<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://bharatdiscovery.org/w/api.php?action=feedcontributions&amp;feedformat=atom&amp;user=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF</id>
	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://bharatdiscovery.org/w/api.php?action=feedcontributions&amp;feedformat=atom&amp;user=%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF"/>
	<updated>2026-07-14T05:27:32Z</updated>
	<subtitle>सदस्य द्वारा योगदान</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.41.1</generator>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A7%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B_%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244902</id>
		<title>आर्कटिक वेधशाला से कुछ नोट्स -अजेय</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A7%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B_%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244902"/>
		<updated>2012-01-10T09:32:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;अजेय: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{| style=&amp;quot;background:transparent; float:right&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा कविता&lt;br /&gt;
|चित्र=Ajey.JPG&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=&lt;br /&gt;
|कवि =[[अजेय]] &lt;br /&gt;
|जन्म= &lt;br /&gt;
|जन्म स्थान=(सुमनम, केलंग, [[हिमाचल प्रदेश]]) &lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= &lt;br /&gt;
|यू-ट्यूब लिंक=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://ajeyklg.blogspot.com/ आधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #a7d7f9; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{|  align=&amp;quot;center&amp;quot;&lt;br /&gt;
! अजेय् की रचनाएँ&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 250px; overflow:auto; overflow-x: hidden; width:99%&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{अजेय की रचनाएँ}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''सुबह होगी और दिन भर बसंत रहेगा'''&lt;br /&gt;
             9.&lt;br /&gt;
           पौ फट रही है&lt;br /&gt;
             क्षितिज बैंगनी हो गया है&lt;br /&gt;
             इस लम्बी सर्दी के बाद जो सूरज उगेगा&lt;br /&gt;
             कम से कम चार माह नहीं डूबेगा&lt;br /&gt;
             मौत सी ठंडी इस सफेदी को&lt;br /&gt;
             इन्द्रधनुषी रंग बाँटेगा&lt;br /&gt;
             परिंदे और लोमड़ियाँ सफेद पोशाकें उतार&lt;br /&gt;
             मनपसंद रंगों में धमा चौकड़ी मचाएंगे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
             10.     &lt;br /&gt;
          बर्फ पर कोई सिंदूर छिड़क गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
28.     &lt;br /&gt;
सारा खेल वक्त का है&lt;br /&gt;
वक्त सूरज तय करता है&lt;br /&gt;
सूरज हवाएँ पैदा करता है&lt;br /&gt;
हवा समुद्र को छेड़ता है&lt;br /&gt;
समुद्र ने बर्फ को तोड़ना शुरू कर दिया है&lt;br /&gt;
बर्फ पिघलते ही हरी काई के फीते तैरने लग जाएगें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
29.     &lt;br /&gt;
यह हलचल ही है&lt;br /&gt;
जहाँ जीवन दिखता है&lt;br /&gt;
वह एक लहर थी&lt;br /&gt;
जो मछलियों को तट तक बहा लाई&lt;br /&gt;
और एक लहर ही होगी&lt;br /&gt;
जो उन्हें सही सलामत घर वापस ले जाएगी ।&lt;br /&gt;
दूर-दूर तक सूँध लेने वाले शिकारी&lt;br /&gt;
दूर दूर तक सुन लेने वाले शिकार&lt;br /&gt;
गंधों और आहटों का द्वन्द्व&lt;br /&gt;
इंद्रियों का तनाव पूर्ण मुकाबला चलेगा&lt;br /&gt;
दूर-दूर तक यह जगह एक शिकारगाह बन जाएगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
30.&lt;br /&gt;
चट्टानों पर कोंपले निकल आएंगी&lt;br /&gt;
तेज़ हवा की मार सहती हुई&lt;br /&gt;
धीरे-धीरे धरती के साथ भूरी होती लोमड़ी&lt;br /&gt;
झुंड से बिछडे़ चूज़ों को खाना शुरू करेगी&lt;br /&gt;
चुराए गए अंडों से मांद भर लेगी&lt;br /&gt;
बहुत छोटा है उसके लिए&lt;br /&gt;
हारवेस्टिंग का यह मौसम/ फिर भी&lt;br /&gt;
आर्कटिक में भुखमरी नही है!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    '''तुम्हारा नहीं होना'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      25.   &lt;br /&gt;
      इस गुनगुनी धूपवाली सुबह&lt;br /&gt;
       इस ठाठदार ‘स्नो रिज़ॉर्ट’ में&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना भी&lt;br /&gt;
       एक विलास है&lt;br /&gt;
       रोयेंदार कम्बल की सलवटों डूबा हुआ&lt;br /&gt;
       टटोलती रहती है जिसमें मेरी उंगलियां&lt;br /&gt;
       उन खास चीज़ों को&lt;br /&gt;
       रात भर साथ रहते हुए भी जो&lt;br /&gt;
       सुबह अकसर नदारद होती है -&lt;br /&gt;
      एक सुविधाजनक रिमोट बटन&lt;br /&gt;
       एक सुकूनबख्श  सिग्रेट लाईटर&lt;br /&gt;
       तुम्हारी यादों को दर्ज करने वाली&lt;br /&gt;
       एक मुलायम पेंसिल&lt;br /&gt;
       और जो पड़ी रहतीं हैं&lt;br /&gt;
       सटी हुई आपस में&lt;br /&gt;
       फिर भी अलग-अलग&lt;br /&gt;
       छिटके हुए गुमशुदा लगभग&lt;br /&gt;
       कहाँ हो तुम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
        31.&lt;br /&gt;
      आज मैं उन तमाम चीज़ों के सैम्पल लूँगा&lt;br /&gt;
       दिन निकलते ही जो&lt;br /&gt;
       बरफ के क्रिस्टलों के बीच&lt;br /&gt;
       बढ़ते दबाव और दुःख की उम्र बताना शुरू कर देती हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       एक क्लोरोफिल की जिजीविषा  में छिपी&lt;br /&gt;
       मिट्टी के टुकड़ों की खोई हुई महक जाँचूँगा&lt;br /&gt;
       और यह पता लगाने की कोशिश करूँगा&lt;br /&gt;
       कि क्या तुम्हारे नहीं होने से ही&lt;br /&gt;
       शुरू कर दिया था एक दिन&lt;br /&gt;
       घुलना&lt;br /&gt;
       उस भरी पूरी हरियाली ने&lt;br /&gt;
       लहरों ने, हवा ने&lt;br /&gt;
       और मिट्टी ने&lt;br /&gt;
       खो जाना&lt;br /&gt;
       पानी में&lt;br /&gt;
       और ठोस हो जाना?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      32. &lt;br /&gt;
      दोपहर तक&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       आर्द्रता के नहीं होने में तबदील हो गया है&lt;br /&gt;
       कि द्रवित और गतिशील अंतःकरण के बावजूद&lt;br /&gt;
       यहाँ हर मौसम का है एक घनीभूत संस्तर&lt;br /&gt;
       रूखा, कड़ा, ठहरा हुआ&lt;br /&gt;
       एक मरियल सूरज जिसके क्षितिज में&lt;br /&gt;
       अपनी पूरी ताकत से चमका है दिन भर&lt;br /&gt;
       और शेष हो गया है&lt;br /&gt;
       बिना किसी को पिघलाए&lt;br /&gt;
       बेहूदा कोहरे की संपीड़ित परतों में।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       33.&lt;br /&gt;
      सांझ ढलने पर तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       एक अलग ही भाव से शुक्र तारे का झिपझिपाना है&lt;br /&gt;
       मेरे एकान्त को चिढ़ाते हुए&lt;br /&gt;
       पृथ्वी के अन्तिम छोर पर&lt;br /&gt;
       इस विराट टेलीस्कोप के अतिरिक्त&lt;br /&gt;
       तुम्हें नाप लेने के और भी उपकरण हैं मेरे पास&lt;br /&gt;
       एक से एक शक्तिशाली&lt;br /&gt;
       छूट ही जाती है फिर भी&lt;br /&gt;
       कोई एक अपरिहार्य रीडिंग&lt;br /&gt;
       व्यर्थ हो जाता है दिन भर जुटाए गए आंकड़ों का परिश्रम&lt;br /&gt;
       गड़बड़ा जाता है सारा समीकरण&lt;br /&gt;
       रोश्नदान के बाहर तैरती हुई&lt;br /&gt;
       अंधेरी हवाओं के सुपुर्द कर आता हूँ चुपचाप&lt;br /&gt;
       अपने संभावित आविष्कार की हज़ारों चिन्दियाँ।&lt;br /&gt;
      &lt;br /&gt;
       36.   &lt;br /&gt;
     ‘फुली लोडेड’ हो कर भी, कभी&lt;br /&gt;
       शामिल हो जाती है जीवन में&lt;br /&gt;
       ऐसी अवशता&lt;br /&gt;
       और आकर अगल-बगल बैठ जाते हैं&lt;br /&gt;
       अनिश्च्य और अभाव&lt;br /&gt;
       मेरी देह से लिपट-लिपट जाती इस कातर नीरवता में&lt;br /&gt;
       दूर दूर तक स्थूल स्पर्श  का आभास न होना&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       दरअसल&lt;br /&gt;
       तमाम छूटी हुई गणनाओं से पहले&lt;br /&gt;
       तुम्हें खोज पाना है अपने भीतर&lt;br /&gt;
       अपने ही भीतर&lt;br /&gt;
       आह&lt;br /&gt;
       तुम!&lt;br /&gt;
      एक शाश्वत नृत्य इसी बासी पृथ्वी पर&lt;br /&gt;
       &lt;br /&gt;
        49.  &lt;br /&gt;
      क्या तम्हें पता था&lt;br /&gt;
       झूमते रहते हैं देर रात तक&lt;br /&gt;
       खूब सूरत ‘‘नॉर्दन लाईट्स’’&lt;br /&gt;
      मटमैले ध्रुवीय आसमान पर&lt;br /&gt;
       चलता रहता है उत्सव&lt;br /&gt;
       शून्य से तीस डिग्री नीचे भी?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      इतनी सुन्दर है प्रकृति&lt;br /&gt;
