अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी। शासन में सुधार एवं भागीदारी के लिए आवाज उठाई। आजादी की अन्तिम लड़ाई के दौरान राष्ट्र के बड़े नेताओं को इस बात का अहसास हो गया था कि अब देशी रियासतों को पराधीन बनाकर अधिक समय तक नहीं रखा जा सकता। आखिर, राष्ट्र की स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् राजस्थान की देशी रियासतों का भी भारतीय संघ में विलीनीकरण हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
  यह कहने आवश्यकता नहीं है कि राजस्थान में स्वतन्त्रता से पूर्व जनजागरण लाने का कार्य जिन नेताओं ने किया, उनमें देशभक्ति का जलवा था। वे समकालीन समाज एवं राजनीति को लेकर चिन्तित एवं व्यथित थे। वे क्रांतिकारी विचारों से युक्त थे। उनके नजरिये में स्वतन्त्रता आन्दोलन से तात्पर्य केवल राजनीतिक स्वतन्त्रता प्राप्त करने से नहीं था। वे सामाजिक समस्याओं एवं कुरीतियों के निराकरण, स्त्रियों की दुर्दशा सुधारने तथा कृषकों का शोषण, निरक्षरता, बेगारी आदि के उन्मूलन के लिए भी कृत संकल्प थे। वे चरखा, खादी, ग्राम-स्वावलम्बन, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के पक्ष में थे। देशी रियासतों में 1934 और विशेष रूप से 1938 के बाद चला संघर्ष भी इसी स्वतन्त्रता संघर्ष का हिस्सा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
  राजनीतिक जागरण एवं स्वतन्त्रता आन्दोलन में जिन मुख्य तत्त्वों का योगदान रहा, उनका संक्षिप्त विवेचन प्रस्तुत किया जा रहा है -&lt;br /&gt;
===जनजातीय एवं किसान आन्दोलन===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राजस्थान में राजनीतिक चेतना का श्रीगणेश कर यहाँ की जनजातियों एवं किसानों ने इतिहास रच दिया। राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में भील, मीणा, गरासिया आदि जनजातियाँ प्राचीन काल से रहती आयी हैं। अपने परम्परागत अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में इन्होंने अपना विरोध प्रकट किया, चाहे वह फिर अंग्रेजों के विरुद्ध हो या फिर शासक के विरुद्ध । यहाँ के किसानों ने भी अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों, शोषण एवं आर्थिक मार के विरोध में अपना विरोध जताकर राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दे डाली। अंग्रेजों का आतंक, रियासतों की अव्यवस्था, जागीरदारों का शोषण, कृषकों के परम्परागत अधिकारों का उल्लंघन आदि कारणों से कृषकों में असंतोष पनपा। जागीरी क्षेत्र में कृषकों का असंतोष जागीरदारों के जुल्मों के विरुद्ध था। जागीरदारों को कृषकों के हितों की कोई चिन्ता नहीं थी। जागीरदार अपने क्षेत्र में स्वतन्त्र रहने के कारण उसे शासकों अथवा अंग्रेज सरकार से संरक्षण प्राप्त था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 राजस्थान में स्वतन्त्रता आन्दोलन एवं आदिवासियों में जनजागृति का शंखनाद फूंकने का योगदान देने वालों में मोतीलाल तेजावत (1888-1963) का विशिष्ट स्थान है। तेजावत का जन्म उदयपुर जिले में 14एक सामान्य ओसवाल परिवार में हुआ था। तेजावत अपने बलबूते पर एक बड़ा आन्दोलन ”एकी आन्दोलन“ (1921-22) खड़ा करने में सफल रहा। उसने जिस प्रकार आदिवासियों का विश्वास प्राप्त किया, वह एकदम अकल्पनीय लगता है। तेजावत से पहले गोविन्द गुरू (1858-1931) ने बागड़ प्रदेश में आदिवासी भीलों के उद्धार के लिए ‘भगत आन्देालन’ (1921-1929) चलाया था। इससे पूर्व गोविन्द गुरु ने 1883 में ‘सम्प सभा’ की स्थापना कर इसके माध्यम से भीलों में सामाजिक एवं राजनीतिक जागृति पैदा कर उन्हें संगठित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
