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	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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	<subtitle>सदस्य द्वारा योगदान</subtitle>
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		<title>मै और कविता -दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2015-04-29T10:42:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको यह दिखेगा कि लेख बनकर कैसा लगेगा --&amp;gt;&lt;br /&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;वो मेरी कविता तुम आकर &lt;br /&gt;
मेरे नभ पर दीप जला दो &lt;br /&gt;
मेरे धमनी के कम्पन को  &lt;br /&gt;
प्रेम भरा एक गीत सीखा दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो सुंदरता की चिर सुकमारी &lt;br /&gt;
मै प्रेमयी गान कहाँ से लायूँ &lt;br /&gt;
वो तरुणी अलबेली कविता &lt;br /&gt;
जिससे तेरे हिय को भायूँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी पास जब तुम आती हो   &lt;br /&gt;
आती हो कितनी व्यथा छिपाये  &lt;br /&gt;
इस प्रेम भरी धमनी की धधकन &lt;br /&gt;
क्या ये तुमको कभी ना भाये &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धवल चाँदनी में विलीन &lt;br /&gt;
तुम लहराती नभ संसृति में &lt;br /&gt;
यौवन बिखरते है देखा &lt;br /&gt;
तुमको अवनि के प्रान्तर में  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पर मेरे प्रान्तर में तुमको&lt;br /&gt;
कुछ भी आता रास नहीं &lt;br /&gt;
मै चिर प्रेमी युगांतर का &lt;br /&gt;
पर तुमको आभास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
घिरकर सकल व्यथावों में &lt;br /&gt;
होती है अपनी मिलन रात&lt;br /&gt;
कभी स्वप्न में ही आकर &lt;br /&gt;
कर जावो मुझसे मधुर बात &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर कहो तुम सम्मुख तेरे &lt;br /&gt;
दुःख का पारावार मै रख दूँ  &lt;br /&gt;
व्यथित शब्द का जगत उठाकर&lt;br /&gt;
मै इन तेरे चरणो में रख दूँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पर प्रेम भरे कुछ शब्दों को &lt;br /&gt;
तुम आ मेरे हिय में जगा दो &lt;br /&gt;
और, हृदय को स्पर्श करके &lt;br /&gt;
प्रेम की परिभाषा सीखा दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कब मेरे व्यथित उर को  &lt;br /&gt;
प्रेम आलिंगन करोगी &lt;br /&gt;
आ मेरे हिय में समा जा &lt;br /&gt;
सोंचता हूँ कब कहोगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरे हृदय के सिन्धुं की  &lt;br /&gt;
एक उठती लहर हो तुम &lt;br /&gt;
मेरे सघन बन में खिली  &lt;br /&gt;
विकसी कलि की कुसुम हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक तुम मेरी कविता नहीं &lt;br /&gt;
मेरे गगन की चाँदनी हो &lt;br /&gt;
शिथिल नभ की बाँह में जो &lt;br /&gt;
खोयी हुयी वो यामिनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पर क्या तेरे अमर प्रेम की &lt;br /&gt;
उस अमर विभा को पाऊँगा&lt;br /&gt;
जहाँ सारी व्यथा भसम करके  &lt;br /&gt;
तेरे संग मोद मनाऊंगा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- कृपया इस संदेश से ऊपर की ओर ही सम्पादन कार्य करें। ऊपर आप अपनी इच्छानुसार शीर्षक और सामग्री डाल सकते हैं --&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना {{LOCALMONTHNAME}} {{LOCALYEAR}}]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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	<entry>
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		<title>प्रकृति के प्रति -दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2015-04-29T10:36:34Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
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&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति अविरल तेरा ये बिम्ब &lt;br /&gt;
चूमते अंबर को गिरी श्रंग &lt;br /&gt;
श्रंग पर छेड़े पव संगीत &lt;br /&gt;
गीत नव गाते विविध विहंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर्मियों उर्मिल खग दल गान &lt;br /&gt;
कही चातक की करुण पुकार&lt;br /&gt;
अरे पिक का मदमाता गीत &lt;br /&gt;
लग रहा लिया विश्व है जीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रांखला अचलो की अवर्णित&lt;br /&gt;
निरुपम हिम सज्जित परिधान &lt;br /&gt;
सेज बंकिम विशाल  विश्रांत&lt;br /&gt;
दे रहा अल्कापुर को मात &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थिरकती लहर!सर सरित तड़ाग &lt;br /&gt;
बहे इठलाती सुरसरि धार &lt;br /&gt;
झील झरनो का स्वर्णिम राग &lt;br /&gt;
बहे पव मंद गंध लिए भार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
व्रान्त पर उड़ उड़ करते अंक &lt;br /&gt;
मधुर चुम्बन ब्रन्दी और बृंद&lt;br /&gt;
रसातल में डूबे मकरंद&lt;br /&gt;
डूब ज्यों लिखे कवी कोई छंद  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ललोहित नभ पर जब दिनमान &lt;br /&gt;
कलापी की मृदु रागारुण तान&lt;br /&gt;
मधुर कीटों की किंकिड ध्वनि &lt;br /&gt;
तरुण निशि पर मंजीर सी भान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिथिल रजनी का नव संवाद &lt;br /&gt;
गगन का तेज अलौकिक शांत&lt;br /&gt;
पिये मद सोया जब संसार &lt;br /&gt;
मदभरी जगे चांदनी रात &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तृप्त वसुधा को करता चाँद &lt;br /&gt;
विरह में जलता किसका प्राण&lt;br /&gt;
बीतती अपलक जिसकी रात &lt;br /&gt;
प्रेम विरहाकुल एक खग जात&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिथिल रजनी का मध्य पहर &lt;br /&gt;
सघन बन में जलता एक दीप&lt;br /&gt;
नाप कर मौन तिमिर उँचास&lt;br /&gt;
कर रहा है तम का परिहास&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना {{LOCALMONTHNAME}} {{LOCALYEAR}}]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<title>स्नेह दीप -दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2015-04-29T10:18:09Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
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{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;गयी भर हृदय कोई झंकार &lt;br /&gt;
कली ज्यो अस्फुट त्यों थे गात&lt;br /&gt;
नयन यूँ चंचल ज्यों द्युतिमान &lt;br /&gt;
तेज मुख पर उर्वशी सामान &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देख पाते कुछ पल ये नैन &lt;br /&gt;
हुयी ओझल वो कर पद चाप&lt;br /&gt;
दिखाकर तिरछे अपने गात &lt;br /&gt;
हिला ज्यों मंद पवन में पात &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधर में यूँ मधुरिम मुस्कान&lt;br /&gt;
खिला ज्यों मुकुलों का मधुमास&lt;br /&gt;
पगो के नूपुर की रुनझुन&lt;br /&gt;
जलद से गिरे बूंद ज्यों धुन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खुले थे अनुपम केश कलाप&lt;br /&gt;
छायी हो ज्यों बदली आकाश&lt;br /&gt;
तरुण सुन्दरता-ज्यों जलजात&lt;br /&gt;
हुआ मन पल भर को अज्ञात&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थे फैले तिछर्न नयन के जाल &lt;br /&gt;
गयी अविस्मित चितवन डाल&lt;br /&gt;
गूंथता ये मन सौरभ हार &lt;br /&gt;
कौन भर गयी हृदय झंकार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरे मानस का ये अंतरिछ &lt;br /&gt;
अभी सूना था कुछ पल पूर्व&lt;br /&gt;
एकाएक कौतूहल ये बोल &lt;br /&gt;
बोलने लगे जलद पट खोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरे मन भावों का आकाश &lt;br /&gt;
उड़ा कैसे ये नही याख्यान&lt;br /&gt;
सहज भावो से वो सुकुमारि&lt;br /&gt;
हर लिया कैसे था अनजान&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<title>निर्बलता और सबलता -दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2015-01-27T05:50:45Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<title>एक तुम्हारा चित्र बनाया -दिनेश सिंह</title>
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हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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		<title>कवि और कविता -दिनेश सिंह</title>
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
तृण पर्ण कुटी की  बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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		<title>समय चक्र बढ़ता जाता है -दिनेश सिंह</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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		<title>सात्विक गीत बड़े मंहगे हैं -दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2015-01-23T10:49:50Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
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'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना {{LOCALMONTHNAME}} {{LOCALYEAR}}]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=516122</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=516122"/>
		<updated>2015-01-04T08:52:20Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* शरद ऋतू  -दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ ,जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
अरे-यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असहाय है चीख कराह रहे &lt;br /&gt;
यहाँ दुसह दुखों के भार तले&lt;br /&gt;
सिर धुन धुन रोती निर्बलता&lt;br /&gt;
असहायित शोषण के पथ पे&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== एक चाहत -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक चाहत -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;एक चाह अमिय सी जीवन में &lt;br /&gt;
तू जग!नित आलोचन कर मेरी &lt;br /&gt;
यह आलोचन ही भान कराती &lt;br /&gt;
क्या अन्तः विकृतियाँ है तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थोड़ा सा पाकर जलद नीर &lt;br /&gt;
यहाँ कौन नदी नहीं इतराती &lt;br /&gt;
पर भरा हुआ वो अथाह सिंधु&lt;br /&gt;
नहीं खोता है सय्यम नीती&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपने खारे जल के लिए &lt;br /&gt;
नित आलोचना वो सहता है&lt;br /&gt;
अन्तः की विकृतियों को देख &lt;br /&gt;
शायद मर्यादित रहता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तू धुन्ध देख मत हृदय हार &lt;br /&gt;
भर तू उमंग मत हो अधीर&lt;br /&gt;
यह धुन्ध लुप्त हो जाएगा&lt;br /&gt;
कर ज्वलित हृदय का प्रदीप &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा नव्य गान ले नव्य साज&lt;br /&gt;
ले नव्य तेज हो प्रखर बोल &lt;br /&gt;
दिशि दिशि में उठ रही ज्वाल&lt;br /&gt;
जल रहा हो जब सारा खगोल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उद्बोधन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हम बहुत जलाये बाह्य दीप&lt;br /&gt;
फैलया प्रकाश चौपालों में &lt;br /&gt;
पर नहीं कर सके दूर तिमिर &lt;br /&gt;
जो भरा हृदय के अन्तः में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने जल करके बुझे दीप &lt;br /&gt;
नही दीप जला विश्वास भरा &lt;br /&gt;
जहाँ भरा हुआ है राग द्वेष &lt;br /&gt;
उस अंध गुहा पर दीप जला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जाति कौम की सड़ी लकड़ियों &lt;br /&gt;
को एकत्रित कर आग लगा &lt;br /&gt;
तब मानवता के हवन कुण्ड से &lt;br /&gt;
अस्फुट होगी एक दिव्य विभा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अंध गुहा के अंतः में &lt;br /&gt;
जाग जाग वो जाग विभा&lt;br /&gt;
तेरी प्रदीप्त की ज्वाला से &lt;br /&gt;
जल जाये ईर्ष्यावती अभा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कडवे पत्ते-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;तुम हाँथ पसारे यहाँ खड़े किस आशा में &lt;br /&gt;
क्यों बोल रहे हो यहाँ अश्रु की भाषा में &lt;br /&gt;
जो तेरा है उसे छीन झपट कर ले आओ &lt;br /&gt;
नहीं डाल गले में फांद शुलि पर चढ़ जाओ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बस यही रास्ते दो ही है तेरे सम्मुख &lt;br /&gt;
इन्ही रास्तों में तुमको चलना होगा &lt;br /&gt;
एक रास्ता और यहाँ है किन्तु तुम्हें &lt;br /&gt;
उसमें तुमको पल पल मरना होगा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर भरे शब्द आशाओं के &lt;br /&gt;
कब पड़ते मुर्दों के कानो में&lt;br /&gt;
क्या नहीं जानते बंधू मेरे तुम &lt;br /&gt;
नहीं पाषाण पिघलते आँसू में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस आशा की तुम ज्वाला लेकर &lt;br /&gt;
जो चाह रहे हो कोई दीप जलाना &lt;br /&gt;
वह आशा ही आशा बनकर रह जायेगी&lt;br /&gt;
औ घिरा रहेगा अन्धकार से हर कोना&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहे हो चढ़ अंचलों के शृंगों से &lt;br /&gt;
विभा कोई जिससे मिट जाये अंधियाली&lt;br /&gt;
पर सच है! की मानव के गौरव पथ से &lt;br /&gt;
कब की लुप्त हो गयी है किरणों की लाली&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कौन यहाँ नहीं है व्याकुल-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख मेरी दयनीय दशा को &lt;br /&gt;
मन मेरा मुझसे है व्याकुल&lt;br /&gt;
बोला वह विश्व प्राङ्गणा में &lt;br /&gt;
सर,सलिल,कुसुम्म्य सभी व्याकुल&lt;br /&gt;
कौन यहाँ जो नहीं है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जलते सूरज के प्रखर तेज से &lt;br /&gt;
धरती का कण कण है व्याकुल &lt;br /&gt;
प्राकृति के सारे नियम तोड़&lt;br /&gt;
मानवीय सभ्यता है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देख सबल का प्रबल वेग &lt;br /&gt;
निर्बल का अँग अँग व्याकुल &lt;br /&gt;
निर्भीक दौड़ते भय के रथ से &lt;br /&gt;
शांति,खड़ी नतमस्तक व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धनवर्षा देख मंदिरो में &lt;br /&gt;
धन कुबेर होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
भूखे की भूख देखकर के&lt;br /&gt;
हो रहा देव-होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ मानव होता है पावन&lt;br /&gt;
वह गंग बहे निसहाय विकल &lt;br /&gt;
धो धोकर मैल हुई मलिन &lt;br /&gt;
पावन गंगा का जल निर्मल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चुनी,कार्यपालिका के कार्यों से &lt;br /&gt;
यहाँ निम्नवर्ग आकुल व्याकुल&lt;br /&gt;
औ न्यायपालिका के निर्णाय से &lt;br /&gt;
है उच्चवर्ग व्याकुल विव्हल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानव निर्मित यह हवन कुण्ड &lt;br /&gt;
जलता खगोल निसहाय विकल &lt;br /&gt;
सुन लगा ध्यान उठता तूफान&lt;br /&gt;
जाऊं!दीवार तोड़ किस ओर निकल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्ण-छवि-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;रजनी तिमिर ले जा रही थी &lt;br /&gt;
छितिज से,चाँद ओझल हो रहा था &lt;br /&gt;
औ मत्त स्वर में एक खग &lt;br /&gt;
स्वर चेतना में भर रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थे पुष्प के तरु मुकुट पहने &lt;br /&gt;
यौन में डूबे सभी मकरन्द थे&lt;br /&gt;
बून्द चंचल ओस के कण &lt;br /&gt;
तृप्त वसुधा कर रहे थे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्राण पपीहा मधुर स्वर में &lt;br /&gt;
था घोलता स्वर मधुर पव में &lt;br /&gt;
शैल श्रंग, दूर्वा प्रांतर पर &lt;br /&gt;
थी विभा मोति सी ओस कणों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहु टोलियां विहग दल की &lt;br /&gt;
गान करते विविध स्वर में &lt;br /&gt;
पूर्ण यौवना जल तरंगें &lt;br /&gt;
थिरकती थी एक सर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव्य अरुणिमा ऊषा लेकर &lt;br /&gt;
सूर्य नभ पर आ चुका था &lt;br /&gt;
बदलकर पट नील अम्बर&lt;br /&gt;
पट पीत धारण कर चुका था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आ पड़ी जब किरण अलि में&lt;br /&gt;
प्रात की नव विभा लेकर&lt;br /&gt;
रंगी सकल अलि स्वर्णाभ रंग &lt;br /&gt;
स्वर्ण व्योम औ स्वर्ण सरोवर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मौन करुणा-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर ढल चुका है सूर्य नभ से &lt;br /&gt;
फिर सांध्य आयी तम लिये&lt;br /&gt;
इस तम भरी प्रेमयि गुहा में &lt;br /&gt;
मै!नित नव जलाता हूँ दिये&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाह थी कितनी हृदय में &lt;br /&gt;
यदि!तुमको बता पाता कहीं &lt;br /&gt;
हृदय के पट खोल कर मै&lt;br /&gt;
तुमको दिखा पाता कही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
टूटी हुयी इस वेणु में है &lt;br /&gt;
रागनी कितनी बिकल &lt;br /&gt;
प्रेममयि अब शब्द भी &lt;br /&gt;
हैं हो रहे कितने प्रखर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भावों के आवेग उठ उठ &lt;br /&gt;
हलचल मचाते है प्रबल &lt;br /&gt;
गीत के उन्मत्त स्वर भी &lt;br /&gt;
है कर रहे मुझको बिकल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब जोड़ने को बस हमें &lt;br /&gt;
कुछ यादों के है तार मिलते &lt;br /&gt;
अब भूत की बातें सभी बस &lt;br /&gt;
एक शब्दमय आधार बनते&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आँसू-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्यों आ बसे हो नयन में &lt;br /&gt;
तुम नीर बनकर अश्रु धारा&lt;br /&gt;
वह क्यों नहीं भाया तुम्हे &lt;br /&gt;
लहरा रहा जो सिंधु खारा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करने व्यथित क्यों लोक मेरा &lt;br /&gt;
हर पल चले आते हो तुम &lt;br /&gt;
मै वेदना जग से छुपता &lt;br /&gt;
जग को बता जाते हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
त्रासदी जग की सहन कर &lt;br /&gt;
जब हृदय में ज्वाल भरता&lt;br /&gt;
तुम बरस जाते मेघ बनकर&lt;br /&gt;
ज्वाला बुझा जाते हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये कला सीखा कहाँ से &lt;br /&gt;
गुरु कहाँ पाये हो  तुम&lt;br /&gt;
आँसुओं तुम मौन भी &lt;br /&gt;
हर भेद कह जाते हो तुम  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी प्रियतम की आँखों से बह&lt;br /&gt;
तुम अपना प्रेम जताते हो &lt;br /&gt;
हठ अपनी कभी मनाने को  &lt;br /&gt;
बालक अबोध बन जाते हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी ममता की आँखों से बह &lt;br /&gt;
प्रेमायी सागर भर लाते हो&lt;br /&gt;
कभी छद्द्म नीर बहाकर के &lt;br /&gt;
हृदय तोड़ तुम जाते हो&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
------II-भाग&lt;br /&gt;
बहुत पढ़ा इतिहास तुम्हारा &lt;br /&gt;
बहुत छले हो तुम जग को&lt;br /&gt;
फिर आज मेरा ये अन्तस्&lt;br /&gt;