       और फैली हुई&lt;br /&gt;
       क्षण-क्षण अनगिनत रूपाकारों में&lt;br /&gt;
       और भी फैलती हुई&lt;br /&gt;
       अद्भुत है यह सब&lt;br /&gt;
       बड़ा ही दुर्लभ&lt;br /&gt;
       बाहर निकल कर देखा है कभी?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      50.    &lt;br /&gt;
      खोज पाता होगा सदियों में कोई एक&lt;br /&gt;
       इस गुप्त उत्सव का रहस्य&lt;br /&gt;
       जो चल रहा है लगातार&lt;br /&gt;
       जो सुन नहीं पाते हम अपने ही शोर में&lt;br /&gt;
       जो देख नहीं पाते हम अपने ही सपनों के कारण&lt;br /&gt;
       आह !&lt;br /&gt;
      क्या अनुभव है&lt;br /&gt;
       जागते हुए&lt;br /&gt;
       खुले में&lt;br /&gt;
       सन्नाटे में यह सब देख जाना।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       55.   &lt;br /&gt;
      इस तरह से सिकुड़े हुए थे हम&lt;br /&gt;
       कितने दयनीय&lt;br /&gt;
       परत दर परत&lt;br /&gt;
       बरफ की तरह&lt;br /&gt;
       अपने दबावों में दबे हुए&lt;br /&gt;
       बिछुड़े हुए&lt;br /&gt;
       अपने-अपने गहरे खन्दकों की&lt;br /&gt;
       अंधेरी भूल भूलैया में&lt;br /&gt;
       दुबके, अकड़े हुए&lt;br /&gt;
       जहाँ नरक है, नीचे&lt;br /&gt;
       वहीं से नापनी थी हम सब को&lt;br /&gt;
       नए नक्षत्रों की दूरियाँ&lt;br /&gt;
       खोजनी थी नई दुनिया&lt;br /&gt;
       &lt;br /&gt;
       58. &lt;br /&gt;
      अरे , कौन रुका रहना चाहता था ?&lt;br /&gt;
      कौन     ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      63.     &lt;br /&gt;
      धूप सी बरसती थी&lt;br /&gt;
       संतप्त हहराती आकांक्षा&lt;br /&gt;
       भाप सा उड़ जाता था&lt;br /&gt;
       इस महान पृथ्वी का तरल सौन्दर्य&lt;br /&gt;
       कि कूच कर जाना था ऐसे ही एक दिन&lt;br /&gt;
       मुझे&lt;br /&gt;
       तुम्हें&lt;br /&gt;
       हम सब को&lt;br /&gt;
       सहस्त्रों आकाश  गंगाओं की तलाश में&lt;br /&gt;
       इस वेधशाला से तेरह अरब प्रकाश वर्ष दूर&lt;br /&gt;
       जैसे ही अवसर मिले।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       64.  &lt;br /&gt;
      कौन रूका रहना चाहता था&lt;br /&gt;
       इस बासी पृथ्वी पर?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      75.     &lt;br /&gt;
      लेकिन रुको दोस्त&lt;br /&gt;
       अपनी युटोपिया पर तुम्हारा पूरा पूरा हक है&lt;br /&gt;
       लेकिन माफ करना,&lt;br /&gt;
      एक छोटी सी छूट लेना चाहता हूँ  मैं&lt;br /&gt;
       यहां खलल डालते हुए&lt;br /&gt;
       क्या तुम अपने इस अत्याधुनिक ‘डिवाईस’ से&lt;br /&gt;
       इस बीहड़ आर्कटिक के काले आसमान पर&lt;br /&gt;
       प्रक्षेपित कर सकते हो मुझे ?&lt;br /&gt;
       उन सुन्दर ध्रुवीय  प्रकाशों की पृष्टभूमि पर&lt;br /&gt;
       बार-बार उभारना चाहता हूँ&lt;br /&gt;
       अपनी प्रतिछाया&lt;br /&gt;
       बादल पर&lt;br /&gt;
       बिजली और इन्द्रधनुषों की तरह&lt;br /&gt;
       नाचना चाहता हूँ&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
       76.   &lt;br /&gt;
      ओ वेगवान तूफान&lt;br /&gt;
       ओ स्थिर जलमग्न हिमखंड !&lt;br /&gt;
      ओ उफनते समुद्र&lt;br /&gt;
       ओ खामोश  सितारो !&lt;br /&gt;
     &lt;br /&gt;
      ओ&lt;br /&gt;
       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       मेरे प्रिय साजिन्दो !!&lt;br /&gt;
      आज की रात तुम खूब बजाना&lt;br /&gt;
       दिल से&lt;br /&gt;
       कि रूपान्तरित हो जाना है हम सब को&lt;br /&gt;
       नाचते हुए&lt;br /&gt;
       एक तरोताज़ा स्वर्ग में&lt;br /&gt;
       इसी बासी पृथ्वी पर।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1995- 2006&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{समकालीन कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:अजेय]][[Category:कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्य साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:काव्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>अजेय</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A7%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B_%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244901</id>
		<title>आर्कटिक वेधशाला से कुछ नोट्स -अजेय</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A7%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B_%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244901"/>
		<updated>2012-01-10T09:25:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;अजेय: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;| style=&amp;quot;background:transparent; float:right&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा कविता&lt;br /&gt;
|चित्र=Ajey.JPG&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=[[चित्र:उदाहरण.jpg]]&lt;br /&gt;
|कवि =[[अजेय]] &lt;br /&gt;
|जन्म= &lt;br /&gt;
|जन्म स्थान=(सुमनम, केलंग, [[हिमाचल प्रदेश]]) &lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= &lt;br /&gt;
|यू-ट्यूब लिंक=[[चित्र:उदाहरण.jpg]][[चित्र:उदाहरण.jpg]]&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://ajeyklg.blogspot.com/ आधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #a7d7f9; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{|  align=&amp;quot;center&amp;quot;&lt;br /&gt;
! अजेय् की रचनाएँ&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 250px; overflow:auto; overflow-x: hidden; width:99%&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{अजेय की रचनाएँ}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''सुबह होगी और दिन भर बसंत रहेगा'''&lt;br /&gt;
             9.&lt;br /&gt;
           पौ फट रही है&lt;br /&gt;
             क्षितिज बैंगनी हो गया है&lt;br /&gt;
             इस लम्बी सर्दी के बाद जो सूरज उगेगा&lt;br /&gt;
             कम से कम चार माह नहीं डूबेगा&lt;br /&gt;
             मौत सी ठंडी इस सफेदी को&lt;br /&gt;
             इन्द्रधनुषी रंग बाँटेगा&lt;br /&gt;
             परिंदे और लोमड़ियाँ सफेद पोशाकें उतार&lt;br /&gt;
             मनपसंद रंगों में धमा चौकड़ी मचाएंगे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
             10.     &lt;br /&gt;
          बर्फ पर कोई सिंदूर छिड़क गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
28.     &lt;br /&gt;
सारा खेल वक्त का है&lt;br /&gt;
वक्त सूरज तय करता है&lt;br /&gt;
सूरज हवाएँ पैदा करता है&lt;br /&gt;
हवा समुद्र को छेड़ता है&lt;br /&gt;
समुद्र ने बर्फ को तोड़ना शुरू कर दिया है&lt;br /&gt;
बर्फ पिघलते ही हरी काई के फीते तैरने लग जाएगें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
29.     &lt;br /&gt;
यह हलचल ही है&lt;br /&gt;
जहाँ जीवन दिखता है&lt;br /&gt;
वह एक लहर थी&lt;br /&gt;
जो मछलियों को तट तक बहा लाई&lt;br /&gt;
और एक लहर ही होगी&lt;br /&gt;
जो उन्हें सही सलामत घर वापस ले जाएगी ।&lt;br /&gt;
दूर-दूर तक सूँध लेने वाले शिकारी&lt;br /&gt;
दूर दूर तक सुन लेने वाले शिकार&lt;br /&gt;
गंधों और आहटों का द्वन्द्व&lt;br /&gt;
इंद्रियों का तनाव पूर्ण मुकाबला चलेगा&lt;br /&gt;
दूर-दूर तक यह जगह एक शिकारगाह बन जाएगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
30.&lt;br /&gt;
चट्टानों पर कोंपले निकल आएंगी&lt;br /&gt;
तेज़ हवा की मार सहती हुई&lt;br /&gt;
धीरे-धीरे धरती के साथ भूरी होती लोमड़ी&lt;br /&gt;
झुंड से बिछडे़ चूज़ों को खाना शुरू करेगी&lt;br /&gt;
चुराए गए अंडों से मांद भर लेगी&lt;br /&gt;
बहुत छोटा है उसके लिए&lt;br /&gt;
हारवेस्टिंग का यह मौसम/ फिर भी&lt;br /&gt;
आर्कटिक में भुखमरी नही है!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    '''तुम्हारा नहीं होना'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      25.   &lt;br /&gt;
      इस गुनगुनी धूपवाली सुबह&lt;br /&gt;
       इस ठाठदार ‘स्नो रिज़ॉर्ट’ में&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना भी&lt;br /&gt;
       एक विलास है&lt;br /&gt;
       रोयेंदार कम्बल की सलवटों डूबा हुआ&lt;br /&gt;
       टटोलती रहती है जिसमें मेरी उंगलियां&lt;br /&gt;
       उन खास चीज़ों को&lt;br /&gt;
       रात भर साथ रहते हुए भी जो&lt;br /&gt;
       सुबह अकसर नदारद होती है -&lt;br /&gt;
      एक सुविधाजनक रिमोट बटन&lt;br /&gt;
       एक सुकूनबख्श  सिग्रेट लाईटर&lt;br /&gt;
       तुम्हारी यादों को दर्ज करने वाली&lt;br /&gt;
       एक मुलायम पेंसिल&lt;br /&gt;
       और जो पड़ी रहतीं हैं&lt;br /&gt;
       सटी हुई आपस में&lt;br /&gt;
       फिर भी अलग-अलग&lt;br /&gt;
       छिटके हुए गुमशुदा लगभग&lt;br /&gt;