  गोविन्द गुरु ने मेवाड़, डूँगरपुर, ईडर, मालवा आदि क्षेत्रों में बसे भीलों एवं गरासियों को ‘सम्प सभा’ के माध्यम से संगठित किया। उन्होंने एक ओर तो इन आदिवासी जातियों में व्याप्त सामाजिक बुराइयों और कुरीतियों को दूर करने का प्रयत्न किया तो दूसरी ओर, उनको अपने मूलभूत अधिकारों का अहसास कराया। गोविन्द गुरु ने सम्प सभा का प्रथम अधिवेशन 1903 में गुजरात में स्थित मानगढ़ की पहाड़ी पर किया। इस अधिवेशन में गोविन्द गुरु के प्रवचनों से प्रभावित होकर हजारों भील-गरासियों ने शराब छोड़ने, बच्चों को पढ़ाने और आपसी झगड़ों को अपनी पंचायत में ही सुलझाने की शपथ ली। गोविन्द गुरु ने उन्हें बैठ-बेगार और गैर वाजिब लागतें नहीं देने के लिए आह्वान किया। इस अधिवेशन के पश्चात् हर वर्ष आश्विन शुक्ला पूर्णिमा को मानगढ़ की पहाड़ी पर सम्प सभा का अधिवेशन होने लगा। भीलों में बढ़ती जागृति से पड़ोसी राज्य सावधान हो गये। अतः उन्होंने ब्रिटिश सरकार से प्रार्थना की कि भीलों के इस संगठन को सख्ती से दबा दिया जावे। हर वर्ष की भाँति जब 1908 में मानगढ़ की पहाड़ी पर सम्प सभा का विराट् अधिवेशन हो रहा था, तब ब्रिटिश सेना ने मानगढ़ की पहाड़ी को चारों ओर से घेर लिया। उसने भीड़ पर गोलियों की बौछार कर दी। फलस्वरूप 1500 आदिवासी घटना स्थल पर ही शहीद हो गये। गोविन्द गुरु को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। परन्तु भीलों में प्रतिक्रिया होने के डर से उनकी यह सजा 20 वर्षों के कारावास में तब्दील कर दी। अंत में वे 10 वर्ष में ही रिहा हो गये। गोविन्द गुरु अहिंसा के पक्षधर थे व उनकी श्वेत ध्वजा शांति की प्रतीक थी। आज भी भील समाज में गोविन्द गुरु का पूजनीय स्थान है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
  राजस्थान के आदिवासियों में गोविन्द गुरु के पश्चात् सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, मोतीलाल तेजावत का। आदिवासियों पर ढाये जाने वाले जुल्मों से उद्वेलित होकर उन्होंने ठिकाने की नौकरी छोड़ दी। उन्होंने 1921 में भीलों को जागीरदारों द्वारा ली जाने वाली बैठ-बेगार और लाग बागों के प्रश्न को लेकर संगठित करना प्रारम्भ किया। शनैः शनैः यह आन्दोलन सिरोही, ईडर, पालनपुर, विजयनगर आदि राज्यों में भी विस्तार पाने लगा। तेजावत ने अपनी मांगों को लेकर भीलों का एक विराट् सम्मेलन विजयनगर राज्य के&lt;br /&gt;
नीमड़ा गाँव में आयोजित किया। मेवाड़ एवं अन्य पड़ोसी राज्यों की सरकारें भीलों के संगठित होने से चिंतित होने लगी। अतः इन राज्यों की सेनाएँ भीलों के आन्दोलन को दबाने के लिए नीमड़ा पहुँच गयी। सेना द्वारा सम्मेलन स्थल को घेर लेने और गोलियाँ चलाने के कारण 1200  भील मारे गये और कई घायल हो गये। मोतीलाल तेजावत पैर में गोली लगने से घायल हो गये। लोग उन्हें सुरक्षित स्थान ले गये, जहाँ उनका इलाज किया गया। मोतीलाल तेजावत भूमिगत हो गये, इस कारण मेवाड़, सिरोही आदि राज्यों की पुलिस उनको पकड़ने में नाकामयाब रहीं। अंत में, 8 वर्ष पश्चात् 1929 में गाँधीजी की सलाह पर तेजावत ने अपने आपको ईडर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। 