वर्ष  


ऊपर के वर्षों का यदि कल्पों तक की गणना में उपयोग किया जाय तो उनमें से सूर्य सिद्धान्त का मान ही भ्रमहीन एवं सर्वश्रेष्ठ प्रमाणित होता है। सृष्टि संवत के प्रारम्भ से यदि आज तक का गणित किया जाय तो सूर्य सिद्धान्त के अनुसार एक दिन का भी अन्तर नहीं पड़ता। सूर्य सिद्धान्त से प्रतिवर्ष गणना में साढ़े आठ पल से भी अधिक का अन्तर है। सूर्य सिद्धान्त के प्राचीन मान से आधुनिक मान का अन्तर 8 पल 34 विपल का होता है। प्राचीन अयन गति 60 पल और आधुनिक अयन गति 50 पल, 26 विपल होने से गति का अन्तर 9 पल 34 विपल होता है। इस प्रकार 9 पल 34 विपल तथा 8 पल, 34 विपल में केवल एक पल का अन्तर होता है। इस प्रकार सूर्य सिद्धान्त के मान में एक पल कम करके गणित करने से 5000 वर्ष तक के दिनादि सब ठीक मिलते हैं।

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