       कहाँ हो तुम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
        31.&lt;br /&gt;
      आज मैं उन तमाम चीज़ों के सैम्पल लूँगा&lt;br /&gt;
       दिन निकलते ही जो&lt;br /&gt;
       बरफ के क्रिस्टलों के बीच&lt;br /&gt;
       बढ़ते दबाव और दुःख की उम्र बताना शुरू कर देती हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       एक क्लोरोफिल की जिजीविषा  में छिपी&lt;br /&gt;
       मिट्टी के टुकड़ों की खोई हुई महक जाँचूँगा&lt;br /&gt;
       और यह पता लगाने की कोशिश करूँगा&lt;br /&gt;
       कि क्या तुम्हारे नहीं होने से ही&lt;br /&gt;
       शुरू कर दिया था एक दिन&lt;br /&gt;
       घुलना&lt;br /&gt;
       उस भरी पूरी हरियाली ने&lt;br /&gt;
       लहरों ने, हवा ने&lt;br /&gt;
       और मिट्टी ने&lt;br /&gt;
       खो जाना&lt;br /&gt;
       पानी में&lt;br /&gt;
       और ठोस हो जाना?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      32. &lt;br /&gt;
      दोपहर तक&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       आर्द्रता के नहीं होने में तबदील हो गया है&lt;br /&gt;
       कि द्रवित और गतिशील अंतःकरण के बावजूद&lt;br /&gt;
       यहाँ हर मौसम का है एक घनीभूत संस्तर&lt;br /&gt;
       रूखा, कड़ा, ठहरा हुआ&lt;br /&gt;
       एक मरियल सूरज जिसके क्षितिज में&lt;br /&gt;
       अपनी पूरी ताकत से चमका है दिन भर&lt;br /&gt;
       और शेष हो गया है&lt;br /&gt;
       बिना किसी को पिघलाए&lt;br /&gt;
       बेहूदा कोहरे की संपीड़ित परतों में।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       33.&lt;br /&gt;
      सांझ ढलने पर तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       एक अलग ही भाव से शुक्र तारे का झिपझिपाना है&lt;br /&gt;
       मेरे एकान्त को चिढ़ाते हुए&lt;br /&gt;
       पृथ्वी के अन्तिम छोर पर&lt;br /&gt;
       इस विराट टेलीस्कोप के अतिरिक्त&lt;br /&gt;
       तुम्हें नाप लेने के और भी उपकरण हैं मेरे पास&lt;br /&gt;
       एक से एक शक्तिशाली&lt;br /&gt;
       छूट ही जाती है फिर भी&lt;br /&gt;
       कोई एक अपरिहार्य रीडिंग&lt;br /&gt;
       व्यर्थ हो जाता है दिन भर जुटाए गए आंकड़ों का परिश्रम&lt;br /&gt;
       गड़बड़ा जाता है सारा समीकरण&lt;br /&gt;
       रोश्नदान के बाहर तैरती हुई&lt;br /&gt;
       अंधेरी हवाओं के सुपुर्द कर आता हूँ चुपचाप&lt;br /&gt;
       अपने संभावित आविष्कार की हज़ारों चिन्दियाँ।&lt;br /&gt;
      &lt;br /&gt;
       36.   &lt;br /&gt;
     ‘फुली लोडेड’ हो कर भी, कभी&lt;br /&gt;
       शामिल हो जाती है जीवन में&lt;br /&gt;
       ऐसी अवशता&lt;br /&gt;
       और आकर अगल-बगल बैठ जाते हैं&lt;br /&gt;
       अनिश्च्य और अभाव&lt;br /&gt;
       मेरी देह से लिपट-लिपट जाती इस कातर नीरवता में&lt;br /&gt;
       दूर दूर तक स्थूल स्पर्श  का आभास न होना&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       दरअसल&lt;br /&gt;
       तमाम छूटी हुई गणनाओं से पहले&lt;br /&gt;
       तुम्हें खोज पाना है अपने भीतर&lt;br /&gt;
       अपने ही भीतर&lt;br /&gt;
       आह&lt;br /&gt;
       तुम!&lt;br /&gt;
      एक शाश्वत नृत्य इसी बासी पृथ्वी पर&lt;br /&gt;
       &lt;br /&gt;
        49.  &lt;br /&gt;
      क्या तम्हें पता था&lt;br /&gt;
       झूमते रहते हैं देर रात तक&lt;br /&gt;
       खूब सूरत ‘‘नॉर्दन लाईट्स’’&lt;br /&gt;
      मटमैले ध्रुवीय आसमान पर&lt;br /&gt;
       चलता रहता है उत्सव&lt;br /&gt;
       शून्य से तीस डिग्री नीचे भी?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      इतनी सुन्दर है प्रकृति&lt;br /&gt;
       और फैली हुई&lt;br /&gt;
       क्षण-क्षण अनगिनत रूपाकारों में&lt;br /&gt;
       और भी फैलती हुई&lt;br /&gt;
       अद्भुत है यह सब&lt;br /&gt;
       बड़ा ही दुर्लभ&lt;br /&gt;
       बाहर निकल कर देखा है कभी?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      50.    &lt;br /&gt;
      खोज पाता होगा सदियों में कोई एक&lt;br /&gt;
       इस गुप्त उत्सव का रहस्य&lt;br /&gt;
       जो चल रहा है लगातार&lt;br /&gt;
       जो सुन नहीं पाते हम अपने ही शोर में&lt;br /&gt;
       जो देख नहीं पाते हम अपने ही सपनों के कारण&lt;br /&gt;
       आह !&lt;br /&gt;
      क्या अनुभव है&lt;br /&gt;
       जागते हुए&lt;br /&gt;
       खुले में&lt;br /&gt;
       सन्नाटे में यह सब देख जाना।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       55.   &lt;br /&gt;
      इस तरह से सिकुड़े हुए थे हम&lt;br /&gt;
       कितने दयनीय&lt;br /&gt;
       परत दर परत&lt;br /&gt;
       बरफ की तरह&lt;br /&gt;
       अपने दबावों में दबे हुए&lt;br /&gt;
       बिछुड़े हुए&lt;br /&gt;
       अपने-अपने गहरे खन्दकों की&lt;br /&gt;
       अंधेरी भूल भूलैया में&lt;br /&gt;
       दुबके, अकड़े हुए&lt;br /&gt;
       जहाँ नरक है, नीचे&lt;br /&gt;
       वहीं से नापनी थी हम सब को&lt;br /&gt;
       नए नक्षत्रों की दूरियाँ&lt;br /&gt;
       खोजनी थी नई दुनिया&lt;br /&gt;
       &lt;br /&gt;
       58. &lt;br /&gt;
      अरे , कौन रुका रहना चाहता था ?&lt;br /&gt;
      कौन     ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      63.     &lt;br /&gt;
      धूप सी बरसती थी&lt;br /&gt;
       संतप्त हहराती आकांक्षा&lt;br /&gt;
       भाप सा उड़ जाता था&lt;br /&gt;
       इस महान पृथ्वी का तरल सौन्दर्य&lt;br /&gt;
       कि कूच कर जाना था ऐसे ही एक दिन&lt;br /&gt;
       मुझे&lt;br /&gt;
       तुम्हें&lt;br /&gt;
       हम सब को&lt;br /&gt;
       सहस्त्रों आकाश  गंगाओं की तलाश में&lt;br /&gt;
       इस वेधशाला से तेरह अरब प्रकाश वर्ष दूर&lt;br /&gt;
       जैसे ही अवसर मिले।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       64.  &lt;br /&gt;
      कौन रूका रहना चाहता था&lt;br /&gt;
       इस बासी पृथ्वी पर?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      75.     &lt;br /&gt;
      लेकिन रुको दोस्त&lt;br /&gt;
       अपनी युटोपिया पर तुम्हारा पूरा पूरा हक है&lt;br /&gt;
       लेकिन माफ करना,&lt;br /&gt;
      एक छोटी सी छूट लेना चाहता हूँ  मैं&lt;br /&gt;
       यहां खलल डालते हुए&lt;br /&gt;
       क्या तुम अपने इस अत्याधुनिक ‘डिवाईस’ से&lt;br /&gt;
       इस बीहड़ आर्कटिक के काले आसमान पर&lt;br /&gt;
       प्रक्षेपित कर सकते हो मुझे ?&lt;br /&gt;
       उन सुन्दर ध्रुवीय  प्रकाशों की पृष्टभूमि पर&lt;br /&gt;
       बार-बार उभारना चाहता हूँ&lt;br /&gt;
       अपनी प्रतिछाया&lt;br /&gt;
       बादल पर&lt;br /&gt;
       बिजली और इन्द्रधनुषों की तरह&lt;br /&gt;
       नाचना चाहता हूँ&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
       76.   &lt;br /&gt;
      ओ वेगवान तूफान&lt;br /&gt;
       ओ स्थिर जलमग्न हिमखंड !&lt;br /&gt;
      ओ उफनते समुद्र&lt;br /&gt;
       ओ खामोश  सितारो !&lt;br /&gt;
     &lt;br /&gt;
      ओ&lt;br /&gt;
       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       मेरे प्रिय साजिन्दो !!&lt;br /&gt;
      आज की रात तुम खूब बजाना&lt;br /&gt;
       दिल से&lt;br /&gt;
       कि रूपान्तरित हो जाना है हम सब को&lt;br /&gt;
       नाचते हुए&lt;br /&gt;
       एक तरोताज़ा स्वर्ग में&lt;br /&gt;
       इसी बासी पृथ्वी पर।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1995- 2006&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{समकालीन कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:अजेय]][[Category:कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्य साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:काव्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>अजेय</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%8F%E0%A4%95_%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7_%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%BE_%E0%A4%A2%E0%A5%82%E0%A4%81%E0%A4%A2_%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE_%E0%A4%B9%E0%A5%88_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244898</id>
		<title>एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है -अजेय</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%8F%E0%A4%95_%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7_%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%BE_%E0%A4%A2%E0%A5%82%E0%A4%81%E0%A4%A2_%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE_%E0%A4%B9%E0%A5%88_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244898"/>
		<updated>2012-01-10T08:24:46Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;अजेय: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{| style=&amp;quot;background:transparent; float:right&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा कविता&lt;br /&gt;