1936 में उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके पश्चात् भी नजरबन्द एवं जेल का लुका-छिपी खेल चलता रहा किन्तु उन्होंने सामाजिक सरोकारों से कभी मुँह नहीं मोड़ा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 भील-गरासियों के हितों के लिए देश की आज़ादी में अन्य जिन जन नेताओं का योगदान रहा, उनमें प्रमुख थे - माणिक्यलाल वर्मा, भोगीलाल पण्ड्या, मामा बालेश्वर दयाल, बलवन्तसिंह मेहता, हरिदेवजोशी, गौरीशंकर उपाध्याय आदि। इन्होंने भील क्षेत्रों में शिक्षण संस्थाएँ, प्रौढ़ शालाएँ, हॉस्टल आदि स्थापित किये। साथ ही, उन आदिवासियों को कुप्रवृत्तियों को छौड़ने के लिए प्रेरित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 राजपूताना में कई राज्यों में मीणा जनजाति शताब्दियों से निवास करती आ रही है। कुछ स्थानों पर मीणा शासकों का प्राचीन काल में आधिपत्य रहा था। मीणाओं का मुख्य क्षेत्र ढूँढाड़ था। समय पाकर मीणाओं के दो मुख्य भेद हो गये। जो मीणा खेती करते थे, वे खेतिहर मीणा तथा जो चौकीदारी करते थे, वे चौकीदार मीणा कहलाने लगे। कई बार चौकीदार मीणाओं को चोरी और डकैती के लिए जिम्मेदार ठहराया जाने लगा और किसी चोरी का माल बरामद न होने की स्थिति में उस माल की कीमत इनसे वसूली जाने लगी। इन परिस्थितियों में जयपुर राज्य ने भारत, सरकार द्वारा पारित ‘क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट’ (1924) का लाभ उठाते हुए मीणाओं की जीविका को जरायम पेशा मानते हुए हर मीणा परिवार के बालिग स्त्री-पुरुष ही नहीं, 12 वर्ष से बड़े बच्चों का भी निकटस्थ पुलिस थाने में नाम दर्ज करवाना और दैनिक हाजरी देना आवश्यक कर लिया। इस प्रकार शताब्दियों से स्वच्छन्द विचरण करने वाली बहादुर मीणा जाति साधारण मानवाधिकारों से वंचित कर दी गई। सरकार की इस कार्यवाही का विरोध होने लगा। मीणा&lt;br /&gt;
समाज में असंतोष का स्वर उस समय और तेज हो गया जब जयपुर पुलिस ने जरायम पेशा कानून (1930) के अन्तर्गत कठोरता से हाजिरी का पालन करना प्रारम्भ कर दिया। 1933 में मीणा क्षेत्रिय महासभा की स्थापना हुई। इस सभा ने जयपुर सरकार से जरायम पेशा कानून रद्द करने की मांग की परन्तु राज्य ने इसके विपरीत कठोरता से मीणाओं को दबाना प्रारम्भ किया। अप्रेल, 1944 में जैन मुनि मगनसागरजी की अध्यक्षता में नीमकाथाना में मीणों का एक वृहत् सम्मेलन हुआ, जिसमें ‘जयपुर राज्य मीणा सुधार समिति’ का गठन हुआ। इस समिति के अध्यक्ष बंशीधर शर्मा, मंत्री राजेन्द्र कुमार एवं संयुक्त मंत्री लक्ष्मीनारायण झरवाल बनाये गये। 1945 में जरायम पेशा कानून को रद्द करने के लिए प्रांतीय स्तर पर आन्दोलन किया गया। अखिल भारतीय देशी राज्य परिषद् ने भी मीणाओं की मांग का समर्थन किया। इसके परिणामस्वरूप थानों में अनिवार्य उपस्थिति की बाध्यताओं को समाप्त किया गया। परन्तु अभी जरायम पेशा अधिनियम यथावत था, जो आजादी के बाद 1952 में ही समाप्त हो सका।