शनि अमावस्या  

कैसे करें शनिदेव को प्रसन्न

  1. शनि देव के भक्तों को शनि अमावस्या के दिन शनि मंदिर में जाकर शनि देव को नीले लाजवंती का फूल, तिल, तेल, गु़ड़ अर्पण करना चाहिए। शनि देव के नाम से दीपोत्सर्ग करना चाहिए।[2]
  2. शनि अमावस्या के दिन या रात्रि में 'शनि चालीसा' का पाठ, शनि मंत्रों का जाप एवं 'हनुमान चालीसा' का पाठ करें।
  3. इस दिन पीपल के पेड़ पर सात प्रकार का अनाज चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  4. तिल से बने पकवान, उड़द की दाल से बने पकवान ग़रीबों को दान करें।
  5. उड़द दाल की खिचड़ी दरिद्र नारायण को दान करें।
  6. अमावस्या की रात्रि में आठ बादाम और आठ काजल की डिब्बी काले वस्त्र में बांधकर संदूक में रखें।
  7. शनि यंत्र, शनि लॉकेट, काले घोड़े की नाल का छल्ला धारण करें।
  8. इस दिन नीलम या कटैला रत्न धारण करें, जो फल प्रदान करता है।
  9. काले रंग का श्वान (कुत्ता) इस दिन से पालें और उसकी भली प्रकार से सेवा करना शुरू करें।
  10. शनिवार के दिन शनि देव की पूजा के पश्चात् उनसे अपने अपराधों एवं जाने-अनजाने जो भी आपसे पाप कर्म हुआ हो, उसके लिए क्षमा याचना करनी चाहिए।
  11. शनि महाराज की पूजा के पश्चात् 'राहू' और 'केतु' की पूजा भी करनी चाहिए।
  12. इस दिन शनि भक्तों को पीपल में जल देना चाहिए और पीपल में सूत्र बांधकर सात बार परिक्रमा करनी चाहिए।
  13. शनिवार के दिन भक्तों को शनि महाराज के नाम से व्रत रखना चाहिए।
  14. शनिश्वर के भक्तों को संध्या काल में शनि मंदिर में जाकर दीप भेंट करना चाहिए और उड़द दाल में खिचड़ी बनाकर शनि महाराज को भोग लगाना चाहिए। शनिदेव का आशीर्वाद लेने के पश्चात् स्वयं भी प्रसाद स्वरूप खिचड़ी खाना चाहिए।[2]
  15. सूर्य देव के पुत्र शनि देव की प्रसन्नता हेतु इस दिन काली चींटियों को गु़ड़ एवं आटा देना चाहिए।
  16. इस दिन काले रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए।
  17. श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारंभ करना अति मंगलकारी माना जाता है।
  18. शनि अमावस्या के दिन काले घोड़े की नाल या नाव की सतह की कील का बना छल्ला मध्यमा में धारण करें।
  19. शनिवार को अपने हाथ की नाप का 19 हाथ काला धागा माला बनाकर पहनें।

शनि अमावस्या शुभ हो

'शनि अमावस्या' पर भगवान शनि देव से अपने समस्त बुरे कर्मों के लिए माफ़ी मांग लेनी चाहिए और निम्न मंत्रों का जाप करना चाहिए[2]-

शनि मंत्र व स्तोत्र सर्वबाधा निवारक वैदिक गायत्री मंत्र-
"ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरुपाय धीमहि, तन्नो शनि: प्रचोदयात्।"
  • प्रतिदिन श्रध्दानुसार 'शनि गायत्री' का जाप करने से घर में सदैव मंगलमय वातावरण बना रहता है।
वैदिक शनि मंत्र
"ॐ शन्नोदेवीरमिष्टय आपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्रवन्तुन:।"
  • यह शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे पवित्र और अनुकूल मंत्र है। इसकी दो माला सुबह शाम करने से शनि देव की भक्ति व प्रीति मिलती है।
कष्ट निवारण शनि मंत्र नीलाम्बर-

"शूलधर: किरीटी गृघ्रस्थितस्त्रसकरो धनुष्मान्।
चर्तुभुज: सूर्यसुत: प्रशान्त: सदाऽस्तुं मह्यं वरंदोऽल्पगामी॥"

  • इस मंत्र से अनावश्यक समस्याओं से छुटकारा मिलता है। प्रतिदिन एक माला सुबह शाम करने से शत्रु चाह कर भी नुकसान नहीं पहुँचा पायेगा।
सुख-समृद्धि दायक शनि मंत्र-

"कोणस्थ:पिंगलो वभ्रु: कृष्णौ रौद्रान्त को यम:।
सौरि: शनैश्चरौ मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:॥"

  • इस शनि स्तुति का प्रात:काल पाठ करने से शनि जनित कष्ट नहीं व्यापते और सारा दिन सुख पूर्वक बीतता है।[2]
शनि पत्नी नाम स्तुति-

"ॐ शं शनैश्चराय नम: ध्वजनि धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया।
कंटकी कलही चाऽथ तुरंगी महिषी अजा॥
ॐ शं शनैश्चराय नम:"

  • यह बहुत ही अद्भुत और रहस्यमय स्तुति है। यदि कारोबारी, पारिवारिक या शारीरिक समस्या हो, तब इस मंत्र का विधिविधान से जाप और अनुष्ठान किया जाये तो कष्ट कोसों दूर रहेंगे।


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अन्य संबंधित लिंक

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. शनि अमावस्या में क्या करें (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 08 जून, 2013।
  2. 2.0 2.1 2.2 2.3 शनि जयंती का महायोग (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 08 जून, 2013।
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