|चित्र=Ajey.JPG&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=&lt;br /&gt;
|कवि =[[अजेय]] &lt;br /&gt;
|जन्म= &lt;br /&gt;
|जन्म स्थान=(सुमनम, केलंग, [[हिमाचल प्रदेश]]) &lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= &lt;br /&gt;
|यू-ट्यूब लिंक=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://ajeyklg.blogspot.com/ आधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #a7d7f9; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{|  align=&amp;quot;center&amp;quot;&lt;br /&gt;
! अजेय् की रचनाएँ&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 250px; overflow:auto; overflow-x: hidden; width:99%&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{अजेय की रचनाएँ}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
								&lt;br /&gt;
धुर हिमालय में यह एक भीषण जनवरी है &lt;br /&gt;
आधी रात से आगे का कोई वक़्त है &lt;br /&gt;
आधा घुसा हुआ बैठा हूँ &lt;br /&gt;
चादर और कम्बल और् रज़ाई  में &lt;br /&gt;
सर पर कनटोप और दस्ताने हाथ में &lt;br /&gt;
एक नंगा कंप्यूटर हैंग हो गया है &lt;br /&gt;
जब कि एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है . &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तमाम कविताएं पहुँच रहीं हैं मुझ तक हवा में &lt;br /&gt;
कविता कोरवा की पहाड़ियों से &lt;br /&gt;
कविता चम्बल की घाटियों से &lt;br /&gt;
भीम बैठका की गुफा से कविता &lt;br /&gt;
स्वात और दज़ला से कविता &lt;br /&gt;
कविता कर्गिल और पुलवामा से &lt;br /&gt;
मरयुल , जङ-थङ , अमदो और खम से &lt;br /&gt;
कविता उन सभी देशों से &lt;br /&gt;
जहाँ मैं जा नहीं पाया&lt;br /&gt;
जबकि मेरे अपने ही देश थे वे. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कविताओं के उस पार एशिया की धूसर पीठ है&lt;br /&gt;
कविताओं के इस पार एक हरा भरा गोण्ड्वाना है &lt;br /&gt;
कविताओं के टीथिस मे ज़बर्दस्त खलबली है &lt;br /&gt;
कविताओं की थार पर खेजड़ी की पत्तियाँ हैं &lt;br /&gt;
कविताओं की फाट पर ब्यूँस की टहनियाँ हैं &lt;br /&gt;
कविताओं के खड्ड में बल्ह के लबाणे हैं&lt;br /&gt;
कविताओं की धूल में दुमका की खदाने हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कविता का कलरव भरतपुर के घना में &lt;br /&gt;
कविता का अवसाद पातालकोट की खोह में &lt;br /&gt;
कविता का इश्क़ चिनाब के पत्तनों में &lt;br /&gt;
कविता की भूख विदर्भ के गाँवों में &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कविता की तराई में जारी है लड़ाई &lt;br /&gt;
पानी पानी चिल्ला रही है वैशाली &lt;br /&gt;
विचलित रहती है कुशीनारा रात भर &lt;br /&gt;
सूख गया है हज़ारों इच्छिरावतियों का जल &lt;br /&gt;
जब कि कविता है सरसराती आम्रपालि &lt;br /&gt;
मेरा चेहरा डूब जाना चाहता है उस की संदल- माँसल गोद में &lt;br /&gt;
कि हार कर स्खलित हो चुके हैं &lt;br /&gt;
मेरी आत्मा की प्रथम पंक्ति पर तैनात सभी लिच्छवि योद्धा&lt;br /&gt;
 जब कि एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सहसा ही &lt;br /&gt;
एक ढहता हुआ बुद्ध हूँ मैं , अधलेटा &lt;br /&gt;
हिमालय के आर पार फैल गया एक भगवा चीवर &lt;br /&gt;
आधा कंबल में आधा कंबल के बाहर &lt;br /&gt;
सो रही  है मेरी देह कंचनजंघा से हिन्दुकुश तक &lt;br /&gt;
पामीर का तकिया बनाया है &lt;br /&gt;
मेरा एक हाथ गंगा की खादर में कुछ टटोल रहा है &lt;br /&gt;
दूसरे से नेपाल के घाव सहला रहा हूँ &lt;br /&gt;
और मेरा छोटा सा दिल ज़ोर से धड़कता है &lt;br /&gt;
हिमालय के बीचों बीच. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सिल्क रूट पर मेराथन दौड़ रहीं हैं कविताएं &lt;br /&gt;
गोबी में पोलो खेल रहा है गेसर खान &lt;br /&gt;
क़ज़्ज़ाकों और हूणों की कविता में लूट लिए गए हैं &lt;br /&gt;
ज़िन्दादिल खुश मिजाज़ जिप्सी &lt;br /&gt;
यारकन्द के भोले भाले  घोड़े &lt;br /&gt;
क्या लाद लिए जा रहे हैं बिला- उज़्र अपनी पीठ पर&lt;br /&gt;
दोआबा और अम्बरसर की मण्डियों में &lt;br /&gt;
न यह  संगतराश बाल्तियों का माल- असबाब &lt;br /&gt;
न ही  फॉरबिडन सिटी का रेशम &lt;br /&gt;
और न ही जङ्पा घूमंतुओं का &lt;br /&gt;
मक्खन, ऊन और नमक है&lt;br /&gt;
जब कि पिछले एक दशक से &lt;br /&gt;
या हो सकता है उस से भी बहुत पहले से &lt;br /&gt;
कविता में  सुरंगें ही सुरंगें  बन रही हैं !  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खैबर के उस पार से &lt;br /&gt;
बामियान की ताज़ा रेत आ रही है कविता में &lt;br /&gt;
मेरी आँखों को चुभ रही है &lt;br /&gt;
करआ-कोरम के नुकीले खंजर &lt;br /&gt;
मेरी पसलियों में खुभ रहे हैं &lt;br /&gt;
कविता में दहाड़ रहा है टोरा बोरा &lt;br /&gt;
एक मासूम फिदायीन चेहरा &lt;br /&gt;
जो दिल्ली के संसद भवन तक पहुँच गया है&lt;br /&gt;
कविता का सिर उड़ा दिया गया है &lt;br /&gt;
फिर भी ज़िन्दा है कविता &lt;br /&gt;
सियाचिन के बंकर में बैठा  &lt;br /&gt;
एक सिपाही  आँखें भिगो रहा है&lt;br /&gt;
कविता में एक धर्म है नफरत का &lt;br /&gt;
कविता में क़ाबुल और काश्मीर के बाद &lt;br /&gt;
तुरत जो नाम आता है तिब्बत का &lt;br /&gt;
कविता के पठारों से गायब है शङरीला &lt;br /&gt;
कविता के कोहरे से झाँक रहा शंभाला  &lt;br /&gt;
कविता के रहस्य को मिल गया शांति का नोबेल पुरस्कार &lt;br /&gt;
जब कि एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरे , नहीं मालूम था मुझे &lt;br /&gt;
हवा से पैदा होतीं हैं कविताएं ! &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क़तई मालूम नहीं था कि &lt;br /&gt;
हवा जो सदियों पहले लन्दन के सभागारों &lt;br /&gt;
और मेनचेस्टर के कारखानों से चलनी शुरू हुई थी&lt;br /&gt;
आज पॆंटागन और ट्विन –टॉवर्ज़ से होते हुए &lt;br /&gt;
बीजिंग के तह्खानों में जमा हो गई है &lt;br /&gt;
कि हवा जो अपने सूरज को अस्त नही देखना चाहती &lt;br /&gt;
आज मेरे गाँव की छोटी छोटी खिड़कियो को हड़का रही है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हवा के सामने कविता की क्या बिसात ? &lt;br /&gt;
हवा चाहे तो कविता में आग भर दे &lt;br /&gt;
हवा चाहे तो कविता को राख कर दे &lt;br /&gt;
हवा के पास ढेर सारे डॉलर हैं &lt;br /&gt;
आज हवा ने कविता को खरीद लिया है &lt;br /&gt;
जब कि एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है . &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दूर गाज़ा पट्टी से आती है जब &lt;br /&gt;
एक भारी भरकम अरब  कविता &lt;br /&gt;
कम्प्यूटर के आभासी पृष्ट पर &lt;br /&gt;
तैर जाती हैं सहारा की मरीचिकाएं &lt;br /&gt;
शैं- शैं करता &lt;br /&gt;
मनीकरण का खौलता चश्मा बन जाता है उस का सी पी यू &lt;br /&gt;
कि भीतर मदरबोर्ड पर लेट रही है &lt;br /&gt;
एक खूबसूरत अधनंगी यहूदी कविता &lt;br /&gt;
पीली जटाओं वाली &lt;br /&gt;
कविता की नींद में भूगर्भ की तपिश  &lt;br /&gt;
कविता के व्यामोह  में  मलाणा की क्रीम   &lt;br /&gt;
कविता के कुण्ड में  देशी माश की पोटलियाँ &lt;br /&gt;
कविता की पठाल पे कोदरे की मोटी नमकीन रोटियाँ &lt;br /&gt;
कविता की गंध में ,&lt;br /&gt;
आह ! &lt;br /&gt;
कैसा यह अपनापा &lt;br /&gt;
कविता का तीर्थ यह कितना गुनगुना .... &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जबकि धुर हिमालय में &lt;br /&gt;
यह एक ठण्डा  और बेरहम सरकारी क्वार्टर है &lt;br /&gt;
कि जिसका सीमॆंट चटक गया है कविता के तनाव से &lt;br /&gt;
जो मेरी भृकुटियों पर शिशिर गाँठ सा तना हुआ  है &lt;br /&gt;
जब कि एक माँ की बगल में एक बच्चा सो रहा है &lt;br /&gt;
और एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
08.01.2010&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{समकालीन कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:अजेय]][[Category:कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्य साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:काव्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>अजेय</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A7%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B_%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244869</id>
		<title>आर्कटिक वेधशाला से कुछ नोट्स -अजेय</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A7%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B_%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244869"/>
		<updated>2012-01-10T06:23:20Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;अजेय: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{| style=&amp;quot;background:transparent; float:right&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा कविता&lt;br /&gt;
|चित्र=Ajey.JPG&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=&lt;br /&gt;
|कवि =[[अजेय]] &lt;br /&gt;
|जन्म= &lt;br /&gt;