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 राजस्थान के देशी रियासतों के इतिहास में बिजौलिया किसान आन्दोलन (1897-1941) का विशिष्ट स्थान है। दीर्घ काल तक चलने वाले इस आन्दोलन में किसान वर्ग ठिकाने और मेवाड़ राज्य की 16सम्मिलित शक्ति से जूझता रहा। इस आन्दोलन में केवल पुरुषों ने ही भाग नहीं लिया, बल्कि स्त्रियों व बालकों ने भी सक्रियता दिखायी। यह आन्दोलन पूर्णतया स्वावलम्बी एवं अहिंसात्मक था। यह आन्दोलन प्रारम्भ में विजयसिंह पथिक के नेतृत्व में चला। इस आन्दोलन में कृषक वर्ग ने अभूतपूर्व साहस, धैर्य और&lt;br /&gt;
बलिदान का परिचय दिया, चाहे यह अपने मंतव्य में सफल नहीं हो सका। यह आन्दोलन सामंती व्यवस्था के विरुद्ध भयंकर प्रहार था। यह आन्दोलन मेवाड़ राज्य की सीमा तक ही सीमित नहीं रहा। इस आन्दोलन ने कालान्तर में माणिक्यलाल वर्मा जैसे तेजस्वी नेता को जन्म दिया, जो बाद में मेवाड़ राज्य में उत्तरदायी सरकार की स्थापना हेतु अनेक आन्दोलनों का प्रणेता बना। हमें यह जान लेना चाहिए कि राजस्थान में कृषक आन्दोलन स्वस्फूर्त था और इसका नेतृत्व पूर्णतः गैर पेशेवर नेताओं एवं अत्यन्त साधारण किसान वर्ग ने किया था, चाहे उनका आधार जातिगत रहा। बिजौलिया आन्दोलन में धाकड़ जाति की महती भूमिका रही। सीकर और शेखावटी आन्दोलनों में जाट जाति का वर्चस्व रहा। मेवाड़ और सिरोही राज्यों के किसान आन्दोलनों के पीछे भील और गरासिया जातियों की शक्ति रही। इसी प्रकार अलवर और भरतपुर राज्यों में मेवों की मुख्य भूमिका रही। इस प्रकार इन आन्दोलनों को सुनियोजित रूप से संचालित करने का श्रेय जाति पंचायतों एवं जाति संगठनों को दिया जा सकता है।&lt;br /&gt;
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		<title>मोतीलाल तेजावत</title>
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		<author><name>Nileshahari</name></author>
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==जन्म==&lt;br /&gt;
मोतीलाल तेजावत जी का जन्म १८९६ को कोल्यारी गांव [उदयपुर ] में हुआ|&lt;br /&gt;
==योगदान==&lt;br /&gt;
इन्हें &lt;br /&gt;
'आदिवासियों का मसीहा' के नाम से जाना जाता है इन्होंने वनवासी संघ की स्थापना की १४ जनवरी ,१९६९ को इनकी मृत्यु हो गई!&lt;br /&gt;
इन्होने आदिवासियों के हक के लिए लड़ाई लड़ी |&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- कृपया इस संदेश से ऊपर की ओर ही सम्पादन कार्य करें। ऊपर आप अपनी इच्छानुसार शीर्षक और सामग्री डाल सकते हैं --&amp;gt; &lt;br /&gt;
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&amp;lt;!-- यदि आप सम्पादन में नये हैं तो कृपया इस संदेश से नीचे सम्पादन कार्य न करें --&amp;gt;&lt;br /&gt;
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{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>Nileshahari</name></author>
	</entry>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2_%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4&amp;diff=311843</id>
		<title>मोतीलाल तेजावत</title>
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		<updated>2013-01-23T01:53:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जन्म==&lt;br /&gt;
मोतीलाल तेजावत जी का जन्म १८९६ को कोल्यारी गांव [उदयपुर ] में हुआ|&lt;br /&gt;