कैसे न कोसेगा तुमको &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिनके जीवन के बन में &lt;br /&gt;
दुःख की कलियाँ सूखी हो &lt;br /&gt;
फिर हरा भरा कर जाते &lt;br /&gt;
तुम कितने निर्मोही हो  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रद के सागर को मै&lt;br /&gt;
बाँधा था बाँध बनाकर &lt;br /&gt;
बाँध तोड़ तुम जाते &lt;br /&gt;
ह्रद में तुम ज्वार उठाकर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम मेरे अंतः के नभ पर &lt;br /&gt;
घुमड़ घुमड़ बन घन छाये&lt;br /&gt;
दो घडी को यदि सुख पाया&lt;br /&gt;
तुम खोज वेदना ले आये &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरे अन्तरिक्ष की करुणा &lt;br /&gt;
सिसक सिसक कर रोयीं &lt;br /&gt;
क्या क्या जतन किये तब &lt;br /&gt;
स्मृतियाँ समाधि पर सोयीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मै खोज खोजकर सुख को &lt;br /&gt;
पहनाया पुष्प की माला &lt;br /&gt;
पर भाया तुम्हें नहीं क्यों &lt;br /&gt;
जो आकर डेरा डाला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
------III-भाग&lt;br /&gt;
जब रजनी बेला में शशि &lt;br /&gt;
चंद्रमल्लिका से है मिलता &lt;br /&gt;
मेरी करुणा का ईंधन &lt;br /&gt;
बड़वानल सा है जलता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानस जीवन प्रांगण में &lt;br /&gt;
ये कैसा उपहास तुम्हारा &lt;br /&gt;
आँखों संग नाच रहे तुम &lt;br /&gt;
जलता है हृदय हमारा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस करुणा भरे गगन पर &lt;br /&gt;
सुख के बादल छाने दो&lt;br /&gt;
कल्याणी सुख के जल से &lt;br /&gt;
कलि को तो खिल जाने दो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरी दुःख की दुनिया पर &lt;br /&gt;
मिलता किसका संरछण&lt;br /&gt;
बस तू ही तू है दिखती &lt;br /&gt;
क्या तेरा ही है आरछण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के सर पर &lt;br /&gt;
तू कैसा जाल बुना है &lt;br /&gt;
उलझ रहा है जीवन &lt;br /&gt;
कोई पंथ ना सूझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रजनी संग लिपटी रोती&lt;br /&gt;
मेरे अन्तः की करुणा &lt;br /&gt;
उच्चस्वांस कर रोयी &lt;br /&gt;
तन्द्रा मेरी ये तरुणा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्णदीप्त तू सुंदरता-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शैल श्रृंग औ बन उपवन में &lt;br /&gt;
तू कहाँ छुपी नहीं सुंदरता &lt;br /&gt;
तेरे सागर में डूब डूब &lt;br /&gt;
कवि लिखे कामिनी-कविता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गहन तिमिर दूर्वा प्रदेश पर &lt;br /&gt;
कीटों के किंकिणि-ध्वनि में&lt;br /&gt;
कोमल कलियों की पंखुड़ियों &lt;br /&gt;
भ्रमरों के मर मर स्वर में&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
आयी हो मेरे मानस में तो &lt;br /&gt;
नमन करो तुम स्वराकार&lt;br /&gt;
हृदय भरो स्वर्गीय गान&lt;br /&gt;
श्रृंगार शिरोमणि अलंकार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरी नगरी में देख रहा &lt;br /&gt;
सुंदरता, दृश्य मनोरम&lt;br /&gt;
लहरों संग है तू थिरक रही &lt;br /&gt;
गाती संग गान विहंगम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुआ क्षितिज में अरुणोदय &lt;br /&gt;
किरणे आ पड़ी अवनि में&lt;br /&gt;
मंत्रमुग्ध हो गया प्रकृति  &lt;br /&gt;
सुंदरता, तेरे यौवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोल दिये पंखुड़ी जलज &lt;br /&gt;
मकरंद चुम्ब अंकित करते &lt;br /&gt;
मचल रहे है मृदुल कान्त &lt;br /&gt;
और बाँह पसार तुझे भरते&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे स्वर्णदीप्त तू सुंदरता &lt;br /&gt;
पिक के तू उर्मिल गानो में &lt;br /&gt;
नभ मंडल में बन इन्द्रधनुष &lt;br /&gt;
अवनि के कोमल संसृति मे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
------II-भाग&lt;br /&gt;
हे स्वर्णदीप्त तू सुंदरता&lt;br /&gt;
तू किस सौरभ की माला को&lt;br /&gt;
है पलक झुकाये गूँथ रही &lt;br /&gt;
औ उठ उठ गिरती स्वागत को &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी छुपी रूपसी के कपोल पर&lt;br /&gt;
लेकर लज्जा की लाली &lt;br /&gt;
कभी छटक केश तू इठलाती &lt;br /&gt;
जब चले चाल वो मतवाली &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पलकों के पुतली में छिपकर &lt;br /&gt;
दीपक लौ सा वो बलखाना &lt;br /&gt;
वो छुपकर के नत कोरों में &lt;br /&gt;
बिन कहे बहुत कुछ कह जाना &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कैसा कर डाला सम्मोहन &lt;br /&gt;
नयनो में भरकर मादकता &lt;br /&gt;
देख रहा प्रत्यक्ष कवी &lt;br /&gt;
सम्मोहित होती है कविता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन पसारे बाँह खड़ा &lt;br /&gt;
रजनी हो शिथिल समायी &lt;br /&gt;
था तम अपनी यौवन में &lt;br /&gt;
सुंदरता कुंकुम बरसायी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सम्मोहित हो गया जगत &lt;br /&gt;
जब यौवन ने ली अँगड़ाई&lt;br /&gt;
चपला चंचल तू सुंदरता&lt;br /&gt;
जब भर विलास मधु ले आई&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित थरथर अधर प्रवाल &lt;br /&gt;
बहे ज्यों पवन काँपते पात  &lt;br /&gt;
लाज से सकुचाती सुकुमारी &lt;br /&gt;
सकुचति छुई मुई ज्यों पात&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पल्लवित हुआ काम का लोक &lt;br /&gt;
बिखेरे रति अपने जब केश&lt;br /&gt;
झील से गहरे गहरे नैन  &lt;br /&gt;
डूब सा गया कवी देश&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
----III-भाग&lt;br /&gt;
अलकानगरी की रति रानी &lt;br /&gt;
तू उज्जवल एक चेतना है &lt;br /&gt;
तेरी सुषमा के सागर में &lt;br /&gt;
सारा अनंत यह डूबा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरी ज्योत्स्रना जलनिधि में &lt;br /&gt;
दो बटी हुई हैं धारायें&lt;br /&gt;
एक,डूब तृप्त होता है जग &lt;br /&gt;
एक पर मिलती हैं बाधायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरे संग न्याय ये कैसा &lt;br /&gt;
विश्वास तोड़ता है जग &lt;br /&gt;
तब सुंदरता के पीछे &lt;br /&gt;
रहस्य खोजता है जग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे स्वर्णदीप्त तू सुंदरता&lt;br /&gt;
तू निश्छल एक तपस्वी है &lt;br /&gt;
पर भेद लगा पाना मुश्किल &lt;br /&gt;
दिख रही है जो वो तू ही है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भेद लगा पाना मुश्किल &lt;br /&gt;
की ये प्रतिबिम्ब तुम्हारा है&lt;br /&gt;
या सुंदर बिम्ब के पीछे &lt;br /&gt;
छिपा कोई छल छाया है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुंदर विश्वासों में छिपा हुआ है &lt;br /&gt;
नव युग का सुंदर अंकुर &lt;br /&gt;
अंतस उज्जवल जल बरसेगा &lt;br /&gt;
यदि हो!अन्तः का धवल वर्ण अम्बर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुंदर मन हो तो सुंदरता &lt;br /&gt;
सुंदर जीवन का हर क्रम है&lt;br /&gt;
सुंदरतम विश्वासों से ही  &lt;br /&gt;
सुंदर सुखमय ये जीवन है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== शरद ऋतू  -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिनकर किरणों के पथ से &lt;br /&gt;
जब हटे आवरण काले &lt;br /&gt;
हँस पड़ी धरा की कलियाँ&lt;br /&gt;
ध्वनि गूंजे विविध निराले&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन किये अंबर से &lt;br /&gt;
उतरी है शरद हँसनी &lt;br /&gt;
लीन मलय में अविकल &lt;br /&gt;
छवि छाया सी एकाकिनी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रवि बंद किया अपनी शाला &lt;br /&gt;
और अंबर पर उगा चाँद &lt;br /&gt;
श्याम श्वेत उन बादल पर &lt;br /&gt;
उगता छिपता चले चाँद &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शशि मुख पर चंचल चितवन&lt;br /&gt;
नव प्राण फूँकती अलि में &lt;br /&gt;
आ समा गयी वसुधा के&lt;br /&gt;
तरुणम् सौरभ के कलि में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहराती शीत पर्वत प्रदेश &lt;br /&gt;
शैल श्रृंग हुये धवल वर्ण &lt;br /&gt;
हिम के कण लघु लघु उड़ते यूँ &lt;br /&gt;
ज्यों चाँदी के चंचल उड़गण&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=516118</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=516118"/>
		<updated>2015-01-04T08:47:57Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* स्वर्णदीप्त तू सुंदरता-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ ,जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
अरे-यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असहाय है चीख कराह रहे &lt;br /&gt;
यहाँ दुसह दुखों के भार तले&lt;br /&gt;
सिर धुन धुन रोती निर्बलता&lt;br /&gt;
असहायित शोषण के पथ पे&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक चाहत -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक चाहत -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;एक चाह अमिय सी जीवन में &lt;br /&gt;
तू जग!नित आलोचन कर मेरी &lt;br /&gt;
यह आलोचन ही भान कराती &lt;br /&gt;
क्या अन्तः विकृतियाँ है तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थोड़ा सा पाकर जलद नीर &lt;br /&gt;
यहाँ कौन नदी नहीं इतराती &lt;br /&gt;
पर भरा हुआ वो अथाह सिंधु&lt;br /&gt;
नहीं खोता है सय्यम नीती&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपने खारे जल के लिए &lt;br /&gt;
नित आलोचना वो सहता है&lt;br /&gt;
अन्तः की विकृतियों को देख &lt;br /&gt;
शायद मर्यादित रहता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तू धुन्ध देख मत हृदय हार &lt;br /&gt;
भर तू उमंग मत हो अधीर&lt;br /&gt;
यह धुन्ध लुप्त हो जाएगा&lt;br /&gt;
कर ज्वलित हृदय का प्रदीप &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा नव्य गान ले नव्य साज&lt;br /&gt;
ले नव्य तेज हो प्रखर बोल &lt;br /&gt;
दिशि दिशि में उठ रही ज्वाल&lt;br /&gt;
जल रहा हो जब सारा खगोल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== उद्बोधन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हम बहुत जलाये बाह्य दीप&lt;br /&gt;
फैलया प्रकाश चौपालों में &lt;br /&gt;
पर नहीं कर सके दूर तिमिर &lt;br /&gt;
जो भरा हृदय के अन्तः में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने जल करके बुझे दीप &lt;br /&gt;
नही दीप जला विश्वास भरा &lt;br /&gt;
जहाँ भरा हुआ है राग द्वेष &lt;br /&gt;
उस अंध गुहा पर दीप जला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जाति कौम की सड़ी लकड़ियों &lt;br /&gt;
को एकत्रित कर आग लगा &lt;br /&gt;
तब मानवता के हवन कुण्ड से &lt;br /&gt;
अस्फुट होगी एक दिव्य विभा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अंध गुहा के अंतः में &lt;br /&gt;
जाग जाग वो जाग विभा&lt;br /&gt;
तेरी प्रदीप्त की ज्वाला से &lt;br /&gt;
जल जाये ईर्ष्यावती अभा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कडवे पत्ते-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;तुम हाँथ पसारे यहाँ खड़े किस आशा में &lt;br /&gt;
क्यों बोल रहे हो यहाँ अश्रु की भाषा में &lt;br /&gt;
जो तेरा है उसे छीन झपट कर ले आओ &lt;br /&gt;
नहीं डाल गले में फांद शुलि पर चढ़ जाओ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बस यही रास्ते दो ही है तेरे सम्मुख &lt;br /&gt;
इन्ही रास्तों में तुमको चलना होगा &lt;br /&gt;
एक रास्ता और यहाँ है किन्तु तुम्हें &lt;br /&gt;
उसमें तुमको पल पल मरना होगा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर भरे शब्द आशाओं के &lt;br /&gt;
कब पड़ते मुर्दों के कानो में&lt;br /&gt;
क्या नहीं जानते बंधू मेरे तुम &lt;br /&gt;
नहीं पाषाण पिघलते आँसू में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस आशा की तुम ज्वाला लेकर &lt;br /&gt;
जो चाह रहे हो कोई दीप जलाना &lt;br /&gt;
वह आशा ही आशा बनकर रह जायेगी&lt;br /&gt;
औ घिरा रहेगा अन्धकार से हर कोना&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहे हो चढ़ अंचलों के शृंगों से &lt;br /&gt;
विभा कोई जिससे मिट जाये अंधियाली&lt;br /&gt;
पर सच है! की मानव के गौरव पथ से &lt;br /&gt;
कब की लुप्त हो गयी है किरणों की लाली&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कौन यहाँ नहीं है व्याकुल-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख मेरी दयनीय दशा को &lt;br /&gt;
मन मेरा मुझसे है व्याकुल&lt;br /&gt;
बोला वह विश्व प्राङ्गणा में &lt;br /&gt;
सर,सलिल,कुसुम्म्य सभी व्याकुल&lt;br /&gt;
कौन यहाँ जो नहीं है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जलते सूरज के प्रखर तेज से &lt;br /&gt;
धरती का कण कण है व्याकुल &lt;br /&gt;
प्राकृति के सारे नियम तोड़&lt;br /&gt;
मानवीय सभ्यता है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देख सबल का प्रबल वेग &lt;br /&gt;
निर्बल का अँग अँग व्याकुल &lt;br /&gt;
निर्भीक दौड़ते भय के रथ से &lt;br /&gt;
शांति,खड़ी नतमस्तक व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धनवर्षा देख मंदिरो में &lt;br /&gt;
धन कुबेर होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
भूखे की भूख देखकर के&lt;br /&gt;
हो रहा देव-होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ मानव होता है पावन&lt;br /&gt;
वह गंग बहे निसहाय विकल &lt;br /&gt;
धो धोकर मैल हुई मलिन &lt;br /&gt;
पावन गंगा का जल निर्मल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चुनी,कार्यपालिका के कार्यों से &lt;br /&gt;
यहाँ निम्नवर्ग आकुल व्याकुल&lt;br /&gt;
औ न्यायपालिका के निर्णाय से &lt;br /&gt;
है उच्चवर्ग व्याकुल विव्हल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानव निर्मित यह हवन कुण्ड &lt;br /&gt;
जलता खगोल निसहाय विकल &lt;br /&gt;
सुन लगा ध्यान उठता तूफान&lt;br /&gt;
जाऊं!दीवार तोड़ किस ओर निकल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्ण-छवि-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;रजनी तिमिर ले जा रही थी &lt;br /&gt;
छितिज से,चाँद ओझल हो रहा था &lt;br /&gt;
औ मत्त स्वर में एक खग &lt;br /&gt;
स्वर चेतना में भर रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थे पुष्प के तरु मुकुट पहने &lt;br /&gt;
यौन में डूबे सभी मकरन्द थे&lt;br /&gt;
बून्द चंचल ओस के कण &lt;br /&gt;
तृप्त वसुधा कर रहे थे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्राण पपीहा मधुर स्वर में &lt;br /&gt;
था घोलता स्वर मधुर पव में &lt;br /&gt;
शैल श्रंग, दूर्वा प्रांतर पर &lt;br /&gt;
थी विभा मोति सी ओस कणों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहु टोलियां विहग दल की &lt;br /&gt;
गान करते विविध स्वर में &lt;br /&gt;
पूर्ण यौवना जल तरंगें &lt;br /&gt;
थिरकती थी एक सर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव्य अरुणिमा ऊषा लेकर &lt;br /&gt;
सूर्य नभ पर आ चुका था &lt;br /&gt;
बदलकर पट नील अम्बर&lt;br /&gt;
पट पीत धारण कर चुका था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आ पड़ी जब किरण अलि में&lt;br /&gt;
प्रात की नव विभा लेकर&lt;br /&gt;
रंगी सकल अलि स्वर्णाभ रंग &lt;br /&gt;
स्वर्ण व्योम औ स्वर्ण सरोवर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मौन करुणा-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर ढल चुका है सूर्य नभ से &lt;br /&gt;
फिर सांध्य आयी तम लिये&lt;br /&gt;
इस तम भरी प्रेमयि गुहा में &lt;br /&gt;
मै!नित नव जलाता हूँ दिये&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाह थी कितनी हृदय में &lt;br /&gt;
यदि!तुमको बता पाता कहीं &lt;br /&gt;
हृदय के पट खोल कर मै&lt;br /&gt;
तुमको दिखा पाता कही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
टूटी हुयी इस वेणु में है &lt;br /&gt;
रागनी कितनी बिकल &lt;br /&gt;
प्रेममयि अब शब्द भी &lt;br /&gt;
हैं हो रहे कितने प्रखर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भावों के आवेग उठ उठ &lt;br /&gt;
हलचल मचाते है प्रबल &lt;br /&gt;
गीत के उन्मत्त स्वर भी &lt;br /&gt;
है कर रहे मुझको बिकल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब जोड़ने को बस हमें &lt;br /&gt;
कुछ यादों के है तार मिलते &lt;br /&gt;
अब भूत की बातें सभी बस &lt;br /&gt;
एक शब्दमय आधार बनते&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== आँसू-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्यों आ बसे हो नयन में &lt;br /&gt;
तुम नीर बनकर अश्रु धारा&lt;br /&gt;
वह क्यों नहीं भाया तुम्हे &lt;br /&gt;
लहरा रहा जो सिंधु खारा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करने व्यथित क्यों लोक मेरा &lt;br /&gt;
हर पल चले आते हो तुम &lt;br /&gt;
मै वेदना जग से छुपता &lt;br /&gt;
जग को बता जाते हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
त्रासदी जग की सहन कर &lt;br /&gt;
जब हृदय में ज्वाल भरता&lt;br /&gt;
तुम बरस जाते मेघ बनकर&lt;br /&gt;
ज्वाला बुझा जाते हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये कला सीखा कहाँ से &lt;br /&gt;
गुरु कहाँ पाये हो  तुम&lt;br /&gt;
आँसुओं तुम मौन भी &lt;br /&gt;
हर भेद कह जाते हो तुम  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी प्रियतम की आँखों से बह&lt;br /&gt;
तुम अपना प्रेम जताते हो &lt;br /&gt;
हठ अपनी कभी मनाने को  &lt;br /&gt;
बालक अबोध बन जाते हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी ममता की आँखों से बह &lt;br /&gt;
प्रेमायी सागर भर लाते हो&lt;br /&gt;
कभी छद्द्म नीर बहाकर के &lt;br /&gt;
हृदय तोड़ तुम जाते हो&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
------II-भाग&lt;br /&gt;
बहुत पढ़ा इतिहास तुम्हारा &lt;br /&gt;
बहुत छले हो तुम जग को&lt;br /&gt;
फिर आज मेरा ये अन्तस्&lt;br /&gt;
कैसे न कोसेगा तुमको &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिनके जीवन के बन में &lt;br /&gt;
दुःख की कलियाँ सूखी हो &lt;br /&gt;
फिर हरा भरा कर जाते &lt;br /&gt;
तुम कितने निर्मोही हो  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रद के सागर को मै&lt;br /&gt;
बाँधा था बाँध बनाकर &lt;br /&gt;
बाँध तोड़ तुम जाते &lt;br /&gt;
ह्रद में तुम ज्वार उठाकर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम मेरे अंतः के नभ पर &lt;br /&gt;
घुमड़ घुमड़ बन घन छाये&lt;br /&gt;
दो घडी को यदि सुख पाया&lt;br /&gt;
तुम खोज वेदना ले आये &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरे अन्तरिक्ष की करुणा &lt;br /&gt;
सिसक सिसक कर रोयीं &lt;br /&gt;
क्या क्या जतन किये तब &lt;br /&gt;