|जन्म स्थान=([[सुमनम, केलंग, हिमाचल प्रदेश]]) &lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= &lt;br /&gt;
|यू-ट्यूब लिंक=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://ajeyklg.blogspot.com/ आधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #a7d7f9; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{|  align=&amp;quot;center&amp;quot;&lt;br /&gt;
! अजेय् की रचनाएँ&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 250px; overflow:auto; overflow-x: hidden; width:99%&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{अजेय की रचनाएँ}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''सुबह होगी और दिन भर बसंत रहेगा'''&lt;br /&gt;
             9.&lt;br /&gt;
           पौ फट रही है&lt;br /&gt;
             क्षितिज बैंगनी हो गया है&lt;br /&gt;
             इस लम्बी सर्दी के बाद जो सूरज उगेगा&lt;br /&gt;
             कम से कम चार माह नहीं डूबेगा&lt;br /&gt;
             मौत सी ठंडी इस सफेदी को&lt;br /&gt;
             इन्द्रधनुषी रंग बाँटेगा&lt;br /&gt;
             परिंदे और लोमड़ियाँ सफेद पोशाकें उतार&lt;br /&gt;
             मनपसंद रंगों में धमा चौकड़ी मचाएंगे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
             10.     &lt;br /&gt;
          बर्फ पर कोई सिंदूर छिड़क गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
28.     &lt;br /&gt;
सारा खेल वक्त का है&lt;br /&gt;
वक्त सूरज तय करता है&lt;br /&gt;
सूरज हवाएँ पैदा करता है&lt;br /&gt;
हवा समुद्र को छेड़ता है&lt;br /&gt;
समुद्र ने बर्फ को तोड़ना शुरू कर दिया है&lt;br /&gt;
बर्फ पिघलते ही हरी काई के फीते तैरने लग जाएगें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
29.     &lt;br /&gt;
यह हलचल ही है&lt;br /&gt;
जहाँ जीवन दिखता है&lt;br /&gt;
वह एक लहर थी&lt;br /&gt;
जो मछलियों को तट तक बहा लाई&lt;br /&gt;
और एक लहर ही होगी&lt;br /&gt;
जो उन्हें सही सलामत घर वापस ले जाएगी ।&lt;br /&gt;
दूर-दूर तक सूँध लेने वाले शिकारी&lt;br /&gt;
दूर दूर तक सुन लेने वाले शिकार&lt;br /&gt;
गंधों और आहटों का द्वन्द्व&lt;br /&gt;
इंद्रियों का तनाव पूर्ण मुकाबला चलेगा&lt;br /&gt;
दूर-दूर तक यह जगह एक शिकारगाह बन जाएगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
30.&lt;br /&gt;
चट्टानों पर कोंपले निकल आएंगी&lt;br /&gt;
तेज़ हवा की मार सहती हुई&lt;br /&gt;
धीरे-धीरे धरती के साथ भूरी होती लोमड़ी&lt;br /&gt;
झुंड से बिछडे़ चूज़ों को खाना शुरू करेगी&lt;br /&gt;
चुराए गए अंडों से मांद भर लेगी&lt;br /&gt;
बहुत छोटा है उसके लिए&lt;br /&gt;
हारवेस्टिंग का यह मौसम/ फिर भी&lt;br /&gt;
आर्कटिक में भुखमरी नही है!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    '''तुम्हारा नहीं होना'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      25.   &lt;br /&gt;
      इस गुनगुनी धूपवाली सुबह&lt;br /&gt;
       इस ठाठदार ‘स्नो रिज़ॉर्ट’ में&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना भी&lt;br /&gt;
       एक विलास है&lt;br /&gt;
       रोयेंदार कम्बल की सलवटों डूबा हुआ&lt;br /&gt;
       टटोलती रहती है जिसमें मेरी उंगलियां&lt;br /&gt;
       उन खास चीज़ों को&lt;br /&gt;
       रात भर साथ रहते हुए भी जो&lt;br /&gt;
       सुबह अकसर नदारद होती है -&lt;br /&gt;
      एक सुविधाजनक रिमोट बटन&lt;br /&gt;
       एक सुकूनबख्श  सिग्रेट लाईटर&lt;br /&gt;
       तुम्हारी यादों को दर्ज करने वाली&lt;br /&gt;
       एक मुलायम पेंसिल&lt;br /&gt;
       और जो पड़ी रहतीं हैं&lt;br /&gt;
       सटी हुई आपस में&lt;br /&gt;
       फिर भी अलग-अलग&lt;br /&gt;
       छिटके हुए गुमशुदा लगभग&lt;br /&gt;
       कहाँ हो तुम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
        31.&lt;br /&gt;
      आज मैं उन तमाम चीज़ों के सैम्पल लूँगा&lt;br /&gt;
       दिन निकलते ही जो&lt;br /&gt;
       बरफ के क्रिस्टलों के बीच&lt;br /&gt;
       बढ़ते दबाव और दुःख की उम्र बताना शुरू कर देती हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       एक क्लोरोफिल की जिजीविषा  में छिपी&lt;br /&gt;
       मिट्टी के टुकड़ों की खोई हुई महक जाँचूँगा&lt;br /&gt;
       और यह पता लगाने की कोशिश करूँगा&lt;br /&gt;
       कि क्या तुम्हारे नहीं होने से ही&lt;br /&gt;
       शुरू कर दिया था एक दिन&lt;br /&gt;
       घुलना&lt;br /&gt;
       उस भरी पूरी हरियाली ने&lt;br /&gt;
       लहरों ने, हवा ने&lt;br /&gt;
       और मिट्टी ने&lt;br /&gt;
       खो जाना&lt;br /&gt;
       पानी में&lt;br /&gt;
       और ठोस हो जाना?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      32. &lt;br /&gt;
      दोपहर तक&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       आर्द्रता के नहीं होने में तबदील हो गया है&lt;br /&gt;
       कि द्रवित और गतिशील अंतःकरण के बावजूद&lt;br /&gt;
       यहाँ हर मौसम का है एक घनीभूत संस्तर&lt;br /&gt;
       रूखा, कड़ा, ठहरा हुआ&lt;br /&gt;
       एक मरियल सूरज जिसके क्षितिज में&lt;br /&gt;
       अपनी पूरी ताकत से चमका है दिन भर&lt;br /&gt;
       और शेष हो गया है&lt;br /&gt;
       बिना किसी को पिघलाए&lt;br /&gt;
       बेहूदा कोहरे की संपीड़ित परतों में।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       33.&lt;br /&gt;
      सांझ ढलने पर तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       एक अलग ही भाव से शुक्र तारे का झिपझिपाना है&lt;br /&gt;
       मेरे एकान्त को चिढ़ाते हुए&lt;br /&gt;
       पृथ्वी के अन्तिम छोर पर&lt;br /&gt;
       इस विराट टेलीस्कोप के अतिरिक्त&lt;br /&gt;
       तुम्हें नाप लेने के और भी उपकरण हैं मेरे पास&lt;br /&gt;
       एक से एक शक्तिशाली&lt;br /&gt;
       छूट ही जाती है फिर भी&lt;br /&gt;
       कोई एक अपरिहार्य रीडिंग&lt;br /&gt;
       व्यर्थ हो जाता है दिन भर जुटाए गए आंकड़ों का परिश्रम&lt;br /&gt;
       गड़बड़ा जाता है सारा समीकरण&lt;br /&gt;
       रोश्नदान के बाहर तैरती हुई&lt;br /&gt;
       अंधेरी हवाओं के सुपुर्द कर आता हूँ चुपचाप&lt;br /&gt;
       अपने संभावित आविष्कार की हज़ारों चिन्दियाँ।&lt;br /&gt;
      &lt;br /&gt;
       36.   &lt;br /&gt;
     ‘फुली लोडेड’ हो कर भी, कभी&lt;br /&gt;
       शामिल हो जाती है जीवन में&lt;br /&gt;
       ऐसी अवशता&lt;br /&gt;
       और आकर अगल-बगल बैठ जाते हैं&lt;br /&gt;
       अनिश्च्य और अभाव&lt;br /&gt;
       मेरी देह से लिपट-लिपट जाती इस कातर नीरवता में&lt;br /&gt;
       दूर दूर तक स्थूल स्पर्श  का आभास न होना&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       दरअसल&lt;br /&gt;
       तमाम छूटी हुई गणनाओं से पहले&lt;br /&gt;
       तुम्हें खोज पाना है अपने भीतर&lt;br /&gt;
       अपने ही भीतर&lt;br /&gt;
       आह&lt;br /&gt;
       तुम!&lt;br /&gt;
      एक शाश्वत नृत्य इसी बासी पृथ्वी पर&lt;br /&gt;
       &lt;br /&gt;
        49.  &lt;br /&gt;
      क्या तम्हें पता था&lt;br /&gt;
       झूमते रहते हैं देर रात तक&lt;br /&gt;
       खूब सूरत ‘‘नॉर्दन लाईट्स’’&lt;br /&gt;
      मटमैले ध्रुवीय आसमान पर&lt;br /&gt;
       चलता रहता है उत्सव&lt;br /&gt;
       शून्य से तीस डिग्री नीचे भी?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      इतनी सुन्दर है प्रकृति&lt;br /&gt;
       और फैली हुई&lt;br /&gt;
       क्षण-क्षण अनगिनत रूपाकारों में&lt;br /&gt;
       और भी फैलती हुई&lt;br /&gt;
       अद्भुत है यह सब&lt;br /&gt;
       बड़ा ही दुर्लभ&lt;br /&gt;
       बाहर निकल कर देखा है कभी?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      50.    &lt;br /&gt;
      खोज पाता होगा सदियों में कोई एक&lt;br /&gt;
       इस गुप्त उत्सव का रहस्य&lt;br /&gt;
       जो चल रहा है लगातार&lt;br /&gt;
       जो सुन नहीं पाते हम अपने ही शोर में&lt;br /&gt;
       जो देख नहीं पाते हम अपने ही सपनों के कारण&lt;br /&gt;
       आह !&lt;br /&gt;
      क्या अनुभव है&lt;br /&gt;
       जागते हुए&lt;br /&gt;
       खुले में&lt;br /&gt;
       सन्नाटे में यह सब देख जाना।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       55.   &lt;br /&gt;
      इस तरह से सिकुड़े हुए थे हम&lt;br /&gt;
       कितने दयनीय&lt;br /&gt;
       परत दर परत&lt;br /&gt;
       बरफ की तरह&lt;br /&gt;
       अपने दबावों में दबे हुए&lt;br /&gt;
       बिछुड़े हुए&lt;br /&gt;
       अपने-अपने गहरे खन्दकों की&lt;br /&gt;
       अंधेरी भूल भूलैया में&lt;br /&gt;
       दुबके, अकड़े हुए&lt;br /&gt;
       जहाँ नरक है, नीचे&lt;br /&gt;
       वहीं से नापनी थी हम सब को&lt;br /&gt;
       नए नक्षत्रों की दूरियाँ&lt;br /&gt;
       खोजनी थी नई दुनिया&lt;br /&gt;
       &lt;br /&gt;
       58. &lt;br /&gt;
      अरे , कौन रुका रहना चाहता था ?&lt;br /&gt;
