शिवराम कारंत  

कला विषयक ज्ञान

अपने कला विषयक ज्ञान के बल पर शिवराम कारंत ने यक्षगान के अंतरंग में प्रवेश करने का साहस किया। कला विषयक क्षेत्र में उनका योगदान महत्त्वपूर्ण माना जाता है। शिवराम कारंत ने अपना ध्यान मानव और उसकी परिस्थिति को देखने पर केंद्रित किया। उनके कई उपन्यास एक के बाद एक प्रकाशित हुए। इससे स्पष्ट होता है कि चारों ओर के वास्तविक जीवन को उन्होंने बहुत सूक्ष्मता के साथ परखा था। सबसे अधिक वह इससे प्रभावित हुए कि बड़ी दु:खद घटनाओं के बीच भी मनुष्य की सहज जीने की इच्छा बनी रहती है।

मूकज्जिय कनसुगलु

मूकज्जिय कनसुगलु [1] में शिवराम कारंत ने अन्वेषण की एक बिल्कुल नई और विराट यात्रा की है। उनका उद्देश्य (हिन्दी अनुवाद मूकज्जी) पुस्तक के माध्यम से प्रागैतिहासिक काल से लेकर वर्तमान काल तक की मानव सभ्यता का परिचय देना था। उन्होंने एक ऐसी विधवा वृद्धा की कल्पना की, जिसकी कुछ अधिमानसिक संवेदनाएँ जाग्रत थी। वह इस कृति द्वारा यह प्रमाणित करना चाहते थे कि मनुष्य की ईश्वर संबंधी धारणा इतिहास में निरंतर बदलती आई है और सेक्स जैसी जैविक प्रवृत्तियाँ जीवन का इतना अनिवार्य अंग है कि वैराग्य धारण के नाम उनकी वर्जना सर्वथा अनुचित है। यह वृद्धा देश के प्राचीन मूल्यों के प्रतिनिधि - रूप पीपल के पेड़ तले बैठ कर अपने पौत्र को, अर्थात् हम सभी को सुदूर अतीत का दर्शन कराती है और इस प्रत्येक प्रसंग में उनका बल एक ही बात पर होता कि हम जीवन को, जैसा वह था और जैसा अब है एक साथ लेते हुए संपूर्ण रूप में देखें। आदि से अंत तक इस उपन्यास में काल के सौ छोरों को एक साथ लेकर कांरत ने अपना वक्तव्य वृद्धा मूकज्जी के माध्यम से प्रस्तुत किया है।

चोमाना दुडि

शिवराम कारंत के उपन्यास 'चोमाना दुडि' पर इसी नाम से फ़िल्म भी बन चुकी है, जिसे 1976 का सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का 'राष्ट्रीय पुरस्कार' भी मिल चुका है।

कृतियाँ

मूकज्जी उपन्यास

शिवराम कारंत की प्रमुख कृतियाँ इस प्रकार है:-

नाटक
  • कर्णार्जुन (1927)
  • नारद गर्वभंग (1932)
  • नवीन नाटकगलु (1946)
  • मंगलारति (1956)
  • कीचक सैरंध्री (1970)
कहानी
  • हसिवु (1931)
  • हावु (1931)
  • गद्य-ज्ञान (1932)
  • मैगल्लन दिनचरियिंद (1951)
आत्मकथा
  • हुच्चु मनस्सिन हत्तु मुखगलु
यात्रा-वृतांत
  • चित्रमय दक्षिण कन्नड़ (1934)
कला विषयक
  • भारतीय चित्रकले (1930)
  • यक्षगान (1971)
  • चालुक्य वास्तुशिल्प (1969)
  • भारतीय वास्तुशिल्प (1975)
  • कला प्रपंच (1978)
उपन्यास
  • देवदूतरु (1928)
  • सरसम्मन समाधि (1937)
  • मुगिद युद्ध(1945)
  • कुडियर कूसु (1951)
  • गोंडारण्य (1954)
  • जगदोद्धारना (1960)
  • उक्किदा नोरे (1970)
  • केवल मनुष्यरु (1971)
  • मृजन्म (1974)
  • मूकज्जी (1979)
निबंध
  • ज्ञान
  • चिक्कदोड्डवरू
  • हल्लिय हत्तु समस्तरु
विश्व कोश, शब्दकोश व ज्ञान विषयक
  • बाल प्रपंच (1936)
  • सिरिगन्नड अर्थकोश (1941)
  • विज्ञान प्रपंच (1956)
  • विचित्र खगोल(1965)

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कारंत, शिवराम [जनवरी 1979] (1) मूकज्जी (हिन्दी)। भारतीय ज्ञानपीठ, 223। 81-263-0594-0। अभिगमन तिथि: 30 नवम्बर, 2010

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