स्मृतियाँ समाधि पर सोयीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मै खोज खोजकर सुख को &lt;br /&gt;
पहनाया पुष्प की माला &lt;br /&gt;
पर भाया तुम्हें नहीं क्यों &lt;br /&gt;
जो आकर डेरा डाला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
------III-भाग&lt;br /&gt;
जब रजनी बेला में शशि &lt;br /&gt;
चंद्रमल्लिका से है मिलता &lt;br /&gt;
मेरी करुणा का ईंधन &lt;br /&gt;
बड़वानल सा है जलता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानस जीवन प्रांगण में &lt;br /&gt;
ये कैसा उपहास तुम्हारा &lt;br /&gt;
आँखों संग नाच रहे तुम &lt;br /&gt;
जलता है हृदय हमारा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस करुणा भरे गगन पर &lt;br /&gt;
सुख के बादल छाने दो&lt;br /&gt;
कल्याणी सुख के जल से &lt;br /&gt;
कलि को तो खिल जाने दो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरी दुःख की दुनिया पर &lt;br /&gt;
मिलता किसका संरछण&lt;br /&gt;
बस तू ही तू है दिखती &lt;br /&gt;
क्या तेरा ही है आरछण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के सर पर &lt;br /&gt;
तू कैसा जाल बुना है &lt;br /&gt;
उलझ रहा है जीवन &lt;br /&gt;
कोई पंथ ना सूझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रजनी संग लिपटी रोती&lt;br /&gt;
मेरे अन्तः की करुणा &lt;br /&gt;
उच्चस्वांस कर रोयी &lt;br /&gt;
तन्द्रा मेरी ये तरुणा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्णदीप्त तू सुंदरता-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शैल श्रृंग औ बन उपवन में &lt;br /&gt;
तू कहाँ छुपी नहीं सुंदरता &lt;br /&gt;
तेरे सागर में डूब डूब &lt;br /&gt;
कवि लिखे कामिनी-कविता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गहन तिमिर दूर्वा प्रदेश पर &lt;br /&gt;
कीटों के किंकिणि-ध्वनि में&lt;br /&gt;
कोमल कलियों की पंखुड़ियों &lt;br /&gt;
भ्रमरों के मर मर स्वर में&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
आयी हो मेरे मानस में तो &lt;br /&gt;
नमन करो तुम स्वराकार&lt;br /&gt;
हृदय भरो स्वर्गीय गान&lt;br /&gt;
श्रृंगार शिरोमणि अलंकार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरी नगरी में देख रहा &lt;br /&gt;
सुंदरता, दृश्य मनोरम&lt;br /&gt;
लहरों संग है तू थिरक रही &lt;br /&gt;
गाती संग गान विहंगम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुआ क्षितिज में अरुणोदय &lt;br /&gt;
किरणे आ पड़ी अवनि में&lt;br /&gt;
मंत्रमुग्ध हो गया प्रकृति  &lt;br /&gt;
सुंदरता, तेरे यौवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोल दिये पंखुड़ी जलज &lt;br /&gt;
मकरंद चुम्ब अंकित करते &lt;br /&gt;
मचल रहे है मृदुल कान्त &lt;br /&gt;
और बाँह पसार तुझे भरते&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे स्वर्णदीप्त तू सुंदरता &lt;br /&gt;
पिक के तू उर्मिल गानो में &lt;br /&gt;
नभ मंडल में बन इन्द्रधनुष &lt;br /&gt;
अवनि के कोमल संसृति मे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
------II-भाग&lt;br /&gt;
हे स्वर्णदीप्त तू सुंदरता&lt;br /&gt;
तू किस सौरभ की माला को&lt;br /&gt;
है पलक झुकाये गूँथ रही &lt;br /&gt;
औ उठ उठ गिरती स्वागत को &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी छुपी रूपसी के कपोल पर&lt;br /&gt;
लेकर लज्जा की लाली &lt;br /&gt;
कभी छटक केश तू इठलाती &lt;br /&gt;
जब चले चाल वो मतवाली &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पलकों के पुतली में छिपकर &lt;br /&gt;
दीपक लौ सा वो बलखाना &lt;br /&gt;
वो छुपकर के नत कोरों में &lt;br /&gt;
बिन कहे बहुत कुछ कह जाना &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कैसा कर डाला सम्मोहन &lt;br /&gt;
नयनो में भरकर मादकता &lt;br /&gt;
देख रहा प्रत्यक्ष कवी &lt;br /&gt;
सम्मोहित होती है कविता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन पसारे बाँह खड़ा &lt;br /&gt;
रजनी हो शिथिल समायी &lt;br /&gt;
था तम अपनी यौवन में &lt;br /&gt;
सुंदरता कुंकुम बरसायी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सम्मोहित हो गया जगत &lt;br /&gt;
जब यौवन ने ली अँगड़ाई&lt;br /&gt;
चपला चंचल तू सुंदरता&lt;br /&gt;
जब भर विलास मधु ले आई&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित थरथर अधर प्रवाल &lt;br /&gt;
बहे ज्यों पवन काँपते पात  &lt;br /&gt;
लाज से सकुचाती सुकुमारी &lt;br /&gt;
सकुचति छुई मुई ज्यों पात&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पल्लवित हुआ काम का लोक &lt;br /&gt;
बिखेरे रति अपने जब केश&lt;br /&gt;
झील से गहरे गहरे नैन  &lt;br /&gt;
डूब सा गया कवी देश&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
----III-भाग&lt;br /&gt;
अलकानगरी की रति रानी &lt;br /&gt;
तू उज्जवल एक चेतना है &lt;br /&gt;
तेरी सुषमा के सागर में &lt;br /&gt;
सारा अनंत यह डूबा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरी ज्योत्स्रना जलनिधि में &lt;br /&gt;
दो बटी हुई हैं धारायें&lt;br /&gt;
एक,डूब तृप्त होता है जग &lt;br /&gt;
एक पर मिलती हैं बाधायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरे संग न्याय ये कैसा &lt;br /&gt;
विश्वास तोड़ता है जग &lt;br /&gt;
तब सुंदरता के पीछे &lt;br /&gt;
रहस्य खोजता है जग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे स्वर्णदीप्त तू सुंदरता&lt;br /&gt;
तू निश्छल एक तपस्वी है &lt;br /&gt;
पर भेद लगा पाना मुश्किल &lt;br /&gt;
दिख रही है जो वो तू ही है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भेद लगा पाना मुश्किल &lt;br /&gt;
की ये प्रतिबिम्ब तुम्हारा है&lt;br /&gt;
या सुंदर बिम्ब के पीछे &lt;br /&gt;
छिपा कोई छल छाया है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुंदर विश्वासों में छिपा हुआ है &lt;br /&gt;
नव युग का सुंदर अंकुर &lt;br /&gt;
अंतस उज्जवल जल बरसेगा &lt;br /&gt;
यदि हो!अन्तः का धवल वर्ण अम्बर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुंदर मन हो तो सुंदरता &lt;br /&gt;
सुंदर जीवन का हर क्रम है&lt;br /&gt;
सुंदरतम विश्वासों से ही  &lt;br /&gt;
सुंदर सुखमय ये जीवन है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=516111</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=516111"/>
		<updated>2015-01-04T08:41:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* आँसू-दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ ,जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
अरे-यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असहाय है चीख कराह रहे &lt;br /&gt;
यहाँ दुसह दुखों के भार तले&lt;br /&gt;
सिर धुन धुन रोती निर्बलता&lt;br /&gt;
असहायित शोषण के पथ पे&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक चाहत -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक चाहत -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;एक चाह अमिय सी जीवन में &lt;br /&gt;
तू जग!नित आलोचन कर मेरी &lt;br /&gt;
यह आलोचन ही भान कराती &lt;br /&gt;
क्या अन्तः विकृतियाँ है तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थोड़ा सा पाकर जलद नीर &lt;br /&gt;
यहाँ कौन नदी नहीं इतराती &lt;br /&gt;
पर भरा हुआ वो अथाह सिंधु&lt;br /&gt;
नहीं खोता है सय्यम नीती&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपने खारे जल के लिए &lt;br /&gt;
नित आलोचना वो सहता है&lt;br /&gt;
अन्तः की विकृतियों को देख &lt;br /&gt;
शायद मर्यादित रहता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तू धुन्ध देख मत हृदय हार &lt;br /&gt;
भर तू उमंग मत हो अधीर&lt;br /&gt;
यह धुन्ध लुप्त हो जाएगा&lt;br /&gt;
कर ज्वलित हृदय का प्रदीप &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा नव्य गान ले नव्य साज&lt;br /&gt;
ले नव्य तेज हो प्रखर बोल &lt;br /&gt;
दिशि दिशि में उठ रही ज्वाल&lt;br /&gt;
जल रहा हो जब सारा खगोल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== उद्बोधन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हम बहुत जलाये बाह्य दीप&lt;br /&gt;
फैलया प्रकाश चौपालों में &lt;br /&gt;
पर नहीं कर सके दूर तिमिर &lt;br /&gt;
जो भरा हृदय के अन्तः में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने जल करके बुझे दीप &lt;br /&gt;
नही दीप जला विश्वास भरा &lt;br /&gt;
जहाँ भरा हुआ है राग द्वेष &lt;br /&gt;
उस अंध गुहा पर दीप जला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जाति कौम की सड़ी लकड़ियों &lt;br /&gt;
को एकत्रित कर आग लगा &lt;br /&gt;
तब मानवता के हवन कुण्ड से &lt;br /&gt;
अस्फुट होगी एक दिव्य विभा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अंध गुहा के अंतः में &lt;br /&gt;
जाग जाग वो जाग विभा&lt;br /&gt;
तेरी प्रदीप्त की ज्वाला से &lt;br /&gt;
जल जाये ईर्ष्यावती अभा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कडवे पत्ते-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;तुम हाँथ पसारे यहाँ खड़े किस आशा में &lt;br /&gt;
क्यों बोल रहे हो यहाँ अश्रु की भाषा में &lt;br /&gt;
जो तेरा है उसे छीन झपट कर ले आओ &lt;br /&gt;
नहीं डाल गले में फांद शुलि पर चढ़ जाओ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बस यही रास्ते दो ही है तेरे सम्मुख &lt;br /&gt;
इन्ही रास्तों में तुमको चलना होगा &lt;br /&gt;
एक रास्ता और यहाँ है किन्तु तुम्हें &lt;br /&gt;
उसमें तुमको पल पल मरना होगा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर भरे शब्द आशाओं के &lt;br /&gt;
कब पड़ते मुर्दों के कानो में&lt;br /&gt;
क्या नहीं जानते बंधू मेरे तुम &lt;br /&gt;
नहीं पाषाण पिघलते आँसू में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस आशा की तुम ज्वाला लेकर &lt;br /&gt;
जो चाह रहे हो कोई दीप जलाना &lt;br /&gt;
वह आशा ही आशा बनकर रह जायेगी&lt;br /&gt;
औ घिरा रहेगा अन्धकार से हर कोना&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहे हो चढ़ अंचलों के शृंगों से &lt;br /&gt;
विभा कोई जिससे मिट जाये अंधियाली&lt;br /&gt;
पर सच है! की मानव के गौरव पथ से &lt;br /&gt;
कब की लुप्त हो गयी है किरणों की लाली&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कौन यहाँ नहीं है व्याकुल-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख मेरी दयनीय दशा को &lt;br /&gt;
मन मेरा मुझसे है व्याकुल&lt;br /&gt;
बोला वह विश्व प्राङ्गणा में &lt;br /&gt;
सर,सलिल,कुसुम्म्य सभी व्याकुल&lt;br /&gt;
कौन यहाँ जो नहीं है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जलते सूरज के प्रखर तेज से &lt;br /&gt;
धरती का कण कण है व्याकुल &lt;br /&gt;
प्राकृति के सारे नियम तोड़&lt;br /&gt;
मानवीय सभ्यता है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देख सबल का प्रबल वेग &lt;br /&gt;
निर्बल का अँग अँग व्याकुल &lt;br /&gt;
निर्भीक दौड़ते भय के रथ से &lt;br /&gt;
शांति,खड़ी नतमस्तक व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धनवर्षा देख मंदिरो में &lt;br /&gt;
धन कुबेर होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
भूखे की भूख देखकर के&lt;br /&gt;
हो रहा देव-होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ मानव होता है पावन&lt;br /&gt;
वह गंग बहे निसहाय विकल &lt;br /&gt;
धो धोकर मैल हुई मलिन &lt;br /&gt;
पावन गंगा का जल निर्मल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चुनी,कार्यपालिका के कार्यों से &lt;br /&gt;
यहाँ निम्नवर्ग आकुल व्याकुल&lt;br /&gt;
औ न्यायपालिका के निर्णाय से &lt;br /&gt;
है उच्चवर्ग व्याकुल विव्हल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानव निर्मित यह हवन कुण्ड &lt;br /&gt;
जलता खगोल निसहाय विकल &lt;br /&gt;
सुन लगा ध्यान उठता तूफान&lt;br /&gt;
जाऊं!दीवार तोड़ किस ओर निकल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== स्वर्ण-छवि-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;रजनी तिमिर ले जा रही थी &lt;br /&gt;
छितिज से,चाँद ओझल हो रहा था &lt;br /&gt;
औ मत्त स्वर में एक खग &lt;br /&gt;
स्वर चेतना में भर रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थे पुष्प के तरु मुकुट पहने &lt;br /&gt;
यौन में डूबे सभी मकरन्द थे&lt;br /&gt;
बून्द चंचल ओस के कण &lt;br /&gt;
तृप्त वसुधा कर रहे थे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्राण पपीहा मधुर स्वर में &lt;br /&gt;
था घोलता स्वर मधुर पव में &lt;br /&gt;
शैल श्रंग, दूर्वा प्रांतर पर &lt;br /&gt;
थी विभा मोति सी ओस कणों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहु टोलियां विहग दल की &lt;br /&gt;
गान करते विविध स्वर में &lt;br /&gt;
पूर्ण यौवना जल तरंगें &lt;br /&gt;
थिरकती थी एक सर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव्य अरुणिमा ऊषा लेकर &lt;br /&gt;
सूर्य नभ पर आ चुका था &lt;br /&gt;
बदलकर पट नील अम्बर&lt;br /&gt;
पट पीत धारण कर चुका था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आ पड़ी जब किरण अलि में&lt;br /&gt;
प्रात की नव विभा लेकर&lt;br /&gt;
रंगी सकल अलि स्वर्णाभ रंग &lt;br /&gt;
स्वर्ण व्योम औ स्वर्ण सरोवर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== मौन करुणा-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर ढल चुका है सूर्य नभ से &lt;br /&gt;
फिर सांध्य आयी तम लिये&lt;br /&gt;
इस तम भरी प्रेमयि गुहा में &lt;br /&gt;
मै!नित नव जलाता हूँ दिये&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाह थी कितनी हृदय में &lt;br /&gt;
यदि!तुमको बता पाता कहीं &lt;br /&gt;
हृदय के पट खोल कर मै&lt;br /&gt;
तुमको दिखा पाता कही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
टूटी हुयी इस वेणु में है &lt;br /&gt;
रागनी कितनी बिकल &lt;br /&gt;
प्रेममयि अब शब्द भी &lt;br /&gt;
हैं हो रहे कितने प्रखर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भावों के आवेग उठ उठ &lt;br /&gt;
हलचल मचाते है प्रबल &lt;br /&gt;
गीत के उन्मत्त स्वर भी &lt;br /&gt;
है कर रहे मुझको बिकल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब जोड़ने को बस हमें &lt;br /&gt;
कुछ यादों के है तार मिलते &lt;br /&gt;
अब भूत की बातें सभी बस &lt;br /&gt;
एक शब्दमय आधार बनते&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आँसू-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्यों आ बसे हो नयन में &lt;br /&gt;
तुम नीर बनकर अश्रु धारा&lt;br /&gt;
वह क्यों नहीं भाया तुम्हे &lt;br /&gt;
लहरा रहा जो सिंधु खारा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करने व्यथित क्यों लोक मेरा &lt;br /&gt;
हर पल चले आते हो तुम &lt;br /&gt;
मै वेदना जग से छुपता &lt;br /&gt;
जग को बता जाते हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
त्रासदी जग की सहन कर &lt;br /&gt;
जब हृदय में ज्वाल भरता&lt;br /&gt;
तुम बरस जाते मेघ बनकर&lt;br /&gt;
ज्वाला बुझा जाते हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये कला सीखा कहाँ से &lt;br /&gt;
गुरु कहाँ पाये हो  तुम&lt;br /&gt;
आँसुओं तुम मौन भी &lt;br /&gt;
हर भेद कह जाते हो तुम  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी प्रियतम की आँखों से बह&lt;br /&gt;
तुम अपना प्रेम जताते हो &lt;br /&gt;
हठ अपनी कभी मनाने को  &lt;br /&gt;
बालक अबोध बन जाते हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी ममता की आँखों से बह &lt;br /&gt;
प्रेमायी सागर भर लाते हो&lt;br /&gt;
कभी छद्द्म नीर बहाकर के &lt;br /&gt;
हृदय तोड़ तुम जाते हो&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
------II-भाग&lt;br /&gt;
बहुत पढ़ा इतिहास तुम्हारा &lt;br /&gt;
बहुत छले हो तुम जग को&lt;br /&gt;
फिर आज मेरा ये अन्तस्&lt;br /&gt;
कैसे न कोसेगा तुमको &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिनके जीवन के बन में &lt;br /&gt;
दुःख की कलियाँ सूखी हो &lt;br /&gt;
फिर हरा भरा कर जाते &lt;br /&gt;
तुम कितने निर्मोही हो  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रद के सागर को मै&lt;br /&gt;
बाँधा था बाँध बनाकर &lt;br /&gt;
बाँध तोड़ तुम जाते &lt;br /&gt;
ह्रद में तुम ज्वार उठाकर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम मेरे अंतः के नभ पर &lt;br /&gt;
घुमड़ घुमड़ बन घन छाये&lt;br /&gt;
दो घडी को यदि सुख पाया&lt;br /&gt;
तुम खोज वेदना ले आये &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरे अन्तरिक्ष की करुणा &lt;br /&gt;
सिसक सिसक कर रोयीं &lt;br /&gt;
क्या क्या जतन किये तब &lt;br /&gt;
स्मृतियाँ समाधि पर सोयीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मै खोज खोजकर सुख को &lt;br /&gt;
पहनाया पुष्प की माला &lt;br /&gt;
पर भाया तुम्हें नहीं क्यों &lt;br /&gt;
जो आकर डेरा डाला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
------III-भाग&lt;br /&gt;
जब रजनी बेला में शशि &lt;br /&gt;
चंद्रमल्लिका से है मिलता &lt;br /&gt;
मेरी करुणा का ईंधन &lt;br /&gt;
बड़वानल सा है जलता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानस जीवन प्रांगण में &lt;br /&gt;
ये कैसा उपहास तुम्हारा &lt;br /&gt;
आँखों संग नाच रहे तुम &lt;br /&gt;
जलता है हृदय हमारा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस करुणा भरे गगन पर &lt;br /&gt;
सुख के बादल छाने दो&lt;br /&gt;
कल्याणी सुख के जल से &lt;br /&gt;
कलि को तो खिल जाने दो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरी दुःख की दुनिया पर &lt;br /&gt;
मिलता किसका संरछण&lt;br /&gt;
बस तू ही तू है दिखती &lt;br /&gt;
क्या तेरा ही है आरछण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के सर पर &lt;br /&gt;
तू कैसा जाल बुना है &lt;br /&gt;
उलझ रहा है जीवन &lt;br /&gt;
कोई पंथ ना सूझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रजनी संग लिपटी रोती&lt;br /&gt;
मेरे अन्तः की करुणा &lt;br /&gt;
उच्चस्वांस कर रोयी &lt;br /&gt;
तन्द्रा मेरी ये तरुणा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=516110</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=516110"/>
		<updated>2015-01-04T08:29:46Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* मौन करुणा-दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ ,जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
अरे-यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असहाय है चीख कराह रहे &lt;br /&gt;
यहाँ दुसह दुखों के भार तले&lt;br /&gt;