      कौन     ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      63.     &lt;br /&gt;
      धूप सी बरसती थी&lt;br /&gt;
       संतप्त हहराती आकांक्षा&lt;br /&gt;
       भाप सा उड़ जाता था&lt;br /&gt;
       इस महान पृथ्वी का तरल सौन्दर्य&lt;br /&gt;
       कि कूच कर जाना था ऐसे ही एक दिन&lt;br /&gt;
       मुझे&lt;br /&gt;
       तुम्हें&lt;br /&gt;
       हम सब को&lt;br /&gt;
       सहस्त्रों आकाश  गंगाओं की तलाश में&lt;br /&gt;
       इस वेधशाला से तेरह अरब प्रकाश वर्ष दूर&lt;br /&gt;
       जैसे ही अवसर मिले।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       64.  &lt;br /&gt;
      कौन रूका रहना चाहता था&lt;br /&gt;
       इस बासी पृथ्वी पर?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
      75.     &lt;br /&gt;
      लेकिन रुको दोस्त&lt;br /&gt;
       अपनी युटोपिया पर तुम्हारा पूरा पूरा हक है&lt;br /&gt;
       लेकिन माफ करना,&lt;br /&gt;
      एक छोटी सी छूट लेना चाहता हूँ  मैं&lt;br /&gt;
       यहां खलल डालते हुए&lt;br /&gt;
       क्या तुम अपने इस अत्याधुनिक ‘डिवाईस’ से&lt;br /&gt;
       इस बीहड़ आर्कटिक के काले आसमान पर&lt;br /&gt;
       प्रक्षेपित कर सकते हो मुझे ?&lt;br /&gt;
       उन सुन्दर ध्रुवीय  प्रकाशों की पृष्टभूमि पर&lt;br /&gt;
       बार-बार उभारना चाहता हूँ&lt;br /&gt;
       अपनी प्रतिछाया&lt;br /&gt;
       बादल पर&lt;br /&gt;
       बिजली और इन्द्रधनुषों की तरह&lt;br /&gt;
       नाचना चाहता हूँ&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
       76.   &lt;br /&gt;
      ओ वेगवान तूफान&lt;br /&gt;
       ओ स्थिर जलमग्न हिमखंड !&lt;br /&gt;
      ओ उफनते समुद्र&lt;br /&gt;
       ओ खामोश  सितारो !&lt;br /&gt;
     &lt;br /&gt;
      ओ&lt;br /&gt;
       &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       मेरे प्रिय साजिन्दो !!&lt;br /&gt;
      आज की रात तुम खूब बजाना&lt;br /&gt;
       दिल से&lt;br /&gt;
       कि रूपान्तरित हो जाना है हम सब को&lt;br /&gt;
       नाचते हुए&lt;br /&gt;
       एक तरोताज़ा स्वर्ग में&lt;br /&gt;
       इसी बासी पृथ्वी पर।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1995- 2006&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{समकालीन कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:अजेय]][[Category:कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्य साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:काव्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>अजेय</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A7%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B_%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244830</id>
		<title>आर्कटिक वेधशाला से कुछ नोट्स -अजेय</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A7%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B_%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244830"/>
		<updated>2012-01-09T18:35:29Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;अजेय: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{| style=&amp;quot;background:transparent; float:right&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा कविता&lt;br /&gt;
|चित्र=Ajey.JPG&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=&lt;br /&gt;
|कवि =[[अजेय]] &lt;br /&gt;
|जन्म= &lt;br /&gt;
|जन्म स्थान=([[सुमनम, केलंग, हिमाचल प्रदेश]]) &lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= &lt;br /&gt;
|यू-ट्यूब लिंक=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://ajeyklg.blogspot.com/ आधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #a7d7f9; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{|  align=&amp;quot;center&amp;quot;&lt;br /&gt;
! अजेय् की रचनाएँ&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 250px; overflow:auto; overflow-x: hidden; width:99%&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{अजेय की रचनाएँ}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''सुबह होगी और दिन भर बसंत रहेगा'''&lt;br /&gt;
    9.      पौ फट रही है&lt;br /&gt;
             क्षितिज बैंगनी हो गया है&lt;br /&gt;
             इस लम्बी सर्दी के बाद जो सूरज उगेगा&lt;br /&gt;
             कम से कम चार माह नहीं डूबेगा&lt;br /&gt;
             मौत सी ठंडी इस सफेदी को&lt;br /&gt;
             इन्द्रधनुषी रंग बाँटेगा&lt;br /&gt;
             परिंदे और लोमड़ियाँ सफेद पोशाकें उतार&lt;br /&gt;
             मनपसंद रंगों में धमा चौकड़ी मचाएंगे&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    10.     बर्फ पर कोई सिंदूर छिड़क गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    28.     सारा खेल वक्त का है&lt;br /&gt;
वक्त सूरज तय करता है&lt;br /&gt;
सूरज हवाएँ पैदा करता है&lt;br /&gt;
हवा समुद्र को छेड़ता है&lt;br /&gt;
समुद्र ने बर्फ को तोड़ना शुरू कर दिया है&lt;br /&gt;
बर्फ पिघलते ही हरी काई के फीते तैरने लग जाएगें&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
29.     यह हलचल ही है&lt;br /&gt;
          जहाँ जीवन दिखता है&lt;br /&gt;
वह एक लहर थी&lt;br /&gt;
जो मछलियों को तट तक बहा लाई&lt;br /&gt;
और एक लहर ही होगी&lt;br /&gt;
जो उन्हें सही सलामत घर वापस ले जाएगी ।&lt;br /&gt;
दूर-दूर तक सूँध लेने वाले शिकारी&lt;br /&gt;
दूर दूर तक सुन लेने वाले शिकार&lt;br /&gt;
गंधों और आहटों का द्वन्द्व&lt;br /&gt;
इंद्रियों का तनाव पूर्ण मुकाबला चलेगा&lt;br /&gt;
दूर-दूर तक यह जगह एक शिकारगाह बन जाएगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
30.     चट्टानों पर कोंपले निकल आएंगी&lt;br /&gt;
         तेज़ हवा की मार सहती हुई&lt;br /&gt;
धीरे-धीरे धरती के साथ भूरी होती लोमड़ी&lt;br /&gt;
झुंड से बिछडे़ चूज़ों को खाना शुरू करेगी&lt;br /&gt;
चुराए गए अंडों से मांद भर लेगी&lt;br /&gt;
बहुत छोटा है उसके लिए&lt;br /&gt;
हारवेस्टिंग का यह मौसम/ फिर भी&lt;br /&gt;
आर्कटिक में भुखमरी नही है!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
25.     इस गुनगुनी धूपवाली सुबह&lt;br /&gt;
       इस ठाठदार ‘स्नो रिज़ॉर्ट’ में&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना भी&lt;br /&gt;
       एक विलास है&lt;br /&gt;
     रोयेंदार कम्बल की सलवटों डूबा हुआ&lt;br /&gt;
       टटोलती रहती है जिसमें मेरी उंगलियां&lt;br /&gt;
       उन खास चीज़ों को&lt;br /&gt;
       रात भर साथ रहते हुए भी जो&lt;br /&gt;
       सुबह अकसर नदारद होती है -&lt;br /&gt;
       एक सुविधाजनक रिमोट बटन&lt;br /&gt;
       एक सुकूनबख्श  सिग्रेट लाईटर&lt;br /&gt;
       तुम्हारी यादों को दर्ज करने वाली&lt;br /&gt;
एक मुलायम पेंसिल&lt;br /&gt;
       और जो पड़ी रहतीं हैं&lt;br /&gt;
       सटी हुई आपस में&lt;br /&gt;
       फिर भी अलग-अलग&lt;br /&gt;
       छिटके हुए गुमशुदा लगभग&lt;br /&gt;
       कहाँ हो तुम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
31.     आज मैं उन तमाम चीज़ों के सैम्पल लूँगा&lt;br /&gt;
       दिन निकलते ही जो&lt;br /&gt;
       बरफ के क्रिस्टलों के बीच&lt;br /&gt;
       बढ़ते दबाव और दुःख की उम्र बताना शुरू कर देती हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       एक क्लोरोफिल की जिजीविषा  में छिपी&lt;br /&gt;
       मिट्टी के टुकड़ों की खोई हुई महक जाँचूँगा&lt;br /&gt;
       और यह पता लगाने की कोशिश करूँगा&lt;br /&gt;
       कि क्या तुम्हारे नहीं होने से ही&lt;br /&gt;
       शुरू कर दिया था एक दिन&lt;br /&gt;
       घुलना&lt;br /&gt;
       उस भरी पूरी हरियाली ने&lt;br /&gt;
       लहरों ने, हवा ने&lt;br /&gt;
       और मिट्टी ने&lt;br /&gt;
       खो जाना&lt;br /&gt;
पानी में&lt;br /&gt;
और ठोस हो जाना?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
32.     दोपहर तक&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       आर्द्रता के नहीं होने में तबदील हो गया है&lt;br /&gt;
       कि द्रवित और गतिशील अंतःकरण के बावजूद&lt;br /&gt;
       यहाँ हर मौसम का है एक घनीभूत संस्तर&lt;br /&gt;
       रूखा, कड़ा, ठहरा हुआ&lt;br /&gt;
       एक मरियल सूरज जिसके क्षितिज में&lt;br /&gt;
       अपनी पूरी ताकत से चमका है दिन भर&lt;br /&gt;
       और शेष हो गया है&lt;br /&gt;
       बिना किसी को पिघलाए&lt;br /&gt;
       बेहूदा कोहरे की संपीड़ित परतों में।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
33.     सांझ ढलने पर तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       एक अलग ही भाव से शुक्र तारे का झिपझिपाना है&lt;br /&gt;
       मेरे एकान्त को चिढ़ाते हुए&lt;br /&gt;
       पृथ्वी के अन्तिम छोर पर&lt;br /&gt;
