लॉर्ड कैनिंग  

लॉर्ड कैनिंग
Lord Canning

लॉर्ड कैनिंग क्प चार्ल्स जॉन कैनिंग भी कहा जाता है। वह भारत का प्रथम वाइसरॉय था और गवर्नर के रूप में उसका कार्यकाल 1856 से 1862 तक रहा। इस दौरान ही 'गवर्नर ऑफ़ इंडिया 1858 एक्ट 'पास हुआ, जिसके अनुसार 'गवर्नर ऑफ़ जनरल ऑफ़ इंडिया' को ही वायसराय घोषित किया गया। ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी से ब्रिटिश ताज को सत्ता हस्तान्तरित किए जाने के बाद भारत सरकार के पुनर्गठन की कार्यवाही लॉर्ड कैनिंग की अध्यक्षता में हुई। उसे 1859 में अर्ल की उपाधि प्रदान की गई। 1861 के 'भारतीय परिषद अधिनियम' द्वारा उसने अपनी कार्यकारी परिषद का पुनर्गठन किया और दायित्वों का विभागीय वितरण शुरू किया।

परिचय

लॉर्ड कैनिंग का जन्म 14 दिसम्बर, 1812, लन्दन, इंग्लैण्ड में हुआ और मृत्यु 17 जून, 1862, लन्दन में हुई। ये एक कुशल राजनीतिज्ञ और 1857 के सिपाही विद्रोह के दौरान भारत के गवर्नर-जनरल रहे। कैनिंग 1858 में भारत के पहले वाइसराय बने।

गवर्नर-जनरल का पद

जॉर्ज कैनिंग के सबसे छोटे पुत्र चार्ल्स कैनिंग 1836 से सांसद रहे और 1837 में अपनी माँ से वाइकाउण्ट की उपाधि विरासत में प्राप्त की। 1841 में वह सर रॉबर्ट पील के मंत्रिमण्डल में विदेशी मामलों के राज्य अवर सचिव बने और 1846 से कमिश्नर ऑफ़ वुड्स एण्ड फ़ॉरेस्ट्स रहे। लॉर्ड एबेरडीन (1853-55) के तहत पोस्टमास्टर जनरल बने और 1856 में लॉर्ड पॉमर्स्टन की सरकार द्वारा भारत के गवर्नर-जनरल नियुक्त किए गए। कैनिंग ने तत्काल फ़ारस के शाह के ख़िलाफ़, जिन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटेन के सरक्षित राज्य हेरात पर क़ब्ज़ा कर लिया था, फ़ारस की खाड़ी में सैनिक अभियान दल भेजा। इस अभियान दल ने शाह की सेनाओं को हेरात से खदेड़ दिया और अफ़ग़ानिस्तान के शासक दोस्त मुहम्मद के साथ मित्रता कर ली, जो 1857 की सन्धि द्वारा और भी सुदृढ़ हो गई।

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