सिर धुन धुन रोती निर्बलता&lt;br /&gt;
असहायित शोषण के पथ पे&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक चाहत -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक चाहत -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;एक चाह अमिय सी जीवन में &lt;br /&gt;
तू जग!नित आलोचन कर मेरी &lt;br /&gt;
यह आलोचन ही भान कराती &lt;br /&gt;
क्या अन्तः विकृतियाँ है तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थोड़ा सा पाकर जलद नीर &lt;br /&gt;
यहाँ कौन नदी नहीं इतराती &lt;br /&gt;
पर भरा हुआ वो अथाह सिंधु&lt;br /&gt;
नहीं खोता है सय्यम नीती&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपने खारे जल के लिए &lt;br /&gt;
नित आलोचना वो सहता है&lt;br /&gt;
अन्तः की विकृतियों को देख &lt;br /&gt;
शायद मर्यादित रहता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तू धुन्ध देख मत हृदय हार &lt;br /&gt;
भर तू उमंग मत हो अधीर&lt;br /&gt;
यह धुन्ध लुप्त हो जाएगा&lt;br /&gt;
कर ज्वलित हृदय का प्रदीप &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा नव्य गान ले नव्य साज&lt;br /&gt;
ले नव्य तेज हो प्रखर बोल &lt;br /&gt;
दिशि दिशि में उठ रही ज्वाल&lt;br /&gt;
जल रहा हो जब सारा खगोल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== उद्बोधन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हम बहुत जलाये बाह्य दीप&lt;br /&gt;
फैलया प्रकाश चौपालों में &lt;br /&gt;
पर नहीं कर सके दूर तिमिर &lt;br /&gt;
जो भरा हृदय के अन्तः में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने जल करके बुझे दीप &lt;br /&gt;
नही दीप जला विश्वास भरा &lt;br /&gt;
जहाँ भरा हुआ है राग द्वेष &lt;br /&gt;
उस अंध गुहा पर दीप जला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जाति कौम की सड़ी लकड़ियों &lt;br /&gt;
को एकत्रित कर आग लगा &lt;br /&gt;
तब मानवता के हवन कुण्ड से &lt;br /&gt;
अस्फुट होगी एक दिव्य विभा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अंध गुहा के अंतः में &lt;br /&gt;
जाग जाग वो जाग विभा&lt;br /&gt;
तेरी प्रदीप्त की ज्वाला से &lt;br /&gt;
जल जाये ईर्ष्यावती अभा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कडवे पत्ते-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;तुम हाँथ पसारे यहाँ खड़े किस आशा में &lt;br /&gt;
क्यों बोल रहे हो यहाँ अश्रु की भाषा में &lt;br /&gt;
जो तेरा है उसे छीन झपट कर ले आओ &lt;br /&gt;
नहीं डाल गले में फांद शुलि पर चढ़ जाओ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बस यही रास्ते दो ही है तेरे सम्मुख &lt;br /&gt;
इन्ही रास्तों में तुमको चलना होगा &lt;br /&gt;
एक रास्ता और यहाँ है किन्तु तुम्हें &lt;br /&gt;
उसमें तुमको पल पल मरना होगा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर भरे शब्द आशाओं के &lt;br /&gt;
कब पड़ते मुर्दों के कानो में&lt;br /&gt;
क्या नहीं जानते बंधू मेरे तुम &lt;br /&gt;
नहीं पाषाण पिघलते आँसू में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस आशा की तुम ज्वाला लेकर &lt;br /&gt;
जो चाह रहे हो कोई दीप जलाना &lt;br /&gt;
वह आशा ही आशा बनकर रह जायेगी&lt;br /&gt;
औ घिरा रहेगा अन्धकार से हर कोना&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहे हो चढ़ अंचलों के शृंगों से &lt;br /&gt;
विभा कोई जिससे मिट जाये अंधियाली&lt;br /&gt;
पर सच है! की मानव के गौरव पथ से &lt;br /&gt;
कब की लुप्त हो गयी है किरणों की लाली&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कौन यहाँ नहीं है व्याकुल-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख मेरी दयनीय दशा को &lt;br /&gt;
मन मेरा मुझसे है व्याकुल&lt;br /&gt;
बोला वह विश्व प्राङ्गणा में &lt;br /&gt;
सर,सलिल,कुसुम्म्य सभी व्याकुल&lt;br /&gt;
कौन यहाँ जो नहीं है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जलते सूरज के प्रखर तेज से &lt;br /&gt;
धरती का कण कण है व्याकुल &lt;br /&gt;
प्राकृति के सारे नियम तोड़&lt;br /&gt;
मानवीय सभ्यता है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देख सबल का प्रबल वेग &lt;br /&gt;
निर्बल का अँग अँग व्याकुल &lt;br /&gt;
निर्भीक दौड़ते भय के रथ से &lt;br /&gt;
शांति,खड़ी नतमस्तक व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धनवर्षा देख मंदिरो में &lt;br /&gt;
धन कुबेर होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
भूखे की भूख देखकर के&lt;br /&gt;
हो रहा देव-होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ मानव होता है पावन&lt;br /&gt;
वह गंग बहे निसहाय विकल &lt;br /&gt;
धो धोकर मैल हुई मलिन &lt;br /&gt;
पावन गंगा का जल निर्मल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चुनी,कार्यपालिका के कार्यों से &lt;br /&gt;
यहाँ निम्नवर्ग आकुल व्याकुल&lt;br /&gt;
औ न्यायपालिका के निर्णाय से &lt;br /&gt;
है उच्चवर्ग व्याकुल विव्हल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानव निर्मित यह हवन कुण्ड &lt;br /&gt;
जलता खगोल निसहाय विकल &lt;br /&gt;
सुन लगा ध्यान उठता तूफान&lt;br /&gt;
जाऊं!दीवार तोड़ किस ओर निकल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्ण-छवि-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;रजनी तिमिर ले जा रही थी &lt;br /&gt;
छितिज से,चाँद ओझल हो रहा था &lt;br /&gt;
औ मत्त स्वर में एक खग &lt;br /&gt;
स्वर चेतना में भर रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थे पुष्प के तरु मुकुट पहने &lt;br /&gt;
यौन में डूबे सभी मकरन्द थे&lt;br /&gt;
बून्द चंचल ओस के कण &lt;br /&gt;
तृप्त वसुधा कर रहे थे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्राण पपीहा मधुर स्वर में &lt;br /&gt;
था घोलता स्वर मधुर पव में &lt;br /&gt;
शैल श्रंग, दूर्वा प्रांतर पर &lt;br /&gt;
थी विभा मोति सी ओस कणों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहु टोलियां विहग दल की &lt;br /&gt;
गान करते विविध स्वर में &lt;br /&gt;
पूर्ण यौवना जल तरंगें &lt;br /&gt;
थिरकती थी एक सर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव्य अरुणिमा ऊषा लेकर &lt;br /&gt;
सूर्य नभ पर आ चुका था &lt;br /&gt;
बदलकर पट नील अम्बर&lt;br /&gt;
पट पीत धारण कर चुका था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आ पड़ी जब किरण अलि में&lt;br /&gt;
प्रात की नव विभा लेकर&lt;br /&gt;
रंगी सकल अलि स्वर्णाभ रंग &lt;br /&gt;
स्वर्ण व्योम औ स्वर्ण सरोवर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मौन करुणा-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर ढल चुका है सूर्य नभ से &lt;br /&gt;
फिर सांध्य आयी तम लिये&lt;br /&gt;
इस तम भरी प्रेमयि गुहा में &lt;br /&gt;
मै!नित नव जलाता हूँ दिये&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाह थी कितनी हृदय में &lt;br /&gt;
यदि!तुमको बता पाता कहीं &lt;br /&gt;
हृदय के पट खोल कर मै&lt;br /&gt;
तुमको दिखा पाता कही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
टूटी हुयी इस वेणु में है &lt;br /&gt;
रागनी कितनी बिकल &lt;br /&gt;
प्रेममयि अब शब्द भी &lt;br /&gt;
हैं हो रहे कितने प्रखर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भावों के आवेग उठ उठ &lt;br /&gt;
हलचल मचाते है प्रबल &lt;br /&gt;
गीत के उन्मत्त स्वर भी &lt;br /&gt;
है कर रहे मुझको बिकल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब जोड़ने को बस हमें &lt;br /&gt;
कुछ यादों के है तार मिलते &lt;br /&gt;
अब भूत की बातें सभी बस &lt;br /&gt;
एक शब्दमय आधार बनते&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=516108</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2015-01-04T08:26:21Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* स्वर्ण-छवि-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ ,जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
अरे-यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असहाय है चीख कराह रहे &lt;br /&gt;
यहाँ दुसह दुखों के भार तले&lt;br /&gt;
सिर धुन धुन रोती निर्बलता&lt;br /&gt;
असहायित शोषण के पथ पे&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक चाहत -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक चाहत -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;एक चाह अमिय सी जीवन में &lt;br /&gt;
तू जग!नित आलोचन कर मेरी &lt;br /&gt;
यह आलोचन ही भान कराती &lt;br /&gt;
क्या अन्तः विकृतियाँ है तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थोड़ा सा पाकर जलद नीर &lt;br /&gt;
यहाँ कौन नदी नहीं इतराती &lt;br /&gt;
पर भरा हुआ वो अथाह सिंधु&lt;br /&gt;
नहीं खोता है सय्यम नीती&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपने खारे जल के लिए &lt;br /&gt;
नित आलोचना वो सहता है&lt;br /&gt;
अन्तः की विकृतियों को देख &lt;br /&gt;
शायद मर्यादित रहता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तू धुन्ध देख मत हृदय हार &lt;br /&gt;
भर तू उमंग मत हो अधीर&lt;br /&gt;
यह धुन्ध लुप्त हो जाएगा&lt;br /&gt;
कर ज्वलित हृदय का प्रदीप &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा नव्य गान ले नव्य साज&lt;br /&gt;
ले नव्य तेज हो प्रखर बोल &lt;br /&gt;
दिशि दिशि में उठ रही ज्वाल&lt;br /&gt;
जल रहा हो जब सारा खगोल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उद्बोधन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हम बहुत जलाये बाह्य दीप&lt;br /&gt;
फैलया प्रकाश चौपालों में &lt;br /&gt;
पर नहीं कर सके दूर तिमिर &lt;br /&gt;
जो भरा हृदय के अन्तः में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने जल करके बुझे दीप &lt;br /&gt;
नही दीप जला विश्वास भरा &lt;br /&gt;
जहाँ भरा हुआ है राग द्वेष &lt;br /&gt;
उस अंध गुहा पर दीप जला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जाति कौम की सड़ी लकड़ियों &lt;br /&gt;
को एकत्रित कर आग लगा &lt;br /&gt;
तब मानवता के हवन कुण्ड से &lt;br /&gt;
अस्फुट होगी एक दिव्य विभा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अंध गुहा के अंतः में &lt;br /&gt;
जाग जाग वो जाग विभा&lt;br /&gt;
तेरी प्रदीप्त की ज्वाला से &lt;br /&gt;
जल जाये ईर्ष्यावती अभा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कडवे पत्ते-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;तुम हाँथ पसारे यहाँ खड़े किस आशा में &lt;br /&gt;
क्यों बोल रहे हो यहाँ अश्रु की भाषा में &lt;br /&gt;
जो तेरा है उसे छीन झपट कर ले आओ &lt;br /&gt;
नहीं डाल गले में फांद शुलि पर चढ़ जाओ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बस यही रास्ते दो ही है तेरे सम्मुख &lt;br /&gt;
इन्ही रास्तों में तुमको चलना होगा &lt;br /&gt;
एक रास्ता और यहाँ है किन्तु तुम्हें &lt;br /&gt;
उसमें तुमको पल पल मरना होगा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर भरे शब्द आशाओं के &lt;br /&gt;
कब पड़ते मुर्दों के कानो में&lt;br /&gt;
क्या नहीं जानते बंधू मेरे तुम &lt;br /&gt;
नहीं पाषाण पिघलते आँसू में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस आशा की तुम ज्वाला लेकर &lt;br /&gt;
जो चाह रहे हो कोई दीप जलाना &lt;br /&gt;
वह आशा ही आशा बनकर रह जायेगी&lt;br /&gt;
औ घिरा रहेगा अन्धकार से हर कोना&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहे हो चढ़ अंचलों के शृंगों से &lt;br /&gt;
विभा कोई जिससे मिट जाये अंधियाली&lt;br /&gt;
पर सच है! की मानव के गौरव पथ से &lt;br /&gt;
कब की लुप्त हो गयी है किरणों की लाली&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कौन यहाँ नहीं है व्याकुल-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख मेरी दयनीय दशा को &lt;br /&gt;
मन मेरा मुझसे है व्याकुल&lt;br /&gt;
बोला वह विश्व प्राङ्गणा में &lt;br /&gt;
सर,सलिल,कुसुम्म्य सभी व्याकुल&lt;br /&gt;
कौन यहाँ जो नहीं है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जलते सूरज के प्रखर तेज से &lt;br /&gt;
धरती का कण कण है व्याकुल &lt;br /&gt;
प्राकृति के सारे नियम तोड़&lt;br /&gt;
मानवीय सभ्यता है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देख सबल का प्रबल वेग &lt;br /&gt;
निर्बल का अँग अँग व्याकुल &lt;br /&gt;
निर्भीक दौड़ते भय के रथ से &lt;br /&gt;
शांति,खड़ी नतमस्तक व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धनवर्षा देख मंदिरो में &lt;br /&gt;
धन कुबेर होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
भूखे की भूख देखकर के&lt;br /&gt;
हो रहा देव-होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ मानव होता है पावन&lt;br /&gt;
वह गंग बहे निसहाय विकल &lt;br /&gt;
धो धोकर मैल हुई मलिन &lt;br /&gt;
पावन गंगा का जल निर्मल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चुनी,कार्यपालिका के कार्यों से &lt;br /&gt;
यहाँ निम्नवर्ग आकुल व्याकुल&lt;br /&gt;
औ न्यायपालिका के निर्णाय से &lt;br /&gt;
है उच्चवर्ग व्याकुल विव्हल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानव निर्मित यह हवन कुण्ड &lt;br /&gt;
जलता खगोल निसहाय विकल &lt;br /&gt;
सुन लगा ध्यान उठता तूफान&lt;br /&gt;
जाऊं!दीवार तोड़ किस ओर निकल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्ण-छवि-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;रजनी तिमिर ले जा रही थी &lt;br /&gt;
छितिज से,चाँद ओझल हो रहा था &lt;br /&gt;
औ मत्त स्वर में एक खग &lt;br /&gt;
स्वर चेतना में भर रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थे पुष्प के तरु मुकुट पहने &lt;br /&gt;
यौन में डूबे सभी मकरन्द थे&lt;br /&gt;
बून्द चंचल ओस के कण &lt;br /&gt;
तृप्त वसुधा कर रहे थे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्राण पपीहा मधुर स्वर में &lt;br /&gt;
था घोलता स्वर मधुर पव में &lt;br /&gt;
शैल श्रंग, दूर्वा प्रांतर पर &lt;br /&gt;
थी विभा मोति सी ओस कणों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहु टोलियां विहग दल की &lt;br /&gt;
गान करते विविध स्वर में &lt;br /&gt;
पूर्ण यौवना जल तरंगें &lt;br /&gt;
थिरकती थी एक सर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव्य अरुणिमा ऊषा लेकर &lt;br /&gt;
सूर्य नभ पर आ चुका था &lt;br /&gt;
बदलकर पट नील अम्बर&lt;br /&gt;
पट पीत धारण कर चुका था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आ पड़ी जब किरण अलि में&lt;br /&gt;
प्रात की नव विभा लेकर&lt;br /&gt;
रंगी सकल अलि स्वर्णाभ रंग &lt;br /&gt;
स्वर्ण व्योम औ स्वर्ण सरोवर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=516106</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2015-01-04T08:23:42Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* कौन यहाँ नहीं है व्याकुल-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ ,जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
अरे-यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असहाय है चीख कराह रहे &lt;br /&gt;
यहाँ दुसह दुखों के भार तले&lt;br /&gt;
सिर धुन धुन रोती निर्बलता&lt;br /&gt;
असहायित शोषण के पथ पे&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक चाहत -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक चाहत -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;एक चाह अमिय सी जीवन में &lt;br /&gt;
तू जग!नित आलोचन कर मेरी &lt;br /&gt;
यह आलोचन ही भान कराती &lt;br /&gt;
क्या अन्तः विकृतियाँ है तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थोड़ा सा पाकर जलद नीर &lt;br /&gt;
यहाँ कौन नदी नहीं इतराती &lt;br /&gt;
पर भरा हुआ वो अथाह सिंधु&lt;br /&gt;
नहीं खोता है सय्यम नीती&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपने खारे जल के लिए &lt;br /&gt;
नित आलोचना वो सहता है&lt;br /&gt;
अन्तः की विकृतियों को देख &lt;br /&gt;
शायद मर्यादित रहता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तू धुन्ध देख मत हृदय हार &lt;br /&gt;
भर तू उमंग मत हो अधीर&lt;br /&gt;
यह धुन्ध लुप्त हो जाएगा&lt;br /&gt;
कर ज्वलित हृदय का प्रदीप &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा नव्य गान ले नव्य साज&lt;br /&gt;
ले नव्य तेज हो प्रखर बोल &lt;br /&gt;
दिशि दिशि में उठ रही ज्वाल&lt;br /&gt;
जल रहा हो जब सारा खगोल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उद्बोधन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हम बहुत जलाये बाह्य दीप&lt;br /&gt;
फैलया प्रकाश चौपालों में &lt;br /&gt;
पर नहीं कर सके दूर तिमिर &lt;br /&gt;
जो भरा हृदय के अन्तः में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने जल करके बुझे दीप &lt;br /&gt;
नही दीप जला विश्वास भरा &lt;br /&gt;
जहाँ भरा हुआ है राग द्वेष &lt;br /&gt;
उस अंध गुहा पर दीप जला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जाति कौम की सड़ी लकड़ियों &lt;br /&gt;
को एकत्रित कर आग लगा &lt;br /&gt;
तब मानवता के हवन कुण्ड से &lt;br /&gt;
अस्फुट होगी एक दिव्य विभा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अंध गुहा के अंतः में &lt;br /&gt;
जाग जाग वो जाग विभा&lt;br /&gt;
तेरी प्रदीप्त की ज्वाला से &lt;br /&gt;
जल जाये ईर्ष्यावती अभा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कडवे पत्ते-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;तुम हाँथ पसारे यहाँ खड़े किस आशा में &lt;br /&gt;
क्यों बोल रहे हो यहाँ अश्रु की भाषा में &lt;br /&gt;
जो तेरा है उसे छीन झपट कर ले आओ &lt;br /&gt;
नहीं डाल गले में फांद शुलि पर चढ़ जाओ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बस यही रास्ते दो ही है तेरे सम्मुख &lt;br /&gt;
इन्ही रास्तों में तुमको चलना होगा &lt;br /&gt;
एक रास्ता और यहाँ है किन्तु तुम्हें &lt;br /&gt;
उसमें तुमको पल पल मरना होगा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर भरे शब्द आशाओं के &lt;br /&gt;
कब पड़ते मुर्दों के कानो में&lt;br /&gt;
क्या नहीं जानते बंधू मेरे तुम &lt;br /&gt;
नहीं पाषाण पिघलते आँसू में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस आशा की तुम ज्वाला लेकर &lt;br /&gt;
जो चाह रहे हो कोई दीप जलाना &lt;br /&gt;
वह आशा ही आशा बनकर रह जायेगी&lt;br /&gt;
औ घिरा रहेगा अन्धकार से हर कोना&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहे हो चढ़ अंचलों के शृंगों से &lt;br /&gt;
विभा कोई जिससे मिट जाये अंधियाली&lt;br /&gt;