       इस विराट टेलीस्कोप के अतिरिक्त&lt;br /&gt;
       तुम्हें नाप लेने के और भी उपकरण हैं मेरे पास&lt;br /&gt;
       एक से एक शक्तिशाली&lt;br /&gt;
       छूट ही जाती है फिर भी&lt;br /&gt;
       कोई एक अपरिहार्य रीडिंग&lt;br /&gt;
       व्यर्थ हो जाता है दिन भर जुटाए गए आंकड़ों का परिश्रम&lt;br /&gt;
       गड़बड़ा जाता है सारा समीकरण&lt;br /&gt;
       रोश्नदान के बाहर तैरती हुई&lt;br /&gt;
       अंधेरी हवाओं के सुपुर्द कर आता हूँ चुपचाप&lt;br /&gt;
       अपने संभावित आविष्कार की हज़ारों चिन्दियाँ।&lt;br /&gt;
36.     ‘फुली लोडेड’ हो कर भी, कभी&lt;br /&gt;
       शामिल हो जाती है जीवन में&lt;br /&gt;
       ऐसी अवशता&lt;br /&gt;
       और आकर अगल-बगल बैठ जाते हैं&lt;br /&gt;
       अनिश्च्य और अभाव&lt;br /&gt;
       मेरी देह से लिपट-लिपट जाती इस कातर नीरवता में&lt;br /&gt;
       दूर दूर तक स्थूल स्पर्श  का आभास न होना&lt;br /&gt;
       तुम्हारा नहीं होना&lt;br /&gt;
       दरअसल&lt;br /&gt;
तमाम छूटी हुई गणनाओं से पहले&lt;br /&gt;
       तुम्हें खोज पाना है अपने भीतर&lt;br /&gt;
अपने ही भीतर&lt;br /&gt;
आह&lt;br /&gt;
तुम!&lt;br /&gt;
एक शाश्वत नृत्य इसी बासी पृथ्वी पर&lt;br /&gt;
49.     क्या तम्हें पता था&lt;br /&gt;
       झूमते रहते हैं देर रात तक&lt;br /&gt;
       खूब सूरत ‘‘नॉर्दन लाईट्स’’&lt;br /&gt;
       मटमैले ध्रुवीय आसमान पर&lt;br /&gt;
       चलता रहता है उत्सव&lt;br /&gt;
       शून्य से तीस डिग्री नीचे भी?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
       इतनी सुन्दर है प्रकृति&lt;br /&gt;
       और फैली हुई&lt;br /&gt;
       क्षण-क्षण अनगिनत रूपाकारों में&lt;br /&gt;
       और भी फैलती हुई&lt;br /&gt;
       अद्भुत है यह सब&lt;br /&gt;
       बड़ा ही दुर्लभ&lt;br /&gt;
       बाहर निकल कर देखा है कभी?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
50.     खोज पाता होगा सदियों में कोई एक&lt;br /&gt;
       इस गुप्त उत्सव का रहस्य&lt;br /&gt;
       जो चल रहा है लगातार&lt;br /&gt;
       जो सुन नहीं पाते हम अपने ही शोर में&lt;br /&gt;
       जो देख नहीं पाते हम अपने ही सपनों के कारण&lt;br /&gt;
       आह !&lt;br /&gt;
क्या अनुभव है&lt;br /&gt;
       जागते हुए&lt;br /&gt;
खुले में&lt;br /&gt;
सन्नाटे में यह सब देख जाना।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
55.     इस तरह से सिकुड़े हुए थे हम&lt;br /&gt;
       कितने दयनीय&lt;br /&gt;
       परत दर परत&lt;br /&gt;
       बरफ की तरह&lt;br /&gt;
       अपने दबावों में दबे हुए&lt;br /&gt;
       बिछुड़े हुए&lt;br /&gt;
अपने-अपने गहरे खन्दकों की&lt;br /&gt;
अंधेरी भूल भूलैया में&lt;br /&gt;
       दुबके, अकड़े हुए&lt;br /&gt;
       जहाँ नरक है, नीचे&lt;br /&gt;
       वहीं से नापनी थी हम सब को&lt;br /&gt;
       नए नक्षत्रों की दूरियाँ&lt;br /&gt;
       खोजनी थी नई दुनिया&lt;br /&gt;
58.     अरे , कौन रुका रहना चाहता था ?&lt;br /&gt;
       कौन     ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
63.     धूप सी बरसती थी&lt;br /&gt;
       संतप्त हहराती आकांक्षा&lt;br /&gt;
       भाप सा उड़ जाता था&lt;br /&gt;
       इस महान पृथ्वी का तरल सौन्दर्य&lt;br /&gt;
       कि कूच कर जाना था ऐसे ही एक दिन&lt;br /&gt;
       मुझे&lt;br /&gt;
तुम्हें&lt;br /&gt;
हम सब को&lt;br /&gt;
       सहस्त्रों आकाश  गंगाओं की तलाश में&lt;br /&gt;
       इस वेधशाला से तेरह अरब प्रकाश वर्ष दूर&lt;br /&gt;
       जैसे ही अवसर मिले।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
64.     कौन रूका रहना चाहता था&lt;br /&gt;
       इस बासी पृथ्वी पर?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
75.     लेकिन रुको दोस्त&lt;br /&gt;
अपनी युटोपिया पर तुम्हारा पूरा पूरा हक है&lt;br /&gt;
       लेकिन माफ करना,&lt;br /&gt;
एक छोटी सी छूट लेना चाहता हूँ  मैं&lt;br /&gt;
यहां खलल डालते हुए&lt;br /&gt;
       क्या तुम अपने इस अत्याधुनिक ‘डिवाईस’ से&lt;br /&gt;
       इस बीहड़ आर्कटिक के काले आसमान पर&lt;br /&gt;
       प्रक्षेपित कर सकते हो मुझे ?&lt;br /&gt;
       उन सुन्दर ध्रुवीय  प्रकाशों की पृष्टभूमि पर&lt;br /&gt;
       बार-बार उभारना चाहता हूँ&lt;br /&gt;
अपनी प्रतिछाया&lt;br /&gt;
       बादल पर&lt;br /&gt;
       बिजली और इन्द्रधनुषों की तरह&lt;br /&gt;
       नाचना चाहता हूँ&lt;br /&gt;
76.     ओ वेगवान तूफान&lt;br /&gt;
       ओ स्थिर जलमग्न हिमखंड !&lt;br /&gt;
       ओ उफनते समुद्र&lt;br /&gt;
       ओ खामोश  सितारो !&lt;br /&gt;
ओ मेरे प्रिय साजिन्दो !!&lt;br /&gt;
       आज की रात तुम खूब बजाना&lt;br /&gt;
       दिल से&lt;br /&gt;
       कि रूपान्तरित हो जाना है हम सब को&lt;br /&gt;
       नाचते हुए&lt;br /&gt;
       एक तरोताज़ा स्वर्ग में&lt;br /&gt;
       इसी बासी पृथ्वी पर।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1995- 2006&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{समकालीन कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:अजेय]][[Category:कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्य साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:काव्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>अजेय</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A4%E0%A4%BF_%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244828</id>
		<title>अति जीवन -अजेय</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A4%E0%A4%BF_%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244828"/>
		<updated>2012-01-09T18:30:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;अजेय: '{| style=&amp;quot;background:transparent; float:right&amp;quot; |- | {{सूचना बक्सा कविता |चित्र=Ajey.JPG |चि...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{| style=&amp;quot;background:transparent; float:right&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा कविता&lt;br /&gt;
|चित्र=Ajey.JPG&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=&lt;br /&gt;
|कवि =[[अजेय]] &lt;br /&gt;
|जन्म= &lt;br /&gt;
|जन्म स्थान=([[सुमनम, केलंग, हिमाचल प्रदेश]]) &lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= &lt;br /&gt;
|यू-ट्यूब लिंक=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://ajeyklg.blogspot.com/ आधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #a7d7f9; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{|  align=&amp;quot;center&amp;quot;&lt;br /&gt;
! अजेय् की रचनाएँ&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 250px; overflow:auto; overflow-x: hidden; width:99%&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{अजेय की रचनाएँ}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;अति जीवन&lt;br /&gt;
(जंगल में ज़िन्दा रहने के अभिलाषियों के लिए)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
घात लगा-लगा कर तुम उसकी ताकत जाँचते रहना&lt;br /&gt;
पूरी तसल्ली के बाद ही झपटना उस पर&lt;br /&gt;
उसे दबोचने के बाद फिर शुरू हो जाना&lt;br /&gt;
एक मुलायम सिरे से-&lt;br /&gt;
भीतर तक गड़ा देना तुम अपने तीखे दांत&lt;br /&gt;
भींच लेना पूरी ताकत से जबड़े&lt;br /&gt;
चूस लेना सारा का सारा लहू&lt;br /&gt;
रसायन&lt;br /&gt;
रंग और रफ्तार&lt;br /&gt;
जिनसे बनता है जीवन ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मत सोचना भूल कर भी &lt;br /&gt;
कि उसका दूसरा सिरा&lt;br /&gt;
जो पहुँच नही सकता तुम तक&lt;br /&gt;
तुम पर लानतें भेजता होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
परवाह ही नहीं करनी है&lt;br /&gt;
उन लानतों और प्रहारों की&lt;br /&gt;
जो तुम तक नही पहुँच सकती।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तुम अपने पैने पंजों में जकड़ लेना उसका धक-धक हृदय&lt;br /&gt;
ज़रा भी ममता न ले आना मन में&lt;br /&gt;
निचोड़ कर सारी ऊर्जा-&lt;br /&gt;
पेशियों, वसा और मज्जा की &lt;br /&gt;
चाट डालना एकाग्रचित्त  हो,  धीरज धर&lt;br /&gt;
चबा चबा कर &lt;br /&gt;
खींच लेना पूरी ताकत के साथ&lt;br /&gt;
उसका सम्पूर्ण प्राणतत्व अपने भीतर &lt;br /&gt;
विचलित हुए बिना ...............&lt;br /&gt;
क्षण भर भी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लेकिन रहना सतर्क&lt;br /&gt;
कान रखना खुले और नासापुट भी&lt;br /&gt;
कहीं कोई अनजानी आहट&lt;br /&gt;
कोई अजनबी झौंका &lt;br /&gt;
या तुम्हारा सजातीय ही कोई&lt;br /&gt;
झपट कर छीन न ले जाए तुम्हारा यह शिकार।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बस यही एक नियम है&lt;br /&gt;
ज़िन्दा रहने का&lt;br /&gt;
