फ़तेहगढ़ क़िला, भोपाल  

ढाई सीढ़ी की मस्जिद

क़िले के मग़रबी बुर्ज पर एक मस्जिद भी बनवाई गई थी। इस छोटी-सी मस्जिद में दोस्त और उसके सुरक्षा कर्मी नमाज़ अदा किया करते थे। यह एशिया की सबसे छोटी मस्जिद के रूप में जानी जाती है और इसका नाम है 'ढाई सीढ़ी की मस्जिद'। इसका नाम 'ढाई सीढ़ी की मस्जिद' क्यूँ पड़ा यह कहना बहुत मुश्किल है, क्योंकि ढाई सीढ़ी आज कहीं भी नज़र नहीं आती; लेकिन शायद जब यह बनी होगी, तब ढाई सीढ़ी जैसी कोई संरचना इससे अवश्य जुड़ी रही होगी। इसे भोपाल की पहली मस्जिद कहते हैं। हालाँकि कुछ लोग आलमगीर मस्जिद को भोपाल की पहली मस्जिद कहते हैं। उनका मानना है कि औरंगज़ेब का जहाँ-जहाँ से गुज़र हुआ, उसके लिए जगह-जगह आलमगीर मस्जिदें तामीर की गईं और इस लिहाज से इसका नाम पहले आना चाहिए।

मौखिक इतिहास पर विश्वास न कर यदि तथ्यों का विश्लेषण किया जाय तो 'ढाई सीढ़ी की मस्जिद' को ही भोपाल की पहली मस्जिद कहा जाएगा। यहीं से शुरू होता है भोपाल में मस्जिदें तामीर करवाने का सिलसिला। दोस्त मोहम्मद ख़ान के बाद एक लम्बे समय तक कोई ख़ास निर्माण कार्य नहीं हुआ। बाद में उसके पोते फैज़ मोहम्मद ख़ान ने भोपाल की झील के किनारे 'कमला महल' के पास एक मस्जिद बनवाई, इसे 'मक़बरे वाली मस्जिद' के नाम से जाना जाता है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. मस्जिदों का शहर, भोपाल (हिन्दी) संवाद समय। अभिगमन तिथि: 28 अगस्त, 2015।

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