पर सच है! की मानव के गौरव पथ से &lt;br /&gt;
कब की लुप्त हो गयी है किरणों की लाली&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कौन यहाँ नहीं है व्याकुल-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख मेरी दयनीय दशा को &lt;br /&gt;
मन मेरा मुझसे है व्याकुल&lt;br /&gt;
बोला वह विश्व प्राङ्गणा में &lt;br /&gt;
सर,सलिल,कुसुम्म्य सभी व्याकुल&lt;br /&gt;
कौन यहाँ जो नहीं है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जलते सूरज के प्रखर तेज से &lt;br /&gt;
धरती का कण कण है व्याकुल &lt;br /&gt;
प्राकृति के सारे नियम तोड़&lt;br /&gt;
मानवीय सभ्यता है व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देख सबल का प्रबल वेग &lt;br /&gt;
निर्बल का अँग अँग व्याकुल &lt;br /&gt;
निर्भीक दौड़ते भय के रथ से &lt;br /&gt;
शांति,खड़ी नतमस्तक व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धनवर्षा देख मंदिरो में &lt;br /&gt;
धन कुबेर होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
भूखे की भूख देखकर के&lt;br /&gt;
हो रहा देव-होगा व्याकुल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ मानव होता है पावन&lt;br /&gt;
वह गंग बहे निसहाय विकल &lt;br /&gt;
धो धोकर मैल हुई मलिन &lt;br /&gt;
पावन गंगा का जल निर्मल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चुनी,कार्यपालिका के कार्यों से &lt;br /&gt;
यहाँ निम्नवर्ग आकुल व्याकुल&lt;br /&gt;
औ न्यायपालिका के निर्णाय से &lt;br /&gt;
है उच्चवर्ग व्याकुल विव्हल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानव निर्मित यह हवन कुण्ड &lt;br /&gt;
जलता खगोल निसहाय विकल &lt;br /&gt;
सुन लगा ध्यान उठता तूफान&lt;br /&gt;
जाऊं!दीवार तोड़ किस ओर निकल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512273</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512273"/>
		<updated>2014-11-29T11:46:17Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* कडवे पत्ते-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ ,जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
अरे-यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असहाय है चीख कराह रहे &lt;br /&gt;
यहाँ दुसह दुखों के भार तले&lt;br /&gt;
सिर धुन धुन रोती निर्बलता&lt;br /&gt;
असहायित शोषण के पथ पे&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== एक चाहत -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक चाहत -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;एक चाह अमिय सी जीवन में &lt;br /&gt;
तू जग!नित आलोचन कर मेरी &lt;br /&gt;
यह आलोचन ही भान कराती &lt;br /&gt;
क्या अन्तः विकृतियाँ है तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थोड़ा सा पाकर जलद नीर &lt;br /&gt;
यहाँ कौन नदी नहीं इतराती &lt;br /&gt;
पर भरा हुआ वो अथाह सिंधु&lt;br /&gt;
नहीं खोता है सय्यम नीती&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपने खारे जल के लिए &lt;br /&gt;
नित आलोचना वो सहता है&lt;br /&gt;
अन्तः की विकृतियों को देख &lt;br /&gt;
शायद मर्यादित रहता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तू धुन्ध देख मत हृदय हार &lt;br /&gt;
भर तू उमंग मत हो अधीर&lt;br /&gt;
यह धुन्ध लुप्त हो जाएगा&lt;br /&gt;
कर ज्वलित हृदय का प्रदीप &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा नव्य गान ले नव्य साज&lt;br /&gt;
ले नव्य तेज हो प्रखर बोल &lt;br /&gt;
दिशि दिशि में उठ रही ज्वाल&lt;br /&gt;
जल रहा हो जब सारा खगोल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उद्बोधन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हम बहुत जलाये बाह्य दीप&lt;br /&gt;
फैलया प्रकाश चौपालों में &lt;br /&gt;
पर नहीं कर सके दूर तिमिर &lt;br /&gt;
जो भरा हृदय के अन्तः में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने जल करके बुझे दीप &lt;br /&gt;
नही दीप जला विश्वास भरा &lt;br /&gt;
जहाँ भरा हुआ है राग द्वेष &lt;br /&gt;
उस अंध गुहा पर दीप जला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जाति कौम की सड़ी लकड़ियों &lt;br /&gt;
को एकत्रित कर आग लगा &lt;br /&gt;
तब मानवता के हवन कुण्ड से &lt;br /&gt;
अस्फुट होगी एक दिव्य विभा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अंध गुहा के अंतः में &lt;br /&gt;
जाग जाग वो जाग विभा&lt;br /&gt;
तेरी प्रदीप्त की ज्वाला से &lt;br /&gt;
जल जाये ईर्ष्यावती अभा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कडवे पत्ते-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;तुम हाँथ पसारे यहाँ खड़े किस आशा में &lt;br /&gt;
क्यों बोल रहे हो यहाँ अश्रु की भाषा में &lt;br /&gt;
जो तेरा है उसे छीन झपट कर ले आओ &lt;br /&gt;
नहीं डाल गले में फांद शुलि पर चढ़ जाओ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बस यही रास्ते दो ही है तेरे सम्मुख &lt;br /&gt;
इन्ही रास्तों में तुमको चलना होगा &lt;br /&gt;
एक रास्ता और यहाँ है किन्तु तुम्हें &lt;br /&gt;
उसमें तुमको पल पल मरना होगा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर भरे शब्द आशाओं के &lt;br /&gt;
कब पड़ते मुर्दों के कानो में&lt;br /&gt;
क्या नहीं जानते बंधू मेरे तुम &lt;br /&gt;
नहीं पाषाण पिघलते आँसू में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस आशा की तुम ज्वाला लेकर &lt;br /&gt;
जो चाह रहे हो कोई दीप जलाना &lt;br /&gt;
वह आशा ही आशा बनकर रह जायेगी&lt;br /&gt;
औ घिरा रहेगा अन्धकार से हर कोना&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहे हो चढ़ अंचलों के शृंगों से &lt;br /&gt;
विभा कोई जिससे मिट जाये अंधियाली&lt;br /&gt;
पर सच है! की मानव के गौरव पथ से &lt;br /&gt;
कब की लुप्त हो गयी है किरणों की लाली&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512272</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512272"/>
		<updated>2014-11-29T11:40:02Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* उद्बोधन -दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
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== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ ,जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
अरे-यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असहाय है चीख कराह रहे &lt;br /&gt;
यहाँ दुसह दुखों के भार तले&lt;br /&gt;
सिर धुन धुन रोती निर्बलता&lt;br /&gt;
असहायित शोषण के पथ पे&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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== एक चाहत -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक चाहत -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;एक चाह अमिय सी जीवन में &lt;br /&gt;
तू जग!नित आलोचन कर मेरी &lt;br /&gt;
यह आलोचन ही भान कराती &lt;br /&gt;
क्या अन्तः विकृतियाँ है तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थोड़ा सा पाकर जलद नीर &lt;br /&gt;
यहाँ कौन नदी नहीं इतराती &lt;br /&gt;
पर भरा हुआ वो अथाह सिंधु&lt;br /&gt;
नहीं खोता है सय्यम नीती&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपने खारे जल के लिए &lt;br /&gt;
नित आलोचना वो सहता है&lt;br /&gt;
अन्तः की विकृतियों को देख &lt;br /&gt;
शायद मर्यादित रहता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तू धुन्ध देख मत हृदय हार &lt;br /&gt;
भर तू उमंग मत हो अधीर&lt;br /&gt;
यह धुन्ध लुप्त हो जाएगा&lt;br /&gt;
कर ज्वलित हृदय का प्रदीप &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा नव्य गान ले नव्य साज&lt;br /&gt;
ले नव्य तेज हो प्रखर बोल &lt;br /&gt;
दिशि दिशि में उठ रही ज्वाल&lt;br /&gt;
जल रहा हो जब सारा खगोल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उद्बोधन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हम बहुत जलाये बाह्य दीप&lt;br /&gt;
फैलया प्रकाश चौपालों में &lt;br /&gt;
पर नहीं कर सके दूर तिमिर &lt;br /&gt;
जो भरा हृदय के अन्तः में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने जल करके बुझे दीप &lt;br /&gt;
नही दीप जला विश्वास भरा &lt;br /&gt;
जहाँ भरा हुआ है राग द्वेष &lt;br /&gt;
उस अंध गुहा पर दीप जला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जाति कौम की सड़ी लकड़ियों &lt;br /&gt;
को एकत्रित कर आग लगा &lt;br /&gt;
तब मानवता के हवन कुण्ड से &lt;br /&gt;
अस्फुट होगी एक दिव्य विभा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अंध गुहा के अंतः में &lt;br /&gt;
जाग जाग वो जाग विभा&lt;br /&gt;
तेरी प्रदीप्त की ज्वाला से &lt;br /&gt;
जल जाये ईर्ष्यावती अभा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512271</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-11-29T11:33:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* एक चाहत -दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ ,जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
अरे-यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असहाय है चीख कराह रहे &lt;br /&gt;
यहाँ दुसह दुखों के भार तले&lt;br /&gt;
सिर धुन धुन रोती निर्बलता&lt;br /&gt;
असहायित शोषण के पथ पे&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== एक चाहत -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक चाहत -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;एक चाह अमिय सी जीवन में &lt;br /&gt;
तू जग!नित आलोचन कर मेरी &lt;br /&gt;
यह आलोचन ही भान कराती &lt;br /&gt;
क्या अन्तः विकृतियाँ है तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थोड़ा सा पाकर जलद नीर &lt;br /&gt;
यहाँ कौन नदी नहीं इतराती &lt;br /&gt;
पर भरा हुआ वो अथाह सिंधु&lt;br /&gt;
नहीं खोता है सय्यम नीती&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपने खारे जल के लिए &lt;br /&gt;
नित आलोचना वो सहता है&lt;br /&gt;
अन्तः की विकृतियों को देख &lt;br /&gt;
शायद मर्यादित रहता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तू धुन्ध देख मत हृदय हार &lt;br /&gt;
भर तू उमंग मत हो अधीर&lt;br /&gt;
यह धुन्ध लुप्त हो जाएगा&lt;br /&gt;
कर ज्वलित हृदय का प्रदीप &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा नव्य गान ले नव्य साज&lt;br /&gt;
ले नव्य तेज हो प्रखर बोल &lt;br /&gt;
दिशि दिशि में उठ रही ज्वाल&lt;br /&gt;
जल रहा हो जब सारा खगोल&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512270</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512270"/>
		<updated>2014-11-29T11:29:23Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== निर्बलता और सबलता-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;क्षितिज-वृत्त से दिनकर अपनी &lt;br /&gt;
आभा लेकर वह डूब चुका था&lt;br /&gt;
कुञ्ज तटी के शांति भवन में&lt;br /&gt;
निर्वाक खड़ा मै देख रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अथक परिश्रम कर एक खग &lt;br /&gt;
था एक नीड़ निर्माण कर रहा&lt;br /&gt;
तृण तृण जोड़ ,जोड़कर पाती &lt;br /&gt;
था प्रेमारस से सींच रहा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शांति चीरता दूर परिधि से&lt;br /&gt;
एक तूफान कराल उठा &lt;br /&gt;
छिन्न भिन्न कर दिया नीड़ &lt;br /&gt;
वह उसका सुख ना देख सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
होकर विक्षुब्ध वो व्योम विहारी&lt;br /&gt;
फिर एक साख पर बैठ गया था &lt;br /&gt;
शायद वह अपनी निर्बलता या &lt;br /&gt;
भाग्य-नियति को कोस रहा था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरख विध्वंसित नीड़ विहग का &lt;br /&gt;
हृदय विक्षुब्धिध ब्याकुल विव्हल &lt;br /&gt;
अरे-यहाँ सबलता के सम्मुख &lt;br /&gt;
नित प्रलय सेज पर सोता निर्बल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असहाय है चीख कराह रहे &lt;br /&gt;
यहाँ दुसह दुखों के भार तले&lt;br /&gt;
सिर धुन धुन रोती निर्बलता&lt;br /&gt;
असहायित शोषण के पथ पे&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512269</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-11-29T11:25:45Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512265</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-11-29T11:23:07Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संध्या सुहावनी-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512263</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512263"/>
		<updated>2014-11-29T11:21:48Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
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खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== एक तुम्हारा चित्र बनाया-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देख चाँदनी को संग शशि के &lt;br /&gt;
हिय याद तुम्हारी ले आया &lt;br /&gt;
उर के सागर से मसि लेकर&lt;br /&gt;
अन्तःमन को पटल बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतरंग रंग से रंगी चुनर &lt;br /&gt;
लघु लघु मोती से चुनर सजाया &lt;br /&gt;
मन्द मन्द बह रही पवन त्यों &lt;br /&gt;
केश कपोलों पर बिखराया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य छितिज में डूब चुका औ &lt;br /&gt;
काली घटा गगन पर छायी &lt;br /&gt;
आलिंगन में भरकर अंबर से &lt;br /&gt;
मध्यम मध्यम जल बरसाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नत झुकी झुकी सहमी सहमी &lt;br /&gt;
तरु छुईमुई ज्यों सकुचि सकुचि &lt;br /&gt;
हृदय पटल के निश्छल मंदिर में &lt;br /&gt;
यह चित्र एक पवित्र बनाया &lt;br /&gt;
एक तुम्हारा चित्र बनाया&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512262</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-11-29T11:19:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* राष्ट भाषा-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राष्ट भाषा-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हिन्द तेरा हिन्द की तुम रौशनी हो &lt;br /&gt;
हिन्द में मनुजत्व के रग में बसी हो  &lt;br /&gt;
लाख मेहँदी की तरह पिस जाये तू &lt;br /&gt;
पर रंग अपना हर हृदय में छोड़ती हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज चाहे अपवादताओं से घिरी हो &lt;br /&gt;
सामने अस्तित्व की लौ जल रही हो &lt;br /&gt;
पर धरा के इस तटी से उस तटी तक&lt;br /&gt;
पहचान भारत भूमि की तुम ही बनी हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस अरुणमय देश की तुम अभा हो&lt;br /&gt;
प्रात भारत भूमि की पहली प्रभा हो &lt;br /&gt;
रामधारी, कवि निराला ,पंत श्री के&lt;br /&gt;
गान में मृदु रागनी बनकर सजी हो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुखसिंधु,ब्रह्मपुत्र ,गंगे गोदावरी में &lt;br /&gt;
लीन होकर भूमि भारत में बही हो&lt;br /&gt;
तिमिर में भी जली हो तुम नवल प्रदीप्तसा &lt;br /&gt;
कोकिला की कीर में तुम बसी हो राष्ट भाषा&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512261</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512261"/>
		<updated>2014-11-29T11:17:49Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* कविता की पुकार-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कविता की पुकार-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;छोड़कर,कोलाहल भरा संसार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार &lt;br /&gt;
धरा करती जहाँ विविध श्रंगार &lt;br /&gt;
ग्रामो श्री करता है जहाँ विहार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ फैला हो चारागाह&lt;br /&gt;
जहाँ पर गायें करें विहार &lt;br /&gt;
बनुँगी उनके पग की धूलि &lt;br /&gt;
करुँगी फिर मै जय जयकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मनोहर सुरसरि के तट पर &lt;br /&gt;
लहर मृदु गाती जहाँ विहाग &lt;br /&gt;
मधुप संगम जहाँ स्नेहानुराग &lt;br /&gt;
है बसता पावन जहाँ प्रयाग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पावन तमसा की भव्य पुलिन पर&lt;br /&gt;
जहाँ स्वर्ग उतर आता धरती पर &lt;br /&gt;
जहाँ पर्व मनाती पिक गा गाकर &lt;br /&gt;
गाऊँ मै भी छिप किसी साख पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ चित्रकूट का है पावन तट &lt;br /&gt;
औ भरत कूप का है जल निर्मल &lt;br /&gt;
युग युग से इस जलते तन को &lt;br /&gt;
तृप्त करूंगी छिड़क अमिय जल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही है कविता तेरी पुकार &lt;br /&gt;
कवि ले चल मुझको उस पार&lt;br /&gt;
यहाँ व्याकुल मन हुआ अधीर &lt;br /&gt;
यहाँ ऋतू भरे हृदय में पीर&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512260</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-11-29T11:11:16Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* कवि और कविता -दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== कवि और कविता -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कविते तेरी अलकानगरी में &lt;br /&gt;
रमा यहाँ ऐसा कवि जीवन &lt;br /&gt;
ज्यों अरविंदों के प्रान्तर में &lt;br /&gt;
रमा भवँर का हो अंतरमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी उतरी तू कवि के मानस में &lt;br /&gt;
बन शीतल मंद गंध पव कम्पन &lt;br /&gt;
तू कभी कल्पना बनकर मधुरम&lt;br /&gt;
कभी फुट पड़ी बन गीत विहंगम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गाते देखा सुरसरि लहरों में&lt;br /&gt;
इठलाती हो नभ में भूतल में &lt;br /&gt;
सभ्य-सभ्यता औ संस्कृति में&lt;br /&gt;
तुम न्याय नीति औ परिवर्तन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कभी खीच गयी तू रेख क्रांति की &lt;br /&gt;
कभी बनी मूक जन की तू वाणी &lt;br /&gt;
रो पड़ी कभी लखकर पीड़ा को &lt;br /&gt;
हे अखिल कंठ से तू कल्याणी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो कवी तपोवन की हे देवी&lt;br /&gt;
मै खोज रहा हूँ वो अतीत &lt;br /&gt;
जहाँ उगे प्रेम का कल्प वृछ&lt;br /&gt;
मनुजत्व सभ्यता का प्रतीत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगा जगा उस तृष्णा मरुथल में&lt;br /&gt;
जहाँ आडंम्बर की उठती ज्वालायें&lt;br /&gt;
जहाँ धन पिशाच की भेट चढ़ रहीं &lt;br /&gt;
आह-तृण पर्ण कुटी की वो बालायें&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512259</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512259"/>