इस जंगल में।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1986&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{समकालीन कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:अजेय]][[Category:कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्य साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:काव्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>अजेय</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%8F%E0%A4%95_%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7_%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%BE_%E0%A4%A2%E0%A5%82%E0%A4%81%E0%A4%A2_%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE_%E0%A4%B9%E0%A5%88_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244764</id>
		<title>एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है -अजेय</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%8F%E0%A4%95_%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7_%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%BE_%E0%A4%A2%E0%A5%82%E0%A4%81%E0%A4%A2_%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE_%E0%A4%B9%E0%A5%88_-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=244764"/>
		<updated>2012-01-09T11:32:08Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;अजेय: '{| style=&amp;quot;background:transparent; float:right&amp;quot; |- | {{सूचना बक्सा कविता |चित्र= |चित्र ...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{| style=&amp;quot;background:transparent; float:right&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा कविता&lt;br /&gt;
|चित्र=&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=&lt;br /&gt;
|कवि =[[अजेय]] &lt;br /&gt;
|जन्म= &lt;br /&gt;
|जन्म स्थान=([[सुमनम, केलंग, हिमाचल प्रदेश]]) &lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= &lt;br /&gt;
|यू-ट्यूब लिंक=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://ajeyklg.blogspot.com/ आधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #a7d7f9; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{|  align=&amp;quot;center&amp;quot;&lt;br /&gt;
! अजेय् की रचनाएँ&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 250px; overflow:auto; overflow-x: hidden; width:99%&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{अजेय की रचनाएँ}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
								&lt;br /&gt;
धुर हिमालय में यह एक भीषण जनवरी है आधी रात से आगे का कोई वक़्त है आधा घुसा हुआ बैठा हूँ &lt;br /&gt;
चादर और कम्बल और् रज़ाई  में सर पर कनटोप और दस्ताने हाथ में &lt;br /&gt;
एक नंगा कंप्यूटर हैंग हो गया है जब कि एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है . &lt;br /&gt;
तमाम कविताएं पहुँच रहीं हैं मुझ तक हवा में &lt;br /&gt;
कविता कोरवा की पहाड़ियों से &lt;br /&gt;
कविता चम्बल की घाटियों से &lt;br /&gt;
भीम बैठका की गुफा से कविता स्वात और दज़ला से कविता &lt;br /&gt;
कविता कर्गिल और पुलवामा से &lt;br /&gt;
मरयुल , जङ-थङ , अमदो और खम से &lt;br /&gt;
कविता उन सभी देशों से &lt;br /&gt;
जहाँ मैं जा नहीं पाया&lt;br /&gt;
जबकि मेरे अपने ही देश थे वे. &lt;br /&gt;
कविताओं के उस पार एशिया की धूसर पीठ है कविताओं के इस पार एक हरा भरा गोण्ड्वाना है कविताओं के टीथिस मे ज़बर्दस्त खलबली है कविताओं की थार पर खेजड़ी की पत्तियाँ हैं कविताओं की फाट पर ब्यूँस की टहनियाँ हैं कविताओं के खड्ड में बल्ह के लबाणे हैं कविताओं की धूल में दुमका की खदाने हैं &lt;br /&gt;
कविता का कलरव भरतपुर के घना में कविता का अवसाद पातालकोट की खोह में कविता का इश्क़ चिनाब के पत्तनों में &lt;br /&gt;
कविता की भूख विदर्भ के गाँवों में &lt;br /&gt;
कविता की तराई में जारी है लड़ाई पानी पानी चिल्ला रही है वैशाली &lt;br /&gt;
विचलित रहती है कुशीनारा रात भर सूख गया है हज़ारों इच्छिरावतियों का जल जब कि कविता है सरसराती आम्रपालि &lt;br /&gt;
मेरा चेहरा डूब जाना चाहता है उस की संदल- माँसल गोद में &lt;br /&gt;
कि हार कर स्खलित हो चुके हैं &lt;br /&gt;
मेरी आत्मा की प्रथम पंक्ति पर तैनात सभी लिच्छवि योद्धा जब कि एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सहसा ही &lt;br /&gt;
एक ढहता हुआ बुद्ध हूँ मैं अधलेटा हिमालय के आर पार फैल गया एक भगवा चीवर &lt;br /&gt;
आधा कंबल में आधा कंबल के बाहर &lt;br /&gt;
सो रही  है मेरी देह कंचनजंघा से हिन्दुकुश तक &lt;br /&gt;
पामीर का तकिया बनाया है मेरा एक हाथ गंगा की खादर में कुछ टटोल रहा है दूसरे से नेपाल के घाव सहला रहा हूँ और मेरा छोटा सा दिल ज़ोर से धड़कता है &lt;br /&gt;
हिमालय के बीचों बीच. &lt;br /&gt;
सिल्क रूट पर मेराथन दौड़ रहीं हैं कविताएं  गोबी में पोलो खेल रहा है गेसर खान &lt;br /&gt;
क़ज़्ज़ाकों और हूणों की कविता में लूट लिए गए हैं &lt;br /&gt;
ज़िन्दादिल खुश मिजाज़ जिप्सी &lt;br /&gt;
यारकन्द के भोले भाले  घोड़े &lt;br /&gt;
क्या लाद लिए जा रहे हैं बिला- उज़्र अपनी पीठ पर&lt;br /&gt;
दोआबा और अम्बरसर की मण्डियों में &lt;br /&gt;
न यह  संगतराश बाल्तियों का माल- असबाब &lt;br /&gt;
न ही  फॉरबिडन सिटी का रेशम &lt;br /&gt;
और न ही जङ्पा घूमंतुओं का &lt;br /&gt;
मक्खन, ऊन और नमक है&lt;br /&gt;
जब कि पिछले एक दशक से &lt;br /&gt;
या हो सकता है उस से भी बहुत पहले से &lt;br /&gt;
कविता में  सुरंगें ही सुरंगें  बन रही हैं !  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खैबर के उस पार से &lt;br /&gt;
बामियान की ताज़ा रेत आ रही है कविता में &lt;br /&gt;
मेरी आँखों को चुभ रही है &lt;br /&gt;
करआ-कोरम के नुकीले खंजर &lt;br /&gt;
मेरी पसलियों में खुभ रहे हैं &lt;br /&gt;
कविता में दहाड़ रहा है टोरा बोरा &lt;br /&gt;
एक मासूम फिदायीन चेहरा &lt;br /&gt;
जो दिल्ली के संसद भवन तक पहुँच गया है&lt;br /&gt;
कविता का सिर उड़ा दिया गया है &lt;br /&gt;
फिर भी ज़िन्दा है कविता &lt;br /&gt;
सियाचिन के बंकर में बैठा  &lt;br /&gt;
एक सिपाही  आँखें भिगो रहा है&lt;br /&gt;
कविता में एक धर्म है नफरत का &lt;br /&gt;
कविता में क़ाबुल और काश्मीर के बाद &lt;br /&gt;
तुरत जो नाम आता है तिब्बत का &lt;br /&gt;
कविता के पठारों से गायब है शङरीला &lt;br /&gt;
कविता के कोहरे से झाँक रहा शंभाला  &lt;br /&gt;
कविता के रहस्य को मिल गया शांति का नोबेल पुरस्कार जब कि एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अरे , नहीं मालूम था मुझे &lt;br /&gt;
हवा से पैदा होतीं हैं कविताएं ! &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क़तई मालूम नहीं था कि &lt;br /&gt;
हवा जो सदियों पहले लन्दन के सभागारों &lt;br /&gt;
और मेनचेस्टर के कारखानों से चलनी शुरू हुई थी&lt;br /&gt;
आज पॆंटागन और ट्विन –टॉवर्ज़ से होते हुए &lt;br /&gt;
बीजिंग के तह्खानों में जमा हो गई है कि हवा जो अपने सूरज को अस्त नही देखना चाहती &lt;br /&gt;
आज मेरे गाँव की छोटी छोटी खिड़कियो को हड़का रही है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हवा के सामने कविता की क्या बिसात ? &lt;br /&gt;
हवा चाहे तो कविता में आग भर दे &lt;br /&gt;
हवा चाहे तो कविता को राख कर दे &lt;br /&gt;
हवा के पास ढेर सारे डॉलर हैं &lt;br /&gt;
आज हवा ने कविता को खरीद लिया है &lt;br /&gt;
जब कि एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है . &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दूर गाज़ा पट्टी से आती है जब &lt;br /&gt;
एक भारी भरकम अरब  कविता &lt;br /&gt;
कम्प्यूटर के आभासी पृष्ट पर &lt;br /&gt;
तैर जाती हैं सहारा की मरीचिकाएं &lt;br /&gt;
शैं- शैं करता &lt;br /&gt;
मनीकरण का खौलता चश्मा बन जाता है उस का सी पी यू &lt;br /&gt;
कि भीतर मदरबोर्ड पर लेट रही है &lt;br /&gt;
एक खूबसूरत अधनंगी यहूदी कविता &lt;br /&gt;
पीली जटाओं वाली &lt;br /&gt;
कविता की नींद में भूगर्भ की तपिश  &lt;br /&gt;
कविता के व्यामोह  में  मलाणा की क्रीम   &lt;br /&gt;
कविता के कुण्ड में  देशी माश की पोटलियाँ कविता की पठाल पे कोदरे की मोटी नमकीन रोटियाँ &lt;br /&gt;
कविता की गंध में ,&lt;br /&gt;
आह ! &lt;br /&gt;
कैसा यह अपनापा &lt;br /&gt;
कविता का तीर्थ यह कितना गुनगुना .... &lt;br /&gt;
जबकि धुर हिमालय में &lt;br /&gt;
यह एक ठण्डा  और बेरहम सरकारी क्वार्टर है &lt;br /&gt;
कि जिसका सीमॆंट चटक गया है कविता के तनाव से &lt;br /&gt;
जो मेरी भृकुटियों पर शिशिर गाँठ सा तना हुआ  है &lt;br /&gt;
जब कि एक माँ की बगल में एक बच्चा सो रहा है &lt;br /&gt;
और एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
08.01.2010&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{समकालीन कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:समकालीन साहित्य]][[Category:अजेय]][[Category:कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी कविता]]&lt;br /&gt;
[[Category:पद्य साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:काव्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>अजेय</name></author>
	</entry>
</feed>