हिंदी  

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हिंदी के विभिन्न अर्थ

भाषा शास्त्रीय अर्थ

नागरी लिपि में लिखित संस्कृत बहुल खड़ी बोली।

संवैधानिक/क़ानूनी अर्थ

संविधान के अनुसार हिंदी भारत संघ की राजभाषा या अधिकृत भाषा तथा अनेक राज्यों की राजभाषा है।

सामान्य अर्थ

समस्त हिंदी भाषी क्षेत्र की परिनिष्ठित भाषा अर्थात् शासन, शिक्षा, साहित्य, व्यापार आदि की भाषा।

व्यापक अर्थ

आधुनिक युग में हिंदी को केवल खड़ी बोली में ही सीमित नहीं किया जा सकता। हिंदी की सभी उपभाषाएँ और बोलियाँ हिंदी के व्यापक अर्थ में आ जाती हैं। राजा राममोहन राय, केशवचंद्र सेन, नवीन चंद्र राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, तरुणी चरण मिश्र, राजेन्द्र लाल मित्र, राज नारायण बसु, भूदेव मुखर्जी, बंकिम चंद्र चैटर्जी ('हिंदी भाषा की सहायता से भारतवर्ष के विभिन्न प्रदेशों के मध्य में जो ऐक्यबंधन संस्थापन करने में समर्थ होंगे वही सच्चे भारतबंधु पुकारे जाने योग्य हैं।)', सुभाषचंद्र बोस ('अगर आज हिंदी भाषा मान ली गई है तो वह इसलिए नहीं कि वह किसी प्रान्त विशेष की भाषा है, बल्कि इसलिए कि वह अपनी सरलता, व्यापकता तथा क्षमता के कारण सारे देश की भाषा हो सकती है।')।

हिंदी के लिए महापुरुष कथन
हिंदी किसी के मिटाने से मिट नहीं सकती।
चन्द्रबली पाण्डेय

है भव्य भारत ही हमारी मातृभूमि हरी भरी।
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा और लिपि है नागरी ॥
मैथिलीशरण गुप्त

जिस भाषा में तुलसीदास जैसे कवि ने कविता की हो वह अवश्य ही पवित्र है और उसके सामने कोई भाषा नहीं ठहर सकती।
महात्मा गाँधी
हिंदी भारतवर्ष के हृदय-देश स्थित करोड़ों नर-नारियों के हृदय और मस्तिष्क को खुराक देने वाली भाषा है।
हज़ारीप्रसाद द्विवेदी
हिंदी को गंगा नहीं बल्कि समुद्र बनना होगा।
विनोबा भावे
हिंदी के विरोध का कोई भी आन्दोलन राष्ट्र की प्रगति में बाधक है।
सुभाष चन्द्र बसु
हिंदी को संस्कृत से विच्छिन्न करके देखने वाले उसकी अधिकांश महिमा से अपरिचित हैं।
हज़ारीप्रसाद द्विवेदी

समाचार

हिंदी सुधारने के लिए अंग्रेज़ी शब्दों की छूट

13 अक्टूबर, 2011 गुरुवार

आज़ादी के 64 साल बाद भी सरकार हिंदी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा नहीं बना पाई है, मगर अब उसने सरकारी दफ़्तरों में इस्तेमाल होने वाली हिंदी को बदलने के प्रयास अवश्य तेज कर दिए हैं। दफ़्तरों में इस्तेमाल होने वाले हिंदी के कठिन शब्दों की जगह उर्दू, फ़ारसी, सामान्य हिंदी और अंग्रेज़ी के शब्दों का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की सचिव वीणा उपाध्याय ने इस सिलसिले में सभी मंत्रालयों और विभागों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के मुताबिक, कामकाज के दौरान साहित्यिक हिंदी का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी शब्द का हिंदी में उपयोग बतौर अनुवाद न हो। इससे आम लोगों को समस्या होती है। एक हद के बाद यही समस्या किसी भी व्यक्ति को मानसिक तौर पर भाषा के ख़िलाफ़ खड़ा करती है। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की सचिव वीणा उपाध्याय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को जारी किए दिशा-निर्देश मंत्रालय के इस आदेश के बाद पुलिस, कोर्ट, ब्यूरो, रेलवे स्टेशन, बटन, कोट, पैंट, सिग्नल, लिफ़्ट, फीस, क़ानून, अदालत, मुक़दमा, दफ़्तर, एफ़आईआर जैसे अंग्रेज़ी, फ़ारसी और तुर्की भाषा के शब्दों का चलन जारी रहेगा।

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दुनिया के 80 करोड़ लोग जानते हैं हिंदी

20 सितम्बर, 2012 गुरुवार

भारत की राजभाषा हिंदी दुनिया में दूसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। बहुभाषी भारत के हिंदी भाषी राज्यों की आबादी 46 करोड़ से अधिक है। 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत की 1.2 अरब आबादी में से 41.03 फीसदी की मातृभाषा हिंदी है। हिंदी को दूसरी भाषा के तौर पर इस्तेमाल करने वाले अन्य भारतीयों को मिला लिया जाए तो देश के लगभग 75 प्रतिशत लोग हिंदी बोल सकते हैं। भारत के इन 75 प्रतिशत हिंदी भाषियों सहित पूरी दुनिया में तकरीबन 80 करोड़ लोग ऐसे हैं जो इसे बोल या समझ सकते हैं। भारत के अलावा इसे नेपाल, मॉरिशस, फिजी, सूरीनाम, यूगांडा, दक्षिण अफ्रीका, कैरिबियन देशों, ट्रिनिडाड एवं टोबेगो और कनाडा आदि में बोलने वालों की अच्छी ख़ासी संख्या है। इसके अलावा इंग्लैंड, अमेरिका, मध्य एशिया में भी इसे बोलने और समझने वाले अच्छे ख़ासे लोग हैं।

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ऑस्ट्रेलिया के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी हिंदी

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड
29 अक्टूबर, 2012 सोमवार

ऑस्ट्रेलिया के स्कूलों में हिंदी और अन्य प्रमुख एशियाई भाषाएं पढ़ाई जाएंगी। भारत और अन्य एशियाई देशों से संबंध मजबूत बनाने के लिए यह रणनीति तय की गई है। ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने नई नीति का पहला खाका रखते हुए कहा, "जिस समय ऑस्ट्रेलिया बदल रहा था उसी समय एशिया में भी बदलाव हो रहा था, इस सदी में चाहे जो मिले, यह निश्चित ही एशिया को नेतृत्व में फिर से लाएगा। एशिया के उत्थान को कोई नहीं रोक सकता। यह तेज हो रहा है।" प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने एशियन सेंचुरी व्हाइट पेपर जारी करते हुए इसकी घोषणा की। गिलार्ड ने कहा कि शुरुआत स्कूलों, प्रशिक्षण केंद्रों से करना होगी। हरेक स्कूल एशिया के किसी स्कूल के साथ जुड़ेगा और एक प्रमुख एशियाई भाषा हिंदी, मंदारिन, जापानी या इंडोनेशियन सीखने की पहल करेगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने की कोशिश करना होगी। अब पहले जैसा नहीं चलेगा। गिलार्ड ने कहा कि इस सदी में एशिया के बड़ी ताकत बनने की संभावना है। विश्व में यह क्षेत्र नेतृत्व की भूमिका में होगा।

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. ABSTRACT OF SPEAKERS' STRENGTH OF LANGUAGES AND MOTHER TONGUES - 2001 (अंग्रेज़ी) (एच.टी.एम.एल) census of india। अभिगमन तिथि: 15 सितम्बर, 2012।

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