		<updated>2014-11-29T11:07:17Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* मन की व्यथा -दिनेश सिंह */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन की व्यथा -दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कितना सुंदर होता की &lt;br /&gt;
हम सिर्फ एक मानव होते &lt;br /&gt;
न जाति पाति के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
अब पहुँच रहा वो गांवों में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते&lt;br /&gt;
इन महकी स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी अब मानस की &lt;br /&gt;
ये कौमी गांठ घनेरी &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी उन्मन पथ की &lt;br /&gt;
ये गलियाँ अंधेरी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512258</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-11-29T11:04:14Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जब तुम आये मेरे जीवन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;शत शत रश्मि रूप मेरा नभ धरकर &lt;br /&gt;
बरसाने लगा !पद्य जल सतरंगी कण &lt;br /&gt;
वषों से तृश्नित पड़ी धरा पर &lt;br /&gt;
जोतिषिंण वर्ण के पुष्प खिले &lt;br /&gt;
आया बसंत मेरे बन में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर बिहिन मेरी यह वीणा&lt;br /&gt;
स्वर हुआ प्रवाहित मधुर राग &lt;br /&gt;
जब मृदुल मृदुल अपने कर से &lt;br /&gt;
मेरे अन्तः के छुये तार &lt;br /&gt;
स्वर गूंजा चार विभागों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुयी यामीन में ज्योति नवल &lt;br /&gt;
औ हुयी प्रवाहित पवन नवल &lt;br /&gt;
जब नवल पात में छुप करके &lt;br /&gt;
एक विहंगिन गाया गाना &lt;br /&gt;
छुप छुपकर  मेरे बन में&lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरी विहगिन तूने कैसा गाना गाया&lt;br /&gt;
सुख्स पड़े इस बन में फिर मधुऋतु आया&lt;br /&gt;
खिला व्योम पल्लव पल्लव ने ली अंगड़ाई &lt;br /&gt;
खिली मधुपी मंद गंध पाकर तरुणाई&lt;br /&gt;
बहा कवी का हृदय तेरे स्वर लहरों में &lt;br /&gt;
जब तुम आये मेरे जीवन&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512255</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512255"/>
		<updated>2014-11-29T10:47:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== समय चक्र बढ़ता जाता है-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अगणित तारे जग के नभ पर&lt;br /&gt;
संघर्ष निरत बढ़ते सब पथ पर&lt;br /&gt;
नहीं चला जो समय संग वो &lt;br /&gt;
उल्का बन गिर जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बदल रही पल पल प्रबतियाँ&lt;br /&gt;
नव मानव युग है बदल रहा &lt;br /&gt;
युग-परिवर्तन संग नहीं ढला&lt;br /&gt;
वह एक कथा बन जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पड़ी यहाँ घायल मानवता &lt;br /&gt;
समय किसे देखे इसको &lt;br /&gt;
बंद किवाड़े कर आँखों के &lt;br /&gt;
जग आगे बढ़ जाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सत-प्रेम की नगरी भस्म हुयी &lt;br /&gt;
परमारथ कथा पुरानी है &lt;br /&gt;
स्वार्थ साधकर बढ़ा यहाँ जो &lt;br /&gt;
वही विजयी कहलाता है &lt;br /&gt;
समय चक्र बढ़ता जाता है&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=512253</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-11-29T10:43:57Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== सात्विक गीत बड़े महगें हैं-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;ये खग तेरा गान खो गया कहीं कलम से &lt;br /&gt;
झरनो की झंकार खो गयी कहीं कलम से &lt;br /&gt;
तेरी सुधि में गीत कहाँ मिलते सस्ते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखो कविते उपवन गीतों का मुरझाया है &lt;br /&gt;
बादल का वो अमर राग खोया खोया है&lt;br /&gt;
एक सूरत पर सारे रस आकर ठहरे हैं &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब मकरन्दों का स्पन्दन भी हीन हुआ &lt;br /&gt;
अरविंदों के नवल गन्ध भी छिर्ण हुआ&lt;br /&gt;
अब तितली के पंखों के गान कहाँ मिलते है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गीतों में सौंदर्य कहाँ शायन-प्रभात का&lt;br /&gt;
कही लुप्त रस हुआ श्यामा के गीतों का &lt;br /&gt;
नयी नवेली सोनजुही के गीत नहीं है &lt;br /&gt;
सात्विक गीत बड़े महगें हैं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B9%E0%A5%88_%E0%A4%85%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%80_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4_%E0%A4%AA%E0%A4%B0_%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE_%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE_%E0%A4%95%E0%A4%AC_%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE_%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF_%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%A8&amp;diff=501596</id>
		<title>है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है-हरिवंशराय बच्चन</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B9%E0%A5%88_%E0%A4%85%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%80_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4_%E0%A4%AA%E0%A4%B0_%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE_%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE_%E0%A4%95%E0%A4%AC_%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE_%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF_%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%A8&amp;diff=501596"/>
		<updated>2014-08-22T08:03:29Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको यह दिखेगा कि लेख बनकर कैसा लगेगा --&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:{{PAGENAME}}|thumb|{{PAGENAME}} लिंक पर क्लिक करके चित्र अपलोड करें]]&lt;br /&gt;
{{पुनरीक्षण}}&amp;lt;!-- कृपया इस साँचे को हटाएँ नहीं (डिलीट न करें)। इसके नीचे से ही सम्पादन कार्य करें। --&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था&lt;br /&gt;
भावना के हाथ ने जिसमें वितानों को तना था&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा&lt;br /&gt;
स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से रसों से जो सना था&lt;br /&gt;
ढह गया वह तो जुटाकर ईंट पत्थर कंकड़ों को&lt;br /&gt;
एक अपनी शांति की कुटिया बनाना कब मना है&lt;br /&gt;
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों के अश्रु से धोया गया नभ-नील नीलम&lt;br /&gt;
का बनाया था गया मधुपात्र मनमोहक मनोरम&lt;br /&gt;
प्रथम ऊषा की किरण की लालिमा-सी लाल मदिरा&lt;br /&gt;
थी उसी में चमचमाती नव घनों में चंचला सम&lt;br /&gt;
वह अगर टूटा मिलाकर हाथ की दोनों हथेली&lt;br /&gt;
एक निर्मल स्रोत से तृष्णा बुझाना कब मना है&lt;br /&gt;
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या घड़ी थी एक भी चिंता नहीं थी पास आई&lt;br /&gt;
कालिमा तो दूर छाया भी पलक पर थी न छाई&lt;br /&gt;
आँख से मस्ती झपकती बात से मस्ती टपकती&lt;br /&gt;
थी हँसी ऐसी जिसे सुन बादलों ने शर्म खाई&lt;br /&gt;
वह गई तो ले गई उल्लास के आधार माना&lt;br /&gt;
पर अथिरता पर समय की मुसकराना कब मना है&lt;br /&gt;
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाय वे उन्माद के झोंके कि जिनमें राग जागा&lt;br /&gt;
वैभवों से फेर आँखें गान का वरदान माँगा&lt;br /&gt;
एक अंतर से ध्वनित हों दूसरे में जो निरंतर&lt;br /&gt;
भर दिया अंबर-अवनि को मत्तता के गीत गा-गा&lt;br /&gt;
अंत उनका हो गया तो मन बहलने के लिए ही&lt;br /&gt;
ले अधूरी पंक्ति कोई गुनगुनाना कब मना है&lt;br /&gt;
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाय वे साथी कि चुंबक लौह-से जो पास आए&lt;br /&gt;
पास क्या आए, हृदय के बीच ही गोया समाए&lt;br /&gt;
दिन कटे ऐसे कि कोई तार वीणा के मिलाकर&lt;br /&gt;
एक मीठा और प्यारा ज़िन्दगी का गीत गाए&lt;br /&gt;
वे गए तो सोचकर यह लौटने वाले नहीं वे&lt;br /&gt;
खोज मन का मीत कोई लौ लगाना कब मना है&lt;br /&gt;
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या हवाएँ थीं कि उजड़ा प्यार का वह आशियाना&lt;br /&gt;
कुछ न आया काम तेरा शोर करना गुल मचाना&lt;br /&gt;
नाश की उन शक्तियों के साथ चलता ज़ोर किसका&lt;br /&gt;
किंतु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि, तुझे होगा बताना&lt;br /&gt;
जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से&lt;br /&gt;
पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है&lt;br /&gt;
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:हरिवंशराय बच्चन सम्पादन]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:छायावादी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501595</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501595"/>
		<updated>2014-08-22T07:50:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== स्वर्गिगक सुखमा बसा धरा पर--दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है निवास करता-स्वर्ग-जंहाँ इस धरा का &lt;br /&gt;
अचलो की श्रांखलाएँ अवर्णित निरुपम &lt;br /&gt;
पिक प्रणय गान करती-भ्रमर गूंज सुनकर &lt;br /&gt;
प्रखर अति प्रखरतर हो उठता प्रभाकर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिम की चादर ओढे खड़ी काश्मीर की कली&lt;br /&gt;
ज्यो धवल परिधान ओढ़े खड़ी हो कोई रूपसी &lt;br /&gt;
मतवाली रात चाँद की चाँदनी से धुली हुई &lt;br /&gt;
गंध-भार भर मंद-मंदतर बहे मलयानिल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झूमता है यौवन बंकिम विशाल का &lt;br /&gt;
जहाँ चूमते है पर्वत अम्बर के गात को &lt;br /&gt;
सर-सरित और उपवन कानन गिरी-गहन &lt;br /&gt;
झरनो की राग लेकर बहती हुई पवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मधुप-वृन्द-बन्दी-औ करती गान कोकिल&lt;br /&gt;
कलियों के-कपोलो को-करते चुम्बन भ्रमर&lt;br /&gt;
शैशव यौवन सी अंगड़ाई लेती ये धरा&lt;br /&gt;
मुकलो के गंध से गगन का मन भरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजता झरनो का स्वरोर्मियों-प्रखर &lt;br /&gt;
है जाता भर स्वरमयी ध्वनि से गगन &lt;br /&gt;
स्वर से उठता नव-नूतन नवल छंद &lt;br /&gt;
छिपाये स्वर में कवित्त के विविध वर्ण &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501594</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T07:48:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मन मीत मेरे जरा धरो धीर --दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मत हो तुम-ये मेरे मन अधीर &lt;br /&gt;
मिट जायेंगे तेरे-ये भी पीर &lt;br /&gt;
व्यथित दिवस भी-जायेंगे बीत &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अस्ताचल रवि फिर होगा उदय &lt;br /&gt;
कमलिनी-दल खिलेंगे फिर बन में &lt;br /&gt;
फिर गुंजन करेंगे भ्रमर वीर &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जीवन पथ पर &lt;br /&gt;
सपनो के फूल बिछाता चल &lt;br /&gt;
निरख ज्योति अंतरनभ की &lt;br /&gt;
आशा के दीप जलाता चल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रम और स्वप्न के जीवन-रथ पर&lt;br /&gt;
बस चलता चल तू जीवन पथ पर&lt;br /&gt;
जीवन हर्षित हो-अमृत से सींच &lt;br /&gt;
मन मीत मेरे जरा धरो धीर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501593</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T07:43:08Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== तंद्रिल अति तंद्रिल होता उर--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;उगता है चाँद जब अंबर पर &lt;br /&gt;
संताप बढ़ाता जीवन का &lt;br /&gt;
उर में एसी हलचल भरता &lt;br /&gt;
कि रातो को मै सो न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लहरा लहरा कर-जब पवन बहे &lt;br /&gt;
कुछ पल को शोक भूलता मन &lt;br /&gt;
मलयामिस्श्रित वो ध्वनि नुपुर सी&lt;br /&gt;
यूँ लगे चली आ रही हो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिन की आभा पंख समेटे &lt;br /&gt;
ओझल होती है-जब नभ से &lt;br /&gt;
जब घिर जाता हूँ अन्धकार से &lt;br /&gt;
तब नयन कोर भींगे जल से &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चम्पई चाँदनी फैले नभ पर &lt;br /&gt;
शीतल करती है वसुधा को &lt;br /&gt;
पर मुझे लगे ये चम्पक सी &lt;br /&gt;
तंद्रिल अति तंद्रिल करती मन को &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501592"/>
		<updated>2014-08-22T07:41:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== प्रियसी के प्रति---दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मेरे मन बन के आस पास &lt;br /&gt;
स्वाछंद मरुत सा चपल श्वास&lt;br /&gt;
वश में करती वह एक एक क्षण &lt;br /&gt;
एक कली उपवन की रसाल&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत रोक उपवन की सुरभि अरी&lt;br /&gt;
मै पथिक प्रवासी इतना निवास &lt;br /&gt;
निर्झर-सा अलक्षित लोक बसा&lt;br /&gt;
स्वप्निल-संसृति तृष्णा संसार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शून्य हुई मधुमास डगर &lt;br /&gt;
निस्तेज हुई अनुराग लहर &lt;br /&gt;
मत जला शशि-ज्योति ज्यों लपटों से &lt;br /&gt;
ये द्युति चम्पक सा हिला गात&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501591</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T07:37:55Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अब वह बनी मुक्तधारा--दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
किसी के गीत की उपमा बनी थी जो अभी तक&lt;br /&gt;
प्रगति-पथ पर चली वो ज्योति पथ पर बिछाती&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अवहेलना जिसकी युगों से हुई थी&lt;br /&gt;
किसी की काम की कामना अब तक बनी थी&lt;br /&gt;
नवरूप अब लेकर जगी वो प्रेम की अनुगामिनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसके रूप का वर्णन नहीं कोई कर सका&lt;br /&gt;
कवि क्या शेष-नारद आदि नहीं कोई गा सका&lt;br /&gt;
हटाकर काम की मूरत को वह मुक्त धारा बनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिया मद तोड़ जो कटीले तरु खड़े थे&lt;br /&gt;
बदल दी दृष्टि जग की जो कभी एकत्व थे&lt;br /&gt;
किया निर्माण निज नीड़ को वो अभिलाषनी&lt;br /&gt;
स्वच्छंद नीले गगन में उड़ रही है मुक्ताहंसिनी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501589</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501589"/>
		<updated>2014-08-22T07:35:44Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* चाह मन में-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== चाह मन में-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;नित चाह मन में होती प्रखरतर &lt;br /&gt;
नित बृद्धि हो ज्यों शशि गगन पर&lt;br /&gt;
यह हृदय में है क्या चाह कोई &lt;br /&gt;
या कोई मिथ्या है मन पर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस धरा से उस गगन तक&lt;br /&gt;
इस दिशा से उस दिशा तक &lt;br /&gt;
इस तिमिर से उस प्रभा तक&lt;br /&gt;
है चाह मन में अति प्रबलतर&lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिंधु के बिच लहर उठती &lt;br /&gt;
पवन के संग तट को छूती&lt;br /&gt;
है पूर्ण वह अभिलाष करती &lt;br /&gt;
मै गीत के संग प्रभा छूकर &lt;br /&gt;
फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर इन पंक्तियों को जग हँसेगा&lt;br /&gt;
मिथ्या भरा इसके हृदय में जग कहेगा &lt;br /&gt;
पंथ में भी अपशकुन के बिखरे सितारे &lt;br /&gt;
पर बढ़ रहा हूँ पंथ में कर्मिक हथेली थामकर &lt;br /&gt;
की फैल जाऊँ इस भुवन पर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501586</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T07:32:28Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नयन देखते हैं नभ को-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;है ज्ञात मुझे की नहीं तुम &lt;br /&gt;
अब इस मायावी जग में &lt;br /&gt;
पर रह रहकर कुछ भाव उभरते &lt;br /&gt;
इस आकुल अन्तःस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वो मधुर कंठ से मृदु वाणी &lt;br /&gt;
वो स्नेहिल भरी पुकार तेरी &lt;br /&gt;
एक बज्रपात सा उर में होता &lt;br /&gt;
जब करता है उर याद तेरी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिशय तंद्रिल करती स्मृतियाँ&lt;br /&gt;
अंतरतम पल पल प्रतिपल&lt;br /&gt;
उमड़ उमड़ करुणा के सागर &lt;br /&gt;
करते निमग्र तट के स्थल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धीरज की दीवार टूटकर &lt;br /&gt;
इत उत फैली तृण तृण &lt;br /&gt;
इस मेरे एकाकी सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर उठता ज्वार प्रबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देव लोक की देव परी&lt;br /&gt;
हरकर तुम सबका मन &lt;br /&gt;
फिर अपने पंख फैलाकर &lt;br /&gt;
चली गई तुम नील गगन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगणित तारे बिखरे नभ में &lt;br /&gt;
झिलमिल झिलमिल करते चंचल&lt;br /&gt;
जिस तारे में हो बिम्ब तुम्हारा &lt;br /&gt;
है ढूंढ रहे उसको लोचन &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501583</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501583"/>
		<updated>2014-08-22T07:26:14Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-८-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मै , मेरा और अपने में &lt;br /&gt;
उलझ गया संसार मेरा&lt;br /&gt;
हाय प्रायोजित अभिनय से &lt;br /&gt;
मुझे नहीं अवकाश मिला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लघु लघु मम मानस सागर में &lt;br /&gt;
रह रहकर एक लहर उठती &lt;br /&gt;
और तटी तक आ आकर &lt;br /&gt;
वह प्रश्न प्रबल एक कर जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवनीत देह लेकर भूतल में &lt;br /&gt;
जब आया था तब धेय था क्या &lt;br /&gt;
तू जीवन में है उलझ गया&lt;br /&gt;
या जीवन तुझमे उलझ गया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमिय फेन सा निर्मल मन &lt;br /&gt;
लेकर आया था धरणी में &lt;br /&gt;
मद अहं गरल भरा तड़ाग &lt;br /&gt;
संचित किया यान्त्रिक जीवन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस लघुता मन में प्रश्न प्रखर &lt;br /&gt;
है मृत्यु कुटिल या यह जीवन &lt;br /&gt;
यदि मृत्यु कुटिल है तो आखिर &lt;br /&gt;
सारा जीवन फिर क्यों रोदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करुणार्द्र कथा है यदि जीवन&lt;br /&gt;
एक घनीभूति है यह पीड़ा&lt;br /&gt;
उस चंद्रावदनी रूपराशि पर &lt;br /&gt;
भीगी पलकें क्यों करती क्रीड़ा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं था तू तब भी तू था&lt;br /&gt;
अब है पर आखिर सत्य नहीं&lt;br /&gt;
सत्य एक है मृत्यु किन्तु &lt;br /&gt;
मंजिल आखिर यह मृत्यु नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल, काल कलांतर बीत चुके &lt;br /&gt;
औ ज्ञान बहुत हम खोज चुके&lt;br /&gt;
नहीं मानव मन की दहन बुझी &lt;br /&gt;
सब पंचकोष में लीन हुए &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501579</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T06:58:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यह पावसी सान्ध्य -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हुआ ललोहित गगन और &lt;br /&gt;
दिनमान चला निज युग को &lt;br /&gt;
किरण-हंसनी पंख समेट कर&lt;br /&gt;
जा बैठ गयी तरु शिखरों पर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन मार्ग से उतर रही&lt;br /&gt;
निज केश कलाप बिखेरे &lt;br /&gt;
यह पावसी सान्ध्य सकल &lt;br /&gt;
एकाकीपन को समेटे &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मौन-द्रागित र्निमेष लिये&lt;br /&gt;
सौन्दय भाव के पंख खोल&lt;br /&gt;
भू पर उतरी खिली अमराई &lt;br /&gt;
हो गया तरुण हरीतिमालोक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तोम तिमिर का दुर्ग देख &lt;br /&gt;
स्वर स्वानो के है गूंज उठे &lt;br /&gt;
स्वर बध्य राग गाते श्रृगाल&lt;br /&gt;
सब अपने गृह से निकल पड़े&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501578</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501578"/>
		<updated>2014-08-22T06:54:34Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मनुजतत्व सकल वसुंधरा -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दे विद्द-विदद् हे दायनी &lt;br /&gt;
शत-शत रूप धर-धर कर &lt;br /&gt;
चयन-मम ह्रदय-पर कर-शयन&lt;br /&gt;
हर-हर हृदय के दारुण-दहन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हो प्रखर उर ज्योतिर्जल-विभा&lt;br /&gt;
प्रभा सा ज्वलित हो पद्य-जल अभा&lt;br /&gt;
कृति-कृत्त कर-विकृति-प्रबति हर &lt;br /&gt;
सतित-सत पथ पर चलें दृढ़तर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भर कर-सजल-जल-नयन पर&lt;br /&gt;
जीवन अमिय रस सींच कर &lt;br /&gt;
हर श्लेष-क्लेश-विमुक्क्त कर &lt;br /&gt;
चलते चलें पथ कर्म पर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
झरे जीर्ण-जाति विषानला &lt;br /&gt;
छटे गहन-घन-तम-भ्रम भरा &lt;br /&gt;
हो उदित उर-उर भास्करा &lt;br /&gt;
मनुजतत्व सकल वसुंधरा&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501575</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T06:52:52Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== जुगनू के प्रति -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;बादलों ने आज फिर धरती को घेरा&lt;br /&gt;
ढक लिया है चांद तारो को अँधेरा&lt;br /&gt;
पर आज ये बिद्रोह किसने कर दिया है बादलो से&lt;br /&gt;
कह रहा है इस तिमिर को नष्ट कर दूंगा धरा से&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बादलों को कौन ये ललकारता है&lt;br /&gt;
धायकर जो गगन छूना चाहता है&lt;br /&gt;
चीरकर तिमिरांचल को तीव्र गति से बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
वह तिमिर को नष्ट करने पर अटल है लग रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखकर बिद्रोह अतिकर मेघ गरजा&lt;br /&gt;
दमक करके दामिनी का अंग फड़का &lt;br /&gt;
सकल दिशि घनघोर तम औ हवा ब्याकुल&lt;br /&gt;
किन्तु चिर ज्योति जलाने को वह आतुर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठखेलियां वह इस तिमिर से खेलता है &lt;br /&gt;
पल भर ज्वलित कभी लुप्त वह हो रहा है &lt;br /&gt;
वह इन घमंडी घटाओं का मद दर्प कर &lt;br /&gt;
पंथ पर विश्वास का दीपक जलाये बढ़ रहा है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501573</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T06:50:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मिलन यामिनी-दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँद मेरी रात का पूनम सा खिला है &lt;br /&gt;
किन्तु वो उलझी घटाओं से घिरा है &lt;br /&gt;
ये पवन तुम मंद अपनी गति करो&lt;br /&gt;
छणिक वो दिख रहा कभी बुझ रहा है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सूर्य अपनी प्रभा लेकर वो कब का जा चूका है &lt;br /&gt;
सुनहली साँझ का मौसम सुनहरा आ चूका है &lt;br /&gt;
रुपहरे चाँद से!सिंदूरी चाँदनी छन छन रही है &lt;br /&gt;
हृदय के तार से मृदु रागनी बजने लगी है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन के बाँह में रजनी शिथिल खोई हुई है &lt;br /&gt;
जगी है चाँदनी मेरी सकल अलि सोयी हुई है &lt;br /&gt;
भिगो कर लाज से है चन्द्रिका चुपचाप बैठी&lt;br /&gt;
मगर ये झील सी आँखें हैं जो कुछ कह रही हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ठहर जा चाँदनी कुछ पल अभी है रात बांकी&lt;br /&gt;
अभी है बात बांकी बात का विस्तार बांकी &lt;br /&gt;
युगों से शान्त मानस की उमंगें कह रही है &lt;br /&gt;
अरी इस यामिनी की हर छटा मनभावनी है &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501572</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T06:48:18Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यदि चलें सदा मानव बनके -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन के गहरे अंधकार में &lt;br /&gt;
ज्वलित हुआ एक प्रश्न प्रबल &lt;br /&gt;
मानव हो तुम सबसे सुंदर &lt;br /&gt;
फिर क्यों करता है अति छलबल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम जीवन के सौन्दर्य सृष्टि हो &lt;br /&gt;
कुदरत की आदर्श दृष्टि हो&lt;br /&gt;
न्योछावर तुझमे सकल सृष्टि है &lt;br /&gt;
अगणित सुषमावो से निर्मित हो&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम सृष्टि का कैसे आना &lt;br /&gt;
ये मानव पहचान तुमने&lt;br /&gt;
विज्ञानं ज्ञान का समावेश&lt;br /&gt;
है बस तेरे मन मस्तिक में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे अखिल विश्व के चिर रूपम &lt;br /&gt;
ये सब है बस तेरे उर अन्तः में&lt;br /&gt;
फिर क्यों भरता है राग देव्ष &lt;br /&gt;
अपने मन के अन्तः कण में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्यों खोज रहा है ज्योती तम में &lt;br /&gt;
फैल जा व्योम का विस्तार बनके&lt;br /&gt;
नहीं देव अन्तः भेद फिर तुझमे है क्यों&lt;br /&gt;
बरस जा जलद से जल धार बनके &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीत सको तुम त्रिभुवन को &lt;br /&gt;
कर सको पूर्ण अभिलाषा मन के &lt;br /&gt;
कुछ भी दुर्लभ नहीं तुम्हे &lt;br /&gt;
यदि चलें सदा मानव बनके &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501571</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T06:46:25Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== किसी सतरंगी नील नयन में -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;किसी सतरंगी नील नयन में &lt;br /&gt;
खोया मेरा मन विहंंग&lt;br /&gt;
ज्यों किसी गुलावी मधुबन में &lt;br /&gt;
खो गया भवर का अंतरंग &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खिली देख कलि मधुबन में &lt;br /&gt;
जा बैठ गया नादान विहग &lt;br /&gt;
निरख कली नत कोरो को &lt;br /&gt;
उलझ गया अनजान विहग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मोद भरे उन कोरो में &lt;br /&gt;
कोरो में ! रवि किरणों सी लिए धार &lt;br /&gt;
वह नवल कली के मधुवन में &lt;br /&gt;
है भूल गया खग कठिन राह&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501570"/>
		<updated>2014-08-22T06:43:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अषाढ़ के बादल -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;देखकर इस धरा के हृदय की जलन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अश्रु धारा बहे तो फिर ऐसे बहे &lt;br /&gt;
काँटों के सँग सँग फूल भी बह गये&lt;br /&gt;
अश्रु से सींचकर शांत करता तपन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँख में अश्रु है-स्वर में प्रबल रोर है &lt;br /&gt;
कड़कती मेघ में दामिनी गरज कहती घटाएँ हैं,&lt;br /&gt;
सूर्य छुपने का अब क्यों है करता यतन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छुप गये सारे योद्धा निज नीड में&lt;br /&gt;
रोर करता अकेला है रण भूमि में &lt;br /&gt;
भेरी फिर से बजाया रण में गगन &lt;br /&gt;
रो पड़े आज फिर से गगन के नयन&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501569</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T06:42:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* आकुल अंतर -दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आकुल अंतर -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;मन हर्षित होकर जब जब गाया&lt;br /&gt;
वह विरह वेदना तब तब पाया &lt;br /&gt;
हुयी झणिक कभी आभा प्रज्वलित&lt;br /&gt;
अवगुंठनों से भरा तम निकट आया &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खड़ी हो गयी मुँह फेरकर के कल्पनाये&lt;br /&gt;
अति प्रखरतर हो गयी सारी विपद्ताएँ&lt;br /&gt;
दिवस की दिनकर किरण ओझल हुयी &lt;br /&gt;
हुयी विमुखरित चाँद की भी चन्द्रिकाएँ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आहात हृदय ! हृदय का हर्ष भूला &lt;br /&gt;
हुआ गीत इतंना क्षीण की वह पंथ भूला&lt;br /&gt;
मुस्कान अधरों की कही विलुप्तित हुयी &lt;br /&gt;
औ हर्ष सारे हृदय के मार्ग भूला&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुरझा गयी सारी हृदय की मधुर बेला&lt;br /&gt;
खड़ा है निस्तेज होकर वह अकेला &lt;br /&gt;
मधुर स्मृति झण भर को होती प्रज्वलित&lt;br /&gt;
फिर खिंच जाती है यादों की काली रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501568</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501568"/>
		<updated>2014-08-22T06:40:48Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका -दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;चाँदनी से धुली आज ये यामिनी &lt;br /&gt;
प्रीति मेरे हृदय में जगाने लगी &lt;br /&gt;
चकोरा हुआ प्रेम में मन मेरा &lt;br /&gt;
देखकर रात रानी लजाने लगी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो मेरे अन्तः का कोना था सूना पड़ा &lt;br /&gt;
उस जगह पर कोई नव कली खिल रही &lt;br /&gt;
घोलकर अपने रंग में ये चंचल पवन &lt;br /&gt;
गंध उसकी मेरे अंग में भर रही &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये पवन तुम जरा मंद मन्दतर बहो &lt;br /&gt;
इसको मत तोड़ देना तुम झंझोर कर &lt;br /&gt;
बड़ी कोमल है ये मेरे उर की कली&lt;br /&gt;
गिर ना जाये कहीं डाल से टूट कर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेरी यामिनी की नवल चन्द्रिका&lt;br /&gt;
ज्योति मेरे हृदय में जलाने लगी &lt;br /&gt;
ये हटो मेरे अन्तः के घने बादलो&lt;br /&gt;
प्रेममयी-ज्योतिस्तर प्रबलतर हुयी &lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=501563</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-22T06:24:31Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* मेघ आगमन -दिनेश सिंह */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मेघ आगमन -दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;घुमड़ घुमड़कर मेघ गगन में मंडप लगे सजाने &lt;br /&gt;
विविध वर्ण की चुनर पहनकर धरती लगी सँवरने&lt;br /&gt;
पहन पहनकर मोर मुकुट बन उपवन बने बाराती &lt;br /&gt;
कुञ्ज भवन में मंगल गान गाने लगी कालपी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नवल पात में छुपी कोकिला जब मधुरिम स्वर में गयी &lt;br /&gt;
भू बंकिम विशाल के रोम रोम ने ली सहशा अंगड़ाई&lt;br /&gt;
दादुर चातक औ भ्रमर वीर हैं नवल गान वन में गाते &lt;br /&gt;
मध्य निशा में कीट पतंगे बंशी मधुर बजाते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेघ आगमन देख धरा के खिली कपोलो की लाली &lt;br /&gt;
फूल-फूल पराग प्रेम मय पात पात पर हरियाली &lt;br /&gt;
तरु तड़ाग गिरी कानन उपवन में है ख़ुशियाँ लहरायी&lt;br /&gt;
शीश नवाती मेघ राज को झुक झुकर तरुवर की डाली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुये अंग रोमांचित अवनी के जब अम्बर प्रेम गीत गाया&lt;br /&gt;
संगीत घोलती दमक दामिनी धरणी पर स्वर्ग उतर आया&lt;br /&gt;
नभ और धरा का मिलन देख हो उठा रोमांचित भू मंडल&lt;br /&gt;
इस मिलन का साक्षतकार बने तब गीत मेरे कवि ने गाया&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=500658</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
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		<updated>2014-08-13T13:23:55Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह . */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=500657</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=500657"/>
		<updated>2014-08-13T13:21:06Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* खग गीत -दिनेश सिंह */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
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&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सुनहरा ऋतू बसंत .......दिनेश सिंह. ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दूर दूर तक फैली खेतो में हरियाली &lt;br /&gt;
कितनी सुंदर वसुधा लगती &lt;br /&gt;
रँग रँग के फूल खिले है&lt;br /&gt;
रंग बिरंगी डाली डाली &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
मडरायें भवरें उन पर&lt;br /&gt;
भांति भांति की तितली उडती &lt;br /&gt;
रस प्रेम सुधा वे पान करें&lt;br /&gt;
इस वृंतों से उस वृंतों पर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
मधुरम मधुरम पवन बह रही&lt;br /&gt;
भीनी भीनी गंध लिए &lt;br /&gt;
बज रही घंटियाँ बैलो की&lt;br /&gt;
गा रही कोकिला मतवाली &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
वर्षा ऋतू बीती-ऋतू शरद गयी&lt;br /&gt;
बसन्त ऋतू है मुसकायी &lt;br /&gt;
चहक रहीं चिड़ियाँ, तरु पर&lt;br /&gt;
भ्रू-भंग अंग-चंचल कलियाँ हरषाई&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
लहलाते खेतो को देख कृषक&lt;br /&gt;
यु नाच उठे मन मोर द्रंग&lt;br /&gt;
बादल को देख मोरनी ज्यो&lt;br /&gt;
हर्षित उर कर- करती म्रदंग&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
आ गयी आम्र तरु में बौरें&lt;br /&gt;
आ रही है गेहूँ पर बाली &lt;br /&gt;
सीना ताने-तरु चना खड़ा है&lt;br /&gt;
इठलाती अरहर रानी &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
फूली पीली सरसों के बिच&lt;br /&gt;
यु झाँके धरती अम्बर को &lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य ज्यो दुलहिन देखे&lt;br /&gt;
अपने प्रियवर प्रियतम को &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
मीठे मीठे बेर पक गये&lt;br /&gt;
इस डाली के उस गुच्छे पर &lt;br /&gt;
सुमनों से रस पी पी कर&lt;br /&gt;
मधुमक्खी जाती छत्तो पर &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
उर छील-छील,लील-लील,सुषमा अति&lt;br /&gt;
स्वरमयी दिश स्वर्गिक सुन्दरता सर्ग &lt;br /&gt;
उदघोषित करता प्रणय-गान &lt;br /&gt;
आ गया सुनहरा ऋतू बसंत&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=500656</id>
		<title>सदस्य वार्ता:दिनेश सिंह</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&amp;diff=500656"/>
		<updated>2014-08-13T13:10:57Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Dinesh Singh: /* अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==सुझाव पर विचार==&lt;br /&gt;
दिनेश सिंह जी, आपके दिये सुझाव पर भारतकोश टीम शीघ्र ही विचार करके आपको अवगत कराएगी। ‍‍  [[चित्र:nib4.png|35px|top|link=User:गोविन्द राम]]&amp;lt;span class=&amp;quot;sign&amp;quot;&amp;gt;[[User:गोविन्द राम|गोविन्द राम]] - &amp;lt;small&amp;gt;[[सदस्य वार्ता:गोविन्द राम|वार्ता]]&amp;lt;/small&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;  19:52, 9 अगस्त 2014 (IST) &lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-७-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
हाय रोता रहा सकल उम्र तू &lt;br /&gt;
निज पीड़ा का अम्बार लिए &lt;br /&gt;
तेरी पीड़ा से अधिक विकट&lt;br /&gt;
जी रहा है ये संसार लिए &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आँसू ही आँसू मिला जगत से &lt;br /&gt;
नहीं जग से जिनको प्यार मिला &lt;br /&gt;
जिन्हे मात्र प्रलोभन दिखलाकर &lt;br /&gt;
बस स्वप्न भरा संसार मिला &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हे बार बार अति लोभन की &lt;br /&gt;
और भांति भांति रोटी फेंकी &lt;br /&gt;
उस मूक वेदना के सम्मुख &lt;br /&gt;
तू बस अपनी पीड़ा देखी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुख मूक वेदना देखा &lt;br /&gt;
चलें ! लिए ताप ज्वालाएँ&lt;br /&gt;
निर्मोहि वेदने अश्रुमयि&lt;br /&gt;
धरे वच्छ शीलायें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर नई भोर बस एक सवाल &lt;br /&gt;
क्या मिटे भूंख फिर एक बार &lt;br /&gt;
हाँ चुगे परिंदा नित दाना &lt;br /&gt;
नित नई भोर का इन्तजार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन्हें स्वाभिमान से जीना &lt;br /&gt;
स्वप्निल ज्यों बनी कहानी &lt;br /&gt;
बंद ! साहूकार की मुट्ठी &lt;br /&gt;
याचक की चित्त हथेली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मन की व्यथा -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
कितना सुंदर होता की हम &lt;br /&gt;
एक सिर्फ इन्सां होते &lt;br /&gt;
न जाती पाती के लिए जगह &lt;br /&gt;
न धर्मो के बंधन होते &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शोर मचा है धर्म धर्म का &lt;br /&gt;
कौम कौम का लगता नारा &lt;br /&gt;
इस चलती कौमी बयारी में &lt;br /&gt;
उन्मय उन्मय जन मानस सारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो घूम रहा था शहर शहर &lt;br /&gt;
पहुँच रहा अब गाँव गाँव में &lt;br /&gt;
वो कौम बयारी जहर घोलते &lt;br /&gt;
महकती स्वच्छ हवाओं में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्या सुलझेंगी ये मानस की गांठे घनेरी  &lt;br /&gt;
क्या रोशन होंगी ये गलियाँ अंधेरी &lt;br /&gt;