===योगदान===&lt;br /&gt;
इन्हें &lt;br /&gt;
'आदिवासियों का मसीहा' के नाम से जाना जाता है इन्होंने वनवासी संघ की स्थापना की १४ जनवरी ,१९६९ को इनकी मृत्यु हो गई!&lt;br /&gt;
इन्होने आदिवासियों के हक के लिए लड़ाई लड़ी |&lt;br /&gt;
====शीर्षक उदाहरण 3====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=====शीर्षक उदाहरण 4=====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- कृपया इस संदेश से ऊपर की ओर ही सम्पादन कार्य करें। ऊपर आप अपनी इच्छानुसार शीर्षक और सामग्री डाल सकते हैं --&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- यदि आप सम्पादन में नये हैं तो कृपया इस संदेश से नीचे सम्पादन कार्य न करें --&amp;gt;&lt;br /&gt;
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{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8&amp;diff=311842</id>
		<title>एकी आन्दोलन</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==एकी आन्दोलन==&lt;br /&gt;
1917 ई. में [[भील|भीलों]] व गरासियों ने मिलकर दमनकारी नीति व बेगार के विरुद्ध महाराणा को पत्र लिखा । इसका कोई परिणाम नही निकालता देखकर 1921 में बिजौलिया के किसान आन्दोलन से प्रभावित होकर भीलों ने पुनः [[महाराणा]] को शिकायत की । इन सभी अहिंसात्मक प्रयासों को जब कोई परिणाम नहीं निकला तो [[भोमट]] के खालसा क्षेत्र के भीलों ने लगाने व बेगार चुकाने से इनकार कर दिया । 1921 ई में [[मोतीलाल तेजावत]] ने इस [[आन्दोलन]] को नेतृतव प्रदान किया। इस आन्दोलन को जनजातियों में राजनितिक जागरण का प्रतिक माना जाता है । यह आन्दोलन भोमट क्षेत्र के अतिरिक्त [[सिरोही]] व [[गुजरात]] राज्यों में भी फैला ।&lt;br /&gt;
*इस आन्दोलन का कार्यक्षेत्र भोमट था इसलिए इस अन्दोलन को 'भोमट का भील आन्दोलन' भी कहते है ।&lt;br /&gt;
*इस अहिंसात्मक आन्दोलन का श्रीगणेश फलासियाँ गाँव में हुआ ।&lt;br /&gt;
*[[महात्मा गाँधी]] की सलाह पर 1929 में तेजावत जी ने आत्मसमर्पण कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- कृपया इस संदेश से ऊपर की ओर ही सम्पादन कार्य करें। ऊपर आप अपनी इच्छानुसार शीर्षक और सामग्री डाल सकते हैं --&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना जनवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:Nileshahari&amp;diff=311783</id>
		<title>सदस्य:Nileshahari</title>
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		<updated>2013-01-22T10:29:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;नमस्कार मैं निलेश अहारी&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:Nileshahari&amp;diff=311782</id>
		<title>सदस्य:Nileshahari</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:Nileshahari&amp;diff=311782"/>
		<updated>2013-01-22T10:26:21Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Nileshahari: 'मेरा नाम निलेश अहारी है' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;मेरा नाम निलेश अहारी है&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Nileshahari</name></author>
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