क्यों बुझ जाती है गूंज आखिरी &lt;br /&gt;
इस उन्मन उन्मन पथ के ऊपर&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य देखा जब तुमको &lt;br /&gt;
था ऋतू बसंत फूलों का उपवन  &lt;br /&gt;
छुई मुई के तरु सी लज्जित &lt;br /&gt;
नयनो का वो मौन मिलन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कम्पित अधरों से वो कहना &lt;br /&gt;
नख से धरा कुदॆर रही थी &lt;br /&gt;
आँखों मे मादकता चितवन &lt;br /&gt;
साँसों का मिलता स्पंदन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भटक रहा था एकाकी पथ पर  &lt;br /&gt;
पथ पाया-जब मिला साथ तुम्हारा &lt;br /&gt;
ह्रदय शुन्य था उत्सर्ग मौन &lt;br /&gt;
खिल उठा पाकर स्पर्श तुम्हारा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ह्रदय के गहरे अन्धकार में &lt;br /&gt;
मन डूबा था विरह व्यथा में &lt;br /&gt;
छूकर अपने सौन्दर्य ज्योति से  &lt;br /&gt;
फैलाया उर में प्रकाश यौवन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कितने सुख दुःख जीवन में हो &lt;br /&gt;
नहीं मृत्यु से किंचित भय &lt;br /&gt;
आँखों के सम्मुख रहो सदा जो &lt;br /&gt;
औ प्रीति रहे उर में चिरमय&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
==एक सलोने से सपने में कोई -दिनेश सिंह==&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक सलोने से सपने में कोई &lt;br /&gt;
नीदों में दस्तक दे जाती है &lt;br /&gt;
इन्द्रधनुष सा शतरंगी -&lt;br /&gt;
स्वप्न को रंगीत कर जाती है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अद्रशित सी कोई डोर &lt;br /&gt;
खीच रही है अपनी ओर &lt;br /&gt;
खीचा जाऊं हो आत्मविभोर  &lt;br /&gt;
रूपसी कौन कौन चित चोर &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधरों में मुस्कान लिए &lt;br /&gt;
मुख पर शशी की जोत्स्रना  &lt;br /&gt;
द्रगो में लाज-मुग्ध-यौवन विद्यमान &lt;br /&gt;
तेज रवि सा मुख-छबि-में रुचिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखों का फैलाये तिछर्ण जाल &lt;br /&gt;
फंसाकर मेरा खग अनजान चली  &lt;br /&gt;
जैसे नभ में छायी बदली-&lt;br /&gt;
पवन के झोंके उड़ा चली&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:सदस्य वार्ता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संध्या सुहावनी-------------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दिवस अवसान का समय &lt;br /&gt;
चला दिनकर जलधि की गोद  &lt;br /&gt;
हो गया स्वर्ण सा अम्बर लोल &lt;br /&gt;
दिये खग-दल-कुल-मुख खोल &lt;br /&gt;
ध्वनिमय हो गयी हिंदोल &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गो वेला का समय-गोधुल नभमंडल में उड़ा &lt;br /&gt;
गोशावक प्रेमाग्न से-अतिव्याकुल हो रहा &lt;br /&gt;
उड़ पखेरू गगन में कर रहे विहारणी &lt;br /&gt;
दश दिशा निमज्जित हुई &lt;br /&gt;
प्रफुल्लित हुई हरीतिमा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दुर्गम पहाड़ो की शिखा पर &lt;br /&gt;
जा चढ़ी छाया पादप विटप &lt;br /&gt;
तिमिरांचल में है शांतपन &lt;br /&gt;
वेदज्ञाता कर रहे शंध्या नमन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हुई अस्त रवि किरण शैने शैने &lt;br /&gt;
कमल में भांवरा बंद हो रहा &lt;br /&gt;
विपिन में गर्जना कर रहा वनराज  &lt;br /&gt;
गिरी कन्दरा में म्रग छिप रहा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गगन से उतरी कर पदचाप निशियामिनी -&lt;br /&gt;
हो गयी रवि किरण अंतर्यामिनी &lt;br /&gt;
पवन नव-पल्लवित हो गयी &lt;br /&gt;
बहने लगी मधुर-म्रदु वातसी&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==  प्रकति की सुन्दर-----------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;प्रकृति की सुन्दरता को देखकर &lt;br /&gt;
मन हो जाता है मुदित &lt;br /&gt;
बिपिन बिच नभचर का कलरव गूंजता&lt;br /&gt;
विविध ध्वनि विहंगावली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कल कल निनाद करती बहती सुरसरी&lt;br /&gt;
प्रकति से खेलती हो जैसे अठखली &lt;br /&gt;
विविध रंगों से सजी वसुंधरा &lt;br /&gt;
बहु परिधान ओढे खड़ी हो जैसे नववधू &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ लालोहित हो चले नभ लालिमा &lt;br /&gt;
गूंजता है सुर कलापी कोकिला&lt;br /&gt;
कुसुमासव सी मधुर आवाज &lt;br /&gt;
श्रुतिपटल पर कोई मुरली बजी &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निशा का अवसान समीप हो &lt;br /&gt;
नवऊयान हो रही हो यामनी&lt;br /&gt;
शुन्य पर हो जब वातावरण &lt;br /&gt;
पतंगों की गूंज से , जैसे घंटी बजी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चाँद जब चादनी बिखेरे सुमेरु पर &lt;br /&gt;
देखते ही बन रही है अनुपम छटा &lt;br /&gt;
लग रहा है आज मानो अचल पर &lt;br /&gt;
उतर आयी हो फिर से गिरी पर गिरिसुता&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== लाचार कारवाँ ------------दिनेश सिंह  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;फिर से बज गया बिगुल &lt;br /&gt;
गूंज उठी फिर रणभेरी &lt;br /&gt;
अपने अपने रथो में सजकर &lt;br /&gt;
निकल पड़े है फिर महारथी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वही रथी है वही सारथी&lt;br /&gt;
दागदार है सैन्य खड़ी &lt;br /&gt;
 लड़ने को लाचार कारवाँ  &lt;br /&gt;
कोई अन्य विकल्प नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भरे हुये बातो का तरकश &lt;br /&gt;
प्रतिद्वंदी पर करते प्रहार  &lt;br /&gt;
गिर गिरकर वो फिर उठते है  &lt;br /&gt;
नहीं मानते है वो हार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बिछा दिया शतरंजी बाजी  &lt;br /&gt;
ना नया खेल ना चाल नयी &lt;br /&gt;
घुमा फिरा कर वही खेल  &lt;br /&gt;
खेल वही संकल्प वही&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बात बात फिर बात वही&lt;br /&gt;
वही रंग पर ढंग नयी  &lt;br /&gt;
भटके पैदल राही अन्धकार में &lt;br /&gt;
पर रथियों को अहसास नहीं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रण की नीति बनाकर बैठा  &lt;br /&gt;
हर योद्धा शातिर मन वाला  &lt;br /&gt;
कुछ भी कर गुजरेंगे वो &lt;br /&gt;
बस मिले जीत की जय माला&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== खग गीत --------------दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
तू ही स्वतन्त्र एक इस जग में &lt;br /&gt;
कभी इस तरु पर कभी उस तरु पर &lt;br /&gt;
चाहे_डाल कही पर डेरा_या कर ले कहीं बसेरा &lt;br /&gt;
नहीं किसी का भय तुझको_नहीं किसी के बंधन में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गूंजे ध्वनि-हो जग विपिन मनोरम &lt;br /&gt;
बहे मरुत मधुरम मधुरम&lt;br /&gt;
ले गीत गन्ध चहुर्दिक उत्तम&lt;br /&gt;
गा पिक मधुर गान पञ्चम स्वर में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कर नृत्य मुग्ध हो नर्तकप्रिय &lt;br /&gt;
बरस उठे बन जल बादल&lt;br /&gt;
बहे ह्रदय का अन्धकार&lt;br /&gt;
नव प्रभात हो फिर जग में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जागे जग फिर एक बार &lt;br /&gt;
हो हरित नवल मसल का संचार &lt;br /&gt;
हो स्वप्न सजल सुखोन्माद &lt;br /&gt;
फिर हँसे दिशि_अखिल के कण्ठ से&lt;br /&gt;
उठे ध्वनि आनन्द में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उड़ रे पंछी पंख फैलाकर नील गगन में&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-१-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;यह फूलों का देश सलोना &lt;br /&gt;
यहाँ कहाँ काँटों को ठौर &lt;br /&gt;
इस सुगन्धित पवमान में&lt;br /&gt;
जहर घोलता है कौन &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असत्य का बेखौफ रथ&lt;br /&gt;
दौड़ता है वाच्छ्येस्थल में &lt;br /&gt;
बचा अभी सत्य है जो &lt;br /&gt;
भटकता क्यों मरुस्थल में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहते ऊपर स्वर्ग बसा है &lt;br /&gt;
उसका पथ किसने देखा &lt;br /&gt;
मुझे बतावो जरा बन्धू&lt;br /&gt;
कहाँ से आती वह रेखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहीं स्वर्ग है यहीं नरक है &lt;br /&gt;
जहाँ तक मैंने जाना है &lt;br /&gt;
कर्म स्वर्ग अकर्म नरक &lt;br /&gt;
सत पुरुषों का बतलाना है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चलें सभलकर वो है ज्ञानी &lt;br /&gt;
हर पथ पर हर चौराहे में &lt;br /&gt;
बिन सोचे जो राह चले &lt;br /&gt;
वो कहलाते नादानों में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नव भारत के नव शिल्पकार&lt;br /&gt;
हे नयी सदी के सेनानी &lt;br /&gt;
तेरे हुंकारों में तूफान रुका&lt;br /&gt;
हे तरुण देश के अभिमानी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अन्तःद्वन्द -भाग-2-दिनेश सिंह ==&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;हर रोज सुबह उठकर मेरा मन &lt;br /&gt;
एक नई व्यथा लेकर आता &lt;br /&gt;
उर पीड़ा को शब्द बनाकर &lt;br /&gt;
छंदों का वो जाल बिछाता &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
था बैठा लिखने प्रेम गीत &lt;br /&gt;
पर लेखन इतना बाध्य हुआ&lt;br /&gt;
सौभाग्य जगह दुर्भाग्य लिखा &lt;br /&gt;
क्लम बाध्य हुई मै बाध्य हुआ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौभाग्य लिखूं मै किसका &lt;br /&gt;
हे देव जरा तुम बतला दो &lt;br /&gt;
जल रहा विश्व उसका लिख दूँ &lt;br /&gt;
माँ शारद पथ वो दिखला दो &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कही जीर्ण जाती कही भेद भाव &lt;br /&gt;
कहीं ऊँच नीच की लौ उठती हैं &lt;br /&gt;
जल रहें स्वप्न औ उमंगें &lt;br /&gt;
आदर्श धूल में मिलते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जल रही नारियां हाय यहांँ &lt;br /&gt;
केशव आ चिर बचा लो तुम &lt;br /&gt;
ना डोल उठे ये महा मही&lt;br /&gt;
महेश्वर इसे संभालो तुम &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रो रही मही औ महाकाश &lt;br /&gt;
रो रहा देश का अभिमान &lt;br /&gt;
हे देव तेरे दरबार तले&lt;br /&gt;
रो रहा कृषक का स्वाभिमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सकल दिशाएं रक्त रंजित &lt;br /&gt;
मानवता मर पाषाण हुयी &lt;br /&gt;
हिमालय फिर निर्वाक हुआ &lt;br /&gt;
निसहाय बह गंग रही&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-3-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सच था वो सच हो न सका&lt;br /&gt;
यहाँ झूठ को सच होते देखा&lt;br /&gt;
हे देव तेरी इस दुनिया में&lt;br /&gt;
ना जाने क्या क्या देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सच की जीत सदा होती है&lt;br /&gt;
यह झूठ हुआ इस युग में भी&lt;br /&gt;
यह निष्ठूर झूठ करती म्रदंग&lt;br /&gt;
यहाँ सच को मौन खड़े देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओ नीतिकार की नीती देखी&lt;br /&gt;
यहाँ देखा धर्म धुरन्धर को&lt;br /&gt;
औ उनकी कपटी चालों से&lt;br /&gt;
घरों को धु धू जलते देखा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ देखा उन लोगो को भी&lt;br /&gt;
जो आखिर दम तक लड़ते है&lt;br /&gt;
अत्याचारी औ पामर से&lt;br /&gt;
निर्भीक सामना करते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें हार मिले या जीत मिले&lt;br /&gt;
चुप रहना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
वो पंथ देखकर अति दुर्गम&lt;br /&gt;
रुक जाना उनका काम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्म मृत्यु औ यश अपयश&lt;br /&gt;
नहीं उनको कोई रोक सके&lt;br /&gt;
जीना उनका पहला लच्छ नहीं&lt;br /&gt;
मरना आखिर विश्राम नहीं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर हृदय आग हर हृदय जलन&lt;br /&gt;
कब आग बुझेगी ज्ञात नहीं&lt;br /&gt;
यदि रात्रि , नहीं ढली अपवादों की &lt;br /&gt;
फिर कोई नया प्रभात नहीं&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-४-दिनेश सिंह       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खोज रहा था जिसे शुन्य में&lt;br /&gt;
खोजा जिसको गृह बन में&lt;br /&gt;
उसको मै निज उर में पाया&lt;br /&gt;
खोजा जब अपने मन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राग द्वेष छल काम कपट&lt;br /&gt;
यह सब पाया अपने उर में&lt;br /&gt;
ज्ञान की गठरी सर रखकर&lt;br /&gt;
जो बाँट रहा था घर घर में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि कहूँ की मै हूँ पूर्ण-पूर्ण &lt;br /&gt;
तो होगी बिलकुल बात गलत &lt;br /&gt;
किन्तु बचूँ मै अपवादों से&lt;br /&gt;
वो करता हूँ मै कार्य शतत &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अखिल भुवन के कण कण से &lt;br /&gt;
यदि पूछ सको तो पूंछो तुम&lt;br /&gt;
सर्वोत्तम फूल कौन इस जग में &lt;br /&gt;
पावोगे उत्तर एक मानव तुम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईर्ष्या औ ये जलन भावना&lt;br /&gt;
प्रेम ज्योति जलने नहीं देती &lt;br /&gt;
जो घड़ा घ्रणा का भरा हुआ है&lt;br /&gt;
अभिमान हमें झुकने नहीं देता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
म्रग तृष्णा से कैसे निकलें&lt;br /&gt;
ये मोह हमें जाने नहीं देता&lt;br /&gt;
कभी फूटना चाहे ज्ञान का अंकुर&lt;br /&gt;
अज्ञान का तम उसको ढक लेता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हर अधर गरल हर अधर सुधा &lt;br /&gt;
हर मुख पर गरलामृत का प्याला &lt;br /&gt;
यह निर्भर करता है उस पर &lt;br /&gt;
दे रहा है क्या वो देने वाला&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अन्तःद्वन्द -भाग-५-दिनेश सिंह &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर लिखने लगा खीच खीचकर &lt;br /&gt;
वही कल्पित जीवन की रेखा &lt;br /&gt;
फिर वही कल्पना खग पुष्पों की &lt;br /&gt;
निज व्यथा हृदय का फिर देखा &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गा गाकर करुणा कलित गीत यदि&lt;br /&gt;
सौ टुकड़े उर के कर न सका &lt;br /&gt;
तेरे गीतों में फिर वो ताप कहाँ &lt;br /&gt;
किसी ह्रदय में आग लगा न सका &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन करुण कल्पिता गीतों को &lt;br /&gt;
कोई सुनने वाला यहाँ कहाँ &lt;br /&gt;
मन और विकल हो उठता है &lt;br /&gt;
कम होता है पारावार कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चल चुका है अब तक अर्ध उम्र &lt;br /&gt;
शांतप शोक का भार लिए &lt;br /&gt;
नहीं देव बनाया सुधा कोई &lt;br /&gt;
जिसे पीकर मन की दाह बुझे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब नहीं शब्द का ज्ञान तुझे &lt;br /&gt;
तो क्यों फैलाता है शब्द जाल &lt;br /&gt;
बिन उपमा औ बिन अलंकार &lt;br /&gt;
फिर कौन कहेगा काव्यकार &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ रस तो तुम लावो अपनी&lt;br /&gt;
ललित कलित कविताओं में &lt;br /&gt;
कुछ काव्य सुगन्धित फैलावो &lt;br /&gt;
इन बहती काव्य हवाओं में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ काव्य लिखो सु-मधुर सु-राग &lt;br /&gt;
छवि प्रतिबिम्बित हो उत्तम सन्देश &lt;br /&gt;
ले बहे समीरण उस दिशि में &lt;br /&gt;
हो जहाँ जहाँ वर्जित प्रदेश&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;     &lt;br /&gt;
अन्तःद्वन्द -भाग-६-दिनेश सिंह&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो भरा हुआ था निर्मल जल &lt;br /&gt;
वो सूख गया है इस बन से &lt;br /&gt;
क्या कली कोई खिल सकती है &lt;br /&gt;
किसी उजड़े से निर्जन बन में&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस निठुर और निर्जन बन को &lt;br /&gt;
मत सींच इसे तू बन माली &lt;br /&gt;
यहाँ कलियाँ खिलने से पहले &lt;br /&gt;
कलि की आहुति दे दी जाती &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ उर उर में चाहत दृग-दृग &lt;br /&gt;
हर बन उपवन में चाँद खिले &lt;br /&gt;
क्या बिना चांदनी के जग से &lt;br /&gt;
नभ भूतल का अंधियार मिटे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तरु खड़े हो कितने भी बन में &lt;br /&gt;
बिन कलियों के वो सौम्य कहाँ &lt;br /&gt;
बिना चाँदनी अहह चाँद &lt;br /&gt;
इस जग में तेरा अस्तित्त्व कहाँ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन के अन्तः से उठे भाव जो &lt;br /&gt;
ये कलिके तुझको अर्प किया &lt;br /&gt;
एक अन्तः आकुल आह उठी&lt;br /&gt;
यह दाह हृदय की सह न सका&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:दिनेश सिंह]]&lt;br /&gt;
[[Category:कविता]][[Category:हिन्दी कविता]][[Category:काव्य कोश]] [[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सुनहरा ऋतू बसंत .......दिनेश सिंह. ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;दूर दूर तक फैली खेतो में हरियाली &lt;br /&gt;
कितनी सुंदर वसुधा लगती &lt;br /&gt;
रँग रँग के फूल खिले है&lt;br /&gt;
रंग बिरंगी डाली डाली &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
मडरायें भवरें उन पर&lt;br /&gt;
भांति भांति की तितली उडती &lt;br /&gt;
रस प्रेम सुधा वे पान करें&lt;br /&gt;
इस वृंतों से उस वृंतों पर&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
मधुरम मधुरम पवन बह रही&lt;br /&gt;
भीनी भीनी गंध लिए &lt;br /&gt;
बज रही घंटियाँ बैलो की&lt;br /&gt;
गा रही कोकिला मतवाली &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
वर्षा ऋतू बीती-ऋतू शरद गयी&lt;br /&gt;
बसन्त ऋतू है मुसकायी &lt;br /&gt;
चहक रहीं चिड़ियाँ, तरु पर&lt;br /&gt;
भ्रू-भंग अंग-चंचल कलियाँ हरषाई&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
लहलाते खेतो को देख कृषक&lt;br /&gt;
यु नाच उठे मन मोर द्रंग&lt;br /&gt;
बादल को देख मोरनी ज्यो&lt;br /&gt;
हर्षित उर कर- करती म्रदंग&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
आ गयी आम्र तरु में बौरें&lt;br /&gt;
आ रही है गेहूँ पर बाली &lt;br /&gt;
सीना ताने-तरु चना खड़ा है&lt;br /&gt;
इठलाती अरहर रानी &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
फूली पीली सरसों के बिच&lt;br /&gt;
यु झाँके धरती अम्बर को &lt;br /&gt;
प्रथम द्रश्य ज्यो दुलहिन देखे&lt;br /&gt;
अपने प्रियवर प्रियतम को &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
मीठे मीठे बेर पक गये&lt;br /&gt;
इस डाली के उस गुच्छे पर &lt;br /&gt;
सुमनों से रस पी पी कर&lt;br /&gt;
मधुमक्खी जाती छत्तो पर &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
उर छील-छील,लील-लील,सुषमा अति&lt;br /&gt;
स्वरमयी दिश स्वर्गिक सुन्दरता सर्ग &lt;br /&gt;
उदघोषित करता प्रणय-गान &lt;br /&gt;
आ गया सुनहरा ऋतू बसंत&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Dinesh Singh